Tuesday, February 15, 2011
मौसम
बाराबंकी मौसम के बदले रूख ने लोगो को गर्म कपडे फिर से पहने के लिए मजबूर कर दिया। फरवरी माह के लगते ही आसमान में चमकते हुए सूरज ने लोगो को गर्मी का अहसास कराया था। लेकिन आकाश में छायी बदली चलने वाली हवाओ ने मौसम में भारी परिवर्तन कर दिया। कुछ किसानो के चेहरो पर रौनक तो कुछ किसानो के चेहरो पर बदली को लेकर मायूसी देखी गई। किसानो का कहना है कि यदि बरसात होती है तो गेहूॅ,आलू जैसी फसलो को फायदा हो सकता है। वही दलहन व तिलहन को नुकसान हो सकता है। साथ ही साथ इस परिवर्तन शील मौसम में जो लोग लाहपरवाही करेगे। वो निश्चित रूप से बीमार हो सकते है। योभी अभी माध पूर्णिमा का स्नान शेष है। जब तक सारे महत्वपूर्ण स्नान नही हो जाते तब तक ठण्ड मे कमी के आसार नही है।
तहसील दिवस
बाराबंकी:- तहसील नवाबगंज में जिलाधिकारी विकास गोठलवाल की अध्यक्षता में आयोजित तहसील दिवस में कुल 128 प्रार्थनापत्र आये। मौके पर मात्र 3 प्रार्थनापत्रों का ही निस्तारण किया जा सका।
प्राप्त प्रार्थनापत्रों में सर्वाधिक राजस्व विभाग के 53, पुलिस विभाग के 25 आपूर्ति विभाग के 6 विकास विभाग के साथ विद्युत विभाग के 4 समस्त कल्याण विभाग के 9 चकंबन्दी विभाग के 2 विजली विभाग के 4 व अन्य 17 शामिल है। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी अभय कुमार अपर पुलिस अधीक्षक श्री पर्णा गागुली, उप जिलाधिकारी अनिल सिह, तहसीलदार अरूण मिश्रा, उपस्थित थे।
प्राप्त प्रार्थनापत्रों में सर्वाधिक राजस्व विभाग के 53, पुलिस विभाग के 25 आपूर्ति विभाग के 6 विकास विभाग के साथ विद्युत विभाग के 4 समस्त कल्याण विभाग के 9 चकंबन्दी विभाग के 2 विजली विभाग के 4 व अन्य 17 शामिल है। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी अभय कुमार अपर पुलिस अधीक्षक श्री पर्णा गागुली, उप जिलाधिकारी अनिल सिह, तहसीलदार अरूण मिश्रा, उपस्थित थे।
Sunday, February 13, 2011
’एनुवल एजुकेशनल, एविसीवेशन कम कल्चरल एक्टीविटीज
बाराबंकी:- पायनियर माण्टेसरी इण्टर कालेज, में दो दिवेसीय ’’एनुवल एजुकेशनल, एविसीवेशन कम कल्चरल एक्टीविटीज’’ का शुभारम्भ अपर जिला सत्र न्यायधीश राजेन्द्र चन्द ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
इस मौके पर उपस्थित वीरबल साहनी संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 सी0 एम0 नौटियाल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों को समय-समय पर दोहराते रहना चाहिए क्योकि इससे छात्रो को करके सीखने का मौका मिलता है।
प्रदर्शनी में मैजिक बाक्स, इको-फ्रिज, हाइड्रेपानिक्स, कैथेड्रल चर्च, लंका दहन, श्रृष्ट, प्रलय, (कामायनी) भौमिक समय सारणी, रोबोट, आदि का प्रदर्शन किया गया। उधर सांस्कृतिक कायक्रमो में गुजराती गरबा नृत्य (धीमडो-धीमडों) आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बना रहा। इन कार्यक्रमों के साथ-साथ फैंसी डेªस कम्पटीशन का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रेप-गुप में अमन-प्रथम, शिवांगी द्वितीय तथा निष्ठा पटेल तृतीय स्थान पर रही। द्वितीय गुप में (कक्षा1,2) में प्रियंाशी बाजपेयी प्रियांशी तिवारी को प्रथम आस्था द्विवेदी को द्वितीय व शहरीस फातिमा को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। मुख्य अतिंिथ द्वारा इन छात्र-छात्रों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के (पूर्व होनहार) छात्र सत्येन्द्र कुमार को नव नियुक्त नायब तहसील दार सत्येन्द्र कुमार को सम्बोन्धित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला विद्यालय निरीक्षक अरूण कुमार दुबें, विद्यालय प्रबन्धक पूरन सिंह, प्रधानाचार्य श्रीमती रेखा मिश्रा ने भी सभा को सम्बोधित किया। कार्यक्रम में डा0 बी0 के0 तिवारी, श्रीमती सोमप्रभा मिश्रा, जितेन्द्र कुमार गिरी (नगर कोतवाल) श्रीमती मंजू श्रीवास्तव उपस्थित थी कार्यक्रम का संचालन बी0एन0मिश्रा ने किया।
इस मौके पर उपस्थित वीरबल साहनी संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 सी0 एम0 नौटियाल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों को समय-समय पर दोहराते रहना चाहिए क्योकि इससे छात्रो को करके सीखने का मौका मिलता है।
प्रदर्शनी में मैजिक बाक्स, इको-फ्रिज, हाइड्रेपानिक्स, कैथेड्रल चर्च, लंका दहन, श्रृष्ट, प्रलय, (कामायनी) भौमिक समय सारणी, रोबोट, आदि का प्रदर्शन किया गया। उधर सांस्कृतिक कायक्रमो में गुजराती गरबा नृत्य (धीमडो-धीमडों) आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बना रहा। इन कार्यक्रमों के साथ-साथ फैंसी डेªस कम्पटीशन का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रेप-गुप में अमन-प्रथम, शिवांगी द्वितीय तथा निष्ठा पटेल तृतीय स्थान पर रही। द्वितीय गुप में (कक्षा1,2) में प्रियंाशी बाजपेयी प्रियांशी तिवारी को प्रथम आस्था द्विवेदी को द्वितीय व शहरीस फातिमा को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। मुख्य अतिंिथ द्वारा इन छात्र-छात्रों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के (पूर्व होनहार) छात्र सत्येन्द्र कुमार को नव नियुक्त नायब तहसील दार सत्येन्द्र कुमार को सम्बोन्धित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला विद्यालय निरीक्षक अरूण कुमार दुबें, विद्यालय प्रबन्धक पूरन सिंह, प्रधानाचार्य श्रीमती रेखा मिश्रा ने भी सभा को सम्बोधित किया। कार्यक्रम में डा0 बी0 के0 तिवारी, श्रीमती सोमप्रभा मिश्रा, जितेन्द्र कुमार गिरी (नगर कोतवाल) श्रीमती मंजू श्रीवास्तव उपस्थित थी कार्यक्रम का संचालन बी0एन0मिश्रा ने किया।
Friday, February 11, 2011
जिलाधिकारी कार्यलय की दीवाल
बाराबंकी:- मुख्यमंत्री के जनपद दौरे को देखते हुए जिलाधिकारी कार्यलय में कराया जा रहा रग रोगन के कार्य में एक मजदूर की जान जाते-जाते बची।
विदित है कि जहॉगीरा बाद निवासी 45 वर्षीय सहज राम जिलाधिकारी कार्यलय की दीवाल पर काफी ऊचाई पर पोतायी का कार्य कर रहा था कि अचानक बंास चरमरा कर नीचे की ओर आने लगा। तब तक वहॅा पर मौजूद लोगो ने गिर रहे बास को थाम लिया नही तो कुछ भी हो सकता था। जिससे चारो तरफ अफरा-तफरी मच गयी। उसी समय प्रदेश के असरदार मंत्री नसीमुद्दीन सिददीकी चन्द कदमो की दूरी पर स्थित गन्ना मैदान में मुख्यमंत्री आगमन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे जिससे सारा जिला प्रशासन वही पर मौजूद था। उस गरीब मजदूर का धन्टो तक किसी ने हाल-चाल नही लिया।
विदित है कि जहॉगीरा बाद निवासी 45 वर्षीय सहज राम जिलाधिकारी कार्यलय की दीवाल पर काफी ऊचाई पर पोतायी का कार्य कर रहा था कि अचानक बंास चरमरा कर नीचे की ओर आने लगा। तब तक वहॅा पर मौजूद लोगो ने गिर रहे बास को थाम लिया नही तो कुछ भी हो सकता था। जिससे चारो तरफ अफरा-तफरी मच गयी। उसी समय प्रदेश के असरदार मंत्री नसीमुद्दीन सिददीकी चन्द कदमो की दूरी पर स्थित गन्ना मैदान में मुख्यमंत्री आगमन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे जिससे सारा जिला प्रशासन वही पर मौजूद था। उस गरीब मजदूर का धन्टो तक किसी ने हाल-चाल नही लिया।
बाराबंकी भारतीय पोस्ट विभाग
बाराबंकी:- भारतीय पोस्ट विभाग की धिसी-पिटी कार्यशैली के चलते एक युवा का भविष्य अन्धकार की गर्त मे चला गया।
विदित है कि अभिषेक श्रीवास्तव पुत्र नन्द कुमार श्रीवास्तव निवासी ग्राम व पोस्ट भैसूरिया रामनगर जनपद बाराबंकी ने भारतीय वायु सेना में लिपिक पद हेतु आवेदन किया था। जिसकी परीक्षा बीती 28 जनवरी को 2011 को वायु सेना स्टेशन चकेरी कानपुर में सम्पन्न हो गयी। विडम्बना यह है कि वायु सेना द्वारा क्रमसख्या 8550 दिनांक 13 जनवरी 2011 को साधारण डाक से भेजा गया था लेकिन वाह रे डाक विभाग लिफाफे पर चकेरी डाकद्यर की 30 जनवरी 11 की लगी मुहर इस बात को दर्शाती है कि भेजा गया बुलावा पत्र 17 दिनों तक डाकद्यर की ही धूल फाकता रहा और अंत मे वही हुआ जो किस्मत को मजूर था। अभ्यर्थी को परीक्षा हो जाने के बाद मिला। जिससे वह परीक्षा में शामिल नही हो सका।
विदित है कि अभिषेक श्रीवास्तव पुत्र नन्द कुमार श्रीवास्तव निवासी ग्राम व पोस्ट भैसूरिया रामनगर जनपद बाराबंकी ने भारतीय वायु सेना में लिपिक पद हेतु आवेदन किया था। जिसकी परीक्षा बीती 28 जनवरी को 2011 को वायु सेना स्टेशन चकेरी कानपुर में सम्पन्न हो गयी। विडम्बना यह है कि वायु सेना द्वारा क्रमसख्या 8550 दिनांक 13 जनवरी 2011 को साधारण डाक से भेजा गया था लेकिन वाह रे डाक विभाग लिफाफे पर चकेरी डाकद्यर की 30 जनवरी 11 की लगी मुहर इस बात को दर्शाती है कि भेजा गया बुलावा पत्र 17 दिनों तक डाकद्यर की ही धूल फाकता रहा और अंत मे वही हुआ जो किस्मत को मजूर था। अभ्यर्थी को परीक्षा हो जाने के बाद मिला। जिससे वह परीक्षा में शामिल नही हो सका।
Thursday, February 10, 2011
सुश्री मायावती -- 12 फरवरी को बाराबंकी आगमन
आसुतोष कुमार श्रीवास्तव... प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती के आगामी 12 फरवरी को जनपद आगमन को देखते हुए सारा प्रशासनिक अमला दिन रात एक किये हुए है।
गौरतलब है कि आखिर मुख्यमंत्री दौरे की तारीख आते ही प्रशासनिक अमला क्यो सक्रिय होता है। क्या जो विकास कार्य अब कराये जा रहे है इनको पहले नही कराया जा सकता था। हर विकास कार्य के लिए धन का आवटन तो किया जाता है। साथ ही साथ कराये गये विकास कार्यो की निरीक्षण रिपोर्ट भी यही अधिकारी ही तो देते है। इस समय समस्याग्रस्त पीड़ित दरिद्रनारायण की सुनने वाला कोई नही है। क्योकि सारे अधिकारी सुबह होते ही विभिन्न स्थानों को कूच कर जाते है। तथा देर रात वापस आ रहे है। चारो ओर सफाई का कार्य जा रहा है। चाहे सरकारी दफतर हो अथवा नगर के मुख्यमार्ग या फिर मलिन बस्ती ही क्यो न हो। जो कार्य इस समय कराये जा रहे है। ये सारे कार्य तो रूटीन में ही कराये जाने चाहिए। एक दिन के लिए इतनी सारी तैयारी की जाये फिर आराम तलबी में मशगूल हो जाने से तो आमजन को राहत नही मिलने वाली है। जन सामान्य से जुडे साधारण से मामलों में भी प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता ही दिखती है। चाहे काशीराम आवास योजना हो या फिर महामाया योजना