Sunday, September 25, 2011

डॉ लोहिया को भुलाते और सपा नेतृत्व के निर्देशों को नकारते सपाई -----

राजनीतिक दलों में विचार धरा आधारित कार्यकर्ताओ की जगह चुनाव जीतने के फेर में गैर राजनीतिक चरित्र के लोगो,दल बदलुओ को महत्व दे कर प्रत्याशी बना देने का ही दुष परिणाम है कि आज राजनीतिक दल स्वयं में अविश्वनिये हो गये है| डॉ राम मनोहर लोहिया के विचारो की पार्टी जिसे धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव ने १९९२ में छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के निर्देश,सहयोग व आशीर्वाद से बनाया था ,आज समाजवादी विचारो - समाजवादी आन्दोलन का प्रचार -प्रसार करने वाली सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी व ताकत है| समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव दुसरे चरण की क्रांति यात्रा समाप्त कर चुके है| जनता में एक उमंग भरने में कामयाब रहे अखिलेश यादव को अपना ध्यान विधान सभा के घोषित प्रत्याशियो के आचरण व क्रिया कलापों की तरफ भी देना चाहिए| अपने भाषणों ,निर्देशो में स्पष्ट रूप से डॉ लोहिया को , जनेश्वर मिश्र को अपना आदर्श , अपना प्रेरणा श्रोत बताने वाले अखिलेश यादव की संगठन छमता ,संघर्ष छमता ,मिलन सारिता के कारण समाजवादी विचारो के समर्पित लोगो में एक नयी आशा की किरण जग चुकी है|डॉ लोहिया व जनेश्वर मिश्र के नाम ,चित्र प्रत्येक पोस्टर,बैनर व विज्ञापन में प्राथमिकता पर दिये जाने का स्पष्ट आदेश देने वाले समाजवादी संघर्ष के नव प्रतीक बन रहे अखिलेश यादव को जान कर कष्ट व हैरानी होगी कि समाजवादी धरा बाराबंकी में समाजवादी पार्टी के छप रहे पुरे पुरे पन्ने के विज्ञापनों में ना तो डॉ लोहिया का चित्र है और ना ही छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र का| आखिर यह क्या है ,यह किस प्रकार का कृत्य है ,इसका चिंतन सपा नेतृत्व को करना चाहिए| डॉ लोहिया को अपना आदर्श ,अपना सब कुछ मानने वाली सपा के प्रचार सामग्री से ,विज्ञापनों से समाजवादी नेता डॉ राम मनोहर लोहिया का चित्र व जिक्र तक ना होना एक अत्यंत ही शर्मनाक,गैर जिम्मेदाराना व संगठन के निर्देशो के खुलम खुल्ला उल्लंघन ,अनुशासन हीनता का मामला है या प्रकाशन करवाने वाले लोग समाजवादी पार्टी के विचार धारा के नहीं है,डॉ लोहिया को अपना आदर्श नहीं मानते है और नेतृत्व से ज्यादा प्रभावी है ,यह तय करना समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष का काम है| बाहर हाल बाराबंकी में प्रकाशित हो रहे सपा के विज्ञापन से डॉ लोहिया को मानने वालो को गहरा आघात लगा है| यह आघात नाराज़गी में बदले उसके पहले समुचित कदम सपा नेतृत्व को उठाना चाहिए|

