Monday, September 12, 2011
यथार्थ
यथार्थ क्या अब , काव्य बन पायेगा ? किसान-मजदूर का दर्द ,कौन गा के सुनाएगा? गायेगा तब ना,जब गीत लिखा जायेगा| यथार्थ क्या अब,काव्य बन पायेगा? जो देश के विकास का , आधार कहलाते है| अपना पूरा जीवन , श्रम में लगाते है| उनके अंतर्मन का मर्म ,क्या कोई लिख पायेगा? यथार्थ क्या अब,काव्य बन पायेगा? रूचि-अभिरुचि का सवाल,यहाँ मुखरित हो रहा| विकास की चक्की में, अन्नदाता पिस रहा| श्रमिक अब,राहत व बख्शीश पर टिक रहा , श्रम का मोल ,उसे ना मिल रहा| यथार्थ क्या अब काव्य बन पायेगा?
Thursday, September 8, 2011
समाजवादी पार्टी के घोषित प्रत्याशियो के लिए मुसीबत बने चन्द असंतुष्ट
अरविन्द विद्रोही उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी बहुजन समाज पार्टी की जन विरोधी नीतिओ के खिलाफ सड़क से सदन तक आवाज उठाने व संघर्ष करते रहने के कारन समाजवादी पार्टी आम जन मानस के बीच गहरी पैठ बना चुकी है | बसपा सरकार की मनमानी व तानाशाही पूर्ण आचरण के कारन त्रस्त जन मानस का रुझान समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओ के जन संघर्षो को देख कर ही समाजवादी पार्टी की तरफ हुआ है | इसी रुझान को देख कर विभिन्न दलों के चुनाव लड़ने को आतुर नेताओ ने सपा में अपना भविष्य महफूज़ मानते हुये समाजवादी पार्टी की सदयस्ता ग्रहण कर की थी | विभिन्न दलों से आये तमाम जनाधार वाले प्रभावी लोगो को उनके द्वारा डॉ लोहिया के विचारो से प्रभावित होने की बात कहने पर, समाजवादी विचारो-संकल्पों के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जताने पर , मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में संघर्ष का बीड़ा उठाने का वायदा करने पर समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव ने उनको भरपूर तवज्जो देते हुये विधान सभा २०१२ में अधिक से अधिक सीट जितने के मकसद से विधान सभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया | समाजवादी पार्टी के नेतृत्व द्वारा घोषित प्रत्याशियो ने अपने समर्थको के साथ अपने अपने विधान सभा में आम जनता के बीच जाना प्रारंभ कर दिया | करीब एक दर्ज़न सीटों पर प्रत्याशियो को चन्द असंतुष्टो से जो की इसी सीट से विधान सभा का टिकेट मांग रहे थे के अंतर विरोध से जूझना पड़ रहा है | कई बार विधायक रहे,कई बार चुनाव लड़ चुके,हार चुके, हर चुनाव में दल बदलने वाले, चन्द लोग इस बार अपनी चुनावी मंशा पूरी ना होते देख कर बौखला गये है| वर्तमान परिस्थितियो में ,राजनीतिक-सामाजिक समीकरणों के हिसाब से इन सीटो पर घोषित प्रत्याशियो को भारी मतों से विजय श्री मिलनी सुनिश्चित है ,यही कारण है की इन सीटो पर चुनाव लड़ने की अति आतुरता है |सपा के पक्ष में जनमानस का मान भांप के अब असंतुष्ट सपाई ही इन घोषित प्रत्याशियो के विजय मार्ग में कांटे बिछाने का दुष्कर्म कर रहे है |चन्द एक लोग जिस सीट से विधायक होते आये उसके नए परिसीमन में आरक्षित हो जाने से वो दूसरी सीट से लड़ने को जबरन बेताब है | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव द्वारा समाजवादी पार्टी मुख्यालय लखनऊ में आयोजित कार्यकर्ता बैठकों में कई बार विधान सभा चुनावो को लेकर निर्देश दिये गये है| हर हाल में चुनाव लड़ने को आतुर चन्द असंतुष्ट