Thursday, February 10, 2011
सुश्री मायावती -- 12 फरवरी को बाराबंकी आगमन
गौरतलब है कि आखिर मुख्यमंत्री दौरे की तारीख आते ही प्रशासनिक अमला क्यो सक्रिय होता है। क्या जो विकास कार्य अब कराये जा रहे है इनको पहले नही कराया जा सकता था। हर विकास कार्य के लिए धन का आवटन तो किया जाता है। साथ ही साथ कराये गये विकास कार्यो की निरीक्षण रिपोर्ट भी यही अधिकारी ही तो देते है। इस समय समस्याग्रस्त पीड़ित दरिद्रनारायण की सुनने वाला कोई नही है। क्योकि सारे अधिकारी सुबह होते ही विभिन्न स्थानों को कूच कर जाते है। तथा देर रात वापस आ रहे है। चारो ओर सफाई का कार्य जा रहा है। चाहे सरकारी दफतर हो अथवा नगर के मुख्यमार्ग या फिर मलिन बस्ती ही क्यो न हो। जो कार्य इस समय कराये जा रहे है। ये सारे कार्य तो रूटीन में ही कराये जाने चाहिए। एक दिन के लिए इतनी सारी तैयारी की जाये फिर आराम तलबी में मशगूल हो जाने से तो आमजन को राहत नही मिलने वाली है। जन सामान्य से जुडे साधारण से मामलों में भी प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता ही दिखती है। चाहे काशीराम आवास योजना हो या फिर महामाया योजना हो सारी योजनाएॅ जिस वर्ग के लिए बनायी गयी है। उस वर्ग को इनका लाभ मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री के पास इतना समय कहा कि हर व्यक्ति के पास पहॅुचकर दुःख-दर्द जान सके। फिर भी वर्तमान प्रदेश की मुखिया जिला-जिला जा कर प्रदेश वासियों की समस्याओ को जानने की जो कोशिश कर रही है। निश्चित रूप से चन्द्र गुप्त मौर्य व अकबर द ग्रेट के द्वारा की गयी जनसेवा की पुनरावृत्ति कर आम आदमी को बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय को कार्य रूप दे रही है। वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग, पेन्शन सहित विवाह अनुदान समय पर लाभार्थी को यदि मिलता रहे, अस्पतालो में रोगियों की सुचारू रूप से इलाज होता रहे, पुलिस कानून व्यवस्था बनाये रखने को सक्रिय रहे, समाज में अपराध व अपराधियों का बोलबाला न हो, विद्यालयों में बच्चो को समय पर शिक्षा व भोजन मिलता रहे, ब्लाको में मात्र राजनीति ही न हो विकास पर भी चर्चा हो, तहसीलो में भाई-भतीजा से ऊपर उठकर जनसामान्य का काम होता रहे, परिवहन विभाग द्वारा यात्रियों की सुख-सुविधा का ध्यान रखा जाये, वन विभाग द्वारा उपलब्ध भूभाग का 33 प्रतिशत पर हरियाली बनायी रखी जाये, वन जन्तुओ का अवैध रूप से शिकार न किया जाये लकडी माफियाओ से संाठ गंाठ कर हरे फल दार पेडों की कटान न कराई जाये, खाद्य रसद विभाग द्वारा सरकार द्वारा सरकारी राशन का वितरण भली प्रकार किया जाता रहे, मुनाफा खोरो, जमाखोरो, मिलावटी व नकली सामान बेचने वाले लोगो के खिलाफ कार्यवाही होती रहे, शिक्षण संस्थाओं में अध्यापक प्रबन्धतन्त्र व प्रधानाचार्य के बीच राजनीति तक ही सीमित न रहे बल्कि शैक्षणिक कलैन्डर के अनुरूप विद्यार्थियों को पढाते रहे, सरकारी विभागो में भ्रष्टाचार व्याप्त न हा,े जिले की औद्योगिक इकाईयां भरपूर उत्पादन करती रहे तो प्रदेश मुखिया को इस प्रकार दौरे क्यो करने पडें। बात बिल्कुल साफ है कि सरकारी पदों पर बैठे जिम्मेदार लोग जहॉ अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनहीन होते है वही सत्तारूढ दल के जनता द्वारा चुने गये नुमाइन्दे भी इन व्यवस्थाओ के प्रति अपनी जवाब देही नही समझते। क्योकि व्यवस्था तो तभी दुरूस्त रहेगी जब देख रेख अपनी ऑखो की जाये। लेकिन विडम्बना है कि एक ओर जहॉ सरकारी अधिकारी शाम होते ही लखनऊ स्थित अपने द्यरो की ओर कूच कर जाते है। वहीं निर्वाचित प्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र में निवास करने की जगह राजधानी में ही निवास करने को वरीयता देते है। क्योकि क्षेत्र की समस्याओ को झेलने के लिए तो जनता है ही।
बाबू बेनी प्रसाद- बाराबंकी जनपद का विकास
गौरतलब है कि जनपद की परिधि में अनेक नेता आये और अपनी राजनैतिक रोटी सेक कर चलते बने। लेकिन बाबू बेनी प्रसाद का सारा अस्तित्व जनपद के चहुॅमुखी विकास में ही परिलक्षित होता है। मुंह से खरे व दिल के भले इस नेता ने अबतक आधा दर्जन से भी अधिक बार विधान सभा व पांच बार लगातार लोकसभा का चुनाव जीत कर अपने शानदार राजनैतिक कौशल का परिचय दिया है। वर्ष 2007 के विधान सभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी को छोड़कर तुरन्त समाजवादी क्रन्तिदल के गठन के पश्चात हुए चुनाव में बेनी बाबू के हाथ निराशा तो जरूर लगी लेकिन उनके समाजवादी पार्टी छोड़ देने के कारण चुनाव में इसका सीधा लाभ बसपा को मिला तथा बाबू जी के समय आठो विधान सभा सीटो पर परचम लहराने वाली सपा को मात्र दो सीटो से ही सब्र करना पडा। खराब स्वास्थ्य के चलते एक बार विरोधियों को यह कहने का मौका जरूर मिला कि बाबू जी की राजनैतिक पारी अब समाप्त होने को है। लेकिन वर्ष 2009 में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में काग्रेस पार्टी के टिकेट पर गोण्डा संसदीय क्षेत्र से शानदार विजय हासिल कर बाबू जीने अपने विरोधियों को करारा जवाब दिया। इस लोकसभा चुनाव में बाराबंकी लोकसभा सीट से 25 साल बाद बाबू जी ने काग्रेस प्रत्याशी पी0एल0पुनिया को रिकार्ड मतो से विजय बनाकर लोकसभा भेजा यह बात किसी से छिपी नही है। लेकिन राजनीति के क्षेत्र में एक कहावत प्रचलित है कि जिसको अगुली पकड कर चलना सिखाओ वही तुमको पीछे करने की कोशिश करता है। बाबू जी के जन्मदिन के दो साल पूर्व पर नजर डाले तो एक माला के अन्दर बाबू जी व पुनिया एक साथ नजर आते है। लेकिन आज स्थितयां ठीक विपरीत है। एक ही राजनैतिक दल मे होने के बावजूद दोनो लोग एक दूसरे को फूटी ऑख नही सुहाते। वर्तमान समय मे दोनो ही सांसदो को मनमोहन सरकार मे महत्वपूर्ण पद मिले हुए है। लेकिन दोनो लोगो में पार्टी के लिए कौन लाभदायक सिद्ध होगा यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। लेकिन एक बात साफ तौर से कही जा सकती है कि चाहे कोई जितना भी क्यो न बन ले नेता तो बेनी बाबू ही हैं। जब-जब बाबू जी पावर मे होते है तबतब उसका सीधा लाभ जनपद को मिला है चाहे वो वर्ष 1989 से 1991 व 1993 से 1995 में लोक निर्माण मंत्रिपद हो अथवा वर्ष 1996 में देवगौडा सरकार मेे केन्द्रीय दूर सचार मंत्री का पद हो। दोनो पदो पर रहते हुए बाबू जीने जनपद में विकास की गंगा बहाने में कोई कसर नही छोडी। जब वह प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री थे तो जनपद के हर गांव के गली -कूंचो तक सड़को का जाल