Sunday, January 1, 2012

फरीद के जनाधार और गोप के राजनीतिक चातुर्य के आगे आखिर-कार सरवर ने घुटने टेके

अरविन्द विद्रोही ............. आख़िरकार महंगाई,भ्रष्टाचार,जातिवाद,फिरका परस्ती ,राजनीतिक गिरावट के खिलाफ लडाई लड़ने का दम भरते भरते सरवर अली-पूर्व विधायक एक बार पुनः समाजवादी पार्टी को मजबूत करने के लिए सपा में शामिल हो गये | समाजवादी पार्टी ,कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी सभी दलों में रहे और अब पुनः सपा में आये सरवर अली-पूर्व विधायक महीनो से समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने के लिए गोटिया बिछा रहे थे |प्रत्येक दांव बेअसर जाने के बाद उनके द्वारा विगत १३ दिसंबर को देवा से महादेव तक की संकल्प यात्रा निकाली गयी,इस यात्रा में तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओ ने अपनी भागीदारी दी ,जिसमे सरवर अली -पूर्व विधायक ने जमकर राजनीतिक गिरावट पे प्रहार किया |सपा में शामिल ना कराये जाने से , सपा से टिकेट ना होने से नाराज़ सरवर अली -पूर्व विधायक को किसी भी अन्य राजनीतिक दल ने तवज्जो नहीं दी | समाजवादी पार्टी के नेता अरविन्द सिंह गोप ने अपने राजनीति समझ दारी का परिचय देते हुये सरवर अली से संपर्क बनाये रखा वही दूसरी तरफ कुर्सी से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी फरीद महफूज़ किदवई निः वर्तमान विधायक ने कुर्सी विधान सभा में अपने जन संपर्क को तेज़ कर दिया | बाराबंकी जनपद में मुस्लिमो के सबसे बड़े नेता कि अपनी छवि के बलबूते फरीद ने सरवर अली के होश उड़ा दिये | मुस्लियो के बीच फरीद महफूज़ किदवई की मजबूत पकड़ देख कर कोई और राजनीतिक रास्ता ना बनते देख कर सरवर अली ने राजनीतिक मज़बूरी के तहत और गोप के द्वारा बिछाई गयी राजनीतिक बिसात में आकर बीते कई महीनो से सड़क पर,सभाओ में की जा रही बातो को बिसरा कर शायद बंद कमरे में हुये किसी समझौते ,राजनीतिक सौदेबाजी के तहत समाजवादी पार्टी की सदयस्ता ली है | गौरतलब है कि सरवर अली के साथ हालिया निकाली गयी संकल्प यात्रा में शामिल किसी भी अन्य प्रभावी नेता या सामाजिक कार्यकर्ता ने समाजवादी पार्टी की सदयस्ता नहीं ली है | समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव का साथ बीते लोकसभा में छोड कर चले जाने वाले सरवर अली कितने दिनों तक समाजवादी पार्टी में रहेंगे यह चर्चा उनके द्वारा समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने की खबर के साथ ही शुरु हो चुकी है |बहर हाल सरवर अली किन कारणों से समाजवादी पार्टी में शामिल हुये इसको लेकर राजनीतिक हलको में चर्चा अपने शबाब पर है | जो भी हो एक बार पुनः समाजवादी पार्टी की राजनीति में अरविन्द सिंह गोप ने अपनी राजनीति चातुर्य को बखूबी अंजाम देते हुये महीनो से अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे सरवर अली को समाजवादी आशियाने में जगह देकर आगामी विधान सभा २०१२ में सरवर अली के भरपूर उपयोग करने की आधार-शिला रख ही दी है| एक बार पुनः अरविन्द सिंह गोप ने समाजवादी पार्टी के विस्तार के क्रम में अपना महती योगदान देकर अपनी उपयोगिता बढ़ाई ही है |