नेता उनके निर्देशों का मखौल उड़ने में कोई कोताही नहीं छोड़ रहे है | अभी बीते शुक्रवार को एक टिकटार्थी विधायक जिनकी परंपरागत सीट परिसीमन में आरक्षित हो गयी है , समाजवादी पार्टी प्रदेश मुख्यालय में समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने आये थे| जन चर्चा के अनुसार मिलने के बाद जब ये विधायक कक्ष से बाहर आये तो बाहर बरामदे में खड़े सपा के तमाम नेताओ ने इनकी खैरियत पूछी | राजधानी के निकटवर्ती जनपत के यह विधायक हाल में ही बहुजन समाज पार्टी से टिकेट ना मिलने के कारण समाजवादी पार्टी में शामिल हुये थे |इनको एक सीट से चुनाव लड़ने की हरी झंडी भी दी जा चुकी है लेकिन ये दूसरी सीट से चुनाव लड़ने को आतुर है जहा से पार्टी ने एक मजबूत प्रत्याशी पहले से उतार रखा है| खैरियत पूछते ही विधायक महोदय हत्थे से उखाड़ गये और अनर्गल प्रलाप करने लगे | इनके अनर्गल प्रलाप की चर्चा समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आने जाने वालो की जुबान पर है, साथ ही साथ तमाम निष्ठावान नेता-कार्यकर्ता आक्रोशित भी है | सिर्फ नेतृत्व द्वारा अनुशासित रहने के निर्देश के चलते समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओ के कोप भजन से यह विधायक उस दिन बच गये |हालिया शामिल इन विधायक के द्वारा कही बातो को पार्टी के जिम्मेदारो तक पहुचने की बात उपस्थित कार्यकर्ताओ ने कही| यह तो रही सपा मुख्यालय में घटित दुर्भाग्य पूर्ण घटना| इसी तरह के चन्द चुनाव लड़ने को आतुर नेताओ की अनर्गल बयान बाजी का सामना तमाम प्रत्याशियो को अपने अपने विधान सभा क्षेत्र में करना पड़ रहा है| इन असंतुष्टो के द्वारा हर हफ्ते टिकेट काटने की अनर्गल अफवाह उड़ाकर ,जनता के मान में भ्रम पैदा करने का पार्टी विरोधी कृत्य चन्द स्वार्थी तत्वों के द्वारा बदस्तूर जारी है | समाजवादी पार्टी को अब इन असंतुष्टो पर मंथन करना चाहिए | आम जनता बहुजन समाज पार्टी से त्रस्त होकर बेहतर विकल्प की तलाश में समज्वाद्दी पार्टी की ही तरफ देख रही है | पार्टी विरोधी गतिविधिओ में लिप्त, घोषित प्रत्याशियो का विरोध करने वालो, टिकेट काट जाने की बात जनता में फ़ैलाने वाले स्वार्थी लोगो को अब सुधरने की चेतावनी देने से कोई फायदा नहीं,इनके तार किसी ना किसी दूसरी पार्टी से जुड़ चुके है| समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को अब संगठन के निर्णयों और घोषित प्रत्याशियो का विरोध करने कर सीधे सीधे नेतृत्व को चुनौती देने वालो को समाजवादी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में ना तो देरी करनी चाहिए और ना ही कोताही बरतनी चाहिए| इन चन्द स्वार्थी नेताओ की मंशा हर चुनाव की लड़ना और अपना ही हित साधना है | संगठन हित में , नेतृत्व के निर्णयों के अनुपालन में तनिक भी रूचि ना रखने वाले यह लोग दीमक की तरह पार्टी का नुकसान कर रहे है , इनका उपचार ही एकमात्र विकल्प है |
Wednesday, September 7, 2011
सुरेश यादव-प्रत्याशी बाराबंकी ने कराया भव्य ईद मिलन समारोह