हो सारी योजनाएॅ जिस वर्ग के लिए बनायी गयी है। उस वर्ग को इनका लाभ मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री के पास इतना समय कहा कि हर व्यक्ति के पास पहॅुचकर दुःख-दर्द जान सके। फिर भी वर्तमान प्रदेश की मुखिया जिला-जिला जा कर प्रदेश वासियों की समस्याओ को जानने की जो कोशिश कर रही है। निश्चित रूप से चन्द्र गुप्त मौर्य व अकबर द ग्रेट के द्वारा की गयी जनसेवा की पुनरावृत्ति कर आम आदमी को बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय को कार्य रूप दे रही है। वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग, पेन्शन सहित विवाह अनुदान समय पर लाभार्थी को यदि मिलता रहे, अस्पतालो में रोगियों की सुचारू रूप से इलाज होता रहे, पुलिस कानून व्यवस्था बनाये रखने को सक्रिय रहे, समाज में अपराध व अपराधियों का बोलबाला न हो, विद्यालयों में बच्चो को समय पर शिक्षा व भोजन मिलता रहे, ब्लाको में मात्र राजनीति ही न हो विकास पर भी चर्चा हो, तहसीलो में भाई-भतीजा से ऊपर उठकर जनसामान्य का काम होता रहे, परिवहन विभाग द्वारा यात्रियों की सुख-सुविधा का ध्यान रखा जाये, वन विभाग द्वारा उपलब्ध भूभाग का 33 प्रतिशत पर हरियाली बनायी रखी जाये, वन जन्तुओ का अवैध रूप से शिकार न किया जाये लकडी माफियाओ से संाठ गंाठ कर हरे फल दार पेडों की कटान न कराई जाये, खाद्य रसद विभाग द्वारा सरकार द्वारा सरकारी राशन का वितरण भली प्रकार किया जाता रहे, मुनाफा खोरो, जमाखोरो, मिलावटी व नकली सामान बेचने वाले लोगो के खिलाफ कार्यवाही होती रहे, शिक्षण संस्थाओं में अध्यापक प्रबन्धतन्त्र व प्रधानाचार्य के बीच राजनीति तक ही सीमित न रहे बल्कि शैक्षणिक कलैन्डर के अनुरूप विद्यार्थियों को पढाते रहे, सरकारी विभागो में भ्रष्टाचार व्याप्त न हा,े जिले की औद्योगिक इकाईयां भरपूर उत्पादन करती रहे तो प्रदेश मुखिया को इस प्रकार दौरे क्यो करने पडें। बात बिल्कुल साफ है कि सरकारी पदों पर बैठे जिम्मेदार लोग जहॉ अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनहीन होते है वही सत्तारूढ दल के जनता द्वारा चुने गये नुमाइन्दे भी इन व्यवस्थाओ के प्रति अपनी जवाब देही नही समझते। क्योकि व्यवस्था तो तभी दुरूस्त रहेगी जब देख रेख अपनी ऑखो की जाये। लेकिन विडम्बना है कि एक ओर जहॉ सरकारी अधिकारी शाम होते ही लखनऊ स्थित अपने द्यरो की ओर कूच कर जाते है। वहीं निर्वाचित प्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र में निवास करने की जगह राजधानी में ही निवास करने को वरीयता देते है। क्योकि क्षेत्र की समस्याओ को झेलने के लिए तो जनता है ही।
गौरतलब है कि आखिर मुख्यमंत्री दौरे की तारीख आते ही प्रशासनिक अमला क्यो सक्रिय होता है। क्या जो विकास कार्य अब कराये जा रहे है इनको पहले नही कराया जा सकता था। हर विकास कार्य के लिए धन का आवटन तो किया जाता है। साथ ही साथ कराये गये विकास कार्यो की निरीक्षण रिपोर्ट भी यही अधिकारी ही तो देते है। इस समय समस्याग्रस्त पीड़ित दरिद्रनारायण की सुनने वाला कोई नही है। क्योकि सारे अधिकारी सुबह होते ही विभिन्न स्थानों को कूच कर जाते है। तथा देर रात वापस आ रहे है। चारो ओर सफाई का कार्य जा रहा है। चाहे सरकारी दफतर हो अथवा नगर के मुख्यमार्ग या फिर मलिन बस्ती ही क्यो न हो। जो कार्य इस समय कराये जा रहे है। ये सारे कार्य तो रूटीन में ही कराये