Wednesday, August 10, 2011

क्रान्तिकारियो के बलिदान से मिली आजादी --- अतुल अंजान


अरविन्द विद्रोही ९ अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर विभ्भिन आयोजनों में शिरकत करने का निमंत्रण मिला | गाँधी जयंती समारोह ट्रस्ट - बाराबंकी के द्वारा बाराबंकी जनपद के मुख्यालय पर स्थित गाँधी भवन में आयोजित संगोष्ठी में अतुल कुमार अंजान के मुख्य वक्ता के तौर पर आने की पुष्टि दूरभाष से करने के बाद मैं उनको अरसे बाद प्रत्यक्ष रूप से सुनने के व्यग्तिगत लोभ से खुद को रूक ना सका | लखनऊ विश्व विद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष के दायित्व निर्वाहन से लेकर कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव पड़ के दायित्व निवाहन बखूबी करने वाले , अपनी अलग छाप छोड़ने वाले अतुल कुमार अंजान की वक्तव्य शैली का जवाब नहीं | विषय पर गहरी पकड़ और विचारो के प्रस्तुति-करण का अंदाज़ एक ज्ञान कोष की तरह युवा वर्ग के सामने मौजूद है | विचारो को ह्रदय से निकल कर मुखारविंद से प्रकट करने वाले अतुल कुमार अंजान जितने अच्छे वक्ता है उतने ही अच्छे श्रोता भी |

Thursday, August 4, 2011

समाजवादी आन्दोलन व चिंतन की पाठशाला है छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र


समाजवादी आन्दोलन व चिंतन की पाठशाला है छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र अरविन्द विद्रोही जनेश्वर मिश्र समाजवादी आन्दोलन के एक योद्धा व विचारक के रूप में सदैव याद किये जायेंगे | ५ अगस्त ,१९३३ को श्रीमती बासमती एवं श्री रंजीत मिश्र के पुत्र रूप में बलिया जनपद के शुभ नाथहि गाँव में जन्मे जनेश्वर मिश्र पर तत्कालीन ब्रितानिया हुकूमत के खिलाफ चल रहे जन संघर्ष का गहरा असर पदा | हिंदुस्तान प्रजातान्त्रिक समाजवादी संघ ने समाजवाद की अवधारणा को भारत भूमि के युवा मष्तिष्क में जगह बना दी थी | शचीन्द्र नाथ सान्याल , चन्द्र शेखर आजाद , भगत सिंह , राज गुरु , सुख देव सहित तमाम क्रांति कारियो के आजादी के लिए संघर्ष ,समाज के प्रति सोच व बलिदान ने भारत के जन मानस को आक्रोशित कर रखा था | इस क्रांति की बेला में ब्रितानिया हुकूमत के अन्याय के खिलाफ चल रहे संघर्ष के दौर में जन्म लेने वाले जनेश्वर मिश्र के व्यक्तित्व में अन्याय , अत्याचार , शोषण , छुआ -छुत , भेद-भाव व पूंजीवाद के खिलाफ संघर्ष कूट कूट के भरा था | लोक नायक जय प्रकाश नारायण , डॉ राम मनोहर लोहिया के व्यक्तित्व का गहरा प्रभाव विद्यार्थी जीवन में जनेश्वर मिश्र पर पड़ा | जय प्रकाश नारायण के सर्वोदय आन्दोलन में चले जाने के बाद जब लोहिया ने समाजवादी आन्दोलन व संघर्ष की कमान संभाली तब से जनेश्वर मिश्र पूरी तरह से डॉ लोहिया के ही साथ हो लिए | डॉ लोहिया के निजी सचिव की जिम्मेदारी के साथ साथ जनेश्वर मिश्र ने १९६१ में समाजवादी युव जन सभा के महामंत्री पड़ की जिम्मेदारी भी संभाली | १९६२ में फूल पुर लोक सभा के चुनाव में जवाहर लाल नेहरु के मुकाबिल डॉ लोहिया के चुनाव संचालन की जिम्मेदारी जनेश्वर मिश्र ने ही संभाली थी | इस चुनाव में जनेश्वर मिश्र के रण नीतिक कौसल के कारण डॉ लोहिया ने ४५ बुथो पर नेहरु को परास्त किया यद्यपि यह चुनाव डॉ लोहिया हार गये | इस चुनाव के कारण १९६३ में डिफेंस ऑफ़ इंडिया एक्ट के तहत जनेश्वर मिश्र को नज़र बंद किया गया | डॉ राम मनोहर लोहिया के अनुयायी के रूप में जनेश्वर मिश्र इतने मशहूर हो गये कि १९६९ में फूल पुर लोक सभा के उप चुनाव में फूल पुर के लोगो ने नारा दिया -- लोहिया को तो जीता ना सके , छोटे लोहिया को जिताएंगे | इस प्रकार जनेश्वर मिश्र को छोटे लोहिया की उपाधि से विभूषित करने का श्रेय फूल पुर की सम्मानित जनता को जाता है | यह वह दौर था जब समाजवादी युव जन सभा के नेता के तौर पर जनेश्वर मिश्र का दबदबा कायम हो चुका था | उत्तर भारत के युवाओ के आकर्षण के केंद्र बिंदु बन चुके जनेश्वर मिश्र के संघर्ष व विचारो के प्रति समर्पण के कारण ही समाजवादी पुरोधा डॉ राम मनोहर लोहिया ने कहा था ,-- समता , समानता , अहिंसा , लोक तंत्र और समाज वाद यह पांचो भारत की समग्र राजनीति के अंतिम लक्ष्य है | इन्हें जनेश्वर जैसे वैचारिक प्रतिबद्धता वाले संकल्प के धनी युवा ही सत्याग्रह के रास्ते पर चल कर प्राप्त कर सकते है | जनेश्वर में संगठन की अकूत छमता है | वह विश्वसनिये और जुझारू है , समाजवाद की लड़ाई के लिए ऐसे नौजवानो को आगे आना जरुरी है | उसके मन में ताकत के बल पर शोषक बने लोगो के प्रति क्रोध और गरीबो , पीडितो , कमजोरो के लिए अथाह करुना है | उसमे प्रतिभा है और दबे-कुचले वर्ग की बेहतरी के लिए बड़ा काम करने की सदिच्छा भी , ये दोनों बाते विरले लोगो में मिलती है | छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र ने डॉ लोहिया के एक एक शब्द को , अपने ऊपर किये गये हर विश्वास को ता ज़िदगी बखूबी जिया व पूरा किया | समाजवादी आन्दोलन के योद्धा जनेश्वर मिश्र का महती योगदान वैचारिक दृढ़ता के रूप में हमारे सामने है | डॉ लोहिया के विचारो को आत्मसात किये छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र ने तमाम युवाओ को समाजवादी संघर्ष व विचार से जोड़ा तथा राजनीतिक सक्रियता प्रदान की | डॉ लोहिया के विचारो के लिए संघर्ष करने वाले लोक बंधु राज नारायण को भी जनेश्वर मिश्र अपना नेता मानते थे | प्रखर वक्ता जनेश्वर मिश्र उर्फ़ छोटे लोहिया को समाजवाद की चलती फिरती पाठ शाला बताते हुये समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि आज से लगभग ४३ वर्ष पूर्व मैं जनेश्वर मिश्र जी के संपर्क में आया था तब से जब तक वो सशरीर रहे , एक शिक्षक व अभिभावक की तरह हमारा मार्ग दर्शन करते रहे | उनका दिल्ली का राजेंद्र प्रसाद मार्ग स्थित ८ न ० का बंगला लोहिया के लोग समाजवादी नेताओ, कार्य -कर्ताओ का केंद्र बिंदु था | स्मृतियो में खोते हुये राजेंद्र चौधरी ने बताया की छोटे लोहिया का भवन मार्ग दर्शन प्राप्त करने का , आशीर्वाद प्राप्ति का , अपनी बात बेबाकी से कहने का , मदद प्राप्ति का और भर पुर भोजन करने का स्थल था | समाजवादी विचारो के संगम छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र ने ११ सितेम्बर, २००५ को कहा था ,-- समाजवाद महज़ सियासी लफ्ज़ नहीं है, इसे किसी भी समाज का संपूर्ण आधार माना गया है | उप भोक्ता वादी संस्कृति युवा वर्ग को वैचारिक रूप से पतन की ओर ले जाती है | इससे निकट भविष्य में ऐसा संकट पैदा होगा जिससे पार पाना आसान नहीं होगा |... आज के हालात में छोटे लोहिया की यह चिंता वैश्विक चिंता बन चुकी है | २८ अगस्त, २००९ को आगरा के लोहिया नगर में छोटे लोहिया ने कहा था , --- समाजवादियो को देश की तकदीर बदलनी है तो भारी बलिदानों के लिए तैयार रहना होगा | समाजवादियो को राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस चलानी चाहिए | सिर्फ नेताओ के भाषण सुन लेने भर से सामाजिक - आर्थिक परिवर्तन की राजनीति नहीं गरमाएगी | जनता भूख की मार सहते- सहते सो गयी है | जनता को जगाने की जरुरत है | यह काम समाजवादियो को ही करना है | भेदभाव के बारे में सोचोगे तो दिमाग गरम हो जायेगा , तब गरीब की लड़ाई लड़ सकोगे |..... छोटे लोहिया स्वयं विभिन्न जन संघर्षो में लगभग ११ साल जेल में रहे है | कर्त्तव्य के प्रति लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की तरह दृढ़ता दिखाते हुये राम कोला कांड में नैनी जेल में हिरासत में रखे गये छोटे लोहिया ने पत्नी की मृत्यु पर राज्य पल द्वारा जमानत पर रिहाई करने की बात कहने पर साफ़ मना कर दिया था | उन्होंने कहा कि सभी आन्दोलन कारियो कि रिहाई होने पर ही वे जेल से निकलेंगे और अंतत यही हुआ | जनेश्वर मिश्र कार्यकर्ताओ और साथियो को सम्मान देने में तनिक भी कंजूसी नहीं करते थे | छोटे लोहिया का स्पष्ट कहना था कि मुद्दे जन संपर्क व संघर्ष से बनते है | वे चिंतित रहते थे कि अब समाजवादी जन संघर्ष से अलग हो रहे है तथा मेरी मृत्यु के बाद मेरे भवन में रह रहे कार्यकर्ताओ का क्या होगा ? छोटे लोहिया आज हमारे मध्य नहीं है, उनके विचार व संघर्ष समाजवादी विचारो पर चिंतन करने वालो, राजनीति करने वालो के लिए सदैव प्रेरक रहेंगे | आज समाजवादी विचारो के सभी लोगो को , डॉ लोहिया के लोगो को गरीब- गुरबा की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरुरत है | राजनीतिक पटल पर १९९२ में मुलायम सिंह यादव द्वारा लखनऊ क ए हज़रत महल पार्क में डॉ लोहिया के विचारो की पार्टी का गठन किये जाने के पीछे छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र का संपूर्ण निर्देश व आशीर्वाद था | डॉ राम मनोहर लोहिया के विचारो के वाहक छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र आजीवन समाजवादी पार्टी के और मुलायम सिंह यादव के मार्गदर्शक रहे | मुलायम सिंह यादव ने उनके देहावसान के बाद कहा था ,---- डॉ लोहिया और राजनारायण जी के बताये आदर्शो को जनेश्वर जी आगे बढ़ाने में लगे हुये थे | लोहिया और राजनारायण के विचार , उन्ही की सादगी , उन्ही का संघर्ष और उन्ही के बताये रास्ते पर जनेश्वर जी चल रहे थे | जो गरीब है , पिछड़े है , मजदूर है , किसान है , उनके प्रति जो ना इंसाफी हो रही है, गरीबी - अमीरी की खाई बढ़ रही है , उसे पड़ने का संकल्प जनेश्वर जी ने लिया था | अब जनेश्वर जी नहीं है | पहले डॉ राम मनोहर लोहिया जी और राज नारायण जी और फिर जनेश्वर जी हम लोगो को संभाले हुये थे | दिशा निर्देश देते थे , राय देते थे | उनका अभाव बहुत खलेगा | जनेश्वर जी के सपनो , विचारो और उनके संकल्पों को ले कर हम लोग आगे चलेंगे | १९ जनवरी,२०१० को समाजवादी पार्टी के इलाहाबाद में आयोजित धरने में जनेश्वर मिश्र छोटे लोहिया ने आशा भरी आवाज़ में कहा था ---- शायद मेरी मौत के बाद समाजवादी आन्दोलन और तेज हो जाये | २२ जनवरी, २०१० को ही छोटे लोहिया नहीं रहे | छोटे लोहिया के देहावसान के बाद उनकी अंतिम इच्छा कि समाजवादी आन्दोलन तेज हो को पूरा करने कि जिम्मेदारी समाजवादी कार्यकर्ताओ की है | समाजवादी आन्दोलन के बूते समाजवादी राज्य की स्थापना जनता के मुद्दों पर संघर्ष खड़ा करके , जन विश्वास अर्जित करके ही किया जा सकता है | जोड़-तोड़ , दल -बदल, सिधान्त हीन गठ बंधन का सहारा लेने की अपेक्षा समर्पित संघर्ष के साथियो को राजनीति में अवसर दिया जाना वक्त की मांग है और समाजवादी पुरोधाओ भगत सिंह, आचार्य नरेन्द्र देव , लोक नायक जय प्रकाश नारायण , डॉ राम मनोहर लोहिया , राज नारायण , राम सेवक यादव , मधु लिमये , जनेश्वर मिश्र के संकल्पों , सपनो के क्रियान्वयन की दिशा में उथया गया सकारात्मक कदम रूपी सच्ची श्रधांजलि और समर्पण है |

Wednesday, August 3, 2011

आस्था या अन्धविश्वास












यह सभी चित्र उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निकटवर्ती जनपद बाराबंकी के मुख्यालय से लगभग १० किलोमीटर दुरी पर गोंडा मार्ग पर फ़तेह सराएँ , सहावपुर की है | यहाँ एक युवक पर नागिन का साया आने की चर्चा से उसको देखने के लिए पिछले १५ दिनों से तमाम लोग आ रहे है, हजारो का चढ़ाव रोज चढ़ रहा है | प्रशासन बेखबर, बाढ़ राहत में व्यस्त और पुलिस को इसकी तहकीकात का मौका नहीं,

Friday, July 22, 2011

समाजवादी संकल्प-सोच - कल , आज और कल

अरविन्द विद्रोही डॉ राम मनोहर लोहिया वंचितों की आवाज के रूप में सदैव स्मरण किये जाते रहेंगे तथा उनके विचार व संघर्ष हमेशा लोगो को राह दिखाते रहेंगे | क्रान्तिकारियो के बौद्धिक नेता भगत सिंह को अपना नेता मानने वाले डॉ लोहिया ने अपना सम्पुर्न्य जीवन सत्ता के बेलगाम शोषक चरित्र के खिलाफ लड़ने व सत्ताधीशों की नींद हराम करने में बिताया | चाहे वो गुलामी की बेडिओं में भारत माता को जकड़े ब्रितानिया हुकूमत की गोरो की सरकार रही हो या १९४७ के बाद आजाद भारत की अंग्रेज व अंग्रेजी परस्त गुलाम मानसिकता में जकड़ी कांग्रेस की जवाहर लाल नेहरु की सरकार रही हो , डॉ लोहिया ने मन से , वचन से और कर्म से इनको कटघरे में खड़ा किया | भारत की राजनीति में समाजवाद की अवधारणा युवा वर्ग और क्रान्तिकारियो को निरंतर प्रभावित करती रही है | क्रान्तिकारियो के संगठन हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ की तरफ से १९२९ में लाहौर कांग्रेस में घोषणा पत्र का वितरण किया गया | यह घोषणा पत्र भगत सिंह , सुखदेव व अन्य साथियो से विचार- विमर्श के बाद भगवती चरण वोहरा ने बनाया था , इसका वितरण दुर्गा भाभी के नेतृत्व में क्रान्तिकारियो ने किया था | इस घोषणा पत्र में लिखा गया ---- भारत साम्राज्यवाद के जुवे के नीचे पिस रहा है | इसमें करोडो लोग आज अज्ञानता और गरीबी के शिकार हो रहे है | भारत की बहुत बड़ी जनसँख्या जो मजदूरों और किसानों की है , उनको विदेशी दबाव एवं आर्थिक लूट ने पस्त कर दिया है | भारत के मेहनत कश वर्ग की हालत आज बहुत गंभीर है | उसके सामने दोहरा खतरा है , विदेशी पूंजीवाद का एक तरफ से और भारतीय पूंजीवाद के धोखे भरे हमले का दूसरी तरफ से | भारतीय पूंजीवाद विदेशी पूंजी के साथ हर रोज बहुत से गठजोड़ कर रहा है | कुछ राजनीति नेताओ का डोमिनियन यानि की प्रभुता सम्पन्य का दर्ज़ा स्वीकार करना भी हवा के इसी रुख को स्पष्ट करता है | ........भारतीय पूंजीपति भारतीय लोगो को धोखा देकर विदेशी पूंजीपतियो से विश्वाश घात की कीमत के रूप में सरकार से कुछ हिस्सा प्राप्त करना चाहता है | इसी कारण से मेहनत कश की तमाम आशाएं अब सिर्फ समाजवाद पर टिकी है और सिर्फ यही पूर्ण स्वराज्य और सब भेद-भाव ख़त्म करने में सहायक साबित हो सकता है | देश का भविष्य नौजवानों के सहारे है | वही धरती के बेटे है | उनकी दुःख सहने की तत्परता , उनकी बेख़ौफ़ बहादुरी और लहराती क़ुरबानी दर्शाती है कि भारत का भविष्य उनके हाथ में सुरक्षित है | एक अनुभूति-मय घडी में देश बंधु दास ने कहा था , --नौजवान भारत माता कि शान एवँ आशाएं है | आन्दोलन के पीछे इनकी प्रेरणा है , उनकी कुरबानिया है और उनकी जीत है | आजादी की राह पर मशाले लेकर चलने वाले ये ही है , मुक्ति की राह पर ये तीर्थ यात्री है | आज इस घोषणा पत्र के जारी होने के लगभग ८२ वर्षो के अन्तराल और ब्रितानिया हुकूमत से आजादी के ६३ वर्षों बाद भी सरकारों का चरित्र लेश मात्र भी नहीं बदला है | आजाद भारत में डॉ लोहिया ने एक सत्याग्रही के रूप में मारेंगे नहीं पर मानेंगे नहीं का उदघोष किया | यह नारा, यह सिधान्त भारत की ब्रितानिया दासता से मुक्ति के बाद पुरे देश में जन अधिकारों के लिए संघर्ष का सत्ता के अत्याचार-शोषण-अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने का , सत्ता के कानो में जनता की आवाज पहुचने का एक निर्भीक दर्शन बन गया है | अन्याय करना और अन्याय सहना दोनों काम को डॉ लोहिया अनैतिक मानते थे | दफा १४४ को भारत के संविधान में प्रदत्त अधिकारों के खिलाफ मानने वाले डॉ लोहिया ने दफा १४४ का विरोध करते हुए तकरीबन साठ बार जेल यात्रा की | डॉ लोहिया की नज़र में महात्मा गाँधी की सबसे बड़ी देन यह है कि उन्होंने सत्याग्रह और सिविल नाफ़रमानी के सिधांतो को प्रतिपादित करके जनता को निरंकुश-गैर जिम्मेदार-भ्रष्ट शासन सत्ता से संघर्ष का एक अमोघ अस्त्र दिया | डॉ लोहिया सिविल नाफ़रमानी को लोकतंत्र का कवच मानते थे | डॉ लोहिया के द्वारा आजाद भारत में सरकार कि गलत नीतिओ के खिलाफ सिविल नाफ़रमानी और सत्याग्रह चलाये जाने पर जवाहर लाल नेहरु ने संसद में कहा था कि हमारे मित्र डॉ राम मनोहर लोहिया आजाद हिंदुस्तान में भी सत्याग्रह करना चाहते है जिसका कि कोई अर्थ और औचित्य नहीं है| आज भी कांग्रेस की सरकार लोकपाल मामले और काला धन वापसी मामले पर आन्दोलन कर रहे लोगो और संगठनो पर इसी प्रकार की टिप्पणिया करके अपना शोषक , जन विरोधी चरित्र प्रदर्शित कर रही है | डॉ लोहिया समाजवादी आन्दोलन के माध्यम से एक ईसर सत्याग्रहियो का संगठन तैयार करना चाहते थे जो सत्ता का मोह त्याग कर पुरे देश में निरंतर अन्याय के खिलाफ सत्याग्रह करता रहे, आज डॉ लोहिया का यह सपना विभिन्न संगठनो के रूप में साकार हो चुका है | डॉ राम मनोहर् लोहिया ने भगत सिंह सरीखी क्रांतिवादिता, गाँधी की तरह का सत्याग्रही चरित्र व स्व अर्जित मानसिक दृढ़ता के बलबूते समाजवाद व भारत की राजनीति को एक नई दिशा दी | आज डॉ लोहिया के लोगो में मुलायम सिंह यादव व उनकी समाजवादी पार्टी राजनीतिक फलक पर डॉ लोहिया के विचारो और समाजवाद का प्रतिनिधत्व कर रही है | जार्ज फर्नान्डीज़ और ठाकुर रामेश्वर सिंह बीमार हालत में अपने जीवन के अंतिम पलों को जी रहे है | रघु ठाकुर जैसे धुर समाजवादी अपना अलग दल लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी संचालित कर रहे है | समाजवाद का नाम लेकर स्वार्थी राजनीति करने वाले कुछ लोग भ्रष्ट कांग्रेस की गोद में बैठ कर सत्ता सुख की मलाई काट कर कांग्रेस की दया- कृपा पर राजनीतिक जीवन यात्रा का आनंद ले रहे है | जिस कांग्रेस को और जिसकी नीतिओ को डॉ लोहिया देश- समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते थे , उसका महिमा गान करने वाला डॉ लोहिया का अनुयायी किस प्रकार से हो सकता है ? आज उत्तर प्रदेश समेत समूचा भारत उन्ही तमाम समस्याओ व दुश्वारियो से त्रस्त है जिन पर क्रान्तिकारियो ने अपनी चिंता प्रकट की थी , जिसके खिलाफ वो लड़े थे तथा भारत के आम जन के हितार्थ आजादी के लिए मौत तक का वरन स्वतः किया | आज क्रान्तिकारियो के वंशज भी जनता की पैदा को समझ कर सार्वजनिक - राजनीतिक जीवन में सक्रिय हो चुके है | एक बार पुनः देश में नूतन जंग ए आजादी का माहौल बनता दिख रहा है | आज भी वही लूट व अत्याचार भीषण रूप से जारी है जिसके खिलाफ डॉ लोहिया लड़ते हुए म़र गये तथा कह गये कि लोग मेरी बात सुनेंगे जरुर लेकिन मेरे मरने के बाद | आज विभिन्न संगठन भ्रस्टाचार व शोषण-अत्याचार के खिलाफ , जन अधिकारों कि बहाली के लिए सत्याग्रह का मार्ग अपना रहे है | जन आन्दोलनों ने सरकारों को चेतावनी दे दी है | आज लोक नायक जय प्रकाश नारायण के हुँकार सिघासन खाली करो कि जनता आती है, जनता कि हुँकार बन चुकी है | जनता भ्रष्ट व नाकारा सरकारों से त्रस्त है | समाजवादी सोच , संघर्ष के विस्तार हेतु लोक कल्याण के लिए एक बार पुनः कांग्रेस के खिलाफ डॉ लोहिया - जय प्रकाश के मानने वालो , समाजवादी चिंतको , संगठनो को एक साथ जुटना होगा | डॉ लोहिया और लोक नायक जय प्रकाश समेत तमाम समाजवादी नेताओ की आत्मा समाजवादी राज्य व मूल्यों की स्थापना के लिए आज भी निहार रही है, यह मुझे प्रतीत होता है.....

Friday, July 8, 2011

उत्तर प्रदेश में संघर्ष की विरासत निभाते अखिलेश यादव


उत्तर प्रदेश में संघर्ष की विरासत निभाते अखिलेश यादव अरविन्द विद्रोही लोकतान्त्रिक मूल्यों की खुले आम अवहेलना करने पर आमादा उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार और केंद्र की कांग्रेस सरकार ने पूंजीवादी शोषक तंत्र के हितार्थ आम जनों को अनवरत धमकियाने और लतियाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है | उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती के नेतृत्व में बेलगाम नौकरशाही ने राजनीतिक कार्यकर्ताओ और अपनी मांगो पर आन्दोलन कर रहे तमाम संगठनो और लोगो पर पुलिस बालो का बेजा इस्तेमाल कर के मान मर्दन करना जारी रखा है | वही दूसरी तरफ सोनिया गाँधी की कठपुतली केंद्र की मनमोहन सरकार ने राम लीला मैदान में एकत्र सत्याग्रहियो पर रात्रि में बर्बर अत्याचार कर के अपना जन विरोधी पूंजीवादी शोषक चरित्र एक बार पुनः उजागर कर दिया | पुरे देश में विदेश से काला धन वापस लाने के लिए , कृषि भूमि के अधिग्रहण के विरोध में , लोकपाल विधेयक के गठन पर आम जन मानस चर्चा कर रहा है और उद्वेलित भी है | उत्तर प्रदेश में बसपा के शासन काल में लगातार हुई बलात्कार की घटनाओ की , हत्या की घटनाओ का सार्थक प्रतिकार करके दोषीओ को दण्डित करवाने की जगह कांग्रेस- भाजपा के द्वारा जबानी जमा खर्ज करके बसपा और मुख्यमंत्री मायावती को घेरने की खाना-पूरी की गयी है | किसानों की दुखती नस भूमि अधिग्रहण के मनमाने मामलो पर कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी नित नए प्रायोजित नौटंकी समारोहों का आयोजन करके स्वतः स्फूर्ति का अनुभव कर रहे है | आजादी के पश्चात् सर्वाधिक वर्षो तक निर्बाध शासन करने वाली कांग्रेस किसान हित विरोधी ब्रितानिया हुकूमत के द्वारा थोपे गये भूमि अधिग्रहण अधिनियम को ख़त्म नहीं कर सकी और आज केंद्र सरकारों के नाकारेपन का ही दुष्परिणाम है कि आज किसानों को अपनी माँ सरीखी कृषि भूमि के व परिवार के हितार्थ हथियार उठा कर जान लेनी व देनी पड़ रही है | काले धन के सवाल पर सर्वोच्च न्यायलय के द्वारा केंद्र सरकार को फटकार लगाना व निर्देश देने का क्या परिणाम निकलेगा यह भविष्य के गर्त में है | राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी ने भी शीर्ष स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के विषय में और उसके दुष्परिनामो पर तत्कालीन कांग्रेसी प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु को आगाह किया था | महात्मा गाँधी की सलाह व निर्देश की परवाह ना तो तब जवाहर लाल नेहरु ने की थी और ना अब कांग्रेस की सरकार करती है | समाजवादी विचारक डॉ राम मनोहर लोहिया भ्रस्टाचार निवारण के लिए स्थायी आयोग के गठन की वकालत करते थे | कृषि भूमि के अधिग्रहण के सख्त विरोधी डॉ लोहिया सरकारों के इस कृत्य को भारत की ग्राम्य व्यवस्था पर चोट मानते थे | विकास के अनियंत्रित और अनियोजित दौड़ में अन्न दाता और श्रमिक वर्ग को रौंदने का काम आजाद भारत की सरकारों ने बखूबी किया है | सरकारों के जनविरोधी कृत्यों का पुरजोर प्रतिकार समाजवादियो ने निरंतर किया है | गुलाम भारत में ब्रितानिया हुकूमत के जुल्मो से लड़ने वाले डॉ राम मनोहर लोहिया और लोक नायक जय प्रकाश सरीखे समाजवादियो ने आजाद भारत की जनविरोधी कांग्रेस सरकार को सड़क से लेकर संसद तक कटखरे में खड़ा किया | डॉ लोहिया और मधु लिमये द्वारा संसद में उठाये गये सवालों का समुचित जवाब देने में मंत्री ही नहीं प्रधान मंत्री भी नाकामयाब होते रहे है | इंदिरा गाँधी के तानाशाही - जनविरोधी रवैये के खिलाफ जब जय प्रकाश ने आन्दोलन की बागडोर संभाली तब भारत की तरुनाई ने आम जन के साथ मिल के कांग्रेस की भ्रष्ट व निक्कमी सरकारों को उखाड़ फैंका | निरंकुश व भ्रष्ट सरकारों के खिलाफ संघर्ष ही समाजवादियो की पूंजी है | समाजवादी संघर्ष की इस विरासत को डॉ लोहिया और जय प्रकाश के देहावसान के पश्चात् सजोने व विस्तार देने का काम मुलायम सिंह यादव ने बखूबी अंजाम दिया | समाजवादी कार्यकर्ताओ ,ग्रामीण जनता , छात्रों - युवाओ पर अपनी मज़बूत पकड़ की बदौलत मुलायम सिंह यादव धरती पुत्र के संबोधन से भी नवाजे गये है | गाँधी - लोहिया - जय प्रकाश के सिधांतो के अनुपालन में तनिक भी विचलित ना होने के कारण , तात्कालिक अन्याय का विरोध करने के कारण , सरकारों के भ्रष्ट रवैये के खिलाफ हल्ला बोलने के कारण मुलायम को जिद्दी भी माना गया | समाजवादी आन्दोलन में भटकाव व कमिया भी आई परन्तु जन संघर्ष की विरासत जो मुलायम सिंह ने अर्जित की उस पर वो निः संदेह खरे ही उतरे है | आज छोटे लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र हमारे बीच सशरीर नहीं है | डॉ राम मनोहर लोहिया के विचारो के आजीवन प्रचारक व समाजवादी आन्दोलन के प्रखर चिन्तक छोटे लोहिया - जनेश्वर मिश्र ने ही सर्व प्रथम अखिलेश यादव से कहा था कि तुमको राजनीति ही करनी है | जब अखिलेश यादव बोर्डिंग में रह कर पढाई कर रहे थे , तब अवकाश में एक बार लखनऊ आने पर मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश कि मुलाकात जनेश्वर मिश्र से करवाई | अखिलेश यादव के द्वारा जनेश्वर मिश्र का चरण स्पर्श करने पर जनेश्वर मिश्र ने आशीर्वाद स्वरुप जोर से पीठ पर हाथ मार कर कहा था कि युवाओ को सार्थक व सकारात्मक राजनीति करनी चाहिए और पढाई के बाद तुमको भी करनी पड़ेगी | पढाई पूरी करने के बाद अखिलेश यादव जब राजनीति में आये तो तमाम समाजवादी विचारको के सान्निध्य के कारण समाजवादी आन्दोलन के कारण और प्राथमिकतायें क्या हो यह समझने का भरपूर अवसर मिला | कन्नौज की लोकसभा सीट से १९९९ में प्रत्याशी के रूप में अखिलेश यादव का नामांकन करने पहुचे छोटे लोहिया ने पत्रकारों के परिवारवाद के सन्दर्भ मर प्रश्न का जवाब देते हुए कहा था - यह संघर्ष का परिवारवाद है सत्ता का नहीं | छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के इस प्रत्युतर का मान रखते हुए युवा अखिलेश यादव ने लोख्सभा चुनाव जीतने के पश्चात् क्रांति रथ निकल कर प्रदेश का भ्रमण कर संघर्ष की शुरुआत की | वर्त्तमान युवा पीढ़ी में विरलों को ही धुर - खांटी समाजवादियो का सान्निध्य व मार्गदर्शन रुपी आशीर्वाद मिला है | जनेश्वर मिश्र के शिष्य के रूप में डॉ लोहिया की आर्धिक नीतिओ , किसानों - मजदूरों , युवाओ , महिलाओ , आम जन से जुड़े मुद्दों को सड़क व संसद दोनों जगह उठाने में अखिलेश यादव किसी भी समकालीन युवा संसद से पीछे नहीं है | समाजवादी पार्टी के साधारण कार्यकर्ता , फिर युवा प्रकोष्ठों के प्रभारी तथा वर्त्तमान में उत्तर प्रदेश के संगठन के मुखिया की जिम्मेदारी निभा रहे अखिलेश यादव में समाजवादी आन्दोलन व जन संघर्ष को आगे बढ़ाने का मदद भी है और सोच भी है | अपने सरल स्वभाव के कारण वे आम युवाओ व समाजवादी कार्यकर्ताओ के ह्रदय में जगह बनाने में कामयाब हो रहे है | राजनीति एक दिन की नौटंकी नहीं होती है यह मानने वाले और जिनके लिए राजनीति सामाजिक दायित्वों की पूर्ति का माध्यम हैं , वे आज उत्तर प्रदेश की बसपा और केंद्र की कांग्रेस सरकार के खिलाफ अखिलेश यादव के नेतृत्व में जन संघर्ष के लिए गाँव - देहात में अलख जगाने को तत्पर है | पुराने समाजवादियो को एकत्र करना तथा पार्टी के प्रचार अभियान में युवा चेहरों को उतारना यह दो बड़ी संगठानिक चुनौती अखिलेश यादव के सम्मुख है |व्यक्ति आधारित राजनीति की जगह मुद्दों की राजनीति को धार देने में अखिलेश यादव की सफलता समाजवादी आन्दोलन की एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी |

Wednesday, June 29, 2011

मानवता-सौहार्द-नैतिकता-भाई चारे की शिक्षा देते संत-डॉ कल्बे सादिक

मानवता-सौहार्द-नैतिकता-भाई चारे की शिक्षा देते संत-डॉ कल्बे सादिक अरविन्द विद्रोही बाराबंकी के कर्बला में मजलिस ए गम में शामिल होने का निमंत्रण वरिष्ट पत्रकार रिजवान मुस्तफा के द्वारा मुझे प्राप्त हुआ तो अपने सामाजिक सरोकार व पत्रकारिता के धर्म का पालन करने हेतु मैं वहा पहुच गया |तक़रीबन दोपहर १२ बजे इस्लामिक - शिया धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक समारोह स्थल पर आये, मंच पर आते ही उन्होंने उपस्थित जनों से मुखातिब होते हुए कार्यक्रम में देरी से आने के लिए माफ़ी मांगी | आज के दौर में जहा पर लोग अपनी बड़ी गलतियो पर सामाजिक-सार्वजनिक रूप से माफ़ी नहीं मांगते है,उस दौर में एक प्रख्यात हस्ती,एक धर्म गुरु द्वारा जन सामान्य से कार्यक्रम के प्रारंभ में ना आ सकने की माफ़ी मांगना,यकीन मानिये मैं तो हतप्रभ रह गया |और तो और देर से आने की पूर्व सूचना भी धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने आयोजक रिजवान मुस्तफा को दे दी थी |उसके बाद भी माफ़ी | आह ! विनम्रता की प्रतिमूर्ति - तुझे मेरा प्रणाम , उसी पल मैंने मन ही मन उन्हें अपना अभिवादन प्रेषित किया | मुझे आभास हुआ की आज यह समारोह कुछ विशिष्ट सन्देश प्राप्ति का स्थल बनेगा | अपने संबोधन में डॉ कल्बे सादिक ने धर्म क्या है ,पर सरल व मृदु वचनों में कहा कि धर्म वो है जो आपको गलत रास्ते पर जाने से बचाए | आज धर्म को बचाने की बात होती है,कोई इन्सान धर्म कैसे बचा सकता है? धर्म तो आपको बचाने ,सही रास्ता दिखाने के लिए है | धर्म के नाम पर मतभेद ख़त्म करने की अपील करते हुए धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि आज यहाँ कर्बला में शिया - सुन्नी, हिन्दू सभी धर्म के मानने वाले मौजूद है | मैं हज़रत साहेब को मानने वालो से पूछना चाहता हूँ कि हज़रत साहेब से जंग क्या हिन्दू ने लड़ी थी? बैगैर ज्ञान के मनुष्य जानवर से भी बदतर होता है | खुदा,परमेश्वर जो भी कहिये उसने सबसे बुद्धिमान मनुष्य को बनाया है और यह मनुष्य अपने कर्मो से अपने को सबसे नीचे गिरा लेता है | ज्ञान व विज्ञानं इन्सान व इस्लाम के फायदे के लिए है | ज्ञान हासिल करना नितांत जरुरी है | कई घटनाओ का हवाला देते हुए डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि जुल्म के खिलाफ लड़ने वाला ही सच्चा मुसलमान होता है , जुल्म करने वाला मुसलमान हो ही नहीं सकता | आतंकवाद के सवाल पर धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि मैं यह जिम्मेदारी लेता हूँ कि हज़रत मोहम्मद साहेब को मानने वाला कभी भी दहशत गर्त हो ही नहीं सकता , जो दहशत गर्त हैं और जो बेगुनाहों का खून बहाते है उनसे पूछा जाये यकीनन वो जुल्मी यजीद को मानने वाले ही होंगे | मोहम्मद साहेब को मानने वाला जुल्मी हो ही नहीं सकता | बहकावे और उकसाने वाली कार्यवाहियो से बचे रहने तथा अमन चैन की पैरोकारी करने की अपील करते हुए डॉ कल्बे सादिक ने एक वाकया सुनाया | उन्होंने बताया की यह बात हज़रत साहेब के दौर की है | एक अरबी उस मस्जिद में पाहुजा जिसे खुदा की इबादत के लिए रसूल ने अपने हाथो से तामीर की थी | उस अरबी ने मस्जिद में पेशाब करना शुरु कर दिया , वहा रसूल के साथ मौजूद सेवक ने उस अरबी को रोकना चाहा,रसूल ने सेवक से कहा - जरा ठहरो , उसे कर लेने दो पेशाब | वहा गन्दगी फैला कर वह अरबी वापस चल दिया , अब रसूल ने कहा मस्जिद में जो गन्दगी इसने पेशाब करके फैलाई है , उसको पानी से धो कर साफ़ कर दो | कई बाल्टी पानी डाल डाल कर वहा सफाई करवाई खुद रसूल ने | अरबी वहा आया था खलल पैदा करने के मकसद से व मार पीट के इसदे से | रसूल के इस प्रकार के व्यव्हार से वह अरबी भी रसूल का मुरीद हो गया | यह वाकया सुना कर डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि यह है हज़रत मोहम्मद साहेब का चरित्र | इस छमा और विनम्रता की राह पर चल कर रसूल ने इस्लाम को विस्तार दिया था और आज आप मुसलमान क्या कर रहे हो ? यह सोचिये...हिन्दुओ के त्यौहार होली में रंग अगर मस्जिद की दीवारों पर पड़ जाये तो आप उत्तेजित हो जाते हो | अरे..होली का रंग तो पाक होता है, दीवारों पर चूना लगा कर दीवारों को फिर से चमका सकते हो लेकिन आप लोग तो इंसानों को चुना लगा सकते हो लेकिन मस्जिद की रंग लगी दीवारों पर चूना नहीं लगा सकते हो | इस्लाम जुल्म के खिलाफ लड़ने का , आपसी भाईचारे का , विनम्रता का सन्देश देता है | धर्मगुरु डॉ कल्बे सादिक ने मुसलमानों से कहा कि आप कि पहचान क्या है ? आज आप समाज में लम्बे कुरते , ऊँचे पायजामे , लम्बी दाढ़ी , टोपी से पहचाने जा रहे है | जिस जगह मीनारे, गुम्बद , मस्जिद होती है - लोग कहते है यहाँ मुसलमान रहते है | आज आपका बाहरी व्यक्तित्व आपकी पहचान बन चुका है | इस्लाम व मुसलमान का वास्तविक रूप सामने लाने की जरुरत है | डॉ कल्बे सादिक ने बताया कि सही मायने में मुसलमान बस्ती वो है जहा पर कोई मांगने वाला ना हो सब देने वाले हो | मस्जिद खुदा का घर होता है | वह पाक जमीन पर बननी चाहिए | किसी दुसरे की जमीन पर जुल्म जबरदस्ती के जोर से मस्जिद बनाने से वो खुदा का घर नहीं हो जाता | जुल्मी शासक लोग धर्म का इस्तेमाल अपने गुनाहों और जुल्मो को छिपाने के लिए धर्म का बेजा इस्तेमाल करते रहे है | ऐसे जुल्मी कभी भी खुदा के बन्दे नहीं हो सकते | जनाब डॉ कल्बे सादिक ने इस पर भी एक वाकया सुनाया | उन्होंने कहा कि अगर एक जरुरत मंद का मकान बनवा दिया जाये तो खुदा उसको अपना आशियाना मानता है | जरुरतमंदो की मदद करना खुदा के बताये राह पर चलना है | नेक कामों से इस्लाम का विस्तार हुआ , आज नेकी की राह पर सभी को चलने की जरुरत है | समाज में और विशेष कर मुसलमानों में शिक्षा की कमी पर धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने बार बार चिंता व्यक्त की | उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद् के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया ने कहा है कि हर मस्जिद के बगल में मंदिर बनाया जायेगा, मैं उनसे अनुरोध करता हूँ कि वे हर मस्जिद के बगल में विद्या मंदिर की स्थापना जरुर करवा दे | जिससे हिन्दुओ के साथ साथ मुसलमान बच्चे भी शिक्षा ग्रहण करे और ज्ञान कि रौशनी में भारत की तरक्की में अपना योगदान करे | अंत में अपनी वाणी को विराम देने के पहले इस्लामिक शिया धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि बैगैर ज्ञान के इन्सान व देश - समाज की तरक्की नामुमकिन है | इसलिए ज्ञान हासिल कीजिये | समापन के अवसर पर कर्बला की जंग के वाकये को याद करते व दिलाते हुए धर्म गुरु ने सवाल किया कि यह जंग क्या हिन्दुओ से लड़ी गयी थी ? अरे ..वो यजीद और उसके लोग थे,और वो भी पांचो वक़्त के नमाज़ी ही थे ..जिन्होंने रसूल के नवासे को प्यासा ही मार डाला था | यह बात जन समुदाय को उद्वेलित कर गयी | लोगो की सिसकियाँ रुदन में तब्दील हो चुकी थी , इसी समय डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि खुदा ना करे कभी ऐसा हो, लेकिन अगर कही फसाद हो जाये और आप मुसलमान किसी हिन्दू बस्ती में अपने परिवार व बच्चो के साथ पीने का पानी मांगोगे तो यह मेरा यकीन है कि हिन्दू फसाद भूल कर आपको अपने घर में पनाह देंगे, पानी - खाना देंगे , लेकिन इतिहास गवाह है कि उन यजीद के मानने वालो ने प्यासा ही मार डाला था | कर्बला का वह दर्दनाक मंज़र सुनकर रुदन कर रहे जन समुदाय का ह्रदय जुल्म के खिलाफ लड़कर शहीद हुए कर्बला के वीरो को अपने श्रधा सुमन अर्पित करने लगा था | इन्सान मात्र से प्रेम ,शिक्षा ग्रहण करने की सलाह , जरुरत मंदों की मादा , अन्याय - जुल्म से लड़ने की सीख़ देते हुए इस्लामिक शिया धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने अपनी वाणी को विराम दिया |

Sunday, June 26, 2011

अधिग्रहित कृषि भूमि किसानों के नाम भू अभिलेखों में वापस दर्ज हो


अधिग्रहित कृषि भूमि किसानों के नाम भू अभिलेखों में वापस दर्ज हो अरविन्द विद्रोही हमको अपना सामाजिक कर्त्तव्य किस प्रकार निभाना चाहिए और हमारे सामाजिक कर्त्तव्य क्या है ?कौन सा काम किया जाय और किस प्रकार किया जाय की वो समाज के लिए सार्थक व उपयोगी सिद्ध हो,यह प्रश्न मेरे जेहन में वर्षों से कौंधता रहता था | अपनी आत्म संतुस्ती के लिए कुछ सामाजिक काम किये,कुछ के आयोजन में सहभागिता की और अपनी इन चंद उपलब्धियो पर निश्चित तौर पर मानवोचित कमजोरी का शिकार होकर आत्म मुग्धता शिकार भी हुआ | हमारा सामाजिक सरोकार ,इसका उत्तर तलाशते तलाशते कई सवालों के चक्र व्युव्ह में मैंने अपने को घिरा पाया | पता नहीं कितने लोगो ने मुझसे कहा की पहले अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी,उनके लिए अच्छा भोजन व सुख-सुविधा का प्रबंध करिए तब समाज की सोचिये | पहले अपनी व अपने परिजनों की फिक्र करिए ,अपने तरक्की की सोचिये फिर किसी की मदद की सोचिये | इन बातो ने हमको भौचक्का कर दिया | अमूमन हम बहस नहीं करते सिर्फ सुनते है और सामने वाले के कथन में सत्य वचन को ग्रहण करने की चेष्टा करते है लेकिन जब भी कोई यह बात हमसे कहता है तब हम जम कर बहस करते है | हमको तो यही समझ में आया है कि अपना काम तो सभी करते ही है, लेकिन समाज के कामों को चन्द लोग | अगर यह चन्द लोग भी सिर्फ पारिवारिक दायित्व के निर्वाहन मात्र व समाज में सर्व व्यापी हो चुके पूंजीवाद के फेर में पड़ जाय तो क्या होगा? अभी विगत वर्षो में मुझे सामाजिक कर्त्तव्य निर्वाहन की एक सार्थक दिशा मिली | जनपद बाराबंकी की तहसील फतेहपुर के रामनगर मार्ग पर पचघरा के किसानों की बेश कीमती कृषि भूमि के मनमाने अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष रत किसानों से ,उनकी समस्या से जुड़ना हुआ | बड़ी दुविधा और असमंजस की परिस्थितिओ में फंसे पचघरा के ये किसान अपनी बेश कीमती कृषि भूमि को उप मंडी के निर्माण के लिए अधिग्रहित कर लिए जाने से टूट कर बिखर से गये थे | वर्षो के आन्दोलन और संघर्ष के बाद पचघरा के इन किसानों को उनके ही किसान नेतृत्व ने प्रशासनिक दबाव व मिलीभगत के चलते धोखा भी दिया ,अपनी भूमि के मनमाने अधिग्रहण से बेजार पचघरा के किसान अपने नेता के दगाबाजी से भूमि से बेदखल किये जाने की आशंका से भयाक्रांत हो गये | प्रशासनिक अमले के साथ मिल कर उस भ्रष्ट किसान नेता ने जबरन सहमति पत्र पर किसानों के हस्ताक्षर करवाने की पुरजौर कोशिस की | यह कुत्सित प्रयास पचघरा के किसानों ने अपने आत्मबल के बूते विफल किया और इसी संकट की घडी में किसानों के बीच से ही एक किसान जिसकी अपनी भूमि भी अधिग्रहित की गयी है उसने अंगद की तरह अपना पाँव जमा दिया | पुराने संगठन से तत्काल इस्तीफा देकर पचघरा के साहसी किसानों ने अपना संगठन पचघरा भूमि अधिग्रहण विरोधी मोर्चा गठित कर के अपने हक के लिए लड़ना जारी रखा | मोर्चा के मुखिया का दायित्व ख़ुशी राम लोधी राजपूत को और संरक्षण का दायित्व फतेहपुर के वरिष्ट अधिवक्ता यादवेंद्र प्रताप सिंह यादव को सौपा गया | पचघरा के किसानों के इस संगठन ने अपनी हर बैठक में आने और खबर लिखने का दायित्व हमको दिया | भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष कर रहे किसानों ने अपनी भूमि को अधिग्रहण से मुक्ति और भू अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए अपनी बात हर स्तर के अधिकारी व समस्त राजनितिक दलों तक पहुचाई है | पचघरा के इन किसानों ने विभिन्न क्रान्तिकारियो के जन्मदिन व बलिदान दिवस पर बैठक आयोजित करना शुरु कर दिया | मशहूर धन्नाग तीर्थ के विकास के लिए पैदल यात्रा पे निकले यात्रिओं का स्वागत डॉ भीम राव अम्बेडकर स्मृति पार्क-पचघरा में करके वही पर सभा करवाने तथा रात्रि विश्राम महादेव तालाब मंदिर परिसर में करवाने का सराहनिए काम इन किसानों ने किया | रात्रि भोजन व प्रातः जल पान की व्यवस्था भी पचघरा भूमि अधिग्रहण विरोधी मोर्चा ने किया | आज पचघरा के ये किसान अपने हक की व्यक्तिगत लड़ाई लड़ते लड़ते सामाजिक स्तर पर सबसे जुड़ते चले जा रहे है| खेती किसानी के दुष्कर काम को करने के साथ ही साथ पचघरा के किसान स्थानीय मुद्दों पर अपने विचार प्रकट करने लगे है | अभी १८ जून को जब फतेहपुर के समस्त पत्रकार मुंबई के दिवंगत पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या की सी बी आई जाँच और अन्य मांगो को लेकर काला दिवस मानाने और ज्ञापन देने के लिए तहसील परिसर में एकत्र हुए तब पचघरा के किसानों ने तहसील परिसर में आ कर पत्रकारों का साथ दिया | २४जुने को अपनी बैठक में पुनः जे डे की याद में इन किसानों ने २ मिनट का मौन रखा | पुरे प्रदेश-देश में कृषि भूमि के अधिग्रहण ने भयावह हालत उत्पन्न कर दिया है | किसानों के हक की लड़ाई में साथ देने की जगह राजनेता किसानों की दुर्दशा व मौतों पर अपना स्वार्थ सिद्ध करने हेतु नाना प्रकार की नौटंकी कर रहे है | इन राजनेताओ के कदाचरण व भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालो को शासन सत्ता अपने जुल्म से दबाने का प्रयास कर रही है | एक तरफ सत्ता की दबंगई और दूसरी तरफ राज्नेअताओ की नौटंकी,आम आदमी एक ज्वालामुखी की तरह सुलग रहा है | तमाम जगह के किसानों की तरह पचघरा के किसान आज भी सत्याग्रह पर है ,आंदोलित है | अन्ना हजारे और बाबा रामदेव दोनों के अनशन पर पचघरा भूमि अधिग्रहण विरोधी मोर्चा के संरक्षक यादवेन्द्र प्रताप सिंह यादव ने साथियो के साथ सहभागिता की है | आज पचघरा का किसान आन्दोलन स्वामी अग्निवेश की भी जानकारी में आ चुका है | पचघरा के किसानों के साथ उनकी भावना है | आन्दोलन के किसी वक़्त वो सहभागिता करेंगे यह उन्होंने कहा है | स्वामी अग्निवेश ने मुझसे मुलाकात के दौरान कहा कि लोकशक्ति को एकत्र करना जारी रखना ही सामाजिक कार्यकर्ताओ का काम है| यह बात मेरे मन में समां चुकी है | पचघरा के किसान अपनी शक्ति के बूते अपनी अधिग्रहित भूमि अपने नाम वापस दर्ज करवाने के लिए प्रयास रत है,लोग साथ डे रहे है | जिनकी दलाली व कुत्षित षड़यंत्र के मनसूबे विफल हो गये थे वो अब विकास का राग अधिकारिओ के सामने आलाप रहे है,यह वही है जिन्होंने इसी भूमि के अशिग्रहण को वापस लेने की मांग के समर्थन में जमकर राजनीती चमकाई है | किसानों के हक के लिए म़र मिटने की बात सभाओ में की और अब सौदेबाज़ी कर के किसानों को विभाजित कर मुआवजा दिलाने में रात दिन एक किये है | एक बात और क्या कोई ऐसा है जो विकास ना चाहता हो ? हा ,यह अवश्य है की आम जनता - किसान की बलिवेदी पर कोई भी कंक्रीट की ईमारत विकास की परिचायक नहीं हो सकती , यह मानने वाले किसानों की कृषि भूमि का अधिग्रहण समाप्त करने की बात कहते है | यह दुर्भाग्य पूर्ण विडम्बना है कि जब तक कोई मजलूम , किसान आत्म हत्या नहीं कर लेता या सरकारी दमन का शिकार नहीं हो जाता तब तक उसकी हक कि बात कहने तो दूर की बात है, उनकी बात सुनने के लिए भी आज के भांड सरीखे नौटंकी बाज़ नेता आते नहीं है ना ही उनके चाटुकार | संभवता यह नौटंकी बाज़ नेता किसानों की मौत का इंतज़ार करते है जिससे वो सत्ता धारी दल को कठघरे में खड़ा कर के अपना वोट बैंक बढ़ा सके |