बिछाने का कार्य किया। और जब वह केन्द्रीय संचार मंत्री बने तो जनपद स्तर से लेकर गांजरी क्षेत्र हेतमापुर तक संचार भवन बनवाकर टेलीफोन लाइन बिछवाने का कार्य किया। इतना ही नही संचार मंत्री रहते हुए ही द्वापरयुगीन पारिजात वृक्ष पर तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भण्डारी द्वारा डाकटिकट जारी करवा कर जनपद को सारे देश में पहचान दिलाने का काम किया। वर्तमान पारी में इस्पात मंत्री बनते ही जगदीश पुर की स्टील फैक्ट्री को पुनः चालू करने व बाराबंकी तथा गोण्डा में इकाईया स्थापित करने की घोषणा से ही लोगो के मन में एक नयी आशा की किरन जगी है। इनके राजनैतिक कौशल का लाभ मिशन 2012 को कामयाब करने में काग्रेस पार्टी को मिलना अवश्यंभावी है।
Wednesday, February 9, 2011
बाराबंकी:- प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती 12 फरवरी को जनपद आगमन
गौरतलब है कि आखिर मुख्यमंत्री दौरे की तारीख आते ही प्रशासनिक अमला क्यो सक्रिय होता है। क्या जो विकास कार्य अब कराये जा रहे है इनको पहले नही कराया जा सकता था। हर विकास कार्य के लिए धन का आवटन तो किया जाता है। साथ ही साथ कराये गये विकास कार्यो की निरीक्षण रिपोर्ट भी यही अधिकारी ही तो देते है। इस समय समस्याग्रस्त पीड़ित दरिद्रनारायण की सुनने वाला कोई नही है। क्योकि सारे अधिकारी सुबह होते ही विभिन्न स्थानों को कूच कर जाते है। तथा देर रात वापस आ रहे है। चारो ओर सफाई का कार्य जा रहा है। चाहे सरकारी दफतर हो अथवा नगर के मुख्यमार्ग या फिर मलिन बस्ती ही क्यो न हो। जो कार्य इस समय कराये जा रहे है। ये सारे कार्य तो रूटीन में ही कराये जाने चाहिए। एक दिन के लिए इतनी सारी तैयारी की जाये फिर आराम तलबी में मशगूल हो जाने से तो आमजन को राहत नही मिलने वाली है। जन सामान्य से जुडे साधारण से मामलों में भी प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता ही दिखती है। चाहे काशीराम आवास योजना हो या फिर महामाया योजना हो सारी योजनाएॅ जिस वर्ग के लिए बनायी गयी है। उस वर्ग को इनका लाभ मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री के पास इतना समय कहा कि हर व्यक्ति के पास पहॅुचकर दुःख-दर्द जान सके। फिर भी वर्तमान प्रदेश की मुखिया जिला-जिला जा कर प्रदेश वासियों की समस्याओ को जानने की जो कोशिश कर रही है। निश्चित रूप से चन्द्र गुप्त मौर्य व अकबर द ग्रेट के द्वारा की गयी जनसेवा की पुनरावृत्ति कर आम आदमी को बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय को कार्य रूप दे रही है। वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग, पेन्शन सहित विवाह अनुदान समय पर लाभार्थी को यदि मिलता रहे, अस्पतालो में रोगियों की सुचारू रूप से इलाज होता रहे, पुलिस कानून व्यवस्था बनाये रखने को सक्रिय रहे, समाज में अपराध व अपराधियों का बोलबाला न हो, विद्यालयों में बच्चो को समय पर शिक्षा व भोजन मिलता रहे, ब्लाको में मात्र राजनीति ही न हो विकास पर भी चर्चा हो, तहसीलो में भाई-भतीजा से ऊपर उठकर जनसामान्य का काम होता रहे, परिवहन विभाग द्वारा यात्रियों की सुख-सुविधा का ध्यान रखा जाये, वन विभाग द्वारा उपलब्ध भूभाग का 33 प्रतिशत पर हरियाली बनायी रखी जाये, वन