जाने चाहिए। एक दिन के लिए इतनी सारी तैयारी की जाये फिर आराम तलबी में मशगूल हो जाने से तो आमजन को राहत नही मिलने वाली है। जन सामान्य से जुडे साधारण से मामलों में भी प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता ही दिखती है। चाहे काशीराम आवास योजना हो या फिर महामाया योजना हो सारी योजनाएॅ जिस वर्ग के लिए बनायी गयी है। उस वर्ग को इनका लाभ मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री के पास इतना समय कहा कि हर व्यक्ति के पास पहॅुचकर दुःख-दर्द जान सके। फिर भी वर्तमान प्रदेश की मुखिया जिला-जिला जा कर प्रदेश वासियों की समस्याओ को जानने की जो कोशिश कर रही है। निश्चित रूप से चन्द्र गुप्त मौर्य व अकबर द ग्रेट के द्वारा की गयी जनसेवा की पुनरावृत्ति कर आम आदमी को बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय को कार्य रूप दे रही है। वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग, पेन्शन सहित विवाह अनुदान समय पर लाभार्थी को यदि मिलता रहे, अस्पतालो में रोगियों की सुचारू रूप से इलाज होता रहे, पुलिस कानून व्यवस्था बनाये रखने को सक्रिय रहे, समाज में अपराध व अपराधियों का बोलबाला न हो, विद्यालयों में बच्चो को समय पर शिक्षा व भोजन मिलता रहे, ब्लाको में मात्र राजनीति ही न हो विकास पर भी चर्चा हो, तहसीलो में भाई-भतीजा से ऊपर उठकर जनसामान्य का काम होता रहे, परिवहन विभाग द्वारा यात्रियों की सुख-सुविधा का ध्यान रखा जाये, वन विभाग द्वारा उपलब्ध भूभाग का 33 प्रतिशत पर हरियाली बनायी रखी जाये, वन जन्तुओ का अवैध रूप से शिकार न किया जाये लकडी माफियाओ से संाठ गंाठ कर हरे फल दार पेडों की कटान न कराई जाये, खाद्य रसद विभाग द्वारा सरकार द्वारा सरकारी राशन का वितरण भली प्रकार किया जाता रहे, मुनाफा खोरो, जमाखोरो, मिलावटी व नकली सामान बेचने वाले लोगो के खिलाफ कार्यवाही होती रहे, शिक्षण संस्थाओं में अध्यापक प्रबन्धतन्त्र व प्रधानाचार्य के बीच राजनीति तक ही सीमित न रहे बल्कि शैक्षणिक कलैन्डर के अनुरूप विद्यार्थियों को पढाते रहे, सरकारी विभागो में भ्रष्टाचार व्याप्त न हा,े जिले की औद्योगिक इकाईयां भरपूर उत्पादन करती रहे तो प्रदेश मुखिया को इस प्रकार दौरे क्यो करने पडें। बात बिल्कुल साफ है कि सरकारी पदों पर बैठे जिम्मेदार लोग जहॉ अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनहीन होते है वही सत्तारूढ दल के जनता द्वारा चुने गये नुमाइन्दे भी इन व्यवस्थाओ के प्रति अपनी जवाब देही नही समझते। क्योकि व्यवस्था तो तभी दुरूस्त रहेगी जब देख रेख अपनी ऑखो की जाये। लेकिन विडम्बना है कि एक ओर जहॉ सरकारी अधिकारी शाम होते ही लखनऊ स्थित अपने द्यरो की ओर कूच कर जाते है। वहीं निर्वाचित प्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र में निवास करने की जगह राजधानी में ही निवास करने को वरीयता देते है। क्योकि क्षेत्र की समस्याओ को झेलने के लिए तो जनता है ही।
बाबू बेनी प्रसाद- बाराबंकी जनपद का विकास
Asutosh kumar Srivastava बाराबंकी:- देश के स्वतन्त्रता संग्राम से लेकर आजतक जनपद को गौरव दिलाने वालो में जहा रफी अहमद किदवाई का नाम लिया जाता है वही जनपद को विकास की राह पर ले जाने वालो में मात्र एक ही धुृवतारा है जिसे हम सब बाबू बेनी प्रसाद के नाम से जानते है।