Saturday, December 31, 2011

स्वार्थी-सिद्धांत विहीन -दल बदलुओ से समाजवादी पार्टी को होगा नुकसान


अरविन्द विद्रोही...... मायावारी सरकार में वर्षो सत्ता सुख उठा चुके लोग अब वहुजन समाज पार्टी को ख़राब बता रहे है | बसपा से निकले जा रहे नेता,टिकेट ना मिलने से नाराज़ नेता , भ्रस्टाचार के आरोपों में घिरे और कार्यवाही के शिकार नेता अब बसपा सुप्रीमो मायावती को भला-बुरा कह रहे है | अवसरवादी, सिधान्त विहीन ,जनता के हित के विरोधी ,विकास के धन के लुटेरे नेताओ ने अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की तरफ रुख कर लिया है | समाजवादी पार्टी की पहचान उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार की नीतिओ की खिलाफत के कारण ही बनी है ,बसपा के जिम्मेदार रहे नेता जिस तरह समाजवादी पार्टी में महत्व पा रहे है उससे मतदाताओ में एक निराशा उत्पन्न हो गयी है | चुनावो में अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए बसपा से सपा में शामिल होने वाले तमाम दलबदलू नेताओ को सपा नेतृत्व द्वारा प्रत्याशी बना देना समाजवादी कार्यकर्ताओ और नेताओ को निराश करने वाला आत्म घटी कदम है | जिन नेताओ के इशारे पर समाजवादियो ने वर्षो प्रशासनिक अत्याचार सहे ,उन अत्याचारों के खिलाफ सड़क पर संघर्ष किया ,उन्ही बसपा से आये नेताओ के लिए समाजवादी कार्यकर्ता मत मांगेगा ,यह कितनी हास्यास्पद व शर्मनाक बात है | समाजवादियो की पहचान डॉ लोहिया के विचारो और जनता के हित के लिए किये गये संघर्षो से होती है ना कि सत्ता के दलाल प्रवृत्त के अवसर वादी,सिधान्त विहीन नेताओ से | समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संघर्ष की परिपाटी को जीवन्त करने का जो महती काम किया है , उन के उस काम को इन स्वार्थी तत्वों के समाजवादी पार्टी में आने से गहरा धक्का लगा है | उत्तर प्रदेश के आसन्न विधान सभा -२०१२ के चुनाव शुरु हो चुके है,यह निर्णायक घडी है, स्वार्थी-सिद्धांत विहीन - अवसर वादियो को बगल गिर बनाने से समाजवादी सरकार बनाने में मुश्किलें आएँगी,जनता इन स्वार्थी नेताओ से उब चुकी है ,ये जिस पार्टी में रहेंगे उसका ही नुकसान होगा | समाजवादी पार्टी को अपने संघर्ष शील नेताओ की जगह इनको महत्व नहीं देना चाहिए | जिस जिस विधान सभा में बसपा से आये हुये नेताओ को समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है वहा पर समाजवादी कार्यकर्ता हताश है, जिसका खामियाजा भी सपा को उठाना पड़ सकता है |

Wednesday, December 28, 2011

अन्ना का तमाशा

स्वामी राम देव जी को अब अन्ना के बुलावे पर आन्दोलन में शरीक नहीं होना चाहिए ,अपना भारत स्वाभिमान का आन्दोलन जारी रखना चाहिए | ये वही अन्ना टीम है जो अपने अलावा किसी को महत्व नहीं देती ,सिर्फ अपनी बात ही कहती रहती है | भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कामों से बने जन चेतना का लाभ उठा कर स्वामी राम देव जी के आन्दोलन से किनारा करने वालो का साथ नहीं देना चाहिए | जनता की भावना से खिलवाड़ करने वालो का साथ नहीं देना चाहिए | ...............अन्ना के तमाशे में इस बार नहीं जुटी जनता,तमाशा ख़त्म | अन्ना टीम को करना चाहिए आत्म मंथन , काठ की हांड़ी बार बार नहीं चढ़ती यह पुरानी कहावत है | तमाम दावो के बावजूद जनता के ना आने से,बिना किसी के अनुरोध के खुद ही वापस लिया अन्ना ने अनशन ,जेल भरो भी रद्द , नहीं होगा किसी का घेराव |