Friday, September 23, 2011

पूर्व विधायक सरवर अली खान की कुर्सी विधान सभा से चुनाव लड़ने की चर्चा आम


पूर्व विधायक सरवर अली खान ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए दुआ करते हुये कहा कि मुलायम सिंह यादव भारत की वर्तमान राजनीति में डॉ लोहिया के विचारो के सबसे बड़े प्रचारक व अनुयायी है| गरीबो,वंचितों,पिछडो,दलितों,अल्पसंख्यको,महिलाओ,युवाओ,किसानों-मजदूरों व आम जन के लिए ही सोचने वाले व उनके हित की राजनीति करने वाले मुलायम सिंह यादव अपनी इन्ही विशेषताओ के कारण धरती पुत्र की उपथी से नवाजे गये है| उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में आम जनता की उम्मीद के केंद्र बिंदु मुलायम सिंह जी ही है| बाराबंकी में व्यापक जनाधार रखने वाले सरवर अली फतेहपुर ब्लाक के प्रमुख भी रहे है| इनका पुत्र सुफियान अख्तर जिला पंचायत सदस्य भी रहा है | विधान सभा कुर्सी के निवासी सरवर अली सर्व-समाज में अपनी मिलन सरिता व मृदु भाषिता के कारण एक अलग ही पहचान व पकड़ रखते है| समाजवादी पार्टी से त्यागपत्र दे चुके पूर्व विधायक छोटे लाल यादव के कारण कुछ वर्ष पहले समाजवादी पार्टी से अलग हुये सरवर अली किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य वर्तमान में नहीं है| समाजवादी पार्टी अपने पुराने सहयोगी को पार्टी में शामिल करके विधान सभा चूना २०१२ में कुर्सी विधान सभा से प्रत्याशी के रूप में इनको उतार के , चुनाव अभियान में जुटा के इनके व्यक्तित्व व राजनीतिक अनुभव का लाभ ले सकती है | आज पूरा दिन बाराबंकी जनपद में सरवर अली के द्वारा समाजवादी पार्टी में जल्दी शामिल होने व कुर्सी विधान सभा से चुनाव लड़ने की चर्चा आम रही|

Tuesday, September 20, 2011

अवसर मिलते ही राजनीतिक विरोधियो को मिलाने-ठिकाने लगाने में जुटे बेनी प्रसाद वर्मा ------------------ अरविन्द विद्रोही