गौरतलब है कि जनपद की परिधि में अनेक नेता आये और अपनी राजनैतिक रोटी सेक कर चलते बने। लेकिन बाबू बेनी प्रसाद का सारा अस्तित्व जनपद के चहुॅमुखी विकास में ही परिलक्षित होता है। मुंह से खरे व दिल के भले इस नेता ने अबतक आधा दर्जन से भी अधिक बार विधान सभा व पांच बार लगातार लोकसभा का चुनाव जीत कर अपने शानदार राजनैतिक कौशल का परिचय दिया है। वर्ष 2007 के विधान सभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी को छोड़कर तुरन्त समाजवादी क्रन्तिदल के गठन के पश्चात हुए चुनाव में बेनी बाबू के हाथ निराशा तो जरूर लगी लेकिन उनके समाजवादी पार्टी छोड़ देने के कारण चुनाव में इसका सीधा लाभ बसपा को मिला तथा बाबू जी के समय आठो विधान सभा सीटो पर परचम लहराने वाली सपा को मात्र दो सीटो से ही सब्र करना पडा। खराब स्वास्थ्य के चलते एक बार विरोधियों को यह कहने का मौका जरूर मिला कि बाबू जी की राजनैतिक पारी अब समाप्त होने को है। लेकिन वर्ष 2009 में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में काग्रेस पार्टी के टिकेट पर गोण्डा संसदीय क्षेत्र से शानदार विजय हासिल कर बाबू जीने अपने विरोधियों को करारा जवाब दिया। इस लोकसभा चुनाव में बाराबंकी लोकसभा सीट से 25 साल बाद बाबू जी ने काग्रेस प्रत्याशी पी0एल0पुनिया को रिकार्ड मतो से विजय बनाकर लोकसभा भेजा यह बात किसी से छिपी नही है। लेकिन राजनीति के क्षेत्र में एक कहावत प्रचलित है कि जिसको अगुली पकड कर चलना सिखाओ वही तुमको पीछे करने की कोशिश करता है। बाबू जी के जन्मदिन के दो साल पूर्व पर नजर डाले तो एक माला के अन्दर बाबू जी व पुनिया एक साथ नजर आते है। लेकिन आज स्थितयां ठीक विपरीत है। एक ही राजनैतिक दल मे होने के बावजूद दोनो लोग एक दूसरे को फूटी ऑख नही सुहाते। वर्तमान समय मे दोनो ही सांसदो को मनमोहन सरकार मे महत्वपूर्ण पद मिले हुए है। लेकिन दोनो लोगो में पार्टी के लिए कौन लाभदायक सिद्ध होगा यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। लेकिन एक बात साफ तौर से कही जा सकती है कि चाहे कोई जितना भी क्यो न बन ले नेता तो बेनी बाबू ही हैं। जब-जब बाबू जी पावर मे होते है तबतब उसका सीधा लाभ जनपद को मिला है चाहे वो वर्ष 1989 से 1991 व 1993 से 1995 में लोक निर्माण मंत्रिपद हो अथवा वर्ष 1996 में देवगौडा सरकार मेे केन्द्रीय दूर सचार मंत्री का पद हो। दोनो पदो पर रहते हुए बाबू जीने जनपद में विकास की गंगा बहाने में कोई कसर नही छोडी। जब वह प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री थे तो जनपद के हर गांव के गली -कूंचो तक सड़को का जाल बिछाने का कार्य किया। और जब वह केन्द्रीय संचार मंत्री बने तो जनपद स्तर से लेकर गांजरी क्षेत्र हेतमापुर तक संचार भवन बनवाकर टेलीफोन लाइन बिछवाने का कार्य किया। इतना ही नही संचार मंत्री रहते हुए ही द्वापरयुगीन पारिजात वृक्ष पर तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भण्डारी द्वारा डाकटिकट जारी करवा कर जनपद को सारे देश में पहचान दिलाने का काम किया। वर्तमान पारी में इस्पात मंत्री बनते ही जगदीश पुर की स्टील फैक्ट्री को पुनः चालू करने व बाराबंकी तथा गोण्डा में इकाईया स्थापित करने की घोषणा से ही लोगो के मन में एक नयी आशा की किरन जगी है। इनके राजनैतिक कौशल का लाभ मिशन 2012 को कामयाब करने में काग्रेस पार्टी को मिलना अवश्यंभावी है।