सुरेश यादव-प्रत्याशी बाराबंकी ने कराया भव्य ईद मिलन समारोह बाराबंकी विधान सभा २६८ से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुरेश यादव उर्फ़ धर्म राज यादव के द्वारा पीर बटावन के ईद गाह मैदान में आज आयोजित ईद मिलन समारोह में भारी तादाद में शहर वशियो ने शिरकत किया | सुरेश यादव प्रत्याशी बाराबंकी विधान सभा के द्वारा आयोजित इस ईद मिलन समारोह में समाजवादी पार्टी के अरविन्द सिंह गोप -पूर्व मंत्री, मौलाना मेराज समाजवादी पार्टी जिला अध्यक्ष , संघर्ष शील जमीनी नेता ज्ञान प्रकाश मिश्र, धीरेन्द्र वर्मा, निजामउद्दीन-कुर्सी विधान सभा के प्रबल दावेदार, फरजान उस्मानी , हाजी कुद्दुब बुद्दीन अंसारी, चौधरी कलीम , हाजी जाहिद, नाजिम शाहीन , एकलाख किदवई, अब्दुल लतीफ़ , गीता देवी , मो शमीम , शकील राइन, बाबा फरीद , जमील उस्ताद , मौलाना अजहर , मो जैद अंसारी, आबिद अली , हाजी आरिफ़, आलम बाबा, संतोष रावत, तारिक मुजीब , हशमत राइन, शकील सिद्दकी ,नाजिम खातून , रेहाना बानों, कज़ीमा बानों, नसीम अंसारी, अली अहमद, मो जुबेर , मो शरीफ, सब्बीर, शाबिर अली, उमा शरण यादव, अनिल रावत,सुभाष वर्मा, राधा रमण, जयंत मिश्र, राज कुमार मिश्र, राम कैलाश यादव, राम सिंह यादव, धर्मेन्द्र यादव, ओम कार श्रीवास्तव, गीता देवी, सहित उपस्थित सभी जनों ने एक दुसरे को ईद की मुबारक बार दी| सुरेश यादव प्रत्याशी बाराबंकी विधान सभा के द्वारा आयोजित इस ईद मिलन समारोह में सभी वक्ताओ ने आज के आयोजन के लिए सुरेश यादव को धन्यवाद दिया और कहा कि ईद का पर्व आपसी मेल मिलाप का पर्व है | मुख्य अथिति के रूप में अपने संबोधन में अरविन्द सिंह गोप ने कहा कि यह त्यौहार एक माह के रोज़े के बाद इश्वर अपने बन्दों को ख़ुशी के तोहफे के रूप में देता है | इस मौके पर सुरेश यादव को अपना समर्थन-सहयोग और आने वाले विधान सभा के चुनाव में अपना अमूल्य मत देने कि अपील की| ईद मिलन समारोह में सेवई और छोले का भरपूर जयका उपस्थित जनों ने उठाया| समारोह के अंत में सबका तहे दिल से सुक्रिया अदा करते हुये सुरेश यादव-प्रत्याशी बाराबंकी विधान सभा ने कहा कि आज ईदगाह के इस मैदान में आप लोगो की इतनी भारी तादाद में मौजूदगी ने यह साबित कार दिया है कि आप सभी का स्नेह व आशीर्वाद मेरे साथ है | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव जी का पूरा जीवन कौमी एकता व मज़लूमो के हक के लिए समर्पित है यह आप सभी जानते है| मैं एक अनुशासित सिपाही की तरह पार्टी आलाकमान का हर आदेश मानने को , उसको पूरा करने को संकल्पित हूँ|
Monday, August 29, 2011
गैर सरकारी संगठनो और पूंजीवादी -साम्राज्यवादी ताकतों का दुष्चक्र
गैर सरकारी संगठनो और पूंजीवादी -साम्राज्यवादी ताकतों का दुष्चक्र अरविन्द विद्रोही भारत में किन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पूंजीवादी-साम्राज्यवादी देश गैर सरकारी संगठनो को भारी मात्र में धन दे रहे है ,इसकी जाँच लोकसभा कि संयुक्त संसदिए समिति या किसी अन्य सक्षम जांच एजेंसी से भारत सरकार को तत्काल करनी चाहिए| भारत की लोकतान्त्रिक व्यवस्था ,चुनाव प्रणाली ,संविधान को नकारने का प्रयास व कुचेष्टा करने तथा संसद के खिलाफ दुष्प्रचार करने वालो की साजिश को बेनकाब करने के लिए भारत भूमि के उन लोगो को आगे आना ही पड़ेगा जो भेड़ चल ना चलते हो | लाखो-करोडो रुपया विदेश से प्राप्त करने वाले गैर सरकारी संगठनो के कारनामो पर नज़र रखने व इनको आम जनता के सामने लाने की महती भूमिका निभाने के लिए अब भारत भूमि के भूमि-पुत्रो को कमर कसना ही पड़ेगा | गैर सरकारी संगठनो के कर्ता-धर्ताओ ने विदेशो से धन व सम्मान प्राप्ति के लिए भारत को अस्थिर करने, अशांति फ़ैलाने , लोकतान्त्रिक व्यवस्था को ख़त्म करने का षड़यंत्र तो नहीं रचा जा रहा है, यह प्रश्न जेहन में कौंधता रहता है| सरकारी सहायता से संचालित गैर सरकारी संगठन पर धन राशी के बन्दर बाँट के लिए भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियो की भी नज़र रहती है लेकिन विदेशी धन से संचालित गैर सरकारी संगठनो पर कोई प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण नहीं दीखता | इनका रवैया व कार्य पद्धति दोनों अत्यंत रहस्यमयी है | इस पर प्रभावी निगरानी की तत्काल जरुरत है|प्रभावी लोकपाल बिल का गठन भ्रस्टाचार को रोकने में एक कारगर कदम होगा यह कहा जा रहा है| लोकपाल विधेयक के गठन की प्रक्रिया चल रही है | संसद ने कुल ५ प्रस्ताविक विधेयको को संसद की ड्राफ्टिंग कमिटी को भेजा है| ध्यान देने की व गंभीर चिंता की बात यह है कि एक स्व गठित तथा कथित सिविल सोसाइटी के लोग जिन्होंने प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक को भ्रस्टाचार के मुद्दे पर लोकपाल में लाने की मांग पर अपना सर्वस्व झोंक दिया, छोटे सरकारी कर्मचारियो तक को लोकपाल के दायरे में लाने की विशेष मांग रखी कि इससे आम जनता को भ्रस्टाचार से निजात मिलेगी , वही यह सिविल सोसाइटी के स्वयंभू लोग विदेशी धन पाने वाले गैर सरकारी संगठनो को प्रभावी व सक्षम लोकपाल के अधीन करने कि मांगो का विरोध कर रहे है और इस मांग को कि सभी गैर सरकारी संगठनो को लोकपाल के दायरे में लाया जाये सिरे से खारिज करते है |गैर सरकारी संगठनो को प्रभावी लोकपाल के दायरे से बाहर रखने कि कवायत व प्रयास करने वाले इन तथा कथित सिविल सोसाइटी के लोगो की मंशा को संदेह के घेरे में लाती है | क्या इन लोगो के द्वारा संचालित गैर सरकारी संगठनो को विदेशी धन राशी मिलती है, और अगर हा तो किस लिए? सभी गैर सरकारी संगठनो को यह लोग प्रभावी लोकपाल के दायरे में नहीं लाना चाहते इसका क्या करण हो सकता है? क्या विदेशी धन का गलत कामों में प्रयोग हो रहा है भारत में ? क्या यह इन सिविल सोसाइटी के लोगो का भ्रस्टाचार नहीं है? पुरे देश के लोकतंत्र को कठघरे में खड़े करने वाले इन लोगो की संपूर्ण गतिविधिया इनके संविधान विरोधी मानसिकता व सामाजिक चरित्र को परिलक्षित करती है | संसद में गैर सरकारी संगठनो को प्रभावी लोकपाल के अधीन लाने की चर्चा हुई | हमारा यह भी सुझाव है विदेशी धन व विदेशी सम्मान पाने वाले किसी भी गैर सरकारी संगठन के किसी भी कार्यकर्ता को लोकपाल ना बनाया जाये | लोकतंत्र में भारत के हर देश भक्त का , भूमि पुत्र का शत प्रतिशत विश्वास है | इसी विश्वास को संसद ने और सांसदों ने और अधिक दृठता प्रदान की जब इस तथा कथित सिविल सोसाइटी की हठधर्मिता को नकारते हुये उनकी मांगो को संसद की ड्राफ्टिंग कमिटी के पास भेजा, जहा बाकि प्रस्तावित बिलों के साथ साथ विचार किया जायेगा | भारत की सरकार ने सभी नागरिको से लोकपाल विधेयक पर प्रस्ताव व सलाह मांगी थी , सभी प्राप्त विधेयको , सुझावों पर संसद की ड्राफ्टिंग कमिटी विचार करके एक प्रभावी लोकपाल विधेयक का प्रारूप बनाएगी| लोकतान्त्रिक व्यवस्था में संसद के सदन ही कानून - विधेयक बनाते है | एब