उत्तर प्रदेश विधान सभा २०१२ के आम चुनाव जैसे जैसे करीब आते जा रहे है,चुनाव लड़ने को हर हाल में आतुर व राजनीतिक दलों में नेपथ्य में पड़े लोग दल बदलने - निष्ठा बदलने में जुट गये है | राजधानी लखनऊ से सटे जनपद बाराबंकी में इन दिनों प्रति दिन दल बदलने व नया सिधान्त अपनाने का एक बयार बह रहा है| इस दल बदल के पीछे सिधान्तिक मतभेद ना होकर सिर्फ चुनावी हसरते है यह सर्व विदित है| महीनो पहले बाराबंकी में हुये बड़े राजनीतिक धमाके की अनुगूंज के रूप में यह दल बदल हो रहे है| दरअसल महीनो पहले बहुजन समाज पार्टी के नेता सुरश यादव उर्फ़ धर्मराज यादव जिनकी पत्नी दूसरी बार निर्विरोध बंकी ब्लाक प्रमुख पद पर निर्वाचित हुई है,ने लखनऊ जाकर समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष डॉ राम मनोहर लोहिया के विचारो की पार्टी समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव में आस्था जताते हुये ,उनके नेतृत्व में कार्य करने का संकल्प लेते हुये बसपा से त्यागपत्र देकर समाजवादी पार्टी की सदयस्ता ग्रहण कर ली थी| विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यह घटना क्रम एकाएक नहीं घटित हुआ | जनेस्मा छात्र संघ के एक पूर्व अध्यक्ष जो समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में है,ने वर्षो पहले ही समाजवादी पार्टी के नेतृत्व से सुरेश यादव के परिजनों की मुलाकात करा दी थी,और ये लोग बराबर संपर्क में बने रहे| जब दूसरी बार भी सुरेश यादव की पत्नी आशा यादव बंकी ब्लाक प्रमुख निर्विरोध निर्वाचित हो गयी तब सपा नेतृत्व ने मज़बूत राजनीतिक दांव खेलते हुये सुरेश यादव उर्फ़ धर्मराज यादव को समाजवादी पार्टी में शामिल करके बाराबंकी विधान सभा २६८ से पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर दिया| बाराबंकी २६८ से वर्तमान विधायक संग्राम सिंह वर्मा सत्ताधारी बसपा सरकार में राज्य मंत्री है,इनकी अनुज वधु शीला सिंह भी दूसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुयी है| प्रभावी कुर्मी नेता संग्राम सिंह के मुकाबिल मज़बूत यादव प्रत्याशी के रूप में सुरेश यादव को उतार कर समाजवादी पार्टी ने बाराबंकी २६८ को इस बार हर हाल में जीतने की अपनी मंशा जाहिर कर दी है | बाराबंकी विधान सभा २६८ से सपा टिकेट पर लड़ते रहे,विधायक रहे छोटेलाल यादव को यह बात कतई हज़म नहीं हुयी की दुसरे दल से आये व्यक्ति को राजनीतिक रूप से टिकेट दे देना अच्छा है| टिकेट वितरण में पुराने कार्यकर्ताओ से अन्याय किये जाने का आरौप छोटे लाल यादव ने हर मीटिंग में कही | समाजवादी पार्टी में अपनी बातो को नकार दिये जाने की बात कहते हुये छोटेलाल यादव ने इस्तीफा देकर अपनी नयी राजनीतिक राह चुनने का एलान कर दिया| कल केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद के साथ राजधानी लखनऊ के एक पाँच सितारा होटल में छोटेलाल यादव की मौजूदगी ने सारी राजनीतिक चक्र को साफ़ कर दिया है| अभी तक पानी पी पी कर बेनी प्रसाद वर्मा को कोसने वाले और उनके कृत्यों को गलत व एक जाती विशेष का विरोधी बताने वाले नेतागण किस दिन से बेनी प्रसाद वर्मा के कसीदे पढना ,उनका महिमा गान करना शुरु करते है, यह देखना बाकी है| राजनीति के मंझे खिलाडी कांग्रेस के गोंडा से सांसद बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री ने अपनी राजनीतिक सूझ-बुझ से एक बार पुनः अपने राजनीतिक विरोधियो को उलझा दिया है| बाराबंकी के विकास पुरुष माने जाने वाले बेनी प्रसाद वर्मा बाराबंकी की चुनावी राजनीति के केंद्र बिन्दु एक बार फिर बन चुके है| अपने तमाम राजनीतिक विरोधियो को विधान सभा २०१२ में बेनी प्रसाद वर्मा किनारे लगा देंगे यह जन चर्चा शुरु हो गयी है| चर्चा-परिचर्चा के अनुसार --- किसी को साथ मिला के,ख़ुशी से गले मिला के,किसी को किसी से लड़ा के ,और पुराने कांग्रेस्सियो की जगह अपने लोगो को विधान सभा का प्रत्याशी बनवा के दल के भीतर -बाहर एक साथ वर्चस्व स्थापित करने की मुहीम को अंजाम देने में बाराबंकी के विकास पुरुष बेनी प्रसाद वर्मा लग चुके है| केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने शहाब खालिद , सुरेन्द्र नाथ अवस्थी,राम रतन राव ,रामवीर सिंह, छोटे लाल यादव, वसीम राइन ,हुमायु नईम खान आदि को अपने पाले में कर के अपना राजनीतिक चातुर्य प्रदर्शित कर ही दिया है| राजनीतिक दलों में उपेक्षित पड़े नेताओ को महत्व -सम्मान देने के वायदे के साथ कांग्रेस में शामिल करवाने का महारथी प्रयास बेनी प्रसाद द्वारा जारी है| आने वाले समय में तमाम और किनारे पड़े नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते है| इन किनारे पड़े नेताओ के कांग्रेस में शामिल होने से कितना फायदा कांग्रेस को होगा यह तो चुनाव परिणामो से ही पता चलेगा लेकिन इस वक़्त तो कांग्रेस के पुराने नेताओ के होश फ़ाक्ता हो चुके है | दल बदलुओ के आने से विधान सभा का टिकेट काट जाने की आशंका ने कांग्रेस से टिकेट मांगने वाले नेताओ में निराशा व असंतोष व्याप्त हो रहा है| बाराबंकी २६८ से बीते चुनाव में भी कांग्रेस का टिकेट बसपा से टिकेट काट जाने के बाद कांग्रेस में शामिल हुये नईम सिद्धिकी को टिकेट से नवाज़ दिया गया था| चुनाव ख़त्म होते ही नईम ने कांग्रेस को अलविदा कह के पुनः बसपा का दमन पकड़ लिया था | बाराबंकी विधानसभा २६८ से पुनः टिकेट किसी दल बदलू का ना दे दिया जाये यह चिंता पुराने कांग्रेसियो को सता रही है| वर्तमान राजनीतिक परिवेश तो यही कहता है की कांग्रेस टिकेट वितरण के मामले में पुनः अपना इतिहास दोहराएगी, आगे जब तक प्रत्यासियो की सूची ना जारी हो तब तक कयास ही लगे जा सकते है| बाहर हाल अभी तो बेनी प्रसाद वर्मा ने अपना विरोध करने वालो को अपने झंडे तले लाकर एक जंग जीत ही ली है,कांग्रेस में शामिल तमाम नेता अब बेनी प्रसाद की कृपा के बूते ही आगे राजनीति कर पाएंगे यह आम चर्चा है|