गौरतलब है कि जनपद की परिधि में अनेक नेता आये और अपनी राजनैतिक रोटी सेक कर चलते बने। लेकिन बाबू बेनी प्रसाद का सारा अस्तित्व जनपद के चहुॅमुखी विकास में ही परिलक्षित होता है। मुंह से खरे व दिल के भले इस नेता ने अबतक आधा दर्जन से भी अधिक बार विधान सभा व पांच बार लगातार लोकसभा का चुनाव जीत कर अपने शानदार राजनैतिक कौशल का परिचय दिया है। वर्ष 2007 के विधान सभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी को छोड़कर तुरन्त समाजवादी क्रन्तिदल के गठन के पश्चात हुए चुनाव में बेनी बाबू के हाथ निराशा तो जरूर लगी लेकिन उनके समाजवादी पार्टी छोड़ देने के कारण चुनाव में इसका सीधा लाभ बसपा को मिला तथा बाबू जी के समय आठो विधान सभा सीटो पर परचम लहराने वाली सपा को मात्र दो सीटो से ही सब्र करना पडा। खराब स्वास्थ्य के चलते एक बार विरोधियों को यह कहने का मौका जरूर मिला कि बाबू जी की राजनैतिक पारी अब समाप्त होने को है। लेकिन वर्ष 2009 में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में काग्रेस पार्टी के टिकेट पर गोण्डा संसदीय क्षेत्र से शानदार विजय हासिल कर बाबू जीने अपने विरोधियों को करारा जवाब दिया। इस लोकसभा चुनाव में बाराबंकी लोकसभा सीट से 25 साल बाद बाबू जी ने काग्रेस प्रत्याशी पी0एल0पुनिया को रिकार्ड मतो से विजय बनाकर लोकसभा भेजा यह बात किसी से छिपी नही है। लेकिन राजनीति के क्षेत्र में एक कहावत प्रचलित है कि जिसको अगुली पकड कर चलना सिखाओ वही तुमको पीछे करने की कोशिश करता है। बाबू जी के जन्मदिन के दो साल पूर्व पर नजर डाले तो एक माला के अन्दर बाबू जी व पुनिया एक साथ नजर आते है। लेकिन आज स्थितयां ठीक विपरीत है। एक ही राजनैतिक दल मे होने के बावजूद दोनो लोग एक दूसरे को फूटी ऑख नही सुहाते। वर्तमान समय मे दोनो ही सांसदो को मनमोहन सरकार मे महत्वपूर्ण पद मिले हुए है। लेकिन दोनो लोगो में पार्टी के लिए कौन लाभदायक सिद्ध होगा यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। लेकिन एक बात साफ तौर से कही जा सकती है कि चाहे कोई जितना भी क्यो न बन ले नेता तो बेनी बाबू ही हैं। जब-जब बाबू जी पावर मे होते है तबतब उसका सीधा लाभ जनपद को मिला है चाहे वो वर्ष 1989 से 1991 व 1993 से 1995 में लोक निर्माण मंत्रिपद हो अथवा वर्ष 1996 में देवगौडा सरकार मेे केन्द्रीय दूर सचार मंत्री का पद हो। दोनो पदो पर रहते हुए बाबू जीने जनपद में विकास की गंगा बहाने में कोई कसर नही छोडी। जब वह प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री थे तो जनपद के हर गांव के गली -कूंचो तक सड़को का जाल बिछाने का कार्य किया। और जब वह केन्द्रीय संचार मंत्री बने तो जनपद स्तर से लेकर गांजरी क्षेत्र हेतमापुर तक संचार भवन बनवाकर टेलीफोन लाइन बिछवाने का कार्य किया। इतना ही नही संचार मंत्री रहते हुए ही द्वापरयुगीन पारिजात वृक्ष पर तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भण्डारी द्वारा डाकटिकट जारी करवा कर जनपद को सारे देश में पहचान दिलाने का काम किया। वर्तमान पारी में इस्पात मंत्री बनते ही जगदीश पुर की स्टील फैक्ट्री को पुनः चालू करने व बाराबंकी तथा गोण्डा में इकाईया स्थापित करने की घोषणा से ही लोगो के मन में एक नयी आशा की किरन जगी है। इनके राजनैतिक कौशल का लाभ मिशन 2012 को कामयाब करने में काग्रेस पार्टी को मिलना अवश्यंभावी है।
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