जन्तुओ का अवैध रूप से शिकार न किया जाये लकडी माफियाओ से संाठ गंाठ कर हरे फल दार पेडों की कटान न कराई जाये, खाद्य रसद विभाग द्वारा सरकार द्वारा सरकारी राशन का वितरण भली प्रकार किया जाता रहे, मुनाफा खोरो, जमाखोरो, मिलावटी व नकली सामान बेचने वाले लोगो के खिलाफ कार्यवाही होती रहे, शिक्षण संस्थाओं में अध्यापक प्रबन्धतन्त्र व प्रधानाचार्य के बीच राजनीति तक ही सीमित न रहे बल्कि शैक्षणिक कलैन्डर के अनुरूप विद्यार्थियों को पढाते रहे, सरकारी विभागो में भ्रष्टाचार व्याप्त न हा,े जिले की औद्योगिक इकाईयां भरपूर उत्पादन करती रहे तो प्रदेश मुखिया को इस प्रकार दौरे क्यो करने पडें। बात बिल्कुल साफ है कि सरकारी पदों पर बैठे जिम्मेदार लोग जहॉ अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनहीन होते है वही सत्तारूढ दल के जनता द्वारा चुने गये नुमाइन्दे भी इन व्यवस्थाओ के प्रति अपनी जवाब देही नही समझते। क्योकि व्यवस्था तो तभी दुरूस्त रहेगी जब देख रेख अपनी ऑखो की जाये। लेकिन विडम्बना है कि एक ओर जहॉ सरकारी अधिकारी शाम होते ही लखनऊ स्थित अपने द्यरो की ओर कूच कर जाते है। वहीं निर्वाचित प्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र में निवास करने की जगह राजधानी में ही निवास करने को वरीयता देते है। क्योकि क्षेत्र की समस्याओ को झेलने के लिए तो जनता है ही।
Tuesday, February 8, 2011
बसन्त पंचमी विद्यार्थी की मनोकामना ईश्वर से प्रार्थना
आप मॉं शारदे के पुत्र ,आपको यह सांसारिक लोभ लालच भ्रष्टाचार ने कैसे अपने बंधनो में जकड लिया है ।हे गुरुश्रेष्ठ -जागृत हो,मोह-लोभ की बेडियों को तोड दीजिए ।छोड दीजिए-ठेकेदारी का लालच ।मत मोड़िए ,अपनी शैक्षिक छवि को ,ज्ञान पुंज को-लोभ के दरिया में।व्यभिचार के कुंभ में बदलते अपने स्वरूप को तत्काल रोकें-गुरूदेवों ।हम महादेव के सामने सिर पटक चुके हैं कि हे महादेव-हमारे गुरूओं को सत्मार्ग पर लायें ।हम मॉं सरस्वती से विनयावत हो चुके हैं कि हे माते अपने पुत्रों को सहेजें ।हमने अपने छात्र जीवन की उन घटनाओं को याद किया है ,जब हे गुरूश्रेष्ठ-आप हमें सिर्फ असत्य बोल देने पर कक्षा में दण्डित करते थे ।आज आप ही के द्वारा दण्डित ,सत्मार्ग पर आपके ही द्व्रारा चलाये गये विधार्थी आपके सम्मुख चरण वन्दना को प्रस्तुत हैं-हे गुरूवर ,हे परशुराम ,हे वशिष्ठ आदि ऋषियों मुनियों की भॉंति हमें युगों-युगों से शिक्षित कर रहे शिक्षा के पुजारियों ,आप मॉं लक्ष्मी के पुजारी क्यों बन रहें हैं?आप अपना स्वरूप क्यों बिगाड रहें हैं?विद्या ददाति विनयम् आपने हमें पढाया था। आपकी उदारता ,आपका कर्त्तव्यबोघ ,समाज के प्रति आपका अनुराग कब ,कैसे ,क्यों और कहॉं लुप्त हो गया?हम चिंतातुर हैं मुनिवर् ।हम व्याकुल हैं ,आघुनिक भारत के शिक्षा गुरूओं-हम व्यथित हैं। हे जगतजननी मॉं ,आप ही दया करो। आने वाली अपनी औलादों के लिए हमारे गुरूओं की सद्बुध्दि वापस कर दो -मॉं! मॉं , हम अपने लिए नहीं वरन् अपने गुरूओं और अपनी संतानों और समाज के लिए आपसे गुरूओं को सत्मार्ग पर लाने की भिक्षा मॉंगते। हैं।