Saturday, December 24, 2011

किसान मसीहा थे चौधरी चरण सिंह - ज्ञान सिंह यादव

हमारे देश के विकास का आधार कृषि है|कृषि को उन्नत शील बनाने के लिए किसानों की माली हालत में बेहतर सुधार की जरुरत है |चौधरी चरण सिंह जी आजीवन किसानों के हित का काम व संघर्ष करते रहे |आज हमारी सरकारे किसानों के विकास में समुचित ध्यान नहीं दे रही है यह चिंता की बात है | चौधरी चरण सिंह जी किसानों के मसीहा थे ,उनके बताये रास्ते पर चलकर किसानों की दशा में सुधार लाया जा सकता है |यह विचार कुंवर ज्ञान सिंह यादव -जिला सचिव समाजवादी पार्टी बाराबंकी ने राम सेवक यादव चंदौली ,बाराबंकी में राष्ट्रीय सेवा योजना सामान्य कार्यक्रम में चौधरी चरण सिंह के जन्म दिन पर आयोजित गोष्ठी में व्यक्त किया | गोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ अहसान बेग ने तथा संचालन डॉ राम फेर ने किया | अपने संम्बोधन में डॉ अहसान बेग ने कहा क़ि चौधरी चरण सिंह ने अपने कार्यकाल में किसानों के हित की तमाम कल्याण कारी योजनाये लागु की और भ्रस्टाचार के खिलाफ मुहिम चलायी |संचालन कर रहे डॉ राम फेर ने कहा कि चौधरी साहब का साफ़ कहना था कि देश की खुशहाली का रास्ता खेत व खलिहान से होकर गुजरता है| बिना गाँवो की तरक्की के देश का सर्वांगीन विकास नहीं हो सकता है | आज चौधरी साहब के व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेकर किसानों के हित का काम करने की जरुरत है | गोष्ठी में कार्यक्रम अधिकारी शिव बालक यादव,संतोष कुमार यादव,मुख्य नियंता संतराम यादव,क्रीडा अधिकारी उमेश चन्द्र यादव ,प्रवक्ता सोनम यादव , डॉ अरविन्द कुमार वर्मा ,सतीश पांडे सहित सैकड़ो विद्यार्थी शामिल हुये |

सपा में मंथन जारी-कल प्रत्याशियो की बैठक

उत्तर प्रदेश विधान सभा २०१२ के आम चुनावो के लिए समाजवादी पार्टी में मंथन जारी, कल रविवार २५ दिसम्बर को लखनऊ समाजवादी पार्टी कार्यालय में घोषित सभी प्रत्याशियो की बुलाई गयी बैठक | बैठक में प्रत्याशियो को चुनावी अभियान में जीत के गुर सिखायेंगे समाजवादी पार्टी के आला नेता गण | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव करेंगे मुख्य रूप से प्रत्याशियो को संम्बोधित ,देंगे दिशा निर्देश |