Sunday, September 18, 2011

पूर्व विधायक छोटे लाल यादव का समाजवादी पार्टी से इस्तीफा, कारण और प्रभाव

अरविन्द विद्रोही आखिर कार पूर्व विधायक छोटे लाल यादव ने समाजवादी पार्टी में अपनी बाते ना माने जाने के कारण समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे ही दिया| बाराबंकी विधान सभा से घोषित प्रत्याशी सुरेश यादव उर्फ़ धर्मराज यादव को बदलने और समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष मौलाना मेराज को पद मुक्त करने की मांग ना पूरी होने के बाद समाजवादी पार्टी-उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव को fax से भेजे त्याग पत्र में पूर्व विधायक छोटे लाल यादव ने बाराबंकी जनपद के सपा संगठन और अरविन्द सिंह गौप पर गंभीर आर्थिक आरौप लगाये| दल बदल,निष्ठा परिवर्तन, आरौप -प्रत्यारौप का दौर चालू हो चुका है| कई बार समाजवादी पार्टी के टिकेट से विधान सभा की दहलीज पार करने वाले छोटे लाल यादव के त्याग पत्र की पृष्ठ भूमि महीनो पहले तभी तैयार हो गयी थी जब समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष दो बार ब्लाक प्रमुख -बंकी ,बाराबंकी के पद पर निर्विरोध निर्वाचित आशा यादव के पति सुरेश यादव उर्फ़ धर्मराज यादव ने वर्तमान सत्ताधारी दल बहुजन समाज पार्टी से त्याग पत्र दे कर डॉ लोहिया के विचारो की पार्टी समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की | बाराबंकी विधान सभा में १९९१ से लगातार प्रत्याशी रह रहे छोटे लाल यादव की शिकायते और संगठन कार्य से ज्यादा गुट बाजी करने की बात सपा नेतृत्व के सम्मुख लगातार आती रही | बसपा छोडके सपा में शामिल हुये सुरेश यादव को उनके राजनीतिक कौशल और लोकप्रियता के कारण सपा नेतृत्व ने बाराबंकी २६८ से समाजवादी पार्टी का विधान सभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया | पूर्व विधायक छोटे लाल यादव के लिए सुरेश यादव को सपा प्रत्याशी बना दिया जाना हृदयाघात सरीखा रहा,जो अंतत समाजवादी पार्टी नेतृत्व से करीब आधा दर्ज़न मुलाकातों-वार्ताओ के विफल होने के बाद इस्तीफे के रूप में सामने आ ही गया | छोटे लाल वरिष्ठ राजनीतिक है , राजनीति में विधायकी का सफ़र मुलायम सिंह यादव के आशीर्वाद से पूरा करने वाले छोटे लाल यादव आज अपनी पहले की जीतो का श्रेय तक मुलायम सिंह यादव को नहीं दे रहे | हर हाल में चुनाव लड़ने की घोषणा करने वाले छोटे लाल यादव के द्वारा समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह को पहले जैसा ना होने की बात कहना किसी के गले नहीं उतर रहा है| आज पूरा दिन कई चौराहों पर यह चर्चा आम रही कि सिर्फ टिकेट ना मिलने के कारण ही समाजवादी पार्टी को छोड़ना और नेतृत्व को भला बुरा कहना घोर अवसरवादिता है| छोटे लाल यादव द्वारा समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देने के बाद जहा एक तरफ उनके समर्थक भी पार्टी त्याग रहे है वही छोटे लाल से नाराज़ तमाम समाजवादी विचारधारा के नेता अब समाजवादी पार्टी में शामिल होने का मन बना चुके है | बाराबंकी जनपद में समाजवादी पार्टी की घेराबंदी में लगे दिग्गजों को निराशा ही हाथ आएगी , कारण छोटेलाल यादव के बेनी प्रसाद वर्मा से हाथ मिलाने और कांग्रेस से चुनाव लड़ने की चर्चा को समाजवादी पार्टी के मतदाताओ ने ही एक चुनौती के रूप में ले लिया है | समाजवादी पार्टी के कई नेता जो सुरेश यादव को प्रत्याशी बनाये जाने से नाराज़ थे,अब छोटे लाल यादव द्वारा नेतृत्व पर आरौप लगाने और यह कहने की बाराबंकी में एक भी सीट सपा नहीं जीतेगी , मतभेद भुला कर घोषित प्रत्याशी के साथ प्रचार करने व सीट जीतने तथा संगठन की ताकत दिखाने में जुट गया है | बदलते राजनीतिक परिवेश में समाजवादी पार्टी के बाराबंकी २६८ से प्रत्याशी सुरेश यादव के साथ बेनी प्रसाद वर्मा विरोधी खेमा,छोटे लाल से नाराज़ लोग व संग्राम सिंह से दुखी लोग एक जुट हो चुके है| एक सशक्त दावेदार के रूप में अल्प समय में उभरे सुरेश यादव के साथ व्यापारी तबका व्यग्तिगत व्यावसायिक कारणों से लगा है| समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को , उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी से जाने वालो की परवाह ना करके आने वालो का स्वागत करना चाहिए,जाने वाले टिकेट ना मिलने से नाराज़ है और आने वाले जुल्मी बहुजन समाज पार्टी से निजात पा कर समाजवादी सरकार बनाने में अपना योगदान देने के लिए आयेंगे, यह अंतर ही मंशा को स्पष्ट करता है| बाराबंकी जनपद की कुर्सी विधान सभा से भी तत्काल प्रत्याशी घोषित कर देना रणनीतिक रूप से बेहतर होगा| यहाँ से मुस्लिम प्रत्याशी उतारना ही सर्वाधिक उचित होगा | हालिया समाजवादी पार्टी में शामिल विधायक फरीद महफूज़ किदवई को कुर्सी से उतारना इस सीट पर विजय सुनिश्चित कर देगा| प्रारंभ में कमजोर माने जा रहे बाराबंकी विधान सभा के प्रत्याशी सुरेश यादव की जीत का रास्ता दिन प्रति दिन सुगम होता जा रहा है| कुर्सी से मुस्लिम प्रत्याशी की जल्द से जल्द घोषणा समाजवादी पार्टी के विधान सभा विजय अभियान को ताकत प्रदान करेगी|

Friday, September 16, 2011

भ्रष्ट केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को बर्खास्त कर सी बी आई जाँच हो-- राजनाथ शर्मा