हे भारतमाता। आप ही समझाओं इन गुरूश्रेष्ठों को। हे दुर्गा मॉं-आपसे तो असुर भी भय खाते थे ,क्या हमारे गुरू आपसे नहीं डरते?हे सनातन धर्म के कोटि2 देवताओं ,हे समस्त धर्मो के श्रध्देयों-हमारी ,विद्यार्थियों की विनती पर भी ध्यान दें ।हमारे शिक्षकों को मॉं सरस्वती का ही पुत्र रहने दें ।हमारे शिक्षकों को भ्रष्टाचार के दलदल से निकालो-कृष्ण ।हे वासुदेव कृष्ण-तुमने तो अधर्म के नाश के लिए चचेरे भाईयों में महाभारत कराकर धर्म की स्थापना की थी। हे मधुसूदन-अपने मामा कंस का वध आपने ही अत्याचार ,आतंक खत्म करने के लिए किया था ।अवतार ले लो हे चक्रधारी ।
हे सर्वशक्तिमान-सम्पूर्ण सृष्टि के रचयिता ।आप जिस भी रूप में हों, आपकी नजर तो सब पर है ।हम आपको नहीं देख पाते ,आपका डाक पता भी नहीं है ,इसलिए हम इस लेख के माध्यम से आप देवगणों से निवेदन करते हैं कि हमें सत्मार्ग दिखाते आ रहे हमारे गुरूओं ने अपना मार्ग बदल दिया है ,इन्हें राह पर लाने का कोई तो जुगाड. करो प्रभु ।हे सृष्टि रचयिता ब्रहमाजी-आपने कहॉं चूक कर दी?हे पालनहार विष्णु जी-आपने पालन में क्या असमानता कर दी?हे महादेव-क्या आपके त्रिनेत्र खोलने का समय आ गया है?नहीं2 महादेव नहीं , हम अपने गुरूदेवों की तरफ से क्षमाप्रार्थी हैं ।आपने तो समस्त दोषियों को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया है ,उन्हें सचेत किया है ।फिर हमारे मार्गदर्शकों ,हमारे पूज्यनीयों के साथ यह भेदभाव क्यों?गुरूओं को अवसर दें प्रभु ।उन्हे सत्मार्ग पर लाने के लिए मॉं से बोलिए प्रभु ।अपने कर्मो से स्वयं अपना अपमान करा रहे गुरूवरों को दण्डित करने के बारे में अभी मत सोचें-महादेव ।भ्रष्टाचार के घनघोर बियावान में भटक रहे गुरूजनों को अपने ज्ञानपुंज से सदाचरण की राह पर लाओ मॉं ।।।।।।।।।।।
इसी आाशा और विश्वास के साथ कि हमारी मनोकामना अतिशीघ्र पूरी होगी।
गेट मींटिग करके संधर्ष का एलान
विदित है कि प्रादेशिक संगठन के आवाहन पर जनपद शाखा के समस्त सदस्यों द्वारा बीती 31 जनवरी 2011 से काले फीते बॉधकर शासन-प्रशासन के विरोध में प्रतिदिन गेट मींटिक करके विरोध किया यह जनजागरण कार्यक्रम 10 फरवरी तक चलेगा तथा 11 फरवरी को फैजाबाद स्थित जोनल अधिकारी के समक्ष धरना प्रदर्शन किया जाएगा। मांगे पूरी न होने पर 11 फरवरी को कमिश्नर लखनऊ कार्यालय पर धरना दिया जाएगा व अग्रिम आन्दोलन का निर्णय लिया जाएगा।
गेट मींटिग को सम्बोधित करते हुए जिला शाखा के अध्यक्ष आनन्द कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश में वैट प्रणाली लागू होने के बाद नये कार्यालयो का गठन व कर्मचारियों के पदो का सृजन किया गया है। किन्तु अभी तक नए व पुराने खाली पदों पर नई नियुक्तियां नहीं की गयी है। जब कि लगातार कर्मचारी रिटयर हो रहे है तथा कार्य का बोझ दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। एक-एक बाबू से दो-दो तीन-तीन काम लिए जा रहे है। ऐसी दशा में कार्य क्षमता धठने के साथ-साथ हमलोगो के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। तथा कर्मचारियों की पदोन्नति 33 प्रतिशत से बढ़ाए गए 50 प्रतिशत पर नहीं किया जा रहा है। जिसका शासनादेश भी जारी किया जा चुका है। कम्प्यूटर प्रशिक्षण नहीं दिया गया है जिसके कारण कर्मचारियों पर तीन से चार पटलो का कार्य बढ़ गया है।
बसंत पंचमी
