Monday, August 6, 2012

जनता - जन लोकपाल व टीम अन्ना का आन्दोलन


अरविन्द विद्रोही ....................... भारत में संसद व आम जनता द्वारा चुने हुये जनप्रतिनिधियो को धमकाते- गरियाते - धिक्कारते चले जन लोकपाल आन्दोलन की परिणिति राजनीतिक दल के गठन के रूप में आ ही गयी है | चलो यह सुखद ही है संवैधानिक व्यवस्था , लोक्तान्त्रन्तिक व्यवस्था से मिली आम जनता को अपना जन प्रतिनिधि निर्वाचित करने ले अधिकार की ताकत का मखौल उड़ाते उड़ाते गैर सरकारी संगठनो के ये कर्ता धर्ता राजनीतिक ताने बने में आ ही गये | निश्चित रूप से लोकतान्त्रिक देश में राजनीतिक दल बनाने व निर्वाचन प्रक्रिया में शामिल होने का इनका कदम स्वागत योग्य है | अब इस टीम के स्व नाम धन्य नेताओ को अपना मताधिकार भी सुनिश्चित करने की तरफ ध्यान देना होगा और आम जनता से अपने दल के लिए मत भी जुटाना पड़ेगा | गैर सरकारी संगठनो के इस जमावड़े में आई हेट पोलिटिक्स का जुमला भी खूब चला था | जुमला उछालने वाले युवाओ की मानसिक दशा अब इनके प्रति क्या होगी यह समझा जा सकता है | विचार - सिद्धांत - संगठन की जगह सिर्फ व्यक्ति को प्रतीक बना कर , उसको महिमा मंडित करके उसके इर्द गिर्द मिडिया के रहमो करम से इस आन्दोलन को प्रारंभ में बखूबी परवान चढ़ाया गया | प्रारंभिक दौर में तमाम खुले - ढके - छुपे कारणों से जन लोकपाल विधयेक लागु करने का यह आन्दोलन मिडिया ने खूब प्रचारित प्रसारित किया | भ्रस्टाचार और सरकार की गैर जिम्मेदाराना कृत्यों से त्रस्त व अपना अपना सामाजिक राजनीतिक प्रभाव आम जन में बढ़ाने के लिए तमाम राजनीतिक कार्यकर्ताओ ने - समर्थको ने इस सामाजिक आन्दोलन में अपना योगदान बखूबी दिया | दलिए सीमाओ का बंधन टूटा और जन भावनाएं उभरी | लोगो का हुजूम मुख्य आन्दोलन स्थल जंतर मंतर की तरफ कूच किया और एक जन कारवां बन गया | जगह जगह जनपद स्तर पे भी अनशन आन्दोलन जारी हो गये थे | जिले स्तर पे भी गैर सरकारी संगठनो से जुड़े लोगो का भारी जमावड़ा आन्दोलन में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने में तत्पर दिखा | इंडिया अगेंस्ट करेप्सन नामक संगठन के बैनर तले स्व घोषित व मिडिया पोषित स्वयंभू सिविल सोसाइटी के इन कर्ता धर्ताओ ने भारत को भ्रस्टाचार से मुक्त करने का एक मसौदा तैयार किया और उसको ही लागु करने के लिए आन्दोलन शुरु किया था | इनके मसौदे के प्रावधानों की जानकारी के बगैर ही सिर्फ व्यक्ति आधारित विश्वास की अवधारणा के वशीभूत होकर भारत का शहरी नागरिक व युवा उद्वेलित दिखा | स्वतः स्फूर्ति से संचालित यह आन्दोलन प्रारंभ से ही संगठनहीन व दिशा हीन रहा | अन्ना टीम अपने ही खेलो - करतबों और बयानों से तेजी से कुख्यात होती गयी | इंडिया अगेंस्ट करेप्सन के जनपद स्तर के कई कर्ता धर्ताओ से वार्ता के दौरान स्पष्ट पता चला की ये सभी लोग अन्ना हजारे के व्यक्तिगत आभा मंडल , मिडिया के द्वारा प्रचार व जनता के स्वतः स्फूर्त भावनात्मक उभर के भरोसे अपना गाल बजा के व पीठ थपथपा के आत्म मुग्धता के शिकार हो रहे है | इस टीम का एक और प्रसिद्ध जुमला कि अब पूरा देश भ्रस्टाचार के खिलाफ है और हमारे साथ है , कितना हास्यास्पद था , इसका इनको भान ही नहीं रहा | दुर्भाग्य वश भारत में भ्रस्टाचार भारत के आम नागरिक की शिराओ में रक्त बनकर प्रवाहित हो रहा है , यह अलग बात है कि अपना भ्रस्टाचार उसको चलता है , अपने खिलाफ षड़यंत्र और दुसरे का भ्रस्टाचार देश द्रोह दिखता है | भारत में सभी नागरिक यदि भ्रस्टाचार के खिलाफ हो गये और अन्ना टीम के साथ आंदोलित हो गये थे तो भ्रस्टाचार स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए था आखिर भारत में भ्रस्टाचार भारत के ही नागरिक तो करते है | इस तरह के ही बयान बड बोलेपन की निशानी होते है , आम जन चेतना के कार्य को करे बैगैर सिर्फ कोर बयानों - भावनाओ से आन्दोलन करने का परिणाम सामने आ ही चुका है | भ्रस्टाचार समाप्ति का एक सुन्दर सपना देख रहे लोगो का , उसके लिए सार्थक तरीके से लगे , आंदोलित लोगो का एक सपना जो की विगत वर्षो में तेजी से लोगो के जेहन में समाया वो बिखर गया | भ्रस्टाचार के खिलाफ इस सामाजिक आन्दोलन का सर्वाधिक दुर्भाग्य पूर्ण पहलु यह रहा की इसके कर्ता धर्ताओ ने संवैधानिक संस्थाओ पे प्रहार किया और जनता के मताधिकार का मखौल उड़ाया | अंततोगत्वा उंट पहाड़ के नीचे आ ही गया और इस टीम ने राजनीति में आने व राजनीतिक दल बनाने की अपनी घोषणा सार्वजनिक कर दी | इनको यह याद नहीं रहा कि मजदूर तो हर जगह मजबूर है ही , किसान भी बेजार है , युवा वर्ग को भी राहत और बख्शीश की दरकार है |महिलाओ का कौन पुरसाहाल है ? तंत्र है भ्रष्ट लेकिन जन के मन में लगा है जंग ,शिराओ में भ्रस्टाचार रक्त बनकर हो रहा है प्रवाहित लेकिन दुसरो पे ऊँगली उठाने में है हम माहिर | खुद में सुधार की बात को मानते है बेमानी और दुसरो पे लगाम अगने की है इच्छा भारी | बलिदानी पैदा हो पड़ोस में और मेरे घर अनिल अम्बानी ये ही सोच बन गयी है भारत के शहरी समाज की | इस सोच को बदलने के लिए अनवरत जनचेतना जागृत करने की जरुरत है | अनशन समाप्ति के अवसर पे समाजवादी पुरोधा डॉ राम मनोहर लोहिया - लोक नायक जय प्रकाश नारायण के विचारो और संघर्षो की याद जंतर मंतर पे ताज़ा की गयी व उनके अनुपालन की भी प्रतिबद्धता दोहराई गई | टीम अन्ना में शामिल इन गैर सरकारी संगठनो के करता धर्ताओ को यह पता होना चाहिए कि अपने को महात्मा गाँधी का कुजात शिष्य मानने वाले समाजवादी चिन्तक - युग दृष्टा डॉ लोहिया आजाद भारत में व्याप्त सभी बुराइयों कि जननी कांग्रेस व नेहरु को मानते थे | डॉ लोहिया ने गैर सरकारी संगठनो के भ्रस्टाचार के प्रति आगाह करते हुये कहा था कि , --- " सरकार भ्रष्ट करती है और पढ़ा लिखा तैयार हो जाता है | यह बहुत मुमकिन है कि पढ़ा लिखा राजी यों हो जाता है वह इतने ज्यादा बच्चो का बाप होता है कि सबको पालना पोसना उसके बूते के बाहर हो जाता है और शहरो के पश्चिमी ढर्रे की वजह सबब से उसे जीवन का एक स्तर बनाये रखना पड़ता है | पढ़े लिखे के संपूर्ण पतन का ज्यादा कारण हो सकता है उसके बच्चे पैदा करने की प्रवृति | विरोधी पार्टियों समेत सभी राजनीतिक दलों में पढ़े लिखे पर इस पतन का असर पड़ा है | संगठन और संस्थाएं खड़ी कर दी गयी है , जहा सरकार के और विरोधी दलों के लोग एक दुसरे से सांठ गांठ कर सकते है और आमदनी या चंदे का बंटवारा कर लेते है | राष्ट्रीय एकता के नाम पर और राष्ट्र निर्माणात्मक काम की आड़ में यह सब किया जा सकता है | १९२० से आज तक हिंदुस्तान में सरकार ने अनेक गैर सरकारी संगठन खड़े किये जो उसकी सक्रिय सरपरस्ती में चलते है | १९२०-३० की अमन सभाएं और ३०-४० के राष्ट्रीय युद्ध फ्रंट के वारिस ही तो है ५० के भारत सेवक समाज इत्यादि | इन पुस्तैनी गुलामी के अड्डो पे जनता की सेवा के नाम पर झूठी मुठी योजनायें लेकर गाने बजने वाले भाट और चिल्ल पों मचने वाले राजनीतिक भी जमा होते है | मतलब सिर्फ पैसे से होता है | पढ़े लिखे को पैसा चाहिए और इन संगठनो से उसे वह इस तरह से मिलता है कि उसे भान होता है कि जैसे वो जनता का भला कर रहा हो | " डॉ लोहिया ने वर्षो पहले साफ़ संकेत दे दिया था | गाजे बजे के साथ चले गैर सरकारी संगठनो के इस अनशन - आन्दोलन में धन के प्राप्ति के माध्यमो की पड़ताल होनी चाहिए | जन लोकपाल विधेयक लागु करने के लिए इंडिया अगेंस्ट करेप्सन के बैनर तले टीम अन्ना के द्वारा चलाये गये अनशन - आन्दोलन में वैचारिक प्रतिबद्धता का नितांत अभाव रहा | प्रारंभ से ही जैसे जैसे आन्दोलन में उभर आता गया , आन्दोलन को अपने कब्जे में लेने का प्रयास आन्दोलन के ही एक आतंरिक समूह द्वारा तेज हुआ और परिणाम स्वरुप आन्दोलन से जुड़े प्रमुख चेहरे एक के बाद एक अलग होते गये | विरोधाभाशो के ही कारण अंत में तमाम अपीलों के बावजूद प्रारंभिक अनशन- आन्दोलन की तरह जन भावना को अन्ना टीम नहीं उभार पाई | अन्ना टीम को ना तो जन सैलाब दिखा और ना ही इलेक्ट्रानिक मिडिया का अतिरिक्त स्नेह रूपी अनवरत प्रसारण | अब इसे अन्ना टीम की हताशा कहे या प्रमुख हस्तिओं की अनशन ख़त्म करने की अपील का असर --- बलिदान देने की बड़ी बड़ी बोल वचन वालो ने एक आन्दोलन - एक सपने का अंत स्वतः कर दिया | सुखद सिर्फ यह रहा कि बडबोले व आत्म मुग्धता के शिकार अन्ना टीम को अब राजनीति में संगठन व कार्यकर्ताओ की फौज तैयार करना पड़ेगा और इनको भी राजनीति में आटे दाल का भाव पता चलेगा |

Friday, July 27, 2012

डॉ लोहिया और समाजवाद के आइने में सपा सरकार का अक्स


अरविन्द विद्रोही ....................................................... डॉ राम मनोहर लोहिया युग दृष्टा थे | समाजवादी विचारो के प्रचारक व आम जनता के हित के तमाम कार्यक्रम देने वाले , सिद्धांतो का प्रतिपादन करने वाले तथा जन संघर्षो को खड़ा करने वाले डॉ लोहिया आम जनता के हित की सरकारों के गठन का प्रयास करते थे और सरकारों पर जन नियंत्रण का प्रभावी काम भी करते थे | डॉ लोहिया के विचारो - सिद्धांतो - संघर्षो की कसौटी पर खरे उतरे बगैर कोई भी समाजवादी सरकार सफल नहीं मानी जा सकती है | वर्तमान में डॉ लोहिया के विचारो पर १९९२ में बनी समाजवादी पार्टी की उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व में सरकार चल रही है | यह सरकार जनता के विश्वास रूपी मतों से निर्वाचित हुई है | आम जनता ने सुश्री मायावती के नेतृत्व में चल रही तत्कालीन बहुजन समाज पार्टी की सरकार में व्याप्त भ्रस्टाचार , नौकरशाही के दबदबे से त्रस्त आकर बसपा सरकार के खिलाफ सड़क पर लगातार संघर्ष कर रहे समाजवादी कार्यकर्ताओ की मेहनत को देखते हुये बसपा को सत्ता से बेदखल किया | समाजवादी पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र ने बसपा सरकार के भ्रस्टाचार से त्रस्त जनता के साथ साथ बेरोजगार युवाओ को आकर्षित करने में सफलता पाई और सोने पर सुहागे का काम किया था | बसपा सरकार को दुबारा ना आने देने के लिए कृत संकल्पित मतदाताओ के मन को पक्का किया था- क्रांति रथ पर निकले , उम्मीदों की साइकिल पर सवार युवा समाजवादी अखिलेश यादव के जन आकर्षण की छमता और सौम्यता पूर्ण आचरण ने | वर्षो के पश्चात् संघर्ष के बलबूते सत्ता में वापस आए समाजवादी कार्यकर्ताओ की आशा के केंद्र बिंदु बने मुख्य मंत्री अखिलेश यादव को अब समाजवादी पुरोधा डॉ राम मनोहर लोहिया की बातों का पुनः स्मरण करना होगा | डॉ लोहिया ने वर्षो पहले ही चिंता व्यक्त करी थी कि --- किसी भी बड़े आन्दोलन में एक अजीब तरह की वाहियात चीज या मोड़ बन जाया करता है | एक तरफ वे लोग कि जो आन्दोलन के उद्देशों के लिए तकलीफ उठाते है , दूसरी तरफ वे लोग जो आन्दोलन के सफल होने के बाद उसके हुकुमती कम-काज को चलते है | और आप याद रखना कि ये संसार के इतिहास में हमेशा ही हुआ है | लेकिन इतना बुरी तरह से नहीं हुआ कभी जितना कि हिंदुस्तान में हुआ है | और मुझे खतरा लगता है कि कही सोशलिस्ट पार्टी कि हुकूमत में भी ऐसा ना हो जाये कि लड़ने वालो का तो एक गिरोह बने और जब हुकूमत का काम चलाने का वक़्त आए तब दूसरा गिरोह आ जाये | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल की बातो पर चर्चा के बजाये वर्तमान समाजवादी सरकार के द्वारा अल्प काल में लिए गये फैसलों पर निष्पक्ष नज़र डालने से उम्मीदों की साइकिल की रफ़्तार धीमी , पकड़ कमजोर और दिशा गंतव्य से अलग जाती दिखती है | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने नव गठित सरकार को काम करने के लिए ६ माह का समय देने और उसके पश्चात् काम काज का आकलन करने की बात करी थी और अपने आकलन में शत प्रतिशत सफल सरकार बताया था | सपा मुखिया ने हालिया संपन्न विधान सभा चुनाव में कार्यकर्ताओ से