Monday, October 17, 2011

सरकार महाभ्रष्ट व उसके विधायक-मंत्री लुटेरे है -- सरवर अली ,पूर्व विधायक





बाराबंकी | कमर तोड़ महंगाई ,भयंकर भ्रस्टाचार , जातिवाद , फिरकापरस्ती , राजनितिक गिरावट के विरुद्ध संघर्ष की रूप रेखा तैयार करने के लिए बाराबंकी जनपद की कुर्सी विधान सभा के इसरौली बाज़ार -फतेहपुर में दिनांक १६ अक्टूबर , दिन रविवार को दोपहर ११ बजे से स्थानीय नागरिको की एक निर्णायक सभा आयोजित की गयी | इस निर्णायक सभा की अध्यक्षता जनाब हाजी उस्मान गनी साहब तथा संचालन सुफियान अख्तर - पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने किया | निर्णायक सभा के मुख्य वक्ता समाजवादी सोच व पृष्ठ भूमि के जन नेता सरवर अली - पूर्व विधायक थे | इस निर्णायक सभा को संबोधित करने वाले प्रमुख लोगो में सरवर अली , मौलवी मोइद्दीन , जनाब सगीर अंसारी , गयास मियां , शब्बू खान , डॉ तौफीक अहमद , पंडित सुनील तिवारी , रफ़ी अंसारी , शकील बेलहरवी , मास्टर वीरेन्द्र विक्रम सिंह , जुम्मन अंसारी , रमेश यादव , रईस खान , विश्राम यादव , नेता राम लाल यादव , लल्लन प्रधान , कौशल बी डी सी , हाजी अबरार , कौशल वर्मा , मो फारुख , केदार नाथ मिश्र , मास्टर हरी राम यादव , गणेश यादव , मो अय्यूब तथा पंडित बलराम थे | सभी वक्ताओ ने अपने संबोधन में सरवर अली से विधान सभा का आगामी चुनाव लड़ने को कहा | सभा में उपस्थित स्थानीय नागरिको ने चुनाव लड़ने की मांग का पुरजोर समर्थन किया | निर्णायक सभा में उमड़ी हजारो किसानों-मजदूरों-युवाओ -स्थानीय नागरिको को संबोधित करते हुये मुख्य वक्ता सरवर अली-पूर्व विधायक ने कहा कि कृषि आधारित भारत देश में पहले से ही परेशान व जेरबार किसानों को उनकी उपज के सही मूल्य ना मिल पाने , खेती में उपयोग होने वाली समस्त सामग्री उर्वरक , बीज , डीज़ल , कीटनाशक दवा के दामो में चल रही लगातार बढ़ोत्तरी तथा समय से बिजली व नहरों में पानी ना मिल पाने के कारण किसान और भी परेशान और जेरबार होता जा रहा है | स्थानीय नागरिको की भारी उपस्थिति से उत्साहित सरवर अली ने समाजवादी चरित्र व तेवर में बोलते हुये कहा कि वर्तमान बहुजन समाज पार्टी कि सरकार महा भ्रष्ट सरकार है | ऐसी सरकार दुबारा ना बने यह मै चाहता हूँ| आज केंद्र व प्रदेश कि सरकारों ने लूट मचा रखी है | दोनों के मंत्री जेल में है और बेशर्मी पूर्वक सरकारे चल रही है | बाराबंकी जनपद के हालातो को भयावह करार देते हुये सरवर अली ने कहा कि राजनीतिक चरित्र में गिरावट के चलते बसपा सरकार के मंत्री से पुलिस का सिपाही रिश्वत दिलाने कि बात कहता है | सत्ता धारी बसपा कि वर्तमान स्थानीय विधायिका को दलित-जनविरोधी बताते हुये कहा ही ये राजनीतिक बदले की भावना से काम करती है | राजनीतिक विरोधियो को परेशान करना इनका शगल है | अधिकारिओ पर दबाव बना कर , उनसे मिली भगत कर के जनता की मेहनत की कमाई को यहाँ लुटा जा रहा है | ६० % से ज्यादा कमीशन खोरी की बात आम जन चर्चा में है | स्थानीय पुलिस की मनमानी की मनमानी का विवरण देते हुये मंच से ही सार्वजनिक रूप से पुलिस कर्मचारियो - अधिकारिओ को सुधर जाने व जनता को नाजायज़ परेशान आईंदा ना करने की चेतावनी देते हुये सरवर अली ने कहा कि अब जुल्म, नाइंसाफी बर्दाश्त के बाहर हो गयी है | कानून का पालन पुलिस वाले और सरकारी कर्मचारी भी करे अन्यथा उनको जनता सबक सिखाएगी ,उनका चालान काटेगी | अंत में सभा के संचालक सुफियान अख्तर ने सभी का हार्दिक धन्यवाद दिया तथा कहा कि अपनी सरज़मी के लिए काम करना , संघर्ष करना हमारी पहचान रही है | अपने पुरखो से मिली गरीबो , वंचितों, पिछडो , मज़लूमो , दलितों की सेवा कि विरासत व जिम्मेदारी को हम हमेशा निभाते रहे है और आगे भी निभाते रहेंगे | जन संघर्ष में ना हम कभी पीछे रहे है और ना आगे कभी पीछे रहेंगे |

Saturday, October 15, 2011

लोहिया और जयप्रकाश नारायण मधु लिमये की नज़र में-अरविन्द विद्रोही -

स्वतन्त्र भारत की राजनीति और चिन्तन धारा पर जिन गिने -चुने लोगो के व्यक्तित्व का गहरा असर हुआ है , उनमे डॉ राम मनोहर लोहिया और जय प्रकाश नारायण प्रमुख रहे हैं | भारत के स्वतंत्रता युद्ध के आखिरी दौर में दोनों की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण रही है | हजारीबाग जेल से जयप्रकाश के बाग़ जाने की घटना ने चिंगारी का काम किया और इस एक घटना के कारण जयप्रकाश की लोकप्रियता बहुत बढ़ गयी | भूमिगत आंदोलनों को प्रज्ज्वलित करने में लोहिया की भूमिका कार्यक्रम और विचार की दृष्टि से असाधारण था | भूमिगत रेडिओ की कल्पना को उषा मेहता और उनके साथियो की मदद से डॉ लोहिया ने ही साकार किया था | सुचेता कृपलानी जैसी गाँधी वादी और अच्युत पटवर्धन जैसे समाजवादी , इनके बीच की कड़ी लोहिया ही थे समाजवादी नेता समझते थे कि महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरु में जवाहरलाल अपेक्षतया ज्यादा प्रगतिशील और वामपंथी हैं | उनकी यह भी धारणा थी कि नेहरु गाँधी और सुभाष चन्द्र बोष से ज्यादा आधुनिक हैं| लोहिया का यह सम्मोहन १९४२ से ही टूटने लगा था और गाँधी जी की हत्या के दिन तक पूरी तरह टूट चुका था | लेकिन जयप्रकाश का मोह आखिर तक नहीं टूटा | जयप्रकाश के मन में नेहरु के प्रति गहरा प्रेम था , वे नेहरु के परिक्रमा पथ से कभी नहीं निकल पाए | लोहिया का आत्म परीक्षण समाजवादी दल के मुल्यांकन की दृष्टि से महत्व पूर्ण है | जहा तक अशोक मेहता , जयप्रकाश आदि का सवाल है , उनमे निश्चित ही धीरज की कमी रही | जय प्रकाश सदभाव से ओत-प्रोत थे | लोहिया की तरह उनमे भी सत्ता-पिपासा लेश मात्र नहीं थी, मगर उनमे विचारो की स्पष्टता नहीं रहती थी | वे अगल-बगल के लोगो से जल्दी प्रभावित हो जाते थे | साथ ही , किसी भी विवादस्पद प्रश्न पर स्पष्ट राय देने तथा उस पर अड़े रहने में जय प्रकाश को हिचक होती थी | चाहे सुभाष चन्द्र बोस के दुबारा अध्यक्ष पड़ का चुनाव लड़ने की बात हो , या त्रिपुरी कांग्रेस के बाद हुये मतभेदों का प्रश्न , चाहे कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में अपनाये गये रुख का सवाल , किसान मजदूर प्रजा पार्टी के साथ विलीनीकरण की समस्या हो या कांग्रेस के साथ सहयोग का विवाद जय प्रकाश अक्सर ढुलमुल नीति अपनाते थे , अपना मत नहीं बना पाते थे | लोहिया इन तरीको से बहुत नाराज़ रहते थे | जय प्रकाश दल के महामंत्री थे | किसी बड़े संगठन को चलाने के लिए लचीलेपन की , समझौते की जरुरत होती है | जय प्रकाश ने लोहिया से कहा था -- आखिर तुमने मुझको दल का महामंत्री बना रखा है तो महामंत्री को यह सुविधा होनी चाहिए कि वह आखिर में बोले , सबकी राय सुनकर , आखिर सबको साथ लेकर चलना है | लोहिया कुछ हद तक जय प्रकाश कि बात सही मानते थे | लोहिया चिंतन-मनन वाले आदमी थे | लेकिन वे क्रांति शुन्य नेता नहीं थे , सृज़न शील चिंतन के साथ तमाम जन आन्दोलन कि अगुवाई की | लेकिन संगठन बनाने का एक अलग कौशल होता है | लोहिया खुद मानते थे कि उनमे ना इस तरह का कौशल है और ना ही इस तरह के काम के प्रति आस्था | १९५५ के बाद दो तीन साल तक संगठन बनाने का प्रयोग लोहिया ने किया लेकिन सफलता नहीं मिली | लोहिया को चाह थी सिर्फ दिमागी नेतृत्व की | जय प्रकाश कुशल संगठन कर्ता थे | कांग्रेस समाजवादी दल की स्थापना काल से संगठन की जिम्मेदारी जय प्रकाश ने संभाली | जय प्रकाश के व्यक्तित्व में करिश्मा था | १९५२ के चुनावो में समाजवादी दल की हार के बाद जय प्रकाश का मन दल से दूर हटने लगा | चुनावी हार को व्यक्तिगत पराजय मन वे भूदान की तरफ , विनोबा भावे की विचार धारा की ओर मुड़े | अनशन आदि के आध्यात्मिक प्रयोगों में वे उलझ गये | इसी बीच नेहरु ने जय प्रकाश को एक पत्र लिख कर दिल्ली आकर सहयोग-वादी बात चीत का न्यौता दिया , बात चीत का सिलसिला शुरु हुआ | जय प्रकाश में हुये इन परिवर्तनों को लोहिया पसंद नहीं करते थे | पंच मढ़ी सम्मेलन १९५२ में जय प्रकाश की कार्यकर्ताओ ने जन संघर्ष के मोर्चे पर पहल ना करने पर आलोचना की | जय प्रकाश के मन में जवाहर लाल की सरकार के बारे में गुस्सा नहीं था जो बाद में इंदिरा सरकार के बारे में उनके मन में पैदा हुआ | अतः नेहरु के समय में सरकार से जूझने के लिए , टक्कर लेने के लिए जो चिंगारी , जो प्रखरता होनी चाहिए , वह उत्पन्न नहीं हो पाई | लोहिया इस बात को लेकर दुखी हो जाते थे कि उनके द्वारा इतने आन्दोलन चलाये गये , इतने विचार दिये गये , लेकिन इसका श्रेय उन्हें कभी नहीं मिला | १९५७ से लोहिया निरंतर कोशिश करते रहे कि जय प्रकाश राजनीति में वापस आये | लोहिया की बातो और कोशिशो का उस समय कोई असर जय प्रकाश पर नहीं पड़ा | जय प्रकाश ने यहाँ तक कहा कि देश को इस तरह हिलाने कि प्रक्रिया पर ना उनका विश्वास है , ना इस तरह के काम में उनको कोई रूचि है | समाजवादी आन्दोलन का यह दुर्भाग्य रहा कि जय प्रकाश - लोहिया के बीच मतभेदों के कारण दोनों का व्यक्तित्व व गुण परस्पर पूरक होते हुये भी आपसी सहयोग का सिलसिला टूट गया | अफ़सोस इस बात का था कि समाजवादी आन्दोलन में परिवर्तन की गाड़ी को जय प्रकाश - लोहिया रूपी बैलो को जोड़ने वाला कोई गाँधी नहीं था | जो काम लोहिया चाहते थे कि जय प्रकाश करे और जिसे करने में राम मनोहर लोहिया के जीवन काल में जय प्रकाश ने इंकार किया , वही काम उन्होंने १९७४ के बाद किया | लोहिया का बस चलता तो वे कांग्रेस का तख्ता १९६७ में ही उलट देते | जय प्रकाश ने जब यह काम संभाला तब तक समाजवादी आन्दोलन विघटित होते होते अत्यंत कमजोर हो गया था | देश की राजनीति को नयी दिशा देने या देश के आर्थिक-सामजिक ढांचे में बुनियादी तबदीली लाने की उसकी छमता ख़त्म हो चुकी थी | लोहिया में निर्भीक बन आत्म परीछन करने का बड़ा गुण था | लोहिया सम दृष्टि वाले थे | जय प्रकाश में सम दृष्टि का अभाव था | धनी-मानी और बड़े लोगो से वे प्रभावित हो जाते थे | उनके व्यवहार में फर्क आ जाता था | लोहिया और जे पी दोनों पर गाँधी का प्रभाव था | लोहिया का व्यक्तित्व लुभावना होते हुये भी प्रखरता थी , शब्द तीखे होते थे | भावना का वे ख्याल नहीं रखते थे | जय प्रकाश का स्वाभाव सौम्य था , व्यक्तित्व में मिठास थी | वे म्रदु भाषी थे , वे किसी को जल्दी नाराज़ नहीं करते थे | दोहिया का डालिए प्रणाली व लोकतंत्र में पूर्ण विश्वास था | वे लोकतंत्र को हर प्रकार से समृद्ध बनाना चाहते थे और जय प्रकाश राष्ट्रीय सहमति , दल हीन लोकतंत्र , दल विहीन राजनीति आदि अवास्तविक कल्पनाओ के शिकार थे | लोहिया की सप्त क्रांति और जय प्रकाश की संपूर्ण क्रांति में अंतिम उद्देश्यों को लेकर कोई फर्क नहीं | जे पी सप्त क्रांति को ही सम्पुर्न्य क्रांति मानते थे | प्रखर राष्ट्रीयता के प्रवक्ता लोहिया सिकुड़ने वाले राष्ट्रवाद के समर्थक नहीं थे | लोहिया और जय प्रकाश के आदर्श उतुंग थे | नागालैंड , कश्मीर , बांग्ला देश आदि के प्रश्नों के बारे में जय प्रकाश द्वारा की गयी पहल उनकी आदर्श वादिता का उत्तम सबूत है | लोहिया की अपनी एक सम्यक- दार्शनिक दृष्टि थी और जय प्रकाश के व्यक्तित्व में गज़ब का जन -आकर्षण | डॉ लोहिया ने १९५४ में ही जय प्रकाश को पत्र लिखा था ---- देश की जनता का तुमसे लगाव है , तुम चाहो तो देश को हिला सकते हो , बशर्ते देश को हिलाने वाला खुद ना हिले |

Tuesday, October 11, 2011

समाजवादी दलों की एका ही डॉ लोहिया-जय प्रकाश नारायण को सच्ची श्रधांजलि

अरविन्द विद्रोही १२ अक्टूबर , १९६७ को समाजवाद के प्रखर प्रवक्ता , युग दृष्टा डॉ राम मनोहर लोहिया की आत्मा ने नश्वर शरीर त्याग कर दिया था | आज डॉ लोहिया स-शरीर भले ही ना हो लेकिन उनके विचार , उनका चिंतन , उनकी राष्ट्र परक , आम जन हित की सोच एक अनमोल विरासत के रूप में हमारी धरोहर के रूप में विद्यमान है | चिर सत्याग्रही , अन्याय का प्रतिकार तत्काल करने वाले क्रांति के मतवाले डॉ लोहिया समाजवादी आन्दोलन के जरिये भारतीय राजनीति से कांग्रेस की भ्रष्ट सरकारों को उखाड़ फैकने की अदम्य इक्छा शक्ति रखते थे | जयप्रकाश नारायण ने भले ही डॉ लोहिया के जीवन काल में उनकी यह इक्छा ना मानी हो लेकिन १९७७ में जयप्रकाश नारायण ने कांग्रेसी सरकारों को धूल चटा कर लोहिया की बात मानी जरुर | और डॉ लोहिया तो कहते ही थे कि -- लोग मेरी बात सुनेंगे जरुर लेकिन मेरे मरने के बाद | आज ना तो गाँधी है , ना जयप्रकाश और ना ही डॉ लोहिया | आज के दौर में करतार सिंह सराभा , रास बिहारी बोस , भगत सिंह , आजाद , अशफाक , सुभाष सरीखे क्रांतिकारी भी नहीं है | आज आम जन हित चिंतन की जगह स्वयं हित चिंतन या समूह हित चिंतन को प्राथमिकता दी जा रही है | भारत की लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सरकारों का चरित्र आम जन विरोधी ही साबित होता रहा है | तानाशाह सरकारों के विरुद्ध अनवरत सत्याग्रह चलाने की मंशा रखने वाले डॉ लोहिया की आत्मा को इधर कुछ सुकून तो मिला ही होगा | भ्रस्टाचार में सरोबोर सरकारों के खिलाफ आंदोलनों ने उम्मीद जगाई है | जनता में आये उबाल को बनाये रखने के डॉ लोहिया की सप्त क्रांतियो पर ध्यान देना नितांत जरुरी है |नर-नारी समानता , रंग भेदों पर आधारित विषमता की समाप्ति , जन्म तथा जाती पर आधारित असमानता का अंत , विदेशी जुल्म का खात्मा तथा विश्व सरकार का निर्माण , निजी संपत्ति से जुडी आर्थिक असमानता का नाश और संभव बराबरी की प्राप्ति , हथियारों के इस्तेमाल पर रोक और सिविल नाफ़रमानी के सिधान्त की प्रति स्थापना तथा निजी स्वतंत्रताओ पर होने वाले अतिक्रमण का मुकाबला इन सात बिन्दुओ - विचारो के लिए संघर्ष ही समाजवादियो की पहचान है | लोहिया के चित्र-जिक्र व उनके विचारो को मूर्त रूप देने में लगा व्यक्ति ही डॉ लोहिया का सच्चा शिष्य हो सकता है , समाजवादी हो सकता है अन्यथा वो रंगे सियार या पाखंडी के सिवाय कुछ नहीं कहा कहा जा सकता है | डॉ लोहिया जीवन पर्यन्त अन्याय के खिलाफ प्रतिकार करते रहे | लोकतान्त्रिक अधिकारों के सिकुड़ने के खिलाफ सड़क-सदन के अलावा डॉ लोहिया ने अदालत का भी सहारा लिया | डॉ लोहिया एक मजबूत और बराबरी का समाज बनाने के लिए जीवन पर्यन्त लगे रहे | आज डॉ लोहिया को अपना आदर्श मानने वालो , उनके विचारो का अनुसरण कर्ता स्वयं को मानने वालो को एक जुट होना चाहिए | और यह एक जुटता किस लिए हो , यह भी समझ लेना चाहिए | प्रदेश-देश दोनों जगह की राजनीति में लाठी-गोली के जरिये जनता को , जनता की आवाज को दबाने-कुचलने वालो की सरकारे है | यह सरकारे पूंजीवादी-साम्राज्यवादी ताकतों का प्रतिनिधित्व कर रही है | समाजवादी ताकतों को इन भ्रष्ट - जनविरोधी सरकारों को हटाने के लिए और ना सिर्फ हटाने के लिए वरन समाजवादी मूल्यों की , डॉ लोहिया के विचारो के अनुपालन करने वाली सरकार को बनाने के लिए एक साथ होना चाहिए | आज समाजवादी बिखरे है | सभी अपने-अपने मुगालते में है | डॉ लोहिया एक कर्म योगी थे | कर्म प्रधान , चिंतन शील व्यक्तित्व के धनी डॉ राम मनोहर लोहिया को सच्ची श्रधांजलि होगी -- समाजवादी विचार धरा के विभिन्न व्यक्तिओ व दलों का एकीकरण और समन्वय | उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनीति में बसपा सरकार के मुकाबिल समाजवादी पार्टी सड़क से सदन तक मजबूती से संघर्ष कर रही है | डॉ लोहिया के विचारो की पार्टी बनाने से शुरु हुआ मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक सफ़र तमाम उतार-चढाव के बाद आज पुनः जनता की उम्मीदों का केंद्र बिंदु बना है | समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव -सांसद एक बार पुनः क्रांति रथ यात्रा पर निकल चुके है | चार चरण की यात्रा में मिले व्यापक जन समर्थन ने सत्ताधारी बसपा को चौकन्ना व अन्य राजनीतिक दलों को अचंभित कर दिया है | समाजवादी पार्टी के युवा नेता अखिलेश यादव में सौम्यता के साथ साथ जुझारूपन का अनोखा मिश्रण देखने को मिल रहा है | डॉ लोहिया के विचारो की शिक्षा छोटे लोहिया स्व जनेश्वर मिश्र से ग्रहण करने वाले अखिलेश यादव के अन्दर जनता को आकर्षित करने की गज़ब की शक्ति देख कर बरबस लोकनायक जयप्रकाश नारायण याद आ जाते है | डॉ लोहिया के विचारो और जय प्रकाश नारायण के करिश्माई व्यक्तित्व का अनूठा मिश्रण बन के उभर रहे है अखिलेश यादव , यह समाजवादी आन्दोलन के लिए एक शुभ संकेत है | अब समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को सभी समाजवादियो को, सभी समाजवादी दलों की एका की पहल करनी चाहिए | व्यापक जनाधार वाले नेता धरतीपुत्र माने जाने वाले मुलायम सिंह यादव की समाजवादी एका की पहल से , समाजवादी दलों की एका से उत्तर प्रदेश की विधान सभा २०१२ के ही नहीं वरन पुरे देश के चुनावो में समाजवादी पार्टी व सहयोगियो का परचम लहराएगा व डॉ लोहिया की समाजवादी एका के मनसूबे , आन्दोलन की मजबूती तथा समाजवादी राज्य की स्थापना का संकल्प पूरा होगा | निः संदेह यह कार्य डॉ लोहिया के विचारो की सबसे बड़ी जनाधार वाली पार्टी समाजवादी पार्टी की अगुआई व मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में ही होना संभव है और यह होना ही डॉ लोहिया-जय प्रकाश नारायण के प्रति सच्ची श्रधांजलि होगी समाजवादियो वादियो की तरफ से लोहिया - जय प्रकाश को |

Monday, October 10, 2011

भ्रस्टाचार में शामिल हैं बसपा सरकार के सभी मंत्री - अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज क्रांति यात्रा के दौरान कहा कि प्रदेश की बसपा सरकार में मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक सभी भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं, इसके चलते माया सरकार ने जनता का विश्वास खो दिया है। जनता की निगाहों में इस सरकार की कोई साख नहीं रह गई है। इसे अब जाना ही है। अगली सरकार समाजवादी पार्टी की बनेगी तभी कानून का राज स्थापित हो सकेगा। बसपा सरकार ने जो लूट मचाई है उसका हिसाब लिया जाएगा और लुटेरों को कड़ी सजा भी दी जायगी।
अखिलेश यादव आज सीतापुर जनपद के हरगांव, महौली और सिधौली में समाजवादी क्रान्ति रथ से यात्रा के बाद इटौंजा (बख्शी का तालाब) लखनऊ में आयोजित विशाल जनसभा केा संबोधित कर रहे थे।यहाँ पर घोषित प्रत्याशी गोमती यादव के साथ ज्ञान सिंह यादव , प्रेम प्रकाश यादव , धर्मानंद तिवारी,अशोक देव , सुभाष यादव आदि ने क्रांति रथ का स्वागत किया | हर जगह घंटों पहले से भारी भीड़ उनके स्वागत में खड़ी मिली। जोशीले नारों और पुष्पवर्षा के बीच उनका कारवां जिधर से गुजरा नौजवानों का उत्साह छलक पड़ा और साइकिल, मोटर साइकिल, कारों के काकिले के साथ पैदल ही रथ के साथ दौड़ते रहे।
समाजवादी क्रान्ति रथ से अपनी यात्रा के चौथे चरण में अखिलेश यादव को बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के भी कई जगह नौजवानों ने रोककर उनको फूलमालाओं से लाद दिया। सड्क किनारे मकानों के छज्जे पर खड़े लोग युवा नेता की एक झलक पाने के लिए घंटों बेचैन रहे। समाजवादी क्रान्ति रथ के पहुचने पर कई जगह इतनी भीड़ उमडी कि सारी व्यवस्थाएं भंग हो गई।
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर तीखे प्रहार करते हुये कहा कि वे बजट में धन की व्यवस्था के बगैर जिले बनाती जा रही हैं। बिना किसी ठोस योजना के केवल प्रचार के लिए आज ही मुख्यमंत्री ने 6 हजार करोड़ रूपए की योजनाओं का लोकार्पण शिलान्यास कर दिया। करीब 40 हजार करोड़ रूपए बसपा राज में पत्थर के हाथियों और मुख्यमंत्री की प्रतिमाओं पर लुटा दिए गये । इनसे दलितों का कोई भला होने वाला नहीं है। कानून व्यवस्था दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि किसान, वकील, व्यापरी, शिक्षक सभी इस सरकार की उपेक्षा और दमन के शिकार हैं। नौजवानों को रोजगार मिला नहीं, उल्टे उनको समाजवादी पार्टी सरकार में मिलने वाला बेरोजगारी भत्ता भी बंद हो गया। कन्या विद्याधन योजना रद्द हो गई। समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकाल की बंद योजनाएं पुनः चालू की जायेंगी और पिछड़ों, मुस्लिमों तथा किसानों के हित में नई योजनाएं लागू की जाएगीं। सड़क-पुल निर्माण का काम तेजी से होगा। मंहगी शिक्षा पर रोक लगेगी।
सिधौली की जनसभा में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसानोें को खाद, पानी, बीज नहीं मिल पा रहा है। बाढ़ में फसल उजड़ गई है। पशुओं की चारे के अभाव में मौते हो रही हैं। इनको राहत देने के बजाए मुख्यमंत्री चीनी मिलें बेचकर कमीशन बटारने में लगी है। किसानों को गन्ना का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। चीनी मिल मालिकों को छूट दे रखी है।
इससे पूर्व महोली में प्रत्याशी एवं विधायक श्री अनूप गुप्ता एवं प्रत्याशी श्रीमती आर0पी0 चैधरी के साथ 30 हजार से ऊपर की भीड़ ने श्री यादव का भव्य स्वागत किया। वहाॅ उन्होंने क्रान्ति रथ से जनता को संबोधित किया। इस क्रान्ति रथ यात्रा में भगवती सिंह , सुशीला सरोज ,राजेंद्र चौधरी ,संजय लाखर , सुनील यादव एवं रामसागर यादव भी थे |

Saturday, October 8, 2011

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और लूट का साम्राज्य है- अखिलेश यादव

“उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और लूट का साम्राज्य है। लोकतंत्र मजाक बनकर रह गया है। गरीबों, बीमारों और किसानों का पैसा पत्थरों और फव्वारों में लगा दिया गया है। अल्पसंख्यकों की दशा खराब है। नौजवान बेकारी से कुंठित है। किसान की जबरन भूमि छीनी जा रही है। मुख्यंमंत्री सिर्फ कालाधन और उगाही के फेर में है। इस भ्रष्ट सरकार को हटाकर ही प्रदेश का भला हो सकता है। समाजवादी क्रान्तिरथ इस संकल्प के साथ ही चल रहा है और तब तक चलता रहेगा जब तक वर्तमान मुख्यमंत्री को कुर्सी से हटाकर उनसे उनके कारनामों का हिसाब नहीं ले लिया जाता है।“
उक्त उद्गार आज समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने क्रान्तिरथ से लखनऊ से लेकर सीतापुर तक जगह-जगह जोशीले स्वागत के बीच व्यक्त किए। जनता में इतना उत्साह था कि पूर्व निश्चित स्थानों से इतर कई जगहों पर भी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हो गए और उन्होने क्रान्तिरथ रोककर अखिलेश यादव को फूलमालाओं से लाद दिया। सैकड़ों कारों का काफिला उनके पीछे था। खास बात यह कि मुस्लिम बड़ी संख्या में जगह-जगह इसमें शामिल हुए। बुर्के में मुस्लिम महिलाएं भी अखिलेश यादव के स्वागत में आई थीं। उनको देखने और सुनने के लिए बच्चे और नौजवान पेड़ों तक पर चढ़ गए थे। महिलाओं ने घरों की छतों से उनपर पुष्पवर्षा की। कई जगह पटाखें दगाकर भी उनका स्वागत किया गया। उनके पीछे विशाल कारवां को देखकर लगता था जैसे क्रान्तिरथ की आंधी आ गई हो।
अखिलेश यादव के साथ पूर्वमंत्री भगवती सिंह, साॅसद सुश्ीाला सरोज, प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी, क्रान्तिरथ में साथ थे। एमएलसी श्री यशवन्त सिंह एवं युवा नेता श्री संजय लाठर, सुनील यादव, आनन्द भदौरिया, नफीस अहमद, धनञ्जय शर्मा , नावेद सिद्दीकी,vikas यादव भी इस यात्रा में शामिल थे।
श्री यादव ने कुर्सी बाजार (बाराबंकी) में धीरेन्द्र वर्मा बाराबंकी जिला महासचिव के कुशल संचालन में आयोजित सभा में 25 हजार से ज्यादा एकत्र जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुसलमानों को आरक्षण की चिट्ठी लिखने से मुसलमानों का भला होनेवाला नहीं हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार ने ही गरीबों, मुस्लिमों, पिछड़ों और किसानों की भलाई नीति बनाई थी और सरकार में उन्हें लाभ पहुॅचाया है। वर्तमान सरकार तो किसानों को बिजली,खाद, बीज, पानी भी नही दे पाई है। उनकी जमीन छीनकर बिल्डरों को बांटती रही है।
उन्होने कहा बसपा राज में अपराधी ही भयमुक्त हैं। छह महीनों में दो सीएमओ की हत्या हो गई। डिप्टी सीएमओ सचान की निर्मम हत्या जेल में हो गई। सरकार के मंत्री भ्रष्टाचार में संलिप्त है। कई विधायक लूट, अपहरण, हत्या के अपराधों में जेल में बंद है। कई मंत्री लोकायुक्त की सिफारिश पर हटाए गए हैं तो अभी कई और मंत्रियों की जांच चल रही है। मुख्यमंत्री कालाधन को ठिकाने लगाने और ज्यादा से ज्यादा लूट में लगी है। श्री यादव ने आव्हान किया कि लोकतंत्र और जनहित में इस बसपा सरकार को हटाने में जनता सहयोग करे। मायाराज के हटने तक यह समाजवादी क्रान्तिरथ चलता रहेगा।
अखिलेश यादव आगे बढ़े तो बेहटा पेट्रोल पम्प पर अपने साथियों के साथ राजेश यादव बबलू ने जबरदस्त स्वागत किया। बेहटा बाजार में भारी भीड़ ने उनका उत्साहपूर्ण स्वागत किया। पैकरामऊ में सुभाष यादव और मो0 नसीम मुन्ना अपने साथियों के साथ मौजूद थे। पलका में अखिलेश यादव ने शांति के प्रतीक कबूतर आकाश में छोड़े तो उनके जिन्दाबाद के नारों से आकाश गंूज उठा। लखनऊ- बाराबंकी की सीमा पर हजारों की भीड़ उनके साथ थी।
अखिलेश यादव के पूर्व निश्चित कार्यक्रम के अनुसार उन्हें आज समाजवादी क्रान्तिरथ यात्रा के चौथे चरण में स्पोर्ट्स कालेज के पास स्वागत के साथ कुर्सी, महमूदाबाद, रेउसा और बिसवां होते हुए सीतापुर जाना था। लेकिन स्वागत स्थल से पहले ही पहाड़पुर चैराहे पर (टेढ़ी पुलिया के पास) पंकज यादव ने बड़ी संख्या में जोशीले नारों के साथ क्रान्तिरथ की अगुवानी करते हुए अपने प्रिय नेता का स्वागत कर किया। स्पोटर््स कालेज पर सर्वश्री गोमती यादव, विजय यादव, अशोक यादव, शकील खाॅ, राम सागर यादव, रामवृक्ष यादव, हनीफ खाॅ, मुजीबुर्रहमान “बबलू“, मो0 एबाद, रामशंकर यादव, जावेद, अशोक यादव देव, संतोष यादव, मुकेश शुक्ला, यामीन खाॅ, राहुल सेन सक्सेना, राजेन्द्र सिंह गप्पू, प्रेमलता यादव, प्रदीप शर्मा ने अखिलेश यादव को फूलमालाओं से स्वागत किया।

कुर्सी बाजार बाराबंकी में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का बहुत ही भव्य स्वागत हुआ। यहां पूर्वमंत्री अरविन्द्र सिंह गोप, पूर्व साॅसद राम सागर रावत, पूर्व विधायक फरीद किदवई, जगदीप यादव, धीरेन्द्र वर्मा ,जरीना उस्मानी, मो0 शाहिद, चै0 कलीमुददीन,पूर्व विधायक रविदास मेहरोत्रा, राम मिलन यादव, अलीम किदवई, कुलदीप वर्मा,ज्ञान प्रकाश मिश्र तथा मौर्य समाज के जिलाध्यक्ष डा0 अम्बरीष कुमार ने अपने प्रिय नेता का शानदार स्वागत किया।
बाराबंकी सीमा पार करते हुए अखिलेश यादव का स्वर्गीय राम सेवक यादव के वंशज विकास यादव ने गांव अनवारी में और अमरसंण्डा में स्थानीय समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने समाजवादी क्रान्तिरथ को रोककर अपने प्रिय युवा नेता को मालाएं पहनाई।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रथ का महमूदाबाद, रेउसा, बिसवां, होते हुए सीतापुर पहुंचने पर जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। जनसमूह के उत्साह के चलते उनकी यात्रा काफी विलम्ब से सीतापुर पहुॅच सकी। अखिलेश यादव आज सीतापुर में ही रात्रि विश्राम कर रहे है और कल, 9 अक्टूबर,2011 को हरगांव, महौली, सिधौली होते हुए लखनऊ लौटते समय इटौंजा (बक्शी का तालाब) में आयोजित जनसभा को सम्बोधित करेगें।

Wednesday, October 5, 2011

समाजवादी धरा पर होगा क्रांति रथ यात्रा पर निकले समाजवादी संघर्ष के नायक का भव्य स्वागत - गोप

अरविन्द विद्रोही बाराबंकी जनपद की कुर्सी विधान सभा से समाजवादी क्रांति यात्रा ८ अक्टूबर को होकर गुजरेगी | क्रांति यात्रा के स्वागत की तैय्यारी में कोई कोर कसार ना रह जाये इसके लिए जनपद की इकाई के साथ समाजवादी पार्टी के विधायक व पूर्व मंत्री अरविन्द सिंह गोप अपने पुरे लाव लश्कर के साथ पुरे मनोयोग से जुटे हुये है | चौथे चरण के कार्यक्रम में बाराबंकी के कुर्सी से क्रांति रथ के निकलने की सूचना मिलते ही जनपद के अध्यक्ष मौलाना मेराज , महासचिव धीरेन्द्र वर्मा , रामनाथ मौर्या ,कुतुब्बुददीन अंसारी , अलीम किदवई , आदि प्रमुख नेताओ के साथ विचार-विमर्श किया |तत्पश्चात सबसे पहले कुर्सी विधान सभा के सभी संभावित प्रत्याशियो की बैठक जिला मुख्यालय में आयोजित करके क्रांति रथ यात्रा के कार्यक्रम के प्रचार - प्रसार करने की व सफल बनाने की जिम्मेदारी अलग अलग दी गयी | इस बैठक के बाद कुर्सी विधान सभा के ही सभी प्रमुख नेताओ की भी बैठक जिला मुख्यालय में आयोजित की गयी | संगठन के लोगो को इस बैठक में न्याय पंचायत स्तर पर क्रांति रथ यात्रा के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सौपी गयी | ३अक्तुबर को कुर्सी विधान सभा के रीवा-सीवा में ग्राम्य स्तर तक के नेताओ की एक वृहद् बैठक हुई जिसमे समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के द्वारा क्रांति रथ यात्रा के स्वागत की भूमिका स्थानीय स्तर पर बनायीं गयी | यहाँ सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि क्रांति रथ यात्रा की जनसभा का आयोजन कुर्सी बाज़ार में किया जायेगा | आज प्रातः ११बजे से ही समाजवादी पार्टी कार्यालय बाराबंकी में सभी घोषित प्रत्याशियो सहित संगठन के जिम्मेदार नेताओ ने पहुचना शुरु कर दिया | क्रांति रथ यात्रा की तैय्यारियो की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुये समाजवादी नेता अरविन्द सिंह गोप -विधायक ,पूर्व मंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में संघर्षो का ही परिणाम है कि आज क्रांति रथ यात्रा को अभूत पूर्व जन समर्थन मिल रहा है | आम जनता का रुख साफ़ बटा रहा है कि २०१२ के आम चुनावो में समाजवादियो की सरकार बनेगी | अरविन्द सिंह गोप ने कहा कि २०१२ के आम चुनावो में बसपा का सूपड़ा जनता साफ़ कर देगी | ८ को कुर्सी में क्रांति रथ यात्रा के नायक अखिलेश यादव के विचारो को सुनने के लिए ज्यादा से ज्यादा आम जनता कैसे पहुचे , यह जिम्मेदारी हमारी आपकी भी है | बसपा के तानाशाही जुल्मी शासन से ऊब चुकी जनता समाजवादी पार्टी को विकल्प मान चुकी है | अब जनता के साथ जुड़े रहना और उनकी उम्मीदों पर खरे उतारना समाजवादियो का काम है | बैठक कि अध्यक्षता जिला अध्यक्ष मौलाना मेराज और संचालन संगठन के महासचिव धीरेन्द्र वर्मा ने किया | वर्तमान विधायक समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता फरीद महफूज़ किदवई ने भावुक होकर कहा कि मैं पूरण समाजवादी और नेता जी मुलायम सिंह यादव का अनुयायी हूँ| अरविन्द सिंह गोप को मैं अपने दिल से छोटा भाई मानता हूँ| समाजवादी पार्टी के और मेरे व्यक्तिगत दुश्मन रोजाना नयी अफवाह फैलाते है , उन पर कतई ध्यान देने कि जरुरत नहीं है | हम सभी लोग मिलकर जनपद कि सभी6सीटो पर सपा का परचम लहराने में जुट चुके है | पार्टी का हर निर्णय हम सभी को मानना है | इस अवसर पर पूर्व सांसद राम सागर रावत ने जोश भरते हुये कहा कि जनपद बाराबंकी में समाजवाद कि जड़े इतनी गहरे है कि उनको हिलाना कोई आसान काम नहीं है | सभी सीते सपा जीतेगी और समाजवाद का परचम लहराया जायेगा | संचालन कर रहे समाजवादी पार्टी बाराबंकी के महासचिव धीरेन्द्र वर्मा ने सभी समाजवादी साथियो से कहा कि अब वो वक़्त आ गया है जब हमको अपनी एका की ताकत विपक्षियो को दिखानी है | ८ तारीख को क्रांति रथ यात्रा में इतनी जनता जुटा देनी है कि समाजवादी संघर्ष के नायक अखिलेश यादव को यह विश्वास हो जाये कि बाराबंकी में समाजवादी पार्टी जन जन में व्याप्त है | आज की बैठक में राम गोपाल रावत - जैतपुर विधान सभा के प्रत्याशी , सपा अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव अलीम किदवई , राम नाथ मौर्या , राम मगन रावत -प्रत्याशी हैदरगढ़ ,जिला उपाध्यक्ष राम चन्द्र मिश्र , ज्ञान प्रकाश मिश्र , इज़हार हुसैन , सुरेश यादव , डॉ कुलदीप सिंह ,चौधरी कलीमुद्दीन उस्मानी , उमाकांत श्रीवास्तव , राम मनोहर यादव , दुःख हरण यादव , ज्ञान सिंह यादव , इन्द्रेश सिंह ,फरजान उस्मानी ,आशीष त्रिपाठी , कामता यादव , यशवंत यादव , अलीम गुड्डू ,पारस चौहान ,मास्टर मुस्तफा , सरोज मौर्या , कमलेश यादव , श्याम प्रकाश त्रिवेदी ,नसीम गुड्डू, मोल्हे राम यादव , डॉ अम्बरीश शास्त्री ,जुबेर कमाल आदि प्रमुख नेता गण मौजूद रहे |

कुर्सी विधान सभा के विकास और स्थानीय मुद्दों पर लडूंगा चुनाव - सरवर अली

आखिर कार आज समाजवादी विचारधारा के जन नेता सरवर अली ने तमाम समर्थको - आम जनता के दबाव के चलते आगामी विधान सभा २०१२ में कुर्सी विधान सभा से चुनाव लड़ने का फैसला १६ अक्टूबर को इसरौली चौकी पर आयोजित सभा में सभी की सहमति से करने का निर्णय लिया | आज सुबह ८ बजे से ही उनके समर्थको ने उनके घर पर पहुचना शुरु कर दिया | १० बजे तक सैकड़ो स्थानीय नागरिको के आ जाने से और इनके दबाव के चलते सरवर अली काफिले के साथ आस पास के ग्रामो में भ्रमण और सलाह लेने के लिए निकल पड़े | दर्ज़नो ग्रामो का भ्रमण करने के दौरान सर्व समाज के व्यापक समर्थन और मुस्लिम समुदाय में उत्साह को देखते हुये १६ अक्टूबर को सभा का निर्णय लिया गया | भ्रमण के बाद ग्राम घमसड़ में एक सभा को संबोधित करते हुये समाजवादी नेता पूर्व विधायक सरवर अली ने कहा कि यह मेरी जन्म स्थली है |गाँव की प्रधानी से ,ब्लाक प्रमुख और विधायक बनने तक के सफ़र में मैंने हमेशा दबे , कुचले , मज़लूमो, वंचितों और और आप सभी के हित लिए संघर्ष किया है | लगभग ४० वर्षो के बाद कुर्सी विधान सभा सामान्य हुई है | दुखत बात है की कुर्सी को चारागाह समझ कर बाहरी लोग सिर्फ विधायक बनने के लिए आज हमदर्दी दिखने का नाटक करते घूम रहे है | इन अवसरवादी बाहरी तत्वों को कुर्सी विधान सभा से बाहर का रास्ता दिखाने में कोई कोर कसार नहीं छोड़ेंगे |इस मौके पर प्रमुख रूप से गणेश यादव , डॉ प्रताप , भगौती यादव , चौधरी हनीफ अंसारी ,हाजी हनीफ मंसूरी , पंडित सरजन महराज , प्रधान कौशल वर्मा , कौशल बी डी सी , शब्बू खान , रुखसार खान , हाजी अबरार खान , जुम्मन अंसारी ,मौलवी मोहायदीन , प्रधान मुन्ना अंसारी , लाल मोहम्मद राईन , यासीन अंसारी , श्री केशन गौतम , गयादीन रावत समेत सैकड़ो समर्थक थे |