आज बसंत पंचमी है और महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी का जन्म दिवस
दिनाँक 8 फरवरी 2011, आज बसंत पंचमी है और महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का आज जन्म दिवस है। हाँलाकि महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जन्म दिवस की असल तारीख 29 फरवरी है किंतु निराला जी की हिदायत रही कि उनका जन्म दिन बसंत पंचमी को ही मनाया जाए अतः बसंत पंचमी को ही महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म दिवस सैलिब्रेट किया जाता रहा है। निराला ने जिस समय कविता रचना की शुरुआत की उनकी भावभूमि बंगाल रही थी। जैसे जैसे कविता रचना की विधा आगे बढी़, उनकी हिदी ने स्थानीयता का ठाठ पकड़ लिया। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का व्यक्तित्व भी उनके काव्य की तरह ही महान, विराट और आदर्शमय रहा। निराला जी की इंसान और उसकी जिंदगी में गजब की आस्था रही। अपनी सदी के अंतहीन सवालो को अपनी विराट काव्य यात्रा में रोंधने का अथक प्रयास निराला ने किया। इसीलिए वह कदाचित पुराने नहीं पडते। उन्होने किसी बंधन को अपनी जिंदगी में कभी स्वीकार नहीं किया। वह एक महान कवि होने के साथ ही महामानव रहे। समग्र जीवन चौतरफा यथार्थ से निराला जूझते रहे और उसे काव्यमय स्वप्नशील अभिव्यक्ति प्रदान करते रहे।
Monday, February 7, 2011
उ0प्र0 में समाजवादी पार्टी ही है बसपा के मुकाबिल
अरविन्द विद्रोही
उ0प्र0 में आगामी विधान-सभा चुनावों के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी ने अपने विधान-सभा वार प्रत्याशियों की घोषणा करके प्रत्याशी चयन में पुनःबाजी मार ली है।कांग्रेस व भाजपा दोनो दल अभी भी अपने-अपने संगठन के अन्दरूनी हालात से जूझ रहे हैं।समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव अपना बिखरा समाजवादी कुनबा व जनाधार वापस लाने में प्रयासरत् हैं।अभी हाल में ही सम्पन्न हुए पंचायती चुनावों में जिस प्रकार बहुजन समाज पार्टी से अकेले समाजवादी पार्टी लड़ती नजर आई,उससे बहुजन समाज पार्टी की सरकार के काम-काज के तरीकों,उसके कार्यकर्ताओं के रवैये से नाराज मतदाताओं की पहली पसन्द समाजवादी पार्टी बनती जा रही है।समाजवादी पार्टी के जनाधार वापसी की मुहिम को मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो चुकी पीस पार्टी से बहुत बड़ी चुनौती मिल सकती है।मुस्लिम मतों में अपने प्रति विश्वास की मजबूती व जनाधार में वृद्धि के लिए ही मुलायम सिंह यादव ने अपने पुराने साथी समाजवादी नेता आजम खान को पूरी तवज्जों देते हुए घर वापसी कराई है।
उ0प्र0 के आगामी विधान-सभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी फिर से सत्ता में बहुमत से वापस आयेगी कि नही यह अलग विषय है तथा इसका निश्चित पता मतगणना के पश्चात् नतीजों के आने से ही होगा।लेकिन चुनावों के पूर्व की तैयारियों,संगठन की ढं़ाचागत व्यवस्था,प्रत्याशी चयन में,बूथ वार कमेटियों के गठन में यह निर्विवाद सत्य है कि बहुजन समाज पार्टी सभी राजनैतिक दलों से आगे चल रही है।बसपा सरकार की उपलब्धियां बूथ कमेटी के कार्यकर्ताओं की विधान-सभा क्षेत्र वार बैठकें लेकर बसपा के क्षेत्रीय कोआर्डिनेटरों के द्वारा पहुॅंचाना एक सुनिश्चित तयशुदा कार्यक्रम है।