कहा था कि सरकार बनने के पश्चात् उनके सम्मान में कोई कसर नहीं रखी जाएगी और इस बात को सरकार गठन के पश्चात् भी दोहराया गया | आम जनता की बात दीगर है, आज समाजवादी पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता भी हताशा के दौर में पहुच चुका है , उसे लोकसभा चुनावो में जनता के बीच दुबारा मत मांगने किन उब्लाब्धियो के बूते जाया जाये यह समझ नहीं आ रहा है | बेरोजगारी भत्ते , लैपटॉप वितरण आदि में पाबंदियो का सवाल कैसे देना है यह समाजवादी कार्यकर्ताओं को समझ नहीं आ रहा है | कानून व्यवस्था और नौकरशाही दोनों बदहाल है , ये अखिलेश सरकार की प्राथमिकताओ में होने चाहिए | सरकार के फैसले जाने अनजाने उत्तर प्रदेश की सत्ता से बेदखल हो चुकी बहुजन समाज पार्टी के जनाधार को पुख्ता करने का काम कर रहे है | बिगड़ी कानून व्यवस्था के चलते और नौकरशाही के अपने ढर्रे के चलते आम जनों को अब बहुजन समाज पार्टी का शासन काल याद आ रहा है जिसमे प्रशासनिक नियंत्रण - कानून व्यवश्ता चुस्त- दुरुस्त रहती थी | डॉ लोहिया महान समाजवादी विचारक थे | उनके विचारो - सिद्धांतो का अनुपालन ना करने वाला समाजवादी कैसे हो सकता है ? भारत की विधान सभाओ और संसद का लोकतंत्र की गरिमा को बढ़ाने के बजाये सत्ताधारी दल और उसके बड़े नेता के पिछलग्गू बनने की प्रवृत्ति से उनको तकलीफ थी | सार्वजनिक जीवन में बढती बेईमानी और स्वार्थवादिता को लेकर डॉ लोहिया के मन में ग्लानि होती थी | नेहरु और कांग्रेस को आजाद भारत में व्याप्त सभी बुराइयों की जड़ मानने वाले डॉ लोहिया ने इसको उखाड़ने के लिए गैर कांग्रेस वाद की नीति अपनाई थी | संसद और संसद के बाहर डॉ लोहिया और उनके साथियो ने देश को गरम किया और १९६७ के चुनावो में कांग्रेस को ८ राज्यों में पराजित किया | डॉ लोहिया की इच्छा थी कि राजनीति में गति आए , कांग्रेस का एकाधिकार समाप्त हो , राजनीतिक दल कार्यक्रम अभिमुख बने | डॉ लोहिया ने अपनी सरकारों को समयबद्ध कार्यक्रम और उनको लागु करने के लिए ६ माह का समय दिया था | जय प्रकाश नारायण से साफ तौर पर डॉ लोहिया ने कहा था , --- मैं सरकार का आदमी नहीं हूँ , इसलिए मुझे दिलचस्पी नहीं है कि सरकार क्या करती है | अगर वह ६ महीने कुछ नहीं करती , कुछ ऐसा नहीं करती कि जिससे देश का मन उछले तो मैं इस सरकार को गिराने की मुहिम शुरू करूँगा | इसके पहले १९५४ में भी मानव प्राणों का मूल्य सत्ता से अधिक मानने वाले डॉ लोहिया जो कि पुलिस के द्वारा भीड़ पर बर्बर गोलीबारी के विरुद्ध रहते थे , ने आम जन हित के सवाल पर अपनी पार्टी की सरकार को घेरा था और वो सरकार चल नहो सकी | १९५४ में ट्रावनकोर कोचीन वर्तमान में केरल में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता पट्टम थानू पिल्लै मुख्य मंत्री थे | वहा पुलिस की गोलीबारी में अनेको लोग मारे गये , नैनी जेल में बंद डॉ लोहिया ने अपनी ही सरकार का इस्तीफा माँगा | इस मुद्दे पर पार्टी टूटी , डॉ लोहिया ने कहा था - सुधरो या टूटो | कुछ माह पश्चात् सरकार भी गिरी | सत्ता को जनता के हित के लिए उपयोगी मानने वाले डॉ लोहिया के कार्यक्रमों व सिद्धांतो पर दृष्टि डालने और उसका अनुपालन करने का काम समाजवादी सोच की सरकार की प्राथमिकता में होना ही चाहिए |

Saturday, July 7, 2012

यशवंत सिंह के समर्थन में बाराबंकी में बैठक


आज बाराबंकी के पंजाब केशरी कार्यालय में पत्रकारो की एक आवश्यक बैठक संपन्न हुई | बैठक में पिछले दिनों भड़ास 4 मीडिया के संपादक यशवंत सिंह की फर्जी मुकदमो में गिरफ़्तारी पर रोष प्रकट किया गया | उपस्थित पत्रकारो ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से यशवंत सिंह की फर्जी मुकदमो में गिरफ़्तारी की उच्च स्तरीय जाँच तथा एक निर्भीक -बेबाक पत्रकार यशवंत सिंह के साथ आतंकवादियो सरीखा व्यवहार करने वाले नोयडा पुलिस कर्मिओ को दण्डित करने की मांग की | बैठक में स्वतंत्र पत्रकार अरविन्द विद्रोही , मो अतहर - पंजाब केशरी , तारिक किदवई - उर्दू आग , प्रदीप सारंग - टीवी १००,देवेन्द्र नाथ मिश्र - प्रतिदिन , दीपक निर्भय - यू पी न्यूज़ , मो असीम किदवई - जन माध्यम , संजय वर्मा , सतीश कश्यप , हृदेश श्रीवास्तव आदि पत्रकार साथी मौजूद थे |