सदन से बाहर खड़े होकर सदन को नियंत्रित करने का संविधान विरोधी कृत्य करने की कुचेस्टा करने वालो से सरकारों को सख्ती से पेश आना चाहिए| सदन ने सभी सुझावों, प्रस्तावों को विचारार्थ ड्राफ्टिंग कमिटी को भेजा इसके लिए सदन को शत-शत नमन| सदन से , सरकार से निवेदन है की देश-समाज हित में विदेशी धन प्राप्त करने वाले गैर सरकारी संगठनो के कर्ता-धर्ताओ के विदेशी संपर्क व मंशा को पता करने की दिशा में तत्काल प्रभावी कदम उठाये| इनकी मंशा भारत में अराजकता फ़ैलाने व सामाजिक अलगाव पैदा करने की प्रतीत होती है |
Thursday, August 18, 2011
डॉ लोहिया के विचार और छात्र नौजवान जागरूकता अभियान
अरविन्द विद्रोही डॉ राममनोहर लोहिया ने १९५७ में एक भाषण में कहा था की -- आखिर संगठन किसका नाम है ? संगठन तो वो है कि जो बिना किसी खास पर्चे या मेहनत या ख़तबाजी के सैकड़ो , हजारो , दास हज़ार , लाख आदमी अपने वक़्त पर और अपने खास काम को कर दिया करे | मान लो कल विचार बैठक है | उस विचार बैठक में लोग आया करते है | समय , दिन बंधा हुआ है | फिर अगर उसके बाद किसी को याद दिलाने की जरुरत पड़े तो समझो संगठन नहीं है | लेकिन अगर बिना याद दिलाये लोग आ जाया करे तो उस दिन और समय पर तो समझ लो संगठन है | डॉ लोहिया का स्पष्ट कहना था की संगठन के लोगो में सहयोगिता होनी चाहिए | डॉ लोहिया के इन विचारो की कसौटी पर समाजवादी संगठनो को परखना नितांत आवश्यक है | समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव के निर्देशानुसार समाजवादी पार्टी के चार युवा फ्रंटल संगठनो क्रमश समाजवादी युवजन सभा , समाजवादी छात्र सभा , लोहिया वाहिनी और मुलायम सिंह यादव यूथ बिग्रेड ने विगत १अगस्त से १५ अगस्त तक पुरे प्रदेश के समस्त जनपदों में छात्र - नौजवान जागरूकता अभियान चलाया | पखवारे भर चले इस छात्र नौजवान जागरूकता अभियान का उद्देश्य समझाते हुये समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने १८ जुलाई को प्रदेश कार्यालय में फ्रंटल संगठनो के अध्यक्षों से पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी व मेरी खुद की मौजूदगी में कहा था कि --- समाजवादी पार्टी डॉ राम मनोहर लोहिया के विचारो पर आधारित पार्टी है | नेता जी मुलायम सिंह यादव ने स्वर्गीय जनेश्वर मिश्रा के आशीर्वाद व मार्ग निर्देशन में समाजवादी संकल्पों व विचारो को पूरा करने के लिए समाजवादी पार्टी बनायीं थी | हमें यह कतई नहीं भूलना है कि डॉ लोहिया हमारी पार्टी के मूल आधार है , समाजवादी पार्टी को , हम सब को डॉ लोहिया के सप्त क्रांति को पूरा करना है | डॉ लोहिया के कामों क आगे बढ़ाने के लिए ही छात्रों नौजवानों में जागरूकता पैदा करने के लिए ही युवा संगठनो को , आप लोग को १२ सुत्रिये मांगो के साथ अभियान चलाना है | यह मांगे क्रमश शिक्षा का व्यवसायी करण बंद हो , बढ़ी फीस वापस की जाये , कालेजो - विश्व विद्यालयों में छात्र संघ की बहाली , क्लास १२ तक समान शिक्षा नीति , मुस्लिम व पिछड़े वर्ग के सभी छात्र- छात्राओ को छात्र वृत्ति , मुस्लिम नौजवानों को विशेष अवसर देते हुये शिक्षा एवं रोजगार में समुचित भागीदारी , छात्रावासों का निर्माण एवं निशुल्क भोजन का प्रबंध , बेरोजगारी भत्ता तथा कन्या विद्या धन देना शुरु किया जाये | शिक्षण शंस्थान में