इन्ही बैठकों में बूथ कमेटी स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कायम कर,क्षेत्रीय विधायक,सांसद व संगठन की समीक्षा होती है।बहुजन समाज पार्टी का सांगठनिक ढांचा,बूथ कमेटियों,कार्यकर्ताओं,विधायकों,सांसदों,कोआर्डिनेटर्स पर बसपा अध्यक्ष मायवती का एकाधिकार बसपा को एक अनुशासित दल के रूप में बनाये रखे है।कांगेस सिर्फ राहुल के करिश्मे के सहारे आत्ममुग्धता का शिकार है।पुराने समाजवादी नेता बेनी प्रसाद वर्मा को मंत्री बनाने से कांग्रेस को कम से कम दो दर्जन सीटों पर बेनी प्रसाद के व्यक्तित्व व जनाधार के कारण विधान-सभा में विजय मिलना निश्चित है बशर्तें उम्मीदवार चयन में जनाधार वाले बेनी प्रसाद वर्मा की पसन्द को तवज्जों दी जाये।बेनी प्रसाद वर्मा के अतिरिक्त गॉंधी-नेहरू परिवार को छोड़कर कोई भी एैसा नेता कांग्रेस में नही है जो अपने संसदीय क्षेत्र या अपने गृह जनपद की सभी विधान-सभा क्षेत्रों पर प्रत्याशी को मुख्य चुनावी संघर्ष में ला सके।भारतीय जनता पार्टी तो सही मायने में अभी भी उ0प्र0 में कमजोर नेतृत्व का दंश झेल रही है।विनय कटियार,योगी आदित्यनाथ,लल्लू सिंह,वरूण गॉंधी सरीखे उर्जावान नेताओं को प्रदेश की कमान सौंपने से भारतीय जनता पार्टी का मूल आधार वापस आते देर नही लगेगी।परन्तु फिलहाल एैसा कुछ होता दिख नहीं रहा है।उ0प्र0 में भाजपा की नौका चुनावी वैतरणी को प्रत्याशियों,क्षेत्रीय नेताओं व राम भरोसे ही पार करेगी,यही प्रतीत होता है।कल्याण सिंह,चौ0अजित सिंह,डा0अयूब,ओम प्रकाश राजभर,कौशल किशोर,उदित राज आदि नेता अपने-अपने दलों के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतार कर नतीजों को प्रभावित करने की भूमिका निभायेंगे।इन नेताओं के दलों का संगठन इनके व्यक्तिगत,जातीय प्रभाव वाले क्षेत्रों में है।
इस समय उ0प्र0 में विधायक बनने की लालसा रखने वालों की पहली पसन्द सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी ही है।ऐन केन प्रकारेण विधायक बनने की चेष्टा में लगे लोग बहुजन समाज पार्टी में दाल न गलने के पश्चात् समाजवादी पार्टी को विकल्प के रूप में मान रहे हैं।बसपा से टिकट न मिलने से,बसपा से निकाले जाने के बाद तमाम लोग समाजवादी पार्टी के नेताओं से मेल-जोल बढ़ाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करने की चेष्टा में लगे हैं।जिन लोगों को आपराधिक प्रवृत्ति का होने के कारण,उनके द्वारा अपने आचरण में सुधार न करने की बात कह कर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने अपने दल से निकाला है वो अब मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी का दामन थामने को प्रयासरत् हैं।इसी बात का फायदा उठाने के लिए बसपा अध्यक्ष मायावती ने सपा को गुण्ड़ो-अपराधियों की पार्टी कहा है।समाजवादी पार्टी के निष्ठावान संघर्षशील कार्यकर्ता भी नही चाहते कि जिन लोगों को बसपा ने नाकारा है उनको समाजवादी पार्टी टिकट या संगठन में पद से नवाजे।अब समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के सामने अपने कार्यकर्ताओं,संघर्ष के साथियों के हितों की रक्षा का दायित्व भी है और उ0प्र0 की सत्ता पर काबिज होकर एक समाजवादी लोकतांत्रिक राज्य की स्थापना का लक्ष्य भी।