Sunday, March 4, 2012

आज समाजवादी पार्टी कार्यालय लखनऊ

आज समाजवादी पार्टी कार्यालय लखनऊ में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ,शिवपाल सिंह यादव -नेता प्रति पक्ष , प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी,मधुकर द्विवेदी मौजूद रहे | पार्टी कार्यालय में महामंत्री राम आसरे विश्व कर्मा , पूर्व मंत्री शत रूद्र प्रकाश ,दरियाबाद विधायक राजीव कुमार सिंह , राजेश यादव उर्फ़ बबलू , कुलदीप वर्मा . पंकज सिंह आदि नेताओ सहित सैकड़ो कार्यकर्ता मौजूद थे | शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव दोनों लोगो ने पत्रकारों के द्वारा पूछे गये प्रश्न का उत्तर दिया | बेनी प्रसाद वर्मा - केंद्रीय इस्पात मंत्री के द्वारा कि गयी टिप्पणी के सन्दर्भ में पूछे जाने पर सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कोई टिप्पणी नहीं किया और एक मंझे हुये राजनीतिक होने का परिचय उनके इसी अंदाज़ से मिला |सपा कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार ए पी दीवान जी , दिलीप सिंह जी, प्रमोद श्रीवास्तव से मुलाकात हुई | आज सपा कार्यालय में कलाकार चरित्र व प्रवृति के एक नए नवेले नेता जी के तौर तरीको और भाव भंगिमा देख कर उनके ऊपर गुस्सा आया और साथ ही अफ़सोस भी हुआ कि समाजवादी पार्टी ने कैसे इस गैर राजनीतिक चरित्र के कलाकार को पार्टी में पदाधिकारी बना दिया | अभी से सरकारी कामों को करवाने का वायदा करते और अखिलेश यादव से दोस्ताना सम्बन्ध होने की बात करते मैंने खुद सुना | खैर किसी दिन ये भी खबर बन के सबके सामने आ ही जायेंगे ,हरकते तो ऐसी ही है कि लेन- देन की बात करते कोई भी फिल्मा लेवे | जब मुलायम सिंह यादव सपा कार्यालय से चले गये तब पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी जी से इत्मिनान से वार्ता हुई | राजेंद्र चौधरी जी के मित्र डी वी सिंह ने कल ही मुझसे कहा था कि मेरी बात करवा देना सो उनसे बात करवाई | जब राजेंद्र चौधरी जी के साथ उनके कमरे से निकला तभी बुंदेलखंड की युवा नेत्री कृष्णा यादव ने अपने द्वारा चुनाव में किये गये प्रचार की तमाम खबरे राजेंद्र चौधरी जी को दिखाई , साथ होने के कारण मैंने भी देखी | तत्पश्चात वहा से रवाना होकर इंकलाबी नज़र के ऑफिस में समन्वय संपादक राजेश श्री नेत्र जी से और लोकमत ऑफिस में उप संपादक प्रणय मोहन सिंह जी से मिला | उसके बाद अमीनाबाद में खरीददारी करी और बाराबंकी घर वापस |

समाजवादी पार्टी पे एक लेख---अरविन्द विद्रोही

उत्तर प्रदेश विधान सभा के आम चुनाव २०१२ के परिणाम आने में सिर्फ २ दिन शेष है | आज एक अजीब बात हुई , लखनऊ से प्रकाशित एक बड़े अख़बार के संपादक ने सुबह सुबह मुझे फ़ोन करके समाजवादी पार्टी पे एक लेख तैयार करके भेजने को कहा | यह वही अख़बार है जिसने आज से २ साल पहले फरवरी २०१० में मेरे द्वारा मुलायम सिंह यादव पे लिखे एक लेख को छापने से मना कर दिया था|लेकिन मुलायम सिंह यादव पे लिखा मेरा वह लेख डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में मध्यांतर पेज ९ पर २४ फरवरी,२०१० को प्रकाशित हुआ जिसके बाद तमाम वरिष्ट समाजवादियो ने मेरे लेखन को सराहा और मेरा उत्साहवर्धन किया | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव , उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव ,प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ,अहमद हसन -नेता विधान परिषद् सहित वरिष्ट पत्रकार व डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट के स्थानीय संपादक अरविन्द चतुर्वेदी जी , प्रभात राय जी , स्वामी अग्निवेश जी , सीधी खबर के संपादक संजय सिंह जी , युवा पत्रकार अतुल सिंह जी ,राजेश भारती बाबा,पटेश्वरी प्रसाद ने मेरे द्वारा लिखे गये समाजवादी आन्दोलन और डॉ लोहिया के विचारो पे आधारित लेखो को बार बार सराहा और मार्गदर्शन भी किया | मैंने निर्णय ये लिया है कि जिन अखबारों ने अभी तक डॉ लोहिया और समाजवादी पार्टी के नेताओ पे लिखे मेरे लेखो को छापने से इंकार किया था ,उनको इन मुद्दों पे लेख अब उनके द्वारा मांगने पे भी नहीं प्रेषित करूँगा | दिल्ली से प्रकाशित हरिभूमि जिसके संपादक ओमकार चौधरी जी है का भी ह्रदय से धन्यवाद जिन्होंने मेरा लिखा एक लेख १२ अक्टूबर ,२०११ को सम्पादकीय पृष्ट पे प्रकाशित किया था | आज की तारीख में सभी जगह सभी पत्रकार अखिलेश यादव के बारे में वही लिख रहे है जो पिछले वर्ष से ही में लिखता रहा हूँ | ---

Saturday, March 3, 2012

राजनीति में सिद्धांतहीन गठबंधन

उत्तर प्रदेश में चुनावी नतीजों पर चर्चा-परिचर्चा जोरो से जारी है | ६ मार्च को परिणाम आने पे किसी एक दल को बहुमत ना मिलने कि स्थिति में राजनीति में सिद्धांतहीन गठबंधन के बलबूते देखते है कौन सरकार बनाता है ? सत्ता के सुख के लिए सिद्धांतो का त्याग कौन करेगा ? किस आधार पे समर्थन दिया और लिए जायेगा ? चुनाव के दौरान एक दुसरे की जम कर आलोचना करने वाले दलों के नेता कैसे बगलगीर होंगे , ये भी शायद देखने को मिल ही जाये | बसपा और कांग्रेस की सरकारों के खिलाफ समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश में जिन मतदाताओ ने अपना समर्थन और मत दिया है,उनकी निगाहें चुनाव परिणामो के बाद सत्ता के लिए बनने वाले गठ बंधन पे भी रहेंगी| जिनके विरोध में मतदाताओ ने मत दिया है , उनके साथ गठ बंधन करके सत्ता हासिल होते देख के क्या बीतेगी ? उत्तर प्रदेश में किसी को भी स्पष्ट बहुमत ना मिलने की सूरत में अगर बसपा या कांग्रेस किसी के समर्थन से या किसी को समर्थन देकर सरकार बनाती है तो एक बार दुबारा से मतदाता ठगा जायेगा |

Friday, March 2, 2012

कुशल वक्ता ,उच्च कोटि के लेखक, क्रांतिकारी लाला हरदयाल

अरविन्द विद्रोही .................. प्रतिदिन सूर्य उदय होता है ,अस्त होता है ,रात्रि अपना अंधकार फैलाती है | मानव जीवन की शुरुआत का अर्थ ही मौत का निश्चित आना है | ३ मार्च की रात विलक्षण प्रतिभा के धनी लाला हरदयाल जो सोये तो सोते ही रह गये | ४ मार्च की सुबह अनपेक्षित रूप से वे फिलाडेल्फिया-अमेरिका में मृत्यु की आगोश में चले गये | लाला हरदयाल कुशल वक्ता व उच्च कोटि के लेखक थे | दीनबंधु एंड्रूज के अनुसार यदि लाला हरदयाल का जन्म शांति के समय में होता तो वो अपनी बुद्धि का उपयोग आश्चर्य जनक कार्यो के लिए करते | लाला हरदयाल ने उन्हें विलक्षण आदर्श वादी करार दिया | पेशकार गौरी दयाल माथुर के पुत्र रत्न रूप में लाला हरदयाल का जन्म दिल्ली में हुआ था | सेंट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से कला स्नातक की उपाधि लाला हरदयाल ने ली | राजकीय कॉलेज लाहौर से एक ही वर्ष में अंग्रेजी साहित्य में तथा अगले वर्ष इतिहास में परास्नातक किया | दिल्ली में लाला हरदयाल क्रान्तिकारियो के प्रति आकर्षित हो गये | मास्टर अमीर चन्द्र ,भाई बाल मुकुंद और हनुमंत सहाय जैसे विख्यात क्रांतिकारी इनके मित्र थे | लार्ड हार्डिंग्ज बम कांड में चार क्रान्तिकारियो को सजा मिली थी | उच्च शिक्षा के लिए आप लन्दन गये ,फिर कुछ दिन बाद भारत वापस लौट आये | लाला हरदयाल ने कुछ समय के बाद लाहौर में एक संस्था की स्थापना की यहाँ उनकी मुलाकात लाला लाजपत राय से हुई | लाला हरदयाल ने स्वदेशी मंत्र को अपने जीवन में आत्म सात कर लिया था | भारत सरकार और आक्सफोर्ड विद्या पीठ की छात्र-वृत्ति को नकार दिया था | अंग्रेजी पोशाक को भी ठुकरा दिया था | निमोनिया होने पर घर की बनी हुई दवाइयों का सेवन किया | लाहौर के आश्रम में रहते हुये लाला हरदयाल ने पंजाबी भाषा में अख़बार निकाला | लाहौर के आश्रम में कार्यकर्ताओ की भर्ती के लिए लाला हरदयाल कानपुर के प्रसिध्द वकील पृथ्वी नाथ समाजसेवी के घर पधारे | उनके सादगी पूर्ण और तपस्वी जीवन का युवको पर बहुत प्रभाव पड़ा | पंजाब में अकाल के दौरान संकट ग्रस्त लोगो की जो सेवा उन्होंने की थी , उसके कारण उनकी लोकप्रियता बहुत बढ़ गयी थी | पुलिस लाला हरदयाल को गिरफ्तार करने का मौका तलाशने लगी | लाला लाजपत राय ने लाला हरदयाल को भारत छोड़ कर विदेश जाने के लिए प्रेरित किया | लाला हरदयाल कोलम्बो मार्ग से इटली होकर फ्रांस पहुचे | फ्रांस में श्याम जी कृष्ण वर्मा और उनके सहयोगी दल सक्रिय था | मैडम कामा ने वन्देमातरम अख़बार का संपादक लाला हरदयाल को बना दिया | प्रथम अंक मदन लाल धींगरा की स्मृति को समर्पित किया गया | वन्देमातरम के अंक बलिदान गाथाओ से भरे होते थे | भारतीओं को देश भक्ति की प्रेरणा मिलती थी- वन्देमातरम के अंको से | ब्रिटिश सरकार की नज़रे लाला हरदयाल को तलाशते हुये पेरिस आ गयी | ब्रिटिश सरकार फ्रांस सरकार पर क्रान्तिकारियो की गिरफ़्तारी के लिए दबाव बनाने लगी | इन परिस्थितियो में लाला हरदयाल इजिप्ट-मिस्र चले गये | वहा इजिप्शियन क्रान्तिकारियो से परिचय हुआ | कुछ समय बाद वे पुनः पेरिस आये परन्तु ब्रिटिश सरकार अभी भी चौकन्नी थी | लाला हरदयाल ला मार्टिनिक नामक समुद्री तट जो कि वेस्ट इंडीज में स्थित है वहा पहुचे | यह फ्रांसीसियो की बस्ती थी | लाला हरदयाल फ्रेंच जानते थे | वहा भरपूर नैसर्गिक सौंदर्य विद्यमान था | स्थानीय लोगो को अंग्रेजी पढ़ा कर वे अपना पेट पालने लगे | यहाँ नैसर्गिक वातावरण में उन्होंने अपनी स्वाभाविक आध्यात्मिक वृत्ति को बढ़ावा दिया | पहाड़ो की गुफाओ में उन्होंने तपस्या की | सब्जी-फल जो मिलता खा लेते | शाम को स्थानीय ग्रंथालय में बिताते | वे पूरी तरह से सन्यासियो और वैरागियो का जीवन जी रहे थे | भाई परमानन्द प्रसिद्ध क्रांतिकारी भी ला मार्टिनिक आ पहुचे | दयानंद कॉलेज में प्राचार्य का पद छोड़ने के बाद भाई परमानन्द लन्दन आ गये थे | भाई परमानन्द को लाहौर कांड में फांसी की सजा मिली थी जो बाद में आजीवन काले पानी की सजा में तब्दील हो गयी थी | लाला हरदयाल पेरिस में बिताये जा रहे अपने जीवन और लोगो की स्वार्थ वृति से उकता गये थे | माह भर भाई परमानन्द लाला हरदयाल साथ ही रहे | भाई परमानन्द लाला हरदयाल को क्रांतिकारी आन्दोलन में पुनः लाने में सफल रहे | लाला हरदयाल ला मार्टिनिक से बोस्टन, बोस्टन से अमेरिका , अमेरिका से होनोलुलू पहुचे | समुद्र किनारे गुफा में तपस्या ,मजदूरों को धर्मोपदेश और क्रांति साधना यही दिनचर्या थी लाला हरदयाल की |अब लाला हरदयाल शिक्षा जगत में भारतीओं के मन में देश प्रेम जगाने में जुटे थे | भाई परमानन्द के कहने पर वे कैलिफोर्निया पहुचे | वहा एक छात्र वृत्ति देने के लिए समिति का गठन किया | लाला हरदयाल ने सान फ्रांसिस्को में और बर्कले में कुछ भाषण दिये ,जिससे प्रभावित होकर इन्हें लेलैंड - स्टेनफोर्ड विद्यापीठ में संस्कृत और भारतीय दर्शन के प्राध्यापक पद पर रखा गया , जिसे लाला हरदयाल ने अवैतनिक रूप से स्वीकार किया | संपूर्ण अमेरिका में लाला हरदयाल की छवि एक भारतीय ऋषि की हो गयी थी | अपनी लोकप्रियता का उपयोग उन्होंने क्रन्तिकार्य को आगे बढ़ाने में किया | २३ दिसंबर ,१९१२ को दिल्ली में लार्ड हार्डिंग्ज पर बम फैंका गया | खबर सुनकर लाला हरदयाल और विद्यार्थियो ने अमेरिका में वन्देमातरम और भारत माता की जय के नारे लगाये | सार्वजनिक सभा में जय घोष हुआ | युगांतर सर्कुलर नामक पत्र में छपे लाला हरदयाल के लेखो का दुनिया भर में बम विस्फोट से ज्यादा प्रभाव हुआ | सान फ्रांसिस्को का युगांतर आश्रम ग़दर पार्टी का मुख्यालय था | इस आश्रम में अनेको क्रांतिकारी तपोमय जीवन व्यतीत कर रहे थे | ग़दर पार्टी का नाम पहले द हिंदुस्तान एसोसियशन ऑफ़ पेसिपक एशियन था | ग़दर पार्टी के अध्यक्ष सोहन सिंह भागना , लाला हरदयाल मंत्री तथा पंडित काशीराम कोषाध्यक्ष थे | ग़दर पत्र उर्दू और पंजाबी भाषा में निकलता था | लाला हरदयाल के ओजस्वी लेखन से ग़दर के प्रचार-प्रसार के साथ साथ धन संघर्ष भी बढ़ रहा था | २५ मार्च , १९१३ को अमेरिकी सरकार ने लाला हरदयाल को गिरफ्तार कर लिया | जमानत पर रिहा होने के बाद ग़दर पार्टी के अनुरोध पर वे तुर्की से जिनेवा ,फिर रामदास नाम से २७ जनवरी , १९१५ को जिनेवा से बर्लिन जा पहुचे | प्रथम विश्व युद्ध का दौर था | लाला हरदयाल ने बर्लिन कमेटी की स्थापना करके यहाँ भी स्वतंत्रता की लडाई जारी रखी | चम्पक रमण पिल्लै , तारक नाथ दास , अब्दुल हाफिज़ मोहम्मद बरकतुल्ला , डॉ चन्द्रकान्त चक्रवर्ती , डॉ भूपेंद्र नाथ दत्त , डॉ प्रभाकर , वीरेन्द्र सरकार एवं वीरेन्द्र चटोपाध्याय प्रमुख क्रांतिकारी बर्लिन में क्रांति मिशन का संचालन कर रहे थे | लाला हरदयाल के आने से साहित्य का निर्माण और भी तेजी से होने लगा | बर्लिन कमेटी ने योजना बनायीं कि जब भारत में विद्रोह हो तभी अंग्रेजो के शत्रु देश भी आक्रमण करे | ग़दर पार्टी ने विद्रोह की तारीख तय की २१ फ़रवरी,१९१५ | लाला हरदयाल ने फ्रांस,स्वीडन,नार्वे,स्विट्जर्लैंड ,इटली ,आस्ट्रिया आदि देशो के क्रान्तिकारियो से संपर्क करके भारत की क्रांति के लिए पोषक वातावरण बनाया | जर्मनी में युद्ध बंदी के पश्चात् लौटे सैनिको को भी आज़ादी की जंग में उतरने कि तैयारी हो गयी | इसी समय राजा महेंद्र प्रताप ने जर्मनी पहुच कर कैसर विलियम को प्रभावित करके जर्मनी और भारतीय सदस्यों का शिष्ट मंडल बनाया और अफगानिस्तान में अस्थायी आजाद हिंद सरकार की स्थापना की | जर्मनी से क्रान्तिकारियो के लिए शास्त्रों से भरे अनेक जहाज भारत भेजे गये | अंग्रेजो ने इन जहाजो को पकड़ लिया | जर्मनी पराजित होने लगा था | जर्मनी ने लाला हरदयाल को १९१६ से १९१७ तक नज़रबंद रखा | बाद में छिपते हुये स्वीडन पहुचे लाला हरदयाल अलग अलग शहरो में नौ वर्षो तक रहे | स्वीडिश भाषा सीख़ ली और स्वीडिश भाषा में ही अपना भाषण-संभाषण और अध्यापन करने लगे | चौदह भाषाओ पर पुर्नाधिकार था माँ भारती के इस क्रांति ज्वाला का | २७ अक्टूबर,१९२७ को लाला हरदयाल लन्दन पहुचे | लन्दन में भाई किशन लाल और भतीजे भगवत दयाल के साथ रहते हुये उन्होंने १९३१ में गौतम बुद्ध के दार्शनिक विचारो पर शोध ग्रन्ध लिखकर पी एच डी की उपाधि प्राप्त की | सर तेज़ बहादुर सप्रू और सी एफ एंड्रूज के प्रयत्नों से उन्हें भारत आने की अनुमति मिली | भारतीय जनता इस विलक्षण , बुद्दिमान और विश्व विख्यात व्यक्तित्व वाले भारत पुत्र के आगमन का स्वागत करने की तैयारी में लगी थी परन्तु लाला हरदयाल नहीं आये उनके मृत्यु की खबर ही एकाएक भारत आ गयी |

Thursday, March 1, 2012

चन्द्र शेखर आजाद के विश्वस्त थे कवि ह्रदय डॉ भगवान दास माहौर

अरविन्द विद्रोही .................... २ मार्च , १९६९ के दिन काल के क्रूर हाथो ने चन्द्र शेखर आजाद के विश्वस्त रहे क्रांतिकारी डॉ भगवान दास माहौर को छीन लिया | इस कवि ह्रदय क्रांतिकारी का जन्म बडौनी ग्राम जनपद दतिया मध्य प्रदेश में हुआ था | माहौर जी के आदर्श चन्द्र शेखर आजाद थे | भुसावल बम कांड के नायक माहौर को बम बनाने का प्रशिक्षण आजाद ने ही दिलाया था | असेम्बली में बम फैकने के लिए क्रांतिकारी संगठन ने जब अंततोगत्वा भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को चुना तब राजगुरु नाराज़ हो गये थे | राजगुरु की नाराज़गी अपने को चयनित ना किये जाने को लेकर थी | वे पूना में अलग नया क्रांतिकारी संगठन करने लगे | आजाद को मालूम पड़ा तो उन्होंने राजगुरु के साथ के लिए डॉ भगवान दास माहौर और सदाशिव मलकापुरकर को बम बनाने की सामग्री के साथ पूना भेज दिया | यह घटना सितम्बर १९२९ की है | पूना जाते समय भुसावल स्टेशन पर आप दोनों लोग मय पेटी/ बम सामग्री के गिरफ्तार कर लिए गये | चन्द्र शेखर आजाद ने भगवान दास माहौर को विक्टोरिया कॉलेज ,ग्वालियर में अध्ययन करने को कहा | उद्देश्य बताया -ग्वालियर में ही बम बनाने का कारखाना खोलना ,छात्रों को क्रांतिकारी संगठन से जोड़ना | दाखिला लेकर माहौर कुछ दिनों तक छात्रावास में रहे फिर किराये का कमरा लेकर रहने लगे ,इनका कमरा क्रान्तिकारियो का ठिकाना बन गया | भुसावल बमकांड में सुनवाई के दौरान इन लोगो ने गद्दार हो चुके जाय गोपाल और फणीन्द्र घोष पर गोलिया चला कर हत्या करने का प्रयास किया | दोनों गद्दार और पुलिस वाले सिर्फ घायल हुये | मुक़दमे में भगवान दास माहौर को आजीवन कारावास और सदाशिवराव मलकापुरकर को पंद्रह वर्ष का कारावास मिला | सन १९३८ में कांग्रेस मंत्री मंडलों के गठन के बाद कैदियो को मुक्त किया गया | रिहा होकर आप दोनों लोग झाँसी पहुंचे | भारत रक्षा कानून के तहत सन १९४० में भगवान दास माहौर फिर गिरफ्तार कर लिए गये | माहौर आज़ादी की प्राप्ति तक जेल आते जाते रहे | आजाद भारत में माहौर जी को उनके शोध ग्रन्थ- सन १८५७ के स्वाधीनता संग्राम का हिंदी साहित्य पर प्रभाव पर आगरा विश्व विद्यालय से पी एच डी की उपाधि प्रदान की गयी | माहौर जी को झाँसी विश्व विद्यालय ने बुंदेलखंड पर कार्य करने के उपलक्ष में डी लिट की उपाधि दी गयी | साहित्य महा-महोपाध्याय की पदवी उन्हें हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग ने मदनेश कृत रासो पर शोध हेतु दी थी | आज़ादी का जंग छिड़ा है ,आज़ादी का रंग | गरज रहा है विप्लव सागर, नचती क्रांति तरंग | छिड़ा है आज़ादी जंग | पास हमारे क्या खोने को ,सारा विश्व जित लेने को | बढे चलो ,है क्या डरने को | भूखे,नंग -धडंग ,छिड़ा है आज़ादी का जंग |

Tuesday, February 28, 2012

अरविन्द केजरीवाल जैसे तीस मार-खां लोग सिर्फ बातो के वीर है


अरविन्द विद्रोही .............. अरविन्द केजरीवाल जैसे लोग सिर्फ बातो के वीर है , धन लेकर ही कार्यक्रम करवाने वाले ये लोग सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओ के संघर्षमयी जीवन को क्या जाने ? अपराधियो को कोई अच्छा नहीं मानता लेकिन जन संघर्षो में दर्ज मुकदमो से कोई अपराधी नहीं होता ,वो तो जन नेता और जन प्रतिनिधि बन जाता है और जो अपराधी है उसको कोई बलिदानी नहीं मानता है | जनता जिसको ज्यादा पसंद करती है उसको अपना प्रतिनिधि चुनती है ,जनता के चयन के आधार क्या है यह सोचने की बात है |जनता अपने रोज मर्रा के सवालो को हाल करने वालो को , अपने लोगो को -भले ही उसका आधार जाति-धर्म हो मानती है | संसद पे,लोकतंत्र पे बार बार प्रहार व कुठाराघात करने से बेहतर है कि अपने को तीस मार खां समझने वाले ये विदेशी धन पे संस्था चलाने वाले लोग आम जनता के बीच ,किसानों-मजदूरों के बीच उनके जीवन से जुडी समस्याओ के लिए लड़े | डॉ लोहिया या और भी तमाम सामाजिक-राजनीतिक लोगो ने लोकतान्त्रिक व्यवस्था की खामिओ और भ्रष्ट व तानाशाह सरकारों के खिलाफ हल्ला बोला था ,जनता को जगाने के लिए अपने विचार दिये और राजनीतिक संगठन बना के लडाई लड़ी ना कि भारत के आम जन को भड़काने व बरगलाने कि कुचेष्ठ करी जैसा कि ये लोग कर रहे है | राजनीतिक चेतना के बिना क्या मनमानी और तानाशाही का राज्य स्थापित करना चाहते है ये अरविन्द केजरीवाल जैसे लोग |अभी चुनावो में भागीदारी करनी चाहिए थी या आगे एक राजनीतिक दल बनाके अपने मुद्दों के साथ निर्वाचन के मैदान में आये और व्यवस्था परिवर्तन की लडाई लड़े ,किसने रोका है ? जनता को जगा के जन प्रतिनिधि बनने में क्या दिक्कत है ? एक बात सत्य है कि भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना कभी भी जनता को बरगलाना नहीं कहा जा सकता है | आज भारत की आम जनता तक की रक्त में भ्रस्टाचार जाने अनजाने प्रवाहित हो रहा है ,जनता को सुधरने के लिए चरित्र वान नेतृत्वकी जरुरत है जो आम जनता के बीच से ही संघर्षो से निकलेगा | अरविन्द केजरीवाल ,किरण बेदी आदि कितने ईमानदार है ये सबके सामने आ चुका है | जो व्यक्ति अपने मताधिकार का प्रयोग ना कर सके ,ये ना सुनिश्चित कर सके की उसका नाम मतदाता सूची में है की नहीं ,उससे लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में कोई आशा रखना व्यर्थ है | भ्रष्ट गैर सरकारी संगठनो के लोगो,अपराधिक चरित्र के नेताओ के विषय में सिर्फ चर्चा की अपेक्षा राजनीतिक सुधार के लिए काम करना बेहतर है | ध्यान यह भी रखना है कि अन्याय-शोषण के खिलाफ लड़ना और अपने को बेहतर -बुद्धिमान साबित करने के लिए सिर्फ अपनी व अपने समूह की बात मनवाने के लिए काम करने में,दबाव डालने में अंतर होता है |अपने स्वार्थ सिद्धि के प्रयास में जुटे है ये गैर सरकारी संगठनो के कर्ता धर्ता | कितना हास्यास्पद है कि लोगो को जागरूक बनाने निकले अरविन्द केजरीवाल खुद कितना जागरूक है ये सभी ने देखा |अपना नाम है कि नहीं ये सुनिश्चित ना कर पाना गैर जिम्मेदारी है ,एक साधारण ग्रामीण तक अपना नाम बढवाने में कोई कसर नहीं रखते है,यह पता करते है कि नयी मतदाता सूची में नाम है कि नहीं ,किसी ने कटवा तो नहीं दिया ,इतना जागरूक है आम जन | अपने मत पर नज़र नहीं और दुसरो को प्रेरित करते घूम रहे है ,,अच्छा मजाक है ,, ये मिथ्या अहंकार में मदमस्त गैर जिम्मेदार ,लोकतंत्र विरोधी,सामाजिक न्याय के विरोधी चरित्र के है और सामंत वादी मानसिकता के पोषक है |इनका विरोध जारी रहेगा ,, ये कोई जनता की आशा के चिराग नहीं , पूंजीवादियो की लगायी आग है और ऐसी आग जिससे भारत भूमि के आमजन घर जले , तबाही आये और लोकतंत्र कमजोर हो |

Saturday, February 25, 2012

राम ,कृष्ण और शिव

सिर्फ मुस्लिम ही नहीं हिन्दू भी अपने को ठगा महसूस करता है ,क्या हिन्दू समुदाय की भावना की परवाह किसी को है ? मेरा मानना है कि कम से कम समाजवादियो- डॉ लोहिया के लोगो को हिन्दू-मुस्लिम में फर्क बंद करना चाहिए | राम ,कृष्ण और शिव भारत के जन की आत्मा में वास करते है ,बहुत लिखा है डॉ लोहिया ने ,पता नहीं क्यूँ समाजवादी भी एक समुदाय की बात करने लगते है ? आज पूरा प्रदेश-देश बुनियादी जरुरतो की कमी से त्रस्त है ,और क्या हिन्दू क्या मुस्लिम सब परेशान है | जनता के हितो की जगह ये सिर्फ मुस्लिम की चिंता की बात करना वाजिब नहीं ,,,जब ये बात उठेगी सब से ज्यादा नुकसान समाज को होगा ,वोटो का फायदा भले ही किसी को हो जाये --- अरविन्द विद्रोही