Wednesday, December 21, 2011

किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह -----अरविन्द विद्रोही

राजनीति के ऐसे श्लाका पुरूष चौधरी चरण सिंह जिन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन काल में देश के दलितों,पिछड़ों,गरीबों और किसानों की बेहतरी के लिए संघर्ष किया,राजनीति में हिस्सेदार बनाया,का व्यक्तित्व एवं कृतित्व राजनैतिक-सामाजिक जीवन जी रहे लोगों के लिए अनुकरणीय है।आज हमारा मुल्क भारत भ्रष्टाचार के दलदल में फॅंसा है।जाति-विद्वेष,आतंकवाद,क्षेत्रवाद,साम्प्रदायिकता के झंझावातों में जनमानस पिस रहा है।नौजवान रोजगार के अभाव में कुण्ठित हो रहा है।गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर होता जा रहा है।अन्नदाता किसान खेत और बाजार दोनों जगह लूटा जा रहा है।विकास के नाम पर कृषि भूमि का अधिग्रहण किसानों के साथ-साथ देश को भी संकट की तरफ ले जा रहा है।जिस प्रकार अंधेरे में राह देखने के लिए प्रकाश पुंज की आवश्यकता होती है,उसी प्रकार जनसमस्याओं को समझने के लिए ह्दय तथा जनसमस्याओं से निजात पाने के लिए पथ-प्रदर्शकों की जरूरत होती है।गरीब,किसान,दलित,मजदूर को उसका अधिकार बतलाने वाले एवं आमूलचूल व्यवस्था परिवर्तन करने वाले चैधरी चरण सिंह की नीतिया।,विचार हमारे बीच दीपस्तम्भ की भांति विद्यमान हैं।

चैधरी चरण सिंह ने अपना सम्पूर्ण जीवन भारतीयता और ग्रामीण परिवेश की मर्यादा में जिया।बाबूगढ़ छावनी के निकट नूरपुर गांव,तहसील हापुड़,जनपद गाजियाबाद,कमिश्नरी मेरठ में काली मिट्टी के अनगढ़ और फूस के छप्पर वाली मढ़ैया में 23दिसम्बर,1902 को आपका जन्म हुआ।चैधरी चरण सिंह के पिता चौधरी मीर सिंह ने अपने नैतिक मूल्यों को विरासत में चरण सिंह को सौंपा था।चरण सिंह के जन्म के 6वर्ष बाद चौधरी मीर सिंह सपरिवार नूरपुर से जानी खुर्द गांव आकर बस गये थे।यहीं के परिवेश में चैधरी चरण सिंह के नन्हें ह्दय में गांव-गरीब-किसान के शोषण के खिलाफ संघर्ष का बीजारोपण हुआ।आगरा विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा लेकर 1928 में चैधरी चरण सिंह ने ईमानदारी,साफगोई और कत्र्तव्यनिष्ठा पूर्वक गाजियाबाद में वकालत प्रारम्भ की।वकालत जैसे व्यावसायिक पेशे में भी चैधरी चरण सिंह उन्हीं मुकद्मों को स्वीकार करते थे जिनमें मुवक्किल का पक्ष न्यायपूर्ण होता था।कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन1929 में पूर्ण स्वराज्य उद्घोष से प्रभावित होकर युवा चरण सिंह ने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया।1930 में महात्मा गाँधी द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन के तहत् नमक कानून तोडने का आह्वान किया गया।गाॅंधी जी ने ‘‘डांडी मार्च‘‘ किया।आजादी के दीवाने चरण सिंह ने गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिण्डन नदी पर नमक बनाया।परिणाम स्वरूप चरण सिंह को 6माह की सजा हुई।जेल से वापसी के बाद चरण सिंह ने महात्मा गाॅंधी के नेतृत्व में स्वयं को पूरी तरह से स्वतन्त्रता संग्राम में समर्पित कर दिया।1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भी चरण सिंह गिरफतार हुए फिर अक्तूबर1941 में मुक्त किये गये।सारे देश में इस समय असंतोष व्याप्त था।महात्मा गाँधी ने करो या मरो का आह्वान किया।अंग्रेजों भारत छोड़ों की आवाज सारे भारत में गूंजने लगी।9अगस्त,1942 को अगस्त क्रांति के माहौल में युवक चरण सिंह ने भूमिगत होकर गाजियाबाद,हापुड़,मेरठ,मवाना,सरथना,बुलन्दशहर के गंावों में गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किया।मेरठ कमिश्नरी में युवक चरण सिंह ने क्रांतिकारी साथियों के साथ मिलकर ब्रितानिया हुकूमत को बार-बार चुनौती दी।मेरठ प्रशासन ने चरण सिंह को देखते ही गोली मारने का आदेश दे रखा था।एक तरफ पुलिस चरण सिंह की टोह लेती थी वहीं दूसरी तरफ युवक चरण सिंह जनता के बीच सभायें करके निकल जाता था।आखिरकार पुलिस ने एक दिन चरण सिंह को गिरफतार कर ही लिया।राजबन्दी के रूप में डेढ़ वर्ष की सजा हुई।जेल में ही चौधरीचरण सिंह की लिखित पुस्तक ‘‘शिष्टाचार‘‘,भारतीय संस्कृति और समाज के शिष्टाचार के नियमों का एक बहुमूल्य दस्तावेज है।

