Saturday, December 31, 2011

स्वार्थी-सिद्धांत विहीन -दल बदलुओ से समाजवादी पार्टी को होगा नुकसान


अरविन्द विद्रोही...... मायावारी सरकार में वर्षो सत्ता सुख उठा चुके लोग अब वहुजन समाज पार्टी को ख़राब बता रहे है | बसपा से निकले जा रहे नेता,टिकेट ना मिलने से नाराज़ नेता , भ्रस्टाचार के आरोपों में घिरे और कार्यवाही के शिकार नेता अब बसपा सुप्रीमो मायावती को भला-बुरा कह रहे है | अवसरवादी, सिधान्त विहीन ,जनता के हित के विरोधी ,विकास के धन के लुटेरे नेताओ ने अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की तरफ रुख कर लिया है | समाजवादी पार्टी की पहचान उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार की नीतिओ की खिलाफत के कारण ही बनी है ,बसपा के जिम्मेदार रहे नेता जिस तरह समाजवादी पार्टी में महत्व पा रहे है उससे मतदाताओ में एक निराशा उत्पन्न हो गयी है | चुनावो में अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए बसपा से सपा में शामिल होने वाले तमाम दलबदलू नेताओ को सपा नेतृत्व द्वारा प्रत्याशी बना देना समाजवादी कार्यकर्ताओ और नेताओ को निराश करने वाला आत्म घटी कदम है | जिन नेताओ के इशारे पर समाजवादियो ने वर्षो प्रशासनिक अत्याचार सहे ,उन अत्याचारों के खिलाफ सड़क पर संघर्ष किया ,उन्ही बसपा से आये नेताओ के लिए समाजवादी कार्यकर्ता मत मांगेगा ,यह कितनी हास्यास्पद व शर्मनाक बात है | समाजवादियो की पहचान डॉ लोहिया के विचारो और जनता के हित के लिए किये गये संघर्षो से होती है ना कि सत्ता के दलाल प्रवृत्त के अवसर वादी,सिधान्त विहीन नेताओ से | समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संघर्ष की परिपाटी को जीवन्त करने का जो महती काम किया है , उन के उस काम को इन स्वार्थी तत्वों के समाजवादी पार्टी में आने से गहरा धक्का लगा है | उत्तर प्रदेश के आसन्न विधान सभा -२०१२ के चुनाव शुरु हो चुके है,यह निर्णायक घडी है, स्वार्थी-सिद्धांत विहीन - अवसर वादियो को बगल गिर बनाने से समाजवादी सरकार बनाने में मुश्किलें आएँगी,जनता इन स्वार्थी नेताओ से उब चुकी है ,ये जिस पार्टी में रहेंगे उसका ही नुकसान होगा | समाजवादी पार्टी को अपने संघर्ष शील नेताओ की जगह इनको महत्व नहीं देना चाहिए | जिस जिस विधान सभा में बसपा से आये हुये नेताओ को समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है वहा पर समाजवादी कार्यकर्ता हताश है, जिसका खामियाजा भी सपा को उठाना पड़ सकता है |

Wednesday, December 28, 2011

अन्ना का तमाशा

स्वामी राम देव जी को अब अन्ना के बुलावे पर आन्दोलन में शरीक नहीं होना चाहिए ,अपना भारत स्वाभिमान का आन्दोलन जारी रखना चाहिए | ये वही अन्ना टीम है जो अपने अलावा किसी को महत्व नहीं देती ,सिर्फ अपनी बात ही कहती रहती है | भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कामों से बने जन चेतना का लाभ उठा कर स्वामी राम देव जी के आन्दोलन से किनारा करने वालो का साथ नहीं देना चाहिए | जनता की भावना से खिलवाड़ करने वालो का साथ नहीं देना चाहिए | ...............अन्ना के तमाशे में इस बार नहीं जुटी जनता,तमाशा ख़त्म | अन्ना टीम को करना चाहिए आत्म मंथन , काठ की हांड़ी बार बार नहीं चढ़ती यह पुरानी कहावत है | तमाम दावो के बावजूद जनता के ना आने से,बिना किसी के अनुरोध के खुद ही वापस लिया अन्ना ने अनशन ,जेल भरो भी रद्द , नहीं होगा किसी का घेराव |

Saturday, December 24, 2011

किसान मसीहा थे चौधरी चरण सिंह - ज्ञान सिंह यादव

हमारे देश के विकास का आधार कृषि है|कृषि को उन्नत शील बनाने के लिए किसानों की माली हालत में बेहतर सुधार की जरुरत है |चौधरी चरण सिंह जी आजीवन किसानों के हित का काम व संघर्ष करते रहे |आज हमारी सरकारे किसानों के विकास में समुचित ध्यान नहीं दे रही है यह चिंता की बात है | चौधरी चरण सिंह जी किसानों के मसीहा थे ,उनके बताये रास्ते पर चलकर किसानों की दशा में सुधार लाया जा सकता है |यह विचार कुंवर ज्ञान सिंह यादव -जिला सचिव समाजवादी पार्टी बाराबंकी ने राम सेवक यादव चंदौली ,बाराबंकी में राष्ट्रीय सेवा योजना सामान्य कार्यक्रम में चौधरी चरण सिंह के जन्म दिन पर आयोजित गोष्ठी में व्यक्त किया | गोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ अहसान बेग ने तथा संचालन डॉ राम फेर ने किया | अपने संम्बोधन में डॉ अहसान बेग ने कहा क़ि चौधरी चरण सिंह ने अपने कार्यकाल में किसानों के हित की तमाम कल्याण कारी योजनाये लागु की और भ्रस्टाचार के खिलाफ मुहिम चलायी |संचालन कर रहे डॉ राम फेर ने कहा कि चौधरी साहब का साफ़ कहना था कि देश की खुशहाली का रास्ता खेत व खलिहान से होकर गुजरता है| बिना गाँवो की तरक्की के देश का सर्वांगीन विकास नहीं हो सकता है | आज चौधरी साहब के व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेकर किसानों के हित का काम करने की जरुरत है | गोष्ठी में कार्यक्रम अधिकारी शिव बालक यादव,संतोष कुमार यादव,मुख्य नियंता संतराम यादव,क्रीडा अधिकारी उमेश चन्द्र यादव ,प्रवक्ता सोनम यादव , डॉ अरविन्द कुमार वर्मा ,सतीश पांडे सहित सैकड़ो विद्यार्थी शामिल हुये |

सपा में मंथन जारी-कल प्रत्याशियो की बैठक

उत्तर प्रदेश विधान सभा २०१२ के आम चुनावो के लिए समाजवादी पार्टी में मंथन जारी, कल रविवार २५ दिसम्बर को लखनऊ समाजवादी पार्टी कार्यालय में घोषित सभी प्रत्याशियो की बुलाई गयी बैठक | बैठक में प्रत्याशियो को चुनावी अभियान में जीत के गुर सिखायेंगे समाजवादी पार्टी के आला नेता गण | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव करेंगे मुख्य रूप से प्रत्याशियो को संम्बोधित ,देंगे दिशा निर्देश |

Wednesday, December 21, 2011

किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह -----अरविन्द विद्रोही

राजनीति के ऐसे श्लाका पुरूष चौधरी चरण सिंह जिन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन काल में देश के दलितों,पिछड़ों,गरीबों और किसानों की बेहतरी के लिए संघर्ष किया,राजनीति में हिस्सेदार बनाया,का व्यक्तित्व एवं कृतित्व राजनैतिक-सामाजिक जीवन जी रहे लोगों के लिए अनुकरणीय है।आज हमारा मुल्क भारत भ्रष्टाचार के दलदल में फॅंसा है।जाति-विद्वेष,आतंकवाद,क्षेत्रवाद,साम्प्रदायिकता के झंझावातों में जनमानस पिस रहा है।नौजवान रोजगार के अभाव में कुण्ठित हो रहा है।गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर होता जा रहा है।अन्नदाता किसान खेत और बाजार दोनों जगह लूटा जा रहा है।विकास के नाम पर कृषि भूमि का अधिग्रहण किसानों के साथ-साथ देश को भी संकट की तरफ ले जा रहा है।जिस प्रकार अंधेरे में राह देखने के लिए प्रकाश पुंज की आवश्यकता होती है,उसी प्रकार जनसमस्याओं को समझने के लिए ह्दय तथा जनसमस्याओं से निजात पाने के लिए पथ-प्रदर्शकों की जरूरत होती है।गरीब,किसान,दलित,मजदूर को उसका अधिकार बतलाने वाले एवं आमूलचूल व्यवस्था परिवर्तन करने वाले चैधरी चरण सिंह की नीतिया।,विचार हमारे बीच दीपस्तम्भ की भांति विद्यमान हैं।

चैधरी चरण सिंह ने अपना सम्पूर्ण जीवन भारतीयता और ग्रामीण परिवेश की मर्यादा में जिया।बाबूगढ़ छावनी के निकट नूरपुर गांव,तहसील हापुड़,जनपद गाजियाबाद,कमिश्नरी मेरठ में काली मिट्टी के अनगढ़ और फूस के छप्पर वाली मढ़ैया में 23दिसम्बर,1902 को आपका जन्म हुआ।चैधरी चरण सिंह के पिता चौधरी मीर सिंह ने अपने नैतिक मूल्यों को विरासत में चरण सिंह को सौंपा था।चरण सिंह के जन्म के 6वर्ष बाद चौधरी मीर सिंह सपरिवार नूरपुर से जानी खुर्द गांव आकर बस गये थे।यहीं के परिवेश में चैधरी चरण सिंह के नन्हें ह्दय में गांव-गरीब-किसान के शोषण के खिलाफ संघर्ष का बीजारोपण हुआ।आगरा विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा लेकर 1928 में चैधरी चरण सिंह ने ईमानदारी,साफगोई और कत्र्तव्यनिष्ठा पूर्वक गाजियाबाद में वकालत प्रारम्भ की।वकालत जैसे व्यावसायिक पेशे में भी चैधरी चरण सिंह उन्हीं मुकद्मों को स्वीकार करते थे जिनमें मुवक्किल का पक्ष न्यायपूर्ण होता था।कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन1929 में पूर्ण स्वराज्य उद्घोष से प्रभावित होकर युवा चरण सिंह ने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया।1930 में महात्मा गाँधी द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन के तहत् नमक कानून तोडने का आह्वान किया गया।गाॅंधी जी ने ‘‘डांडी मार्च‘‘ किया।आजादी के दीवाने चरण सिंह ने गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिण्डन नदी पर नमक बनाया।परिणाम स्वरूप चरण सिंह को 6माह की सजा हुई।जेल से वापसी के बाद चरण सिंह ने महात्मा गाॅंधी के नेतृत्व में स्वयं को पूरी तरह से स्वतन्त्रता संग्राम में समर्पित कर दिया।1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भी चरण सिंह गिरफतार हुए फिर अक्तूबर1941 में मुक्त किये गये।सारे देश में इस समय असंतोष व्याप्त था।महात्मा गाँधी ने करो या मरो का आह्वान किया।अंग्रेजों भारत छोड़ों की आवाज सारे भारत में गूंजने लगी।9अगस्त,1942 को अगस्त क्रांति के माहौल में युवक चरण सिंह ने भूमिगत होकर गाजियाबाद,हापुड़,मेरठ,मवाना,सरथना,बुलन्दशहर के गंावों में गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किया।मेरठ कमिश्नरी में युवक चरण सिंह ने क्रांतिकारी साथियों के साथ मिलकर ब्रितानिया हुकूमत को बार-बार चुनौती दी।मेरठ प्रशासन ने चरण सिंह को देखते ही गोली मारने का आदेश दे रखा था।एक तरफ पुलिस चरण सिंह की टोह लेती थी वहीं दूसरी तरफ युवक चरण सिंह जनता के बीच सभायें करके निकल जाता था।आखिरकार पुलिस ने एक दिन चरण सिंह को गिरफतार कर ही लिया।राजबन्दी के रूप में डेढ़ वर्ष की सजा हुई।जेल में ही चौधरीचरण सिंह की लिखित पुस्तक ‘‘शिष्टाचार‘‘,भारतीय संस्कृति और समाज के शिष्टाचार के नियमों का एक बहुमूल्य दस्तावेज है।

दरअसल कुशाग्र बुद्धि के चरण सिंह का जुड़ाव आर्य समाज से भी था।1929 में गाजियाबाद आर्य समाज के सभापति चुने गये चरण सिंह ने आजादी की लड़ाई के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी।स्पष्ट वक्ता तथा दृढ़ संकल्पित चरण सिंह ने 1937 में प्रथम बार बागपत-गाजियाबाद क्षेत्र से प्रांतीय धारा सभा में चुने जाने के बाद ‘‘लैण्ड युटिलाइजेशन बिल‘‘ को पास कराने की चेष्टा की।किसान हितैषी इस बिल को ब्रितानिया हुकूमत ने रखने ही नहीं दिया।चैधरी चरण सिंह ने हिम्मत नहीं हारी तथा उन्होंने धारा सभा में एक ऋण निर्मोचन विधेयक रखा।इस विधेयक का विरोध तो कंाग्रेस के ही तमाम विधायको ने किया।ये ऐसे विधायक थे,जिनके ऋण पाश में लाखों गरीब,खेतिहर,मजदूर,किसान जकड़ा हुआ था।चौधरीचरण सिंह ने विधेयक के पक्ष में अकाट्य तर्क प्रस्तुत किये।ऋण निर्मोचन विधेयक धारा सभा में पास हो गया तथा किसान ऋण मुक्त हो गये तथा उनके घर-खेत नीलाम होने से बच गये।चैधरी चरण सिंह का कृषि विपणन पर लिखा लेख हिन्दुस्तान टाइम्स में 31मार्च और 1अप्रैल,1938 को छपा।इन लेखों को ही पढ़कर सर छोटूराम ने ‘मण्डी समिति ऐक्ट‘ को पंजाब में पाीरत किया था।उ0प्र0 की धारा सभा के भंग होने से यह बिल पास न हो पाया था।आजादी के बाद 1949 में इन्हीं प्रस्तावों को चैधरी चरण सिंह ने 1939 में 50प्रतिशत आरक्षण खेतिहर-मजदूर किसान के लिए आरक्षित करने की मांग नव निर्वाचित धारा सभा में की थी,परन्तु इस प्रस्ताव पर शोषण वादी नीति के संरक्षकों ने विचार भी नहीं किया।आजाद भारत में 1947 में चौधरीचरण सिंह ने पुनः कांग्रेस विधानमण्डल में यह प्रस्ताव रखा।इस विषय पर चौधरी चरण सिंह का लिखा लेख-‘‘सरकारी सेवाओं में किसान स।तान के लिए 50प्रतिशत का आरक्षण क्यों?‘‘किसानों की मनोदशा को उजागर करता है।कांग्रेस और कांग्रेस के नेता पं0नेहरू का मोह कृषि के प्रति न होकर बड़े उद्योगों के प्रति था,इसलिए किसान हितैषी यह बिल पारित न हो सका।यह चौधरी चरण सिंह ही हैं जिनके द्वारा तैयार किया गया जमींदारी उन्मूलन विधेयक ‘‘राज्य के कल्याणकारी निदेशक सिद्धान्त‘‘पर आधारित था।महात्मागाँधी के सच्चे अनुयायी चैधरी चरण सिंह द्वारा तैयार किया ‘‘जमींदारी उन्मूलन विधेयक‘‘विधानसभा में पारित हुआ तथा सदियों से खेतों में खून पसीना बहाने वाले मेहनतकश किसान भू-स्वामी बनाये गये।1जुलाई,1952 के दिन उ0प्र0 के पिछड़ों-भूमिहीनों को अपने पेशवा चरण सिंह की बदौलत हक मिला।इसी दिन प्रदेश में जमींदारी उन्मूलन विधेयक लागू हुआ।

दृढ़ इच्छा शक्ति के धनी चौधरीचरण सिंह ने प्रदेश के 27000पटवारियों के त्यागपत्र को स्वीकार कर ‘लेखपाल‘ पद का सृजन कर नई भर्ती करके किसानों को पटवारी आतंक से मुक्ति तो दिलाई ही,प्रशासनिक धाक भी जमाई।लेखपाल भर्ती में 18प्रतिशत स्थान हरिजनों के लिए चौधरी चरण सिंह ने आरक्षित किया था।क्रान्तिकारी विचारों के वाहक चरण सिंह ने एक और किसान हित का क्रांतिकारी कानून ‘‘उ0प्र0 भूमि संरक्षण कानून‘‘1954 में पारित कराया।1953 में आप के द्वारा पारित कराया गया ‘‘चकबन्दी कानून‘‘1954 में लागू हुआ तथा संगठित खेत तैयार करने के इस कानून के विषय में अमेरिकी कृषि विशेषज्ञ अलवर्ट मायर ने टिप्पणी की थी-‘‘चकबन्दी के काम को देखकर मुझे ऐसा लगा है कि यह अत्यन्त महत्व का काम गांवों के कृषि उत्पादन में क्रांति लाने वाला होगा।‘‘चौधरीचरण सिंह ने गरीब किसानों के हक में सस्ती खाद-बीज आदि के लिए कृषि आपूर्ति संस्थानों की स्थापना की।मुख्यम।त्री पद पर 3अप्रैल,1967 को आसीन होने के बाद चैधरी चरण सिंह ने कुटीर उद्योगों तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि की योजनाओं को क्रियान्वित करने की दृष्टि से सरकारी एजेंसियों द्वारा ऋण देने के तौर-तरीकों को सुगम बनाया,साढ़े छह एकड़ तक की जोत पर आधा लगान माफ कर दिया तथा दो रूपये तक का लगान बिल्कुल मा़फ कर दिया गया,किसानों की उपज,विशेषकर नकदी फसलों के लाभकारी मूल्यों को दिलाने की दिशा मे। महत्वपूर्ण निर्णय लिए,भूमि भवन कर समाप्त किया।सरकारी काम-काज में हिन्दी का शत् प्रतिशत् प्रयोग तथा 23तहसीलों में,जो उर्दू बाहुल्य थी,सरकारी गजट उर्दू में भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की।किसानों के लिए जोत-बही की व्यवस्था चरण सिंह की ही देन है।ब्रिटिश काल से चले आ रहे नहर की पटरियों पर चलने की पाबंदी को चौधरीचरण सिंह ने कानूनन समाप्त कराया।चैधरी चरण सिंह एक ऐसे नेता थे जिनकी ईमानदारी,नैतिकता और प्रशासनिक दृढ़ता के कारण उ0प्र0 में भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगा था।सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी समाप्त हो गई थी।17अप्रैल,1968 को चौधरी चरण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था।मात्र10माह में किसान व जनहित के ठोस कदम उठाने वाले चरण सि।ह 1969 के मध्यावधि चुनावों में 98 विधायक जिता लाये।17फरवरी,1970 को चैधरी चरण सिंह पुनः मुख्यमंत्री बने।चौधरी चरण सिंह ने सत्ता में आते ही कृषि उत्पादन बढ़ाने की नीति को प्रोत्साहन देते हुए उर्वरकों से बिक्रीकर उठा लिया।साढ़े तीन एकड़ वाली जोतों का लगान माफ कर दिया,भूमिहीन खेतिहर-मजदूरों को कृषि भूमि दिलाने के कार्य पर और जोर दिया।छह माह की अवधि में ही 6,26,338एकड़ भूमि की सीरदारी के पट्टे और 31,188एकड़ के आसामी पट्टे वितरित किये गये।सीलिंग से प्राप्त सारी जमीनें भूमिहीन हरिजनों तथा पिछड़े वर्गों को ही दी गई।भूमि विकास बैंकों की कार्यप्रणाली को और उपयोगी बनाया।गुण्डा विरोधी अभियान चलाया,कानून का राज कायम किया।बाद में केन्द्र में गृहमंत्री रहते हुए चरण सिंह ने ही मण्डल आयोग,अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की।1979में वित्त मंत्री तथा उपप्रधानमंत्री के रूप में राष्टीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक-नाबार्ड की स्थापना की।उर्वरकों व डीजल के दामों में कमी की,कृषि यंत्रों पर उत्पाद शुल्क घटाया,काम के बदले अनाज योजना लागू की।यह चैधरी चरण सिंह ही थे जिन्होंने महात्मा गाँधी की सोच के अनुसार ‘अंत्योदय‘योजना को प्रारम्भ किया।विलासिता की सामग्री पर भारी कर चैधरी चरण सिंह ने ही लगाये।मूल्यगत विषमता पर रोक लगाने के लिए कृषि जिन्सों की अन्तर्राज्यीय आवाजाही पर लगी रोक हटाई।लाइसेंस आवण्टन पर पाबंदी लगाई तथा लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया।बडी कपडा मिलों को हिदायत दी कि 20प्रतिशत कपडा गरीब जनता के लिए बनाये।पहली बार कृषि बजट की आवण्टित राशि में वृद्धि आपके कारण सम्भव हुआ।प्रधानमंत्री पद पर अल्प समय में ही ग्रामीण पुनरूत्थान मंत्रालय की स्थापना आपने ही की थी,जो इस समय ग्रामीण विकास मंत्रालय के नाम से जाना जाता है।

29मई,1987 को स्वर्ग सिधारे सादगी की प्रतिमूर्ति,किसान पुत्र चरण सिंह की ईमानदारी ने उनके भीतर निर्भिकता को जन्म देकर भारत के गरीबों-किसानों के मसीहा के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया।भ्रष्टाचार के विषय में चरण सिंह की स्पष्ट सोच कि भ्रष्टाचार उपर से नीचे की ओर चलता है,अक्षरशः सत्य है।चौधरी चरण सिंह आमजन के लिए वह दीप स्तम्भ हैं,जिसकी रोशनी के बिना उन्हें राह नहीं दिख सकती।आज भ्रष्टाचार,मॅंहगाई का दानव आम जन के हितों को लील रहा है,किसानों की भूमि अधिग्रहण मामलों ने किसानों व कृषि भूमि दोनों को खतरे में डाल दिया है।चैधरी चरण सिंह का चरित्र व सिद्धान्त इन समस्याओं रूपी दानवों से निपटने में आम जन व सरकारों का मददगार हो सकता है बशर्ते आम जन व सरकारें चैधरी चरण सिंह जैसे महापुरूषों को आत्मसात् करे।

Friday, December 16, 2011

सामाजिक न्याय की बात आने पर बिदकते क्यूँ है कुछ लोग

अरविन्द विद्रोही-------- संसद भवन में डॉ भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थल के समीप देश १६३ सांसदों ने सामाजिक न्याय की मांग को बुलंद करते हुये विगत बुधवार को धरना दिया| अपनी मांगो के लिए धरना देना ,ज्ञापन देना आदि संवैधानिक -लोकतान्त्रिक अधिकार भारत के सभी नागरिको को प्राप्त है और सांसद भी भारत के नागरिक ही है| अगर अनुसूचित जाती -अनुसूचित जनजाति के १६३ सांसद एक साथ लोकपाल में हिस्सेदारी यानि आरक्षण की मांग को लेकर धरना दे देते है तो इसमें बुराई क्या है ,यह समझ में नहीं आता है| सामाजिक न्याय के लिए भारत के सभी वर्गों ,सभी जातियो,सभी धर्मो का प्रतिनिधित्व प्रत्येक समिति ,प्रत्येक संस्था में करने में हर्ज़ ही क्या है? वंचितों को आगे लाकर समाज व देश की तरक्की में सभी की हिस्सेदारी करवाने से देश -समाज में समानता ही फैलेगी| समता और समानता समाज के लिए बहुत जरुरी तत्त्व है,भारतीय समाज को सामंतवादी सोच से बाहर आकर सामाजिक न्याय की दिशा में निरंतर अग्रसर होते रहना चाहिए| लोकजनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम विलास पासवान के नेतृत्व में बुधवार को अनुसूचित जाती-अनुसूचित जनजाति के १६३ सांसदों ने धरना देकर ,लोकपाल में सभी वर्गों -जातियो को शामिल किये जाने सम्बंधित ज्ञापन भारत के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को देकर सामाजिक न्याय के एक सज़ग प्रहरी की भूमिका निभाई है |लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान एक दलित नेता के रूप में सैदेव अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे है| सशक्त लोकपाल के लिए चल रहे आन्दोलन और संभावित लोकपाल गठन में सामाजिक न्याय की अनदेखी यक़ीनन समाज के वंचित-दलित तबके की अनदेखी करने उनको पीछे धकेलने सरीखा कृत्य है | देश-समाज के बड़े तबके को देश के बड़े ,संवैधानिक निर्णयों को निर्धारित करने में भागीदारी ना देकर ,निर्णायक संस्थाओ में उनकी भागीदारी सुनिश्चित ना करके , आरक्षण ना देकर के देश -समाज को तोड़ने व आपसी कटुता उत्पन्न करने का काम डॉ लोहिया के अनुयायी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे | आज डॉ लोहिया के एक शिष्य राम विलास पासवान ने सामाजिक न्याय के सवाल को लोकपाल गठन में उठा कर डॉ लोहिया के तात्कालिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष के सिधान्त को साकार कर दिया है| राम विलास पासवान ने टीम अन्ना और केंद्र सरकार की मंशा पर जो सवाल उठाये है कि दोनों पक्ष लोकपाल के पैनल में दलितों,पिछडो,महिलाओ सहित सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के प्रति गंभीर नहीं है , पूर्णतया सत्य ही है | सरकार और अन्ना टीम दोनों लोकपाल मसले पर तानाशाओ सा आचरण करती दिखाई देती है | अपनी बात के अलावा किसी की बात स्वीकार ना करने की अन्ना टीम की जिद्द ने उसका गैर लोकतान्त्रिक चेहरा सबके सामने ला ही दिया है | देश की दलित राजनीति में दलितों के हित में लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान ने सदैव सार्थक लडाई लड़ी है ,पहल की है | लोकपाल के लिए चल रहे आन्दोलन ,उसके गठन की कवायत,के बीच लोकपालो की नियुक्ति में सभी वर्गों के लिए आरक्षण की मांग उठा कर राम विलास पासवान एक बार पुनः दलित राजनीति ही नहीं सामाजिक न्याय की लडाई के सबसे बड़े पैरोकार,सेनानी के रूप में सामने आये है | १६३ सांसदों की संख्या मामूली नहीं होती है और यह सिर्फ इन सांसदों की नहीं देश के सभी वंचितों,दलितों,महिलाओ तथा सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले लोगो की मांग व आवाज है कि निर्णयों और अधिकारों में भागीदारी मिलनी ही चाहिए | डॉ राम मनोहर लोहिया के अनुययियो में से एक राम विलास पासवान ने बगैर राजनीतिक नफा-नुकसान की परवाह किये हक़ की जो आवाज़ बुलंद की है ,उस हक़ की लडाई में सभी समाजवादियो और डॉ लोहिया के लोगो को जुटना ही पड़ेगा |

Thursday, December 15, 2011

ग्रामीण भारत के आम जन और उनकी अभिलाषा


अरविन्द विद्रोही ........ भारत एक कृषि प्रधान देश है| भारत की बहुसंख्यक आबादी कृषि से ही जुडी है| आज भी भारत की बहुसंख्यक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण जीवन से सरोकार रखती ही है| ग्रामीण अंचलों में आजादी के पश्चात् विकास के अनियंत्रित रथ ने ग्रामीणों और ग्रामीण अंचलों के विकास के स्थान पर कृषि की आधार-भूत ढांचे पर ही प्रहार किया | ग्रामीणों की कृषि योग्य बेश कीमती उपजाऊ भूमि का हरण आजाद भारत की सरकारों ने ब्रितानिया सरकार के बनाये एक काले कानून भूमि अधिग्रहण अधिनियम १८९४ के बलबूते ,सत्ता की हनक और संगीनों के जोर पर जम कर किया| भारत की ग्रामीण जनता अपनी बेबसी को आखिर कब तलक जीती? अपनी जमीन को बचाने के लिए भारत के ग्रामीणों ने एकता के सूत्र में बंधना और भारत की ग्राम्य व्यवस्था को तहस नहस करने वाले इस काले कानून की खिलाफत करना शुरु किया | किसान शक्ति के तमाम धरना,प्रदर्शन, आन्दोलन और किसानों के बलिदान के बाद इस काले कानून में बदलाव की पहल हुई| एक तरफ भारत के शहरी इलाको में विकास कार्यो में वृद्धि और दूसरी तरफ ग्रामीण भारत के ढांचे के प्रतिकूल विकास के नित नए कीर्तिमान कायम करने की होड़ ने ग्रामीणों के मन को व्यथित कर डाला है| कंक्रीट के जंगलो की मार से तड़प रहा किसान ,लाभ कारी फसलो के लिए क़र्ज़ लेकर घाटा उठा कर जान देने पर विवश किसानों की मनो दशा समझने की दिशा में पहल जरुरी है | नकली खाद,नकली बीज , बिजली की किल्लत, बढ़ते डीज़ल के दाम ,नहरों में खेत तक समुचित पानी ना आने की समस्या , कृषि लागत में वृद्धि, नहर कटान से उपजे हालात, कभी बाढ़ तो कभी सूखे से बेजार और परेशान अन्न दाता किसान अपनी आर्थिक दशा और अपने परिवार की सामाजिक-शैक्षिक दशा सुधरने के लिए जी जान से हाड तोड़ मेहनत-मसक्कत करता है | क्या गर्मी,क्या बरसात,क्या सर्दी की सर्द रात और क्या गर्म लू के थपेड़े , अन्न दाता किसान कृषि पैदावार के लिए हर मौसम में अपने खेत-खलिहान में मौजूद रहता है | अपने परिवार के भरण-पोषण और हमारे-आपके खाने के लिए अन्न उपजाने वाले किसान की आर्थिक-सामाजिक -शैक्षिक दशा में सुधार के रास्ते तलाशने की जिम्मेदारी हमारी सब की भी बनती है| किसानों की दशा में सुधार के रास्ते तलाशने के लिए किसानों के ही मन को टटोलने का निश्चय किया और किसानों की अद्भुत ज्ञान परक सोच को जान कर एक सुखद अनुभूति का अनुभव भी किया | क्या खेती किसानी में लगे किसानों से कभी ग्राम्य स्तर पर विकास परक योजना के निर्धारण,उनके क्रियान्वयन के बारे में सलाह मशविरा करना शुरु होगा ? ग्राम्य पंचायतो के प्रस्तावों पर विकास कार्य ना होकर सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से चुनावी लाभ हेतु विकास कार्य व विकास परक योजनाओ की घोषणा का सिलसिला भारत-भूमि को तेज़ी से गहरे खाई की तरफ ले जा रहा है| खुद का चुनाव जीतने के लिए,अपने सगे-सम्बंधियो को जिताने के लिए,अपने संगठन के लोगो को जिताने के लिए अब सरकार में शामिल मंत्रियो ने सामाजिक-राजनीतिक नैतिकता को त्याग कर सरे-आम बेशर्मी पूर्वक प्रलाप शुरु कर दिया| अपने संवैधानि कर्तव्यों के पालन की जगह सिर्फ चुनावी लाभ हासिल करने के छुद्र मानसिकता के चलते चुनावी लाभ के लिए विकास कार्यो और वायदों की बरसात करने वाले नेता व मंत्री निष्पक्ष चुनावो की प्रक्रिया को सरेआम अपने सत्ता के रथ पर सवार होकर रौंदते चले जा रहे है और आम आदमी की बिसात ही क्या भारत का चुनाव आयोग भी एक बेबस निरीह संस्था की तरह सिर्फ अधि-सूचना का इंतज़ार कर रहा है | राजनेताओ की मनमानी और भ्रस्टाचार के इस अदभुत स्वरुप को देख कर ब्रितानिया हुक्मरानों के शासन की याद ताजा हो जाती है,जहा भारत की आम जनता की चिंता ना उस सरकार को थी ना इन सरकारों को है| सरकारे आम जनता के विश्वास को लुटने के लिए ,उनके मताधिकार के संवैधानिक अधिकार को लोभ जाल में फंसा कर हड़पने के लिए जनता के धन का चुनावी लाभ हेतु इस्तेमाल कर रही है| एक विधायक,एक सांसद के अपने विधान सभा,अपने संसदिए इलाके के प्रति क्या कर्त्तव्य है,क्या यह भी इन निर्वाचित प्रतिनिधिओ को ज्ञान नहीं है? क्या सरकारों में शामिल मंत्रियो को सिर्फ अपने इलाके में या जहा से उनके पुत्र या सगे -सम्बन्धी चुनाव लड़ने वाले हो ,अपने मंत्रालय का सारा धन वही लगाना राजनीतिक गिरावट और भ्रस्टाचार नहीं ? बुनियादी बदलाव की जगह तात्कालिक लाभ के लोभ में फंस कर इन स्वार्थी राजनेताओ के मकड़ जाल में आम आदमी दिन प्रति दिन कसता ही जा रहा है| ग्रामीण इलाको ,ग्रामीण जनता ,मेहनत कश तबके के सर्वांगीन विकास की एक ठोस पहल ,एक सकारात्मक कार्य योजना आज तक क्रियान्वित नहीं हो सकी है| चुनावी लाभ के लिए टुकडो टुकडो में लागु की जाने वाली विकास योजना सिर्फ छलावा ही साबित होती है जिस से आम जन की जगह चन्द लोगो की तरक्की और शानो-शौकत में वृद्धि होती है | ग्रामीण जनता के लिए ,उसके जीवन के स्तर को उच्च स्तर पर लाने के लिए अब कंक्रीट और इस्पात की नहीं, खेती- किसानी के लिए किसानों के उपज में लागत के अनुपात में मूल्य निर्धारित करने की जरुरत है | ग्रामीण जनता का भला ना कंक्रीट की इमारतो से हुआ है और ना ही इस्पात के जाल से हो सकता है,ये सिर्फ विकास के एक पहलु ,एक टुकड़े ही है | समग्र विकास की पहल ग्रामीण जनता के जीवन दशा, उनके परंपरा-गत पेशे ,बुनियादी शिक्षा-स्वास्थ्य - कृषि आधारित रोजगार ,वाजिब-लाभकारी मूल्यों के निर्धारण और सबसे बढ़कर उनमे आत्म विश्वास जगाने से होगा| यह आत्म विश्वास जगाने का काम भ्रष्ट नेता नहीं करेंगे ,ये स्वार्थी और भ्रष्ट नेता सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने के लिए आम जनता के सम्मुख विकास के नाम पर लोभ का पिटारा खोलते है |जनता की मेहनत की कमाई से बने सरकारी खजाने और उसी सरकारी खजाने के धन को बेशर्मी पूर्वक सिर्फ अपने राजनीतिक लाभ के मद्दे नज़र इस्तेमाल नहीं लुटाते हुये इनको तनिक भी लाज नहीं आती ,कारण सिर्फ आम जनता की ख़ामोशी ही है| आम जनता की ख़ामोशी तोड़ने का काम ,ग्रामीण जनता के बीच जाकर इन स्वार्थी मंत्रियो-नेताओ के स्वार्थी मंसूबो को बताने और जन चेतना जगाने का काम अगर भारत की तरुनाई आगे बढ़ कर अपने मजबूत कंधो पर ले लेवे और जुट जावे इनके चेहरों से नकाब हटाने की मुहिम में तब सत्ता ही नहीं व्यवस्था परिवर्तन से भी कोई नहीं रोक सकता | आज जरुरत समग्र चेतना जगाने और ग्रामीण इलाको की जनता के मन को समझने की है,ग्रामीण मन अब शोषक वर्ग से त्रस्त हो चुका है,नित नए अंट-शंट आन्दोलनों ने आम जन को निराश ही किया है| ग्रामीण मन भारत का वास्तविक मन है,इसकी अभिलाषा को ना जानने की इच्छा शक्ति सरकारी में है,ना ही इनकी समग्र विकास से वास्ता| ग्रामीण इलाको में विकास कार्य सिर्फ चुनावी लाभ के लिए होते है ना की ग्रामीणों की तरक्की के लिए | ग्रामीणों के लिए बनी सार्थक योजनाये भी स्वार्थी सरकारों के नापाक मनसूबों और भ्रष्ट नेता-भ्रष्ट नौकरशाह -अपराधी के काकस में तम तोड़ कर सिर्फ जेब भरने का जरिया बन गयी है |आज जरुरत ग्रामीण अंचलो में जागरूकता की और संवैधानिक अधिकारों को हासिल करने की लडाई लड़ने की है| ग्रामीण इलाको में लोगो के पास तन ढकने को कपडा नहीं है, उनके पास इतना पैसा नहीं है की वो सलीके का वस्त्र खरीद कर पहन सके और पूंजी वाद की बेरहम चक्की में मेहनत कशो-किसानों-युवाओ के हक़ को पिस कर शोषक वर्ग के लोग शहरो-महानगरो में अपना तन दिखाने के लिए नाना प्रकार के हजारो रूपये के वस्त्र खरीदते और पहनते है| ग्रामीण मन अन्दर ही अन्दर अपने शोषण के खिलाफ जल रहा है,ज्वाला मुखी के मुहाने पर बैठा यह समाज किसानों-मेहनत कशो की मेहनत की गाढ़ी कमाई पर ऐश कर रहा है और अंजाम की परवाह भी नहीं कर रहा है| अगर किसी युवा का आक्रोश तमाचे के रूप में एक मंत्री के मुंह पर जा पड़ता है तब कोहराम मचाने में ये स्वार्थी नेता तनिक भी संकोच नहीं करते और अपने द्वारा आम जन के हितो पर प्रति दिन -प्रति पल कुठारा घात करते समय इनको शर्म भी नहीं आती| जुल्मी-निरंकुश सरकारों के खिलाफ संघर्ष करना और उनको उखाड़ फैकना आज के ग्रामीण भारत के मन की अभिलाषा है| जनता की अभिलाषा पर खरे उतरने वाले राजनीतिक नेतृत्व का अभाव ही भ्रष्ट सरकारों के लिए संजीविनी का काम कर रहा है, समाजवादियो ,जनता के लिए संघर्ष करने वाले संगठनो और राष्ट्र वादियो को ग्रामीण मन के अनुसार चलना चाहिए | भ्रष्ट सरकारों के खिलाफ जनता से जुड़े संघर्ष शील राजनीतिक नेताओ को लोकतान्त्रिक अधिकारों को हासिल करने के लिए चुनाव लड़ना चाहिए या किसी इमान दार ,जन नेता ,समाजवादी चरित्र-सोच के प्रत्याशी की भर-पुर मदद करनी चाहिए | जनता के लिए संघर्ष करने वाले ही जनता के लिए काम कर सकते है ,जोड़ तोड़ व मौका परास्त राजनीति करने वाले सिर्फ स्वार्थ सिद्ध करेंगे यह निश्चित व ध्रुव सत्य है |सामाजिक - राजनीतिक व्यवस्था परिवर्तन के लिए आम जन के हितैषियो को लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत जन प्रतिनिधि निर्वाचन हेतु आगे आना चाहिए ,बगैर लोकतान्त्रिक ताकत हासिल किये व्यवस्था परिवर्तन नहीं किया जा सकता है|