भ्रष्ट केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को बर्खास्त कर सी बी आई जाँच हो-- राजनाथ शर्मा गाँधी जयंती समारोह ट्रस्ट के मुखिया व समाजवादी विचारक राजनाथ शर्मा ने आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हजरतगंज स्थित महात्मा गाँधी की प्रतिमा स्थल पे श्रधा सुमन अर्पण व माल्यार्पण के बाद गोंडा से सांसद केंद्र की कांग्रेसी सरकार में इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को भ्रष्ट बताते हुये प्रधानमंत्री को प्रशासन के माध्यम से एक मांग पत्र भेजा| आज प्रातः १० बजे गाँधी प्रतिमा पे प्रदेश के कोने कोने से आये गाँधीवादी - समाजवादी कार्यकर्ताओ ने जुट गये | वरिष्ट समाजवादी नेता गिरीश पांडे,सहदेव सिंह गौतम,सोशलिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेन्द्र शुक्ल,अरविन्द बाजपाई ,लालजीत यादव, आनंद नारायण मिश्र ,डॉ हसन रिज़वी,अमित शुक्ल,जगदम्बा सिंह,फहीम सिद्धिकी , भारत लाल,राहुल दुबे ,विजय वाल्मीकि, पटेश्वरी प्रसाद के साथ आये सैकड़ो कार्यकर्ताओ को संबोधित करते हुये राजनाथ शर्मा ने कहा कि बेनी प्रसाद द्वारा अपने मंत्री पद का दुरुप्रयोग किया जाना बदस्तूर जारी है, अपने पुत्र को विधायक बनाने के लिए बाराबंकी के दरियाबाद विधानसभा में प्रलोभन और सरकारी धन का उपयोग संविधान विरोधी है| सुचना के अधिकार से जानकारी देने में हिला हवाली कि जा रही है| बेनी प्रसाद वर्मा की संपत्ति की जाँच की मांग दोहराते हुये राजनाथ शर्मा ने कहा कि अगर मांगो को नहीं पूरा किया गया तो जंतर मंतर -दिल्ली तक धरना प्रदर्शन किया जायेगा|

Monday, September 12, 2011

यथार्थ

यथार्थ क्या अब , काव्य बन पायेगा ? किसान-मजदूर का दर्द ,कौन गा के सुनाएगा? गायेगा तब ना,जब गीत लिखा जायेगा| यथार्थ क्या अब,काव्य बन पायेगा? जो देश के विकास का , आधार कहलाते है| अपना पूरा जीवन , श्रम में लगाते है| उनके अंतर्मन का मर्म ,क्या कोई लिख पायेगा? यथार्थ क्या अब,काव्य बन पायेगा? रूचि-अभिरुचि का सवाल,यहाँ मुखरित हो रहा| विकास की चक्की में, अन्नदाता पिस रहा| श्रमिक अब,राहत व बख्शीश पर टिक रहा , श्रम का मोल ,उसे ना मिल रहा| यथार्थ क्या अब काव्य बन पायेगा?

Thursday, September 8, 2011

समाजवादी पार्टी के घोषित प्रत्याशियो के लिए मुसीबत बने चन्द असंतुष्ट

अरविन्द विद्रोही उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी बहुजन समाज पार्टी की जन विरोधी नीतिओ के खिलाफ सड़क से सदन तक आवाज उठाने व संघर्ष करते रहने के कारन समाजवादी पार्टी आम जन मानस के बीच गहरी पैठ बना चुकी है | बसपा सरकार की मनमानी व तानाशाही पूर्ण आचरण के कारन त्रस्त जन मानस का रुझान समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओ के जन संघर्षो को देख कर ही समाजवादी पार्टी की तरफ हुआ है | इसी रुझान को देख कर विभिन्न दलों के चुनाव लड़ने को आतुर नेताओ ने सपा में अपना भविष्य महफूज़ मानते हुये समाजवादी पार्टी की सदयस्ता ग्रहण कर की थी | विभिन्न दलों से आये तमाम जनाधार वाले प्रभावी लोगो को उनके द्वारा डॉ लोहिया के विचारो से प्रभावित होने की बात कहने पर, समाजवादी विचारो-संकल्पों के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जताने पर , मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में संघर्ष का बीड़ा उठाने का वायदा करने पर समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव ने उनको भरपूर तवज्जो देते हुये विधान सभा २०१२ में अधिक से अधिक सीट जितने के मकसद से विधान सभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया | समाजवादी पार्टी के नेतृत्व द्वारा घोषित प्रत्याशियो ने अपने समर्थको के साथ अपने अपने विधान सभा में आम जनता के बीच जाना प्रारंभ कर दिया | करीब एक दर्ज़न सीटों पर प्रत्याशियो को चन्द असंतुष्टो से जो की इसी सीट से विधान सभा का टिकेट मांग रहे थे के अंतर विरोध से जूझना पड़ रहा है | कई बार विधायक रहे,कई बार चुनाव लड़ चुके,हार चुