Tuesday, November 15, 2011

मार-पीट करने वाले गुंडे कांग्रेसी नेताओ के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज हो

छात्र संघ बहाली की मांग को लेकर कांग्रेस के महासचिव राहुल गाँधी को ज्ञापन देने गये अभिषेक यादव ,अनिल यादव,आशीष यादव,कार्तिकेय यादव आदि को लातो-मुक्को से मारने वाले कांग्रेसी नेता रूपी अपराधी प्रमोद तिवारी,जीतीं प्रसाद,आर पी एन सिंह ,नसीब पठान के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग और राहुल गाँधी के उत्तर प्रदेश के लोगो पर दिये गये बयान के विरोध में बाराबंकी में भी समाजवादी पार्टी छात्र सभा के कार्यकर्ताओ ने जोरदार प्रदर्शन किया| समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश सचिव फरजान उस्मानी के नेतृत्व में रितेश जयसवाल,सैय्यद फैजी,पंकज वर्मा,चमन सिंह,हसनैन कुरैशी ,शशिकांत वर्मा,राहुल यादव,आशीष वर्मा,नीरज वर्मा,गणेश शंकर श्रीवास्तव,रमण सिंह,संदीप कुमार,टिंकू कुमार,सैफ खान लकी ,अदनान हुशेन,मो असद,ज्ञानेंद्र वर्मा,राहुल वर्मा ,विवेक चौधरी,शाने राजा ,मो इसरार भूरे,शोभित शुक्ल सहित दर्ज़नो छात्रों ने शहर के सिविल लाइंस स्थित कांग्रेस कार्यालय के सामने जमकर राहुल गाँधी मुर्दाबाद,कांग्रेस मुर्दाबाद ,छात्र संघ बहाल करो के नारे लगाये| छात्रों का भारी जमावड़ा देखकर पूरा प्रशासनिक अमला वहा आ गया| सी ओ सिटी दीपेन्द्र नाथ चौधरी व कोतवाली प्रभारी एस के सिंह ने कांग्रेस कार्यालय के पास दल बल के साथ पहुच करके छात्र सभा के छात्रों को समझा के वहा पर प्रदर्शन समाप्त करवाया| वहा से चल कर सभी छात्र छाया अम्बेडकर चौराहे पर पहुचे जहा पर राहुल गाँधी के चित्रों में आग लगा कर बाराबंकी के समाजवादी छात्रों ने अपना आक्रोश प्रकट किया| यहाँ आम जनता भी एकत्र हो गयी और जन समुदाय को संबोधित करते हुये सपा नेता फरजान उस्मानी ने कहा कि समाजवादी साथियो को मारने वाले कांग्रेसी नेताओ पर मार पीट करने का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए,हम सभी राहुल गाँधी के बयान की निंदा करते है जिसमे उन्होंने उत्तर प्रदेश के लोगो को भिखारी कहा है |

Wednesday, November 9, 2011

उत्तर प्रदेश की बदहाली और समाजवादियो-सामाजिक कार्यकर्ताओ का दायित्व

अरविन्द विद्रोही उत्तर प्रदेश के हालात दिन प्रतिदिन बाद से बदतर होते जा रहे है | सियासत की चक्की में आम जन की बात दीगर है , प्रशासनिक अधिकारी और विपक्षी दलों के नेता भी पिसते जा रहे है |उत्तर प्रदेश में सत्ता धारी बहुजन समाज पार्टी के हितो के विपरीत बात करने वाले अधिकारी पागल तक करार दिये जा रहे है ,कोई पागल हो या ना हो इतने यंत्रणा के बाद पागल होने की पूरी सम्भावना उत्पन्न हो ही जाती है | तानाशाही व नौकर शाही के दो पाटो के बीच बेचारा लोकतंत्र,मतदाता पिसता ही जा रहा है| लोकतान्त्रिक मूल्यों की स्थापित मान्यताओ की परवाह किये बिना जन आकांझाओ की अवहेलना करते हुये सरकारों का दमन कारी रवैय्या अपने चरमोत्कर्ष पे है|उत्तर प्रदेश की बसपा और केंद्र की कांग्रेस दोनों सरकारों का दमन चक्र आम जन की भावनाओ को दरिंदगी से कुचलता ही जा रहा है | लोकतंत्र में निर्वाचित सरकारों का जन विरोधी यह चरित्र शर्मनाक और लोकतंत्र को ख़त्म करने वाला चरित्र है| जनविरोधी तानाशाही सरकारों के कारण ही आज आम जन का विश्वास लोकतान्त्रिक व्यवस्था से डगमगा रहा है| आज हालात यह है की उत्तर प्रदेश में हर एक वर्ग बहुजन समाज पार्टी की कार गुजारियो से त्रस्त है |बसपा सरकार की गलत नीतिओ के खिलाफ जनता में जो आक्रोश दिखना चाहिए था ,अनवरत जारी सरकारी लूट ,दमन ,शोषण ,मनमानेपन के खिलाफ उबाल आना चाहिए था ,आखिर वो उबाल ,जनता का आक्रोश लगातार सड़क पर दिखाई क्यूँ नहीं दे रहा है? आम जन त्रस्त है ,यह सत्य है लेकिन संघर्ष से वास्ता नहीं रखना चाहती,आखिर क्यूँ? समाजवादी विचारक डॉ राम मनोहर लोहिया ने जनता की मनोदशा पे कहा था---- हिंदुस्तान जैसे देश में साधारण जनता यांकी गरीब आदमी क्रांति को इतना नहीं समझेगा,जितना कि राहत वाली राजनीति को |वह बराबरी को इतना नहीं समझेगा ,जितना कि बख्शीश को |उसको अगर थोडा बहुत पैसा मिलता रहे जीतने कि उसको आकांझा है,तो वह इसे ज्यादा पसंद करेगा,चाहे वह पैसा और समाज में उसका स्थान बहुत निचे दर्जे का हो,लेकिन कुछ मिला तो सही|जहाँ आदमी बहुत भूखा ,बहुत नंगा है ,बहुत दबा और गिरा हुआ है,वहां वह थोड़ी-बहुत छोटी-मोटी राहत की चीजों से प्रसन्न हो जाया करता है और उसको बराबरी की इच्छा कोई ऐसे सपने के जगत की काल्पनिक चीज मालूम होती है कि उसके लिए वह कुछ बहुत चिंता या सोच विचार करने को तैयार नहीं होता| ऐसा देखा गया है ,लेकिन यह खाली तुलनात्मक बात कह रहा हूँ| ऐसा ना समझना कि हमेशा के लिए एक भूखे और बहुत गरीब देश का गरीब आदमी क्रांति के बजाय राहत की राजनीति को,बराबरी के बजाय बख्शीश वाली नीति को पसंद करेगा |अगर ऐसा हो तो संसार में बदलाव कभी आ ही नहीं सकता|समय बीतते-बीतते ठोकर खाते-खाते दूसरी बातें भी दिमाग में आने लगती है| शायद अब वो वक़्त आ गया है हिंदुस्तान की राजनीति में जिसकी तरफ ,जिसके कभी ना कभी आने की बात डॉ लोहिया ने कही थी|आज तमाम संगठन जनता की आवाज़ बन के उभरे है,जनता में विश्वास की उमंग जगी है| भारत स्वाभिमान आन्दोलन की बाबा राम देव की अगुआई में जनजागरण यात्रा, अन्ना हजारे के अनशन,लाल कृष्ण आडवानी की लोकनायक जय प्रकश नारायण की जन्म स्थली से शुरु हुई रथ यात्रा ,युवा समाजवादी अखिलेश यादव की क्रांति यात्रा ने जनता की भावनाओ को उद्वेलित व जागृत करने का अनूठा काम किया है | उत्तर प्रदेश में समाजवादी आन्दोलन के आशा के केंद्र बिंदु बन चुके समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने डॉ लोहिया के विचारो के आधार पे मुद्दों की राजनीति की सकारात्मक शुरुआत की है जो उनके प्रति बन रहे जन आकर्षण का प्रमुख कारक है |आज जुल्म के खिलाफ लड़ने व एकजुट होने का समय आ गया है| कांग्रेस भ्रस्टाचार की जननी है इसको राजनीतिक नेपथ्य में करने और उत्तर प्रदेश को बसपा की माया सरकार से निजात दिलाने के किये सभी समाजवादियो और सामाजिक कार्यकर्ताओ को गैर कांग्रेसी गठबंधन बनाने की दिशा में काम करना चाहिए| डॉ लोहिया को मानने वालो,समाज हित में काम करने वालो,सरकारों के तानाशाही तरीको से त्रस्त जनों को देश-प्रदेश की सरकारों को उखाड़ फैकने की मुहिम में जुट जाना होगा और समाजवादी मूल्यों की सरकार बनाने के लिए अपना सर्वस्व लगाना पड़ेगा |

Monday, November 7, 2011

समाजवादी अलख


समाजवाद की अलख जगाने निकले और जन चेतना उत्पन्न करके भ्रष्ट-निरंकुश-जुल्मी बसपा सरकार को उत्तर प्रदेश की सत्ता से उखाड़ फैकने के लिए क्रांति रथ पे निकले समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव पुराने समाजवादियो-सामाजिक कार्यकर्ताओ के लिए एक आशा की किरण बन के उभरे है |अखिलेश यादव की क्रांति रथ यात्रा का ,उनका जगह जगह भव्य स्वागत और बड़ी बड़ी जन सभा आयोजित करने वालो को समाजवादी संघर्ष के नव-पुरोधा अखिलेश यादव की मेहनत से कुछ सबक लेना चाहिए | सिर्फ अखिलेश यादव के गले में माला पहना देने और जिंदाबाद के नारे लगा देने से ,मजमा जमा कर देने से बसपा की सरकार नहीं बदली जा सकती है|समाजवादी पार्टी के जनपद के संगठन कर्ताओ को समाजवादी चरित्र व सोच को अपनाने की जरुरत है | जरुरत है नव-पुरोधा अखिलेश यादव की तरह अपने -अपने विधान सभा में अनवरत समाजवादी अलख जगाने के लिए जनता की सवारी साइकिल पे सवार होकर निकल पड़ने की| डॉ लोहिया के विचारो की धार,धरती पुत्र मुलायम सिंह का आशीर्वाद और अखिलेश यादव के प्रभावी नेतृत्व के साथ जनता के बीच उनकी आवाज बनने की जरुरत है ना कि इलाके के मठाधिशो और सत्ता के दलालों के फेर में पड़ने की|

Tuesday, November 1, 2011

भावी मुख्यमंत्री हो सकते है बेनी प्रसाद वर्मा

समाजवादी अपने विचारो और कर्म से अपनी उपयोगिता साबित ही कर देता है,बाराबंकी के विकास पुरुष-धुर समाजवादी नेता बेनी प्रसाद वर्मा-केंद्रीय इस्पात मंत्री ने कांग्रेस में अपनी पकड़ बना के यह एक बार पुनः साबित कर ही दिया है | आगामी विधान सभा २०१२ में गाँधी परिवार अपने अलावा सिर्फ समाजवादी नेता बेनी प्रसाद के जनाधार को मानते हुये उनको भर पुर तवज्जो दे रहा है| बेनीप्रसाद वर्मा भी अपने पुराने संपर्को का इस्तेमाल करके कांग्रेस में समाजवादियो को महत्व पूर्ण जिम्मेदारी वा सम्मान दिलाने का भरोसा दिला कर कांग्रेस का कारवां बढ़ाने में रात दिन एक किये है| कुशल राजनीतिज्ञ , एक एक जनाधार वाले नेता को व्यक्तिगत रूप से जानने वाले बेनी प्रसाद युध्य स्तर पे अभी से अपनी राजनीतिक सेना सजाने लगे है |उनके समर्थक उन्हें भावी मुख्य मंत्री मान रहे है | गाँधी परिवार से मिल रही तवज्जो , व्यापक जनाधार और अपनी मेहनत के बूते बेनी प्रसाद वर्मा २०१२ के आम चुनाव के बाद मुख्य मंत्री बन सकते है,यह खबर चर्चा में आने से बाराबंकी में तो एक अलग ही माहौल बनता दिख रहा है| अपने द्वारा कराय गये विकास कार्यो के कारण जन जन में लोकप्रिय बेनी प्रसाद वर्मा के कारण कांग्रेस विरोधी एक बड़ा मतदाताओ का तबका भी कांग्रेस को मत करने का मन बनाने लगा है | मतदाताओ का आपसी चर्चा में कहना है कि बेनी प्रसाद वर्मा बाराबंकी का विकास करने और बाराबंकी में उद्योग धंधे लगवाने में कोई कसर नहीं रखेंगे इसलिए इनके साथ हम सभी को देना चाहिए | समाजवादी विचारधारा का गढ़ बाराबंकी में समाजवादी नेता बेनी प्रसाद वर्मा की बदौलत ही कांग्रेस का सांसद जीता था और आगामी विधान सभा में सभी सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी सीधे लड़ाई में रहेंगे यह अभी से दिखने लगा है| अपने अंतर विरोध और गलत टिकेट वितरण का आरौप झेल रही समाजवादी पार्टी बाराबंकी में मृत प्राय सी हो गयी है |

Monday, October 31, 2011

घट रहा है समाजवादी पार्टी का जनाधार

कल संपन्न हुये बाराबंकी के जैदपुर विधान सभा के समाजवादी कार्यकर्ता सम्मेलन में सपा जिला अध्यक्ष मौलाना मेराज के रवैये से हुये कार्यकर्ता नाराज़, स्थानीय कार्यकर्ताओ ने मेहनत की और मंच पे कब्ज़ा जमाया जिला इकाई ने,विधान सभा इकाई के किसी नेता को बोलने का नहीं दिया मौका | दरियाबाद से प्रत्याशी राजीव कुमार सिंह -विधायक के अलावा बाकी घोषित प्रत्याशी सपा नेतृत्व के निर्देशों को दरकिनार कर पहुंचे दूसरी विधान सभा के कार्यकर्ता सम्मेलन में | कार्यक्रमों में देर से पहुचने के कारण समाजवादी पार्टी के नेताओ से हो रहे है कार्यकर्ता और आम जनता नाराज़| विधान सभा स्तर के नेताओ को नज़र अंदाज़ करने से होगा भारी नुकसान , घोषित प्रत्याशी है अपने में मगरूर , बसपा विरोध और अखिलेश यादव की मेहनत के भरोसे लड़ रहे है चुनाव | घट रहा है समाजवादी पार्टी का जनाधार लेकिन समाजवादी पार्टी की जिला इकाई और प्रत्याशी बेफिक्र|

Thursday, October 27, 2011

बधाई विज्ञापनों के जरिये अपना हित साधने , राजनीति चमकाने की और पत्रकारों को लुभाने की कोशिश

हम सभी ने दीप पर्व दीपावली मना लिया | पूंजीपतियो ने जम कर अपनी पूंजी का प्रदर्शन करते हुये जमकर अपने आवास , अपने व्यापारिक प्रतिषठान की सजावट रंग बिरंगे बिजली के झालरों से करवाई | एक एक पूंजीपति परिवार ने सिर्फ आतिशबाजी में ही हजारो रुपये स्वाहा कर दिये| इनकी देखा देखी परिवार के सदश्यो के मन रखने के लिए , परंपरा निर्वाहन के नाम पे मेहनत कशो ने भी अपनी सामर्थ से ज्यादा का धन दीप पर्व को उल्लास पूर्वक मानाने में खर्च किया | व्यापारिक वर्ग ने एक तरफ जहा जम के कमाई कि वही दूसरी तरफ इन्ही व्यापारियो ने अधिकारिओ के घर जा जाकर मिठाई ,आतिशबाजी और मेवा , कपडे आदि उपहार स्वरुप रिश्वत भेट की | यही नहीं तमाम कमाई वाली जगह पर नियुक्त सरकारी कर्मचारी व अधिकारिओ ने भी अपने उच्च अधिकारिओ को भेट देने में कोई कोताही नहीं रखी | दीपावली का असली आनंद तो नौकरशाह , पूंजीपतियो , व्यापारियो ने जम कर उठाया | यही नहीं राजनीतिज्ञों ने भी दीपावली का जमकर उपभोग किया | दीप पर्व के बहाने जन संपर्क किया , बड़ी बड़ी होर्डिंग्स लगवाकर बधाई सन्देश दिया | जिन लोगो ने कभी किसी का भला नहीं किया वो भी बधाई संदेशो और विज्ञापनों के द्वारा बधाई देते नज़र आये | राजनीति में नेपथ्य में पड़े जनाधार विहीन , असामाजिक तत्वों ने भी आने वाले विधान सभा चुनावो को ध्यान में रखते हुये दीप पर्व की बधाई आम जनता को दे डाली | अपने पास अनैतिक तरीके से जमा किये गये धन का प्रयोग अब विभिन्न पर्वो में बधाई संदेशो और समाचार पत्रों में विज्ञापनों को देने में करने में ये तत्त्व तनिक भी गुरेज़ नहीं करेंगे | मीडिया जगत भी ऐसे तत्वों के शोषण का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता है | सिर्फ चुनावी बेला में बधाई देने वालो के मंसूबो को भांप के आम जनता और मिडिया जगत दोनों भरपूर आर्थिक दोहन करने के इंतज़ार में इन तत्वों का हौसला अफजाई कर रही है |