दरअसल कुशाग्र बुद्धि के चरण सिंह का जुड़ाव आर्य समाज से भी था।1929 में गाजियाबाद आर्य समाज के सभापति चुने गये चरण सिंह ने आजादी की लड़ाई के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी।स्पष्ट वक्ता तथा दृढ़ संकल्पित चरण सिंह ने 1937 में प्रथम बार बागपत-गाजियाबाद क्षेत्र से प्रांतीय धारा सभा में चुने जाने के बाद ‘‘लैण्ड युटिलाइजेशन बिल‘‘ को पास कराने की चेष्टा की।किसान हितैषी इस बिल को ब्रितानिया हुकूमत ने रखने ही नहीं दिया।चैधरी चरण सिंह ने हिम्मत नहीं हारी तथा उन्होंने धारा सभा में एक ऋण निर्मोचन विधेयक रखा।इस विधेयक का विरोध तो कंाग्रेस के ही तमाम विधायको ने किया।ये ऐसे विधायक थे,जिनके ऋण पाश में लाखों गरीब,खेतिहर,मजदूर,किसान जकड़ा हुआ था।चौधरीचरण सिंह ने विधेयक के पक्ष में अकाट्य तर्क प्रस्तुत किये।ऋण निर्मोचन विधेयक धारा सभा में पास हो गया तथा किसान ऋण मुक्त हो गये तथा उनके घर-खेत नीलाम होने से बच गये।चैधरी चरण सिंह का कृषि विपणन पर लिखा लेख हिन्दुस्तान टाइम्स में 31मार्च और 1अप्रैल,1938 को छपा।इन लेखों को ही पढ़कर सर छोटूराम ने ‘मण्डी समिति ऐक्ट‘ को पंजाब में पाीरत किया था।उ0प्र0 की धारा सभा के भंग होने से यह बिल पास न हो पाया था।आजादी के बाद 1949 में इन्हीं प्रस्तावों को चैधरी चरण सिंह ने 1939 में 50प्रतिशत आरक्षण खेतिहर-मजदूर किसान के लिए आरक्षित करने की मांग नव निर्वाचित धारा सभा में की थी,परन्तु इस प्रस्ताव पर शोषण वादी नीति के संरक्षकों ने विचार भी नहीं किया।आजाद भारत में 1947 में चौधरीचरण सिंह ने पुनः कांग्रेस विधानमण्डल में यह प्रस्ताव रखा।इस विषय पर चौधरी चरण सिंह का लिखा लेख-‘‘सरकारी सेवाओं में किसान स।तान के लिए 50प्रतिशत का आरक्षण क्यों?‘‘किसानों की मनोदशा को उजागर करता है।कांग्रेस और कांग्रेस के नेता पं0नेहरू का मोह कृषि के प्रति न होकर बड़े उद्योगों के प्रति था,इसलिए किसान हितैषी यह बिल पारित न हो सका।यह चौधरी चरण सिंह ही हैं जिनके द्वारा तैयार किया गया जमींदारी उन्मूलन विधेयक ‘‘राज्य के कल्याणकारी निदेशक सिद्धान्त‘‘पर आधारित था।महात्मागाँधी के सच्चे अनुयायी चैधरी चरण सिंह द्वारा तैयार किया ‘‘जमींदारी उन्मूलन विधेयक‘‘विधानसभा में पारित हुआ तथा सदियों से खेतों में खून पसीना बहाने वाले मेहनतकश किसान भू-स्वामी बनाये गये।1जुलाई,1952 के दिन उ0प्र0 के पिछड़ों-भूमिहीनों को अपने पेशवा चरण सिंह की बदौलत हक मिला।इसी दिन प्रदेश में जमींदारी उन्मूलन विधेयक लागू हुआ।

दृढ़ इच्छा शक्ति के धनी चौधरीचरण सिंह ने प्रदेश के 27000पटवारियों के त्यागपत्र को स्वीकार कर ‘लेखपाल‘ पद का सृजन कर नई भर्ती करके किसानों को पटवारी आतंक से मुक्ति तो दिलाई ही,प्रशासनिक धाक भी जमाई।लेखपाल भर्ती में 18प्रतिशत स्थान हरिजनों के लिए चौधरी चरण सिंह ने आरक्षित किया था।क्रान्तिकारी विचारों के वाहक चरण सिंह ने एक और किसान हित का क्रांतिकारी कानून ‘‘उ0प्र0 भूमि संरक्षण कानून‘‘1954 में पारित कराया।1953 में आप के द्वारा पारित कराया गया ‘‘चकबन्दी कानून‘‘1954 में लागू हुआ तथा संगठित खेत तैयार करने के इस कानून के विषय में अमेरिकी कृषि विशेषज्ञ अलवर्ट मायर ने टिप्पणी की थी-‘‘चकबन्दी के काम को देखकर मुझे ऐसा लगा है कि यह अत्यन्त महत्व का काम गांवों के कृषि उत्पादन में क्रांति लाने वाला होगा।‘‘चौधरीचरण सिंह ने गरीब किसानों के हक में सस्ती खाद-बीज आदि के लिए कृषि आपूर्ति संस्थानों की स्थापना की।मुख्यम।त्री पद पर 3अप्रैल,1967 को आसीन होने के बाद चैधरी चरण सिंह ने कुटीर उद्योगों तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि की योजनाओं को क्रियान्वित करने की दृष्टि से सरकारी एजेंसियों द्वारा ऋण देने के तौर-तरीकों को सुगम बनाया,साढ़े छह एकड़ तक की जोत पर आधा लगान माफ कर दिया तथा दो रूपये तक का लगान बिल्कुल मा़फ कर दिया गया,किसानों की उपज,विशेषकर नकदी फसलों के लाभकारी मूल्यों को दिलाने की दिशा मे। महत्वपूर्ण निर्णय लिए,भूमि भवन कर समाप्त किया।सरकारी काम-काज में हिन्दी का शत् प्रतिशत् प्रयोग तथा 23तहसीलों में,जो उर्दू बाहुल्य थी,सरकारी गजट उर्दू में भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की।किसानों के लिए जोत-बही की व्यवस्था चरण सिंह की ही देन है।ब्रिटिश काल से चले आ रहे नहर की पटरियों पर चलने की पाबंदी को चौधरीचरण सिंह ने कानूनन समाप्त कराया।चैधरी चरण सिंह एक ऐसे नेता थे जिनकी ईमानदारी,नैतिकता और प्रशासनिक दृढ़ता के कारण उ0प्र0 में भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगा था।सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी समाप्त हो गई थी।17अप्रैल,1968 को चौधरी चरण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था।मात्र10माह में किसान व जनहित के ठोस कदम उठाने वाले चरण सि।ह 1969 के मध्यावधि चुनावों में 98 विधायक जिता लाये।17फरवरी,1970 को चैधरी चरण सिंह पुनः मुख्यमंत्री बने।चौधरी चरण सिंह ने सत्ता में आते ही कृषि उत्पादन बढ़ाने की नीति को प्रोत्साहन देते हुए उर्वरकों से बिक्रीकर उठा लिया।साढ़े तीन एकड़ वाली जोतों का लगान माफ कर दिया,भूमिहीन खेतिहर-मजदूरों को कृषि भूमि दिलाने के कार्य पर और जोर दिया।छह माह की अवधि में ही 6,26,338एकड़ भूमि की सीरदारी के पट्टे और 31,188एकड़ के आसामी पट्टे वितरित किये गये।सीलिंग से प्राप्त सारी जमीनें भूमिहीन हरिजनों तथा पिछड़े वर्गों को ही दी गई।भूमि विकास बैंकों की कार्यप्रणाली को और उपयोगी बनाया।गुण्डा विरोधी अभियान चलाया,कानून का राज कायम किया।बाद में केन्द्र में गृहमंत्री रहते हुए चरण सिंह ने ही मण्डल आयोग,अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की।1979में वित्त मंत्री तथा उपप्रधानमंत्री के रूप में राष्टीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक-नाबार्ड की स्थापना की।उर्वरकों व डीजल के दामों में कमी की,कृषि यंत्रों पर उत्पाद शुल्क घटाया,काम के बदले अनाज योजना लागू की।यह चैधरी चरण सिंह ही थे जिन्होंने महात्मा गाँधी की सोच के अनुसार ‘अंत्योदय‘योजना को प्रारम्भ किया।विलासिता की सामग्री पर भारी कर चैधरी चरण सिंह ने ही लगाये।मूल्यगत विषमता पर रोक लगाने के लिए कृषि जिन्सों की अन्तर्राज्यीय आवाजाही पर लगी रोक हटाई।लाइसेंस आवण्टन पर पाबंदी लगाई तथा लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया।बडी कपडा मिलों को हिदायत दी कि 20प्रतिशत कपडा गरीब जनता के लिए बनाये।पहली बार कृषि बजट की आवण्टित राशि में वृद्धि आपके कारण सम्भव हुआ।प्रधानमंत्री पद पर अल्प समय में ही ग्रामीण पुनरूत्थान मंत्रालय की स्थापना आपने ही की थी,जो इस समय ग्रामीण विकास मंत्रालय के नाम से जाना जाता है।

29मई,1987 को स्वर्ग सिधारे सादगी की प्रतिमूर्ति,किसान पुत्र चरण सिंह की ईमानदारी ने उनके भीतर निर्भिकता को जन्म देकर भारत के गरीबों-किसानों के मसीहा के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया।भ्रष्टाचार के विषय में चरण सिंह की स्पष्ट सोच कि भ्रष्टाचार उपर से नीचे की ओर चलता है,अक्षरशः सत्य है।चौधरी चरण सिंह आमजन के लिए वह दीप स्तम्भ हैं,जिसकी रोशनी के बिना उन्हें राह नहीं दिख सकती।आज भ्रष्टाचार,मॅंहगाई का दानव आम जन के हितों को लील रहा है,किसानों की भूमि अधिग्रहण मामलों ने किसानों व कृषि भूमि दोनों को खतरे में डाल दिया है।चैधरी चरण सिंह का चरित्र व सिद्धान्त इन समस्याओं रूपी दानवों से निपटने में आम जन व सरकारों का मददगार हो सकता है बशर्ते आम जन व सरकारें चैधरी चरण सिंह जैसे महापुरूषों को आत्मसात् करे।

Friday, December 16, 2011

सामाजिक न्याय की बात आने पर बिदकते क्यूँ है कुछ लोग

अरविन्द विद्रोही-------- संसद भवन में डॉ भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थल के समीप देश १६३ सांसदों ने सामाजिक न्याय की मांग को बुलंद करते हुये विगत बुधवार को धरना दिया| अपनी मांगो के लिए धरना देना ,ज्ञापन देना आदि संवैधानिक -लोकतान्त्रिक अधिकार भारत के सभी नागरिको को प्राप्त है और सांसद भी भारत के नागरिक ही है| अगर अनुसूचित जाती -अनुसूचित जनजाति के १६३ सांसद एक साथ लोकपाल में हिस्सेदारी यानि आरक्षण की मांग को लेकर धरना दे देते है तो इसमें बुराई क्या है ,यह समझ में नहीं आता है| सामाजिक न्याय के लिए भारत के सभी वर्गों ,सभी जातियो,सभी धर्मो का प्रतिनिधित्व प्रत्येक समिति ,प्रत्येक संस्था में करने में हर्ज़ ही क्या है? वंचितों को आगे लाकर समाज व देश की तरक्की में सभी की हिस्सेदारी करवाने से देश -समाज में समानता ही फैलेगी| समता और समानता समाज के लिए बहुत जरुरी तत्त्व है,भारतीय समाज को सामंतवादी सोच से बाहर आकर सामाजिक न्याय की दिशा में निरंतर अग्रसर होते रहना चाहिए| लोकजनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम विलास पासवान के नेतृत्व में बुधवार को अनुसूचित जाती-अनुसूचित जनजाति के १६३ सांसदों ने धरना देकर ,लोकपाल में सभी वर्गों -जातियो को शामिल किये जाने सम्बंधित ज्ञापन भारत के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को देकर सामाजिक न्याय के एक सज़ग प्रहरी की भूमिका निभाई है |लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान एक दलित नेता के रूप में सैदेव अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे है| सशक्त लोकपाल के लिए चल रहे आन्दोलन और संभावित लोकपाल गठन में सामाजिक न्याय की अनदेखी यक़ीनन समाज के वंचित-दलित तबके की अनदेखी करने उनको पीछे धकेलने सरीखा कृत्य है | देश-समाज के बड़े तबके को देश के बड़े ,संवैधानिक निर्णयों को निर्धारित करने में भागीदारी ना देकर ,निर्णायक संस्थाओ में उनकी भागीदारी सुनिश्चित ना करके , आरक्षण ना देकर के देश -समाज को तोड़ने व आपसी कटुता उत्पन्न करने का काम डॉ लोहिया के अनुयायी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे | आज डॉ लोहिया के एक शिष्य राम विलास पासवान ने सामाजिक न्याय के सवाल को लोकपाल गठन में उठा कर डॉ लोहिया के तात्कालिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष के सिधान्त को साकार कर दिया है| राम विलास पासवान ने टीम अन्ना और केंद्र सरकार की मंशा पर जो सवाल उठाये है कि दोनों पक्ष लोकपाल के पैनल में दलितों,पिछडो,महिलाओ सहित सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के प्रति गंभीर नहीं है , पूर्णतया सत्य ही है | सरकार और अन्ना टीम दोनों लोकपाल मसले पर तानाशाओ सा आचरण करती दिखाई देती है | अपनी बात के अलावा किसी की बात स्वीकार ना करने की अन्ना टीम की जिद्द ने उसका गैर लोकतान्त्रिक चेहरा सबके सामने ला ही दिया है | देश की दलित राजनीति में दलितों के हित में लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान ने सदैव सार्थक लडाई लड़ी है ,पहल की है | लोकपाल के लिए चल रहे आन्दोलन ,उसके गठन की कवायत,के बीच लोकपालो की नियुक्ति में सभी वर्गों के लिए आरक्षण की मांग उठा कर राम विलास पासवान एक बार पुनः दलित राजनीति ही नहीं सामाजिक न्याय की लडाई के सबसे बड़े पैरोकार,सेनानी के रूप में सामने आये है | १६३ सांसदों की संख्या मामूली नहीं होती है और यह सिर्फ इन सांसदों की नहीं देश के सभी वंचितों,दलितों,महिलाओ तथा सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले लोगो की मांग व आवाज है कि निर्णयों और अधिकारों में भागीदारी मिलनी ही चाहिए | डॉ राम मनोहर लोहिया के अनुययियो में से एक राम विलास पासवान ने बगैर राजनीतिक नफा-नुकसान की परवाह किये हक़ की जो आवाज़ बुलंद की है ,उस हक़ की लडाई में सभी समाजवादियो और डॉ लोहिया के लोगो को जुटना ही पड़ेगा |