Wednesday, July 4, 2012

दलाल पत्रकारिता और भ्रष्ट पुलिस तंत्र का हमला तेज़ हुआ है बेबाक पत्रकारिता पे


अरविन्द विद्रोही ................... यशवंत सिंह -संपादक भड़ास ४ मिडिया की नोयडा पुलिस के द्वारा गिरफ़्तारी ने यह साबित कर दिया है कि वेब मिडिया कि ताकत से दलाल पत्रकारों और भ्रष्ट पुलिस तंत्र के रखवारो के होश उड़ गये है | पिछले महीनो से संदुपुर -बाराबंकी , गोरखपुर , लखनऊ के पश्चात् नोयडा और लखीमपुर में जनसरोकार रखने वाले और निर्भीक पत्रकारों के पुलिसिया उत्पीडन से यह साफ हो गया है कि यह एक सुनियोजित साजिस है निर्भीक पत्रकारों कि आवाज़ को दबाने की | एक के पश्चात् एक घटित हो रही घटना यह सिद्ध करती है कि वेब मीडिया ने दलाल प्रवृति के पोषक और पत्रकारिता कि आड़ में अधिकारियो की दलाली करने वाले प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मिडिया के पत्रकारों के काकस को भेद दिया है | यशवंत सिंह की गिरफ़्तारी प्रकरण के पश्चात् वेब मिडिया की ताकत और भी ज्यादा बढ़ेगी | पत्रकारिता जगत के काले कारनामो को उजागर करने की वजह से ही यशवंत सिंह और भड़ास ४ मिडिया भ्रष्ट-दलाल लोगो की आँखों की किरकिरी बन गये थे और आज भी बने है | शायद इन दलालों को अनुमान रहा हो कि यशवंत सिंह कि फर्जी मुकदमो में गिरफ़्तारी के पश्चात् भड़ास का संचालन बंद हो जायेगा , यशवंत अकेले और अलग थलग पद जायेंगे , साथी साथ त्याग देंगे | लेकिन उनका अनुमान दुर्भाग्यवश गलत सिद्ध हो चुका है | यशवंत सिंह के साथ आज तमाम वरिष्ट पत्रकार खड़े है | कुमार सौवीर ,प्रकाश हिन्दुस्तानी , सुभाष राय , दयानंद पाण्डेय , हरे प्रकाश उपाध्याय ,मदन तिवारी , सैयद असदर अली , अविनाश , कृष्णभानु आदि ने इस प्रकरण पे अपने विचार लिख कर निर्भीक पत्रकारिता को उर्जा व ताकत प्रदान करी है | दलाली से इतर जनसरोकार व निर्भीक पत्रकारिता , बेबाक लेखन करने वालो को इस तरह कि दिकक्तो से रूबरू होते ही रहना पड़ेगा | व्यवस्था को जड़ तक भ्रष्ट कर चुके लोगो को यह कतई नहीं गवारा होता है कि कोई उनकी जड़ पर प्रहार करे | कमियां उजागर करने वालो को सदैव साजिशो का शिकार होना पड़ता है | बस जिस तरह दलाल पत्रकारों का साथ दलाल दे रहे है उसी तरह अब निर्भीक व बेबाक लेखन का माद्दा रखने वालो को दलाल पत्रकारिता के खिलाफ , उनकी सज़िसो के खिलाफ अब कलमकारों की कलम अनवरत चलती रहनी चाहिए |

सेंट एंथोनी-बाराबंकी में गिरता शैक्षिक स्तर - बिशप को शिकायत प्रेषित


अरविन्द विद्रोही ................ बाराबंकी के सेंट एंथोनी कॉलेज में शिक्षा के गिरते स्तर के खिलाफ छात्रों ने खोला मोर्चा | गिरते शिक्षा के स्तर और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ लखनऊ के बिशप को लिखा पत्र | सेंट एंथोनी कॉलेज के पूर्व छात्रों के फेसबुक समूह पर कॉलेज की वर्तमान दशा पर और बदहाली पर चर्चा आम | कॉलेज परिसर में बियर की बोतले मिलने की जानकारी देते हुये उत्कर्ष मौर्या ने शिक्षा के गिरे स्तर की तरफ मित्रो का ध्यान खीचा है | वर्तमान समय में विद्यार्थियों के द्वारा परीक्षा में कम नंबर पाने पर क्या सिर्फ विद्यार्थियों को दोष देना चाहिए इस पर समूह में चर्चा में सामने आया कि एक विषय कॉमर्स में एक साथ ३२ विद्यार्थियों को १२ वी में compartmant आया | एक साथ एक ही विषय में विद्यार्थियों के कम नंबर आने से निश्चित रूप से उस विषय को पढ़ने वाले अध्यापक और विद्यालय के प्रबंधक - प्राचार्य पर ऊँगली उठेगी ही | सूत्रों कि माने तो वर्तमान समय में सेंट एंथोनी कॉलेज में शैक्षिक माहौल के स्थान में अराजकता का वातावरण व्याप्त है | पूर्व छात्र आदित्य भट्ट , मयूर बहादुर खरे , मयंक वर्मा , आकाश गुप्ता , अर्जुन शुक्ल , फ़राज़ खान , फैज़ खान , मयंक वर्मा , अहमद सरफ़राज़ हुसैन ने विनीत राय के द्वारा चर्चा के लिए रखे गये उपरोक्त विषय पे अपने विचार रखते हुये ३२ छात्रों के एक साथ कम नंबर आने का दोषी वर्तमान शिक्षक और कॉलेज प्राचार्य को माना | सेंट एंथोनी कॉलेज में सर्वाधिक बड़ी चिंता का कारण कॉलेज के नियमावली के विपरीत यहाँ के शिक्षको के द्वारा छात्रों को tution पढने के लिए जबरन बाध्य करने के प्रकरण से है | बेबस छात्र अपने अध्यापको के दबाव में उनसे tution लेने को मजबूर है , tution के चलते ही ये शिक्षक कॉलेज में पढ़ने में अपना संपूर्ण ध्यान नहीं देते है | tution के खिलाफ आवाज़ उठाने वालो में नमन जैन , उत्कर्ष मौर्या , सैयद अमीना , अफजल उस्मानी , अंसिका वैश्य , सनत खान , बिलाल , अम्बाले अभिज्ञान भट्ट ,सुबीन कुरैन , विनीत राय ने नियमो के विपरीत जबरन tution के खिलाफ ज्ञापन देने और आन्दोलन की अपील करी | सेंट एंथोनी कॉलेज में व्यापत इन समस्या के विषय में अमित सिंह- अध्यक्ष पूर्व छात्र संघ सेंट एंथोनी कॉलेज ,सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि यह सच है कि अब सेंट एंथोनी कॉलेज में शिक्षा का स्तर गिर चुका है | इसके जिम्मेदार यहाँ के प्राचार्य और शिक्षक के साथ साथ वे सभी अभिभावक भी है जो कि सेंट एंथोनी कॉलेज कि सभी बातो को बिना विरोध दर्ज कराये अपनी बात रखे मान लेते है |

Thursday, June 21, 2012

कांग्रेस प्रवक्ता रशीद की दिमागी हालत


कांग्रेस प्रवक्ता रशीद अल्वी के बयान कि अगर बीजेपी के इशारे पर देश में कोई नाचता है तो वह मुलायम सिंह यादव हैं। इस देश में अगर बीजेपी का सबसे बड़ा एजेंट कोई है, तो वह मुलायम सिंह यादव हैं, को समाजवादी पार्टी के लोगो को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए | अब सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को डॉ लोहिया के गैर कांग्रेस वाद के सिद्धांत का अनुशरण करना चाहिए और समाजवादियो की सरकार २०१४ में बैगैर कांग्रेस का साथ लिए बना कर दिखा देना चाहिए | डॉ लोहिया कांग्रेस को देश में व्याप्त सभी बुराइयों की जननी मानते थे और जो आज की तारीख में भी सत्य ही है | मुलायम सिंह यादव को आगे बढ़ कर देश में सभी समाजवादी राजनीतिक संगठनो की एका के प्रयास करने चाहिए और सभी समाजवादी विचारधारा के लोगो को एक मंच पर लाकर २०१४ के चुनावो के पश्चात् समाजवादी सरकार के गठन के प्रयास करने चाहिए | रशीद अल्वी के इस बयान पे प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता प्रो रामगोपाल यादव ने कहा कि अल्वी की दिमागी हालत ठीक नहीं है, वह पगला गए हैं। रशीद अल्वी के इस बयान के पश्चात् समाजवादी पार्टी के नेताओ में आक्रोश व्याप्त हो गया है |