और बाहर दोन जगह छात्राओ को सुरक्षा का इन्तेजाम हो , अलीगढ मुस्लिम विश्व विद्यालय के अल्पसंख्यक स्वरुप की बहाली की जाये | छात्र - छात्राओ को बस एवं रेलगाड़ी में निशुल्क यात्रा पास की व्यवस्था की जाये | उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सत्ताधारी बहुजन समाज पार्टी की सरकार के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखरित रही है , सड़क पर उसके खिलाफ संघर्ष में सबसे आगे रही है ,यही कारन है कि बहुजन समाज पार्टी की सरकार से त्रस्त लोगो की पहली पसंद बन चुकी समाजवादी पार्टी से सबसे ज्यादा आशा भी अब उत्तर प्रदेश के नागरिको को है | ऐसी स्थितिओ में विभिन्न सामाजिक विषयों को भी छात्र- नौजवान जागरूकता अभियान में शामिल करके समाज के विभिन्न तबको से जुड़ने व उनको संगठन के साथ जोड़ने की कवायत में सक्रियता निभाने वालो तथा रूचि ना लेने वालो दोनों तरह के कार्यकर्ताओ-नेताओ का चिन्हीकरण कार्यकर्ता आधारित राजनीति को बढ़ावा देने की सोच को साकार रूप देने में सहायक सिद्ध होगी | यह इस लिए भी जरुरी है कि प्रत्येक अभियान व आन्दोलन में सक्रिय कार्यकर्ताओ कि पहचान होने से उनको विशेष अवसर व सम्मान दिया जा सके | समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव जिस सरलता से अपनी बातो को अपने युवा सहयोगियो के सम्मुख रख रहे थे और इन कार्यक्रमों के मसौदो को , अभियान के संचालन के तरीको पर जिस तरह से संजीदगी पूर्वक सलाह मशविरा कर रहे थे , देख कर एक सुखद अनुभूति हुई | प्रसंग वश बताते चले कि लखनऊ के एक धार्मिक स्थल के बाहर अभियान का शिविर लगाने के प्रस्ताव को नकारते हुये अखिलेश यादव ने कहा कि यह डॉ लोहिया और समाजवादी विचारधारा के खिलाफ होगा | धर्म स्थल धार्मिक कामों के लिए है , वहा पार्टी का प्रचार शिविर लगाना कतई उचित नहीं है | संगठन के कार्यक्रम धार्मिक स्थल पर ना आयोजित किया जाये सिर्फ सार्वजनिक स्थल ही उपयुक्त है | आज धर्म का सहारा लेकर , उन्माद व धार्मिक भावना को उभर कर अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने वालो को समाजवादी पार्टी के युवा नेता अखिलेश यादव से कुछ सीखना चाहिए | इस अभियान में फ्रंटल संगठन एक अनुमान के अनुसार लगभग ५ लाख छात्र नौजवानों तक सीधे संवाद के जरिये अपनी बात पहुचने में कामयाब हुये है | छोटे लोहिया के नाम से विख्यात जनेस्वर मिश्र जी को अंतिम दिनों में चिंता हो गयी थी कि समाजवादी नेता अब जन संघर्ष से कटते जा रहे है| समाजवादी युवा कार्यकर्ताओ - नेताओ को जनता के सवालो पर जन अभियान में जुटा कर राजनीतिक परिपक्वता के साथ साथ समाजवादी पुरोधाओ के विचारो को व्यवहार रूप में साकार करने का महती काम उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के युवा कार्यकर्ता अखिलेश यादव के नेतृत्व में करने में जुटे है |
Friday, August 12, 2011
सर्वशक्तिमान , प्यार और मानव के जीवन में प्यार के मायने
अरविन्द विद्रोही क्या कोई सर्व शक्तिमान है,जिसने सृष्टि की रचना की है | अगर है कोई सर्व शक्तिमान तो क्या उसे अपनी रची रचना में सर्वश्रेष्ठ कहे जाने वाले मानव का अधोपतन दिखाई नहीं पड़ता ? यह मानव जाति ही है ना जो अपने को सभी प्राणियो में सर्वाधिक बुद्धिमान मानती है | सारे धर्म ग्रन्थ के मूल आधार-भूत सिधांतो से अपने को अपने पाखंड पूर्ण , आडम्बर भरे पूजा व उपासना पद्धति से नकारता मानव अपने मानव धर्म से भी कोसो दूर हो चला है | प्राणी मात्र से प्रेम, सौहार्द , भाई चारे का स्थान नफरत , अलगाव , मनमुटाव ,क्लेश व द्वेष आदि मनोविकारो ने ले लिया है | क्या मानव सचमुच सर्व शक्तिमान की सर्वश्रेष्ट रचना है ? ढाई आखर का एक शब्द - प्यार , सृष्टि के रचनाकार का भी शायद अभीष्ट | यह प्यार ही तो रहा होगा जब उसने जीवन में रंग भरते हुए अनूठे अहसास के लघु बीज को जीवात्मा में रोपित किया | हे सृष्टि के रचनाकार - तुम अगर हो तो अपने अस्तित्व का आभास मात्र ही कराओ | इस काल के मानव के पशुवत आचरण के पीछे क्या कोई लीला है तुम्हारी? अब अगर यह कोई लीला है तो यह तो तुम ही समझते होगे , हम तो सिर्फ यह समझते है कि जिस प्रकार किसान अपने खेत में बीज बोता है, फसल लगाता है , उसके बाद अगर वही किसान अपने खेत व फसल की निगरानी ना करे ,खर- पतवार की निराई-गुड़ाई ना करे तो निश्चित रूप से फसल ख़राब हो ही जाति है, बीज दबा रह जाता है , अनावश्यक खर - पतवार की फसल खड़ी हो जाती है | देखने वाले बीज व फसल को दोषी नहीं मानते है, और ना ही खेत को , दोषी तो किसान ही माना जाता है , और अपनी अकर्मण्यता के लिए अनजानों से भी दुत्कारा जाता है | किसान तो खैर तेरी सृष्टि का एक सबसे निरीह व बेबस प्राणी है जो तेरे बनाये तथा कथित सर्वश्रेष्ट रचना मानव के रूप में जन्मने के बावजूद चन्द मानव के शोषण आधारित राज्य का शिकार है |अन्न दाता भरी दोपहरी , उमस भरी गर्मी , भीषण बरसात व सर्दी के थपेड़ो को जीता हुआ अपनी बदहाली व बेबसी को सोचता हुआ प्रति पल मरता है | यह अन्न दाता किसान तो तेरी तरह सर्वशक्तिमान नहीं है , क्या सचमुच तू है सर्वशक्तिमान ? अगर है तो अब ठीक कर अपनी रचना | क्या लिखू और कितना लिखू ? मानव जाति के अधोपतन का हाल यह है कि आज प्यार शब्द को वासना की पूर्ति मात्र की अभिव्यक्ति - जरिया मान लिया गया है | आज प्यार शब्द को कामुकता व वासनायुक्त आचरण का पर्याय बना दिया गया है | विपरीत लिंगी के प्रति आकर्षण आज के दौर में अपने चरम पर है , जीवन में संयम का कोई मोल नहीं | यह आकर्षण जो समर्पण , स्नेह , आसक्ति , विछोह , मिलन की यादगार अमिट हस्ताक्षर के रूप में तमाम किस्सों - कहानियो के रूप में मौजूद है आज समाप्त सा हो चुका है | प्यार अब सिर्फ वासना से लबरेज़ युवा वर्ग का विपरीत लिंगी के प्रति आकर्षण से प्रारंभ होकर समर्पण की राह पर ना जाकर अधिकायत में व्यापार , सौदेबाजी , कैरियर , अलगाव की राह पर बार बार टूटता - सँवरता रहता है | वास्तव में उन्मुक्त व स्वछंद जीवन का यह तथा कथित प्यार मनोकामना पूर्ति, लोभ , व्यावसायिकता , सौदेबाजी, वासना पूर्ति और धनार्जन का माध्यम मात्र है | प्यार तो वह भाव है जिसमे प्यार करने वाला अपना सर्वस्व लुटा कर , समर्पित कर के प्रसन्नता महसूस करता है | वर्षो बाद वह कह उठता है कहाँ चली गयी तुम?क्या वापस नहीं आओगी?वर्षों हो गया है तुम्हारा इंतज़ार करते|अब आ भी जाओ|तुम तो बहुत चाहती थी मुझे,फिर अब क्या हो गया?क्यूँ छोड़ के चली गयी?सभी कहते हैं कि अब तुम वापस नहीं आओगी,क्या सचमुच नहीं आ सकती?सुनो..तुमको आना पड़ेगा..मेरे लिए..अपने प्यारे....के लिए..कितना प्यार करती थी तू मुझ को और मैं था कि बस|तू मेरी सबसे प्यारी..थी,थी ना फिर क्या अब आ भी जा..और तू जानती ही है कि तेरे पास आना मेरे बस का नहीं..खैर तेरे इंतज़ार में तेरा| और किसी दिन कह पड़ता है वही दीवाना - जानती हो,तेरी हर बात,तेरा प्यार तेरा मनुहार याद है मुझे|जिस दिन तू छोड़ के गयी मुझे,मैं रात भर जगा था,उसी जगह था जहा से तू चली गयी|किसी ने कहा था--वो चली गयी सो जाओ|मैंने कहा--इस के लिए एक पूरी रात तो जागना ही था,चलो इसी तरह|बहुत याद आती हो,हमेशा.....कब आओगी? वास्तव में अपने ह्रदय में मधुर यादों को सहेजे , स्मृतिओं को जीवन का आधार बनाकर एक प्रेमी जीवन के भव सागर को पार कर लेता है | स्नेह , ममत्व , करुना , समर्पण सरीखे सखा उसके जीवन की नौका के खेवनहार होते है | यह प्रेम की असीम ताकत ही होती है जो प्रेमी को हौसला देती है| कोई भी जिसने अपने जीवन में प्यार को उतार लिया , व्यवहार में अपना लिया , उसके जीवन में नफरत , ईर्ष्या , द्वेष आदि कालिमाओं का कोई स्थान नहीं रह जाता है | यह कलिमायें तो प्रेम रूपी अखंड ज्योति के देदीप्यमान प्रकाश से कभी पास आ ही नहीं सकती है | आह.. तनिक कल्पना तो करो.. उस प्यार के पथिक के खुश हाल जीवन की,,,उस जीवन की जिसमे सब एक दुसरे को प्यार करे जहा किसी विकार की कोई जगह ना हो | हमारी नज़र में तो प्यार एक सरल - सुन्दर अलौकिक भाव है | प्यार एक ताकत है | यह वह भाव है जिसे जब तक आत्मसात ना किया जाये तब तक समझ पाना नामुमकिन है | प्यार किसी सिधान्त का मोहताज़ नहीं है | समर्पण- स्नेह का आधार युक्त प्यार प्राणी मात्र को बुलन्दियो पर ले जाता है | जिसने अपने जीवन में प्यार को स्थान दिया प्यार को जिया , प्यार से जिया , प्यार किया उस ने परम पिता परमेश्वर के सानिध्य को पाने के मार्ग पर चलने का अपना राह प्रशस्त व सुगम किया | परम पिता तक पहुचने का , अपने कर्त्तव्य को पूरा करने का श्रेष्ठ मार्ग है प्रेम अर्थात प्यार | प्यार के राही बनिए... प्रेम पथिक .... प्रभु के पास जाने का एक मार्ग.. अपने अभीष्ट को पाने का एक मात्र मार्ग ..
Wednesday, August 10, 2011
क्रान्तिकारियो के बलिदान से मिली आजादी --- अतुल अंजान
अरविन्द विद्रोही ९ अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर विभ्भिन आयोजनों में शिरकत करने का निमंत्रण मिला | गाँधी जयंती समारोह ट्रस्ट - बाराबंकी के द्वारा बाराबंकी जनपद के मुख्यालय पर स्थित गाँधी भवन में आयोजित संगोष्ठी में अतुल कुमार अंजान के मुख्य वक्ता के तौर पर आने की पुष्टि दूरभाष से करने के बाद मैं उनको अरसे बाद प्रत्यक्ष रूप से सुनने के व्यग्तिगत लोभ से खुद को रूक ना सका | लखनऊ विश्व विद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष के दायित्व निर्वाहन से लेकर कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव पड़ के दायित्व निवाहन बखूबी करने वाले , अपनी अलग छाप छोड़ने वाले अतुल कुमार अंजान की वक्तव्य शैली का जवाब नहीं | विषय पर गहरी पकड़ और विचारो के प्रस्तुति-करण का अंदाज़ एक ज्ञान कोष की तरह युवा वर्ग के सामने मौजूद है | विचारो को ह्रदय से निकल कर मुखारविंद से प्रकट करने वाले अतुल कुमार अंजान जितने अच्छे वक्ता है उतने ही अच्छे श्रोता भी |
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