Tuesday, June 19, 2012

दिनदहाड़े राष्ट्रीय राज्य मार्ग व जिला चिकित्सालय में मारपीट ,बाराबंकी पुलिस का गैर जिम्मेदार चेहरा उजागर


आज बाराबंकी जनपद में सड़क में गाड़ी को रास्ता ना देने के विवाद के चलते दुर्भाग्य पूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गयी | दोपहर ११ बजे के करीब लखनऊ के डॉ लोहिया अस्पताल से अपने रिश्तेदार मरीज को देखकर अपनी निजी मारुती कार से लौट रहे कोठी उस्मानपुर निवासी राजू सिंह पुत्र ब्रिजेश सिंह और उनकी माता श्रीमती विनोद सिंह का सफेदाबाद में धर्मेन्द्र यादव - बी डी सी , बंकी जो कि समाजवादी पार्टी के बाराबंकी सीट के विधायक धर्मराज यादव उर्फ़ सुरेश यादव के अनुज भी है व उनके दो अन्य साथियो का ओवर टेकिंग को लेकर वाद विवाद , गाली गलौज व अंततोगत्वा मार पीट तक हुई | सफेदाबाद में घटी इस घटना में धर्मेन्द्र यादव द्वारा राजू सिंह को गाली देने व थप्पड़ मारने के पश्चात् धर्मेन्द्र यादव व उनके साथियो को राजू सिंह ने अपनी कार में रखे डंडे से मारा | राजू सिंह के द्वारा मारे जाने से हतप्रभ रह गये धर्मेन्द्र यादव व उनके साथियो ने किसी तरह राजू सिंह को पकड़ा और उसकी जमकर धुनाई कर डाली | यह सब दिन दोपहरी राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर होता रहा और राहगीर इस मारपीट को देखकर भयभीत हो गये | सपा विधायक के भाई धर्मेन्द्र यादव से बुरी तरह पिटे राजू सिंह व उसकी माँ किसी तरह भग कर बाराबंकी जिला अस्पताल के आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में अपना इलाज करने पहुचे ,उनके पीछे पीछे धर्मेन्द्र यादव यहाँ भी आ धमके | जिला चिकित्सालय में धर्मेन्द्र यादव के तमाम समर्थक तब तक पहुच चुके थे और उन लोगो ने अस्पताल कर्मियों तथा पुलिस कर्मियों कि मौजूदगी में दुबारा राजू सिंह व उसकी माँ को जमकर लात-घूंसों से मारा | बुरी तरह से घायल राजू सिंह व उसकी माँ ने पत्रकारों के पूछने पर अपने साथ हुई घटना को बताया | यहाँ पर इन पीडितो को इलाज तक कराने नहीं दिया गया | दूसरी तरफ स्थानीय विधायक के भाई धर्मेन्द्र यादव व उनके साथियों का मेडिकल परीक्षण हुआ | प्राप्त जानकारी के अनुसार राजू सिंह के उपर मार पीट का अभियोग धर्मेन्द्र यादव ने दर्ज कराया है | पत्रकारों ने जब राजू सिंह से दूरभाष से इस घटना के विषय में शाम को ७ बजे के लगभग बात करी तो उसने हताशा भरे शब्दों में कहा कि जब पुलिस कर्मियों कि मौजूदगी में मुझको व माँ को मारा गया और पुलिस कर्मी ही मुझको पकडे रहे तो मेरी फरियाद कौन सुनेगा | सपा विधायक के भाई के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं होगी इसलिए मैं प्राथमिकी नहीं दर्ज कराऊंगा | मैं बहुत मार खा चुका हूँ और आगे कोई खतरा नहीं उठाना चाहता हूँ| दोनों पक्षों की झूठी शान व अहंकार के चलते हुई इस दुखद घटना में बाराबंकी की मित्र पुलिस कहा खड़ी थी यह काबिले गौर है | सपा जिला अध्यक्ष मौलाना मेराज , विधायक सुरेश यादव ने धर्मेन्द्र यादव को बेकसूर बताया वही राजू सिंह का लहूलुहान चेहरा और श्रीमती विनोद सिंह की हालात से किसने किसको मारा यह साफ दिखाई दे रहा था | बहरहाल मामले की विवेचना पुलिस प्रशासन का कार्य है जिसमे निष्पक्षता परिलक्षित होनी चाहिए जैसा कि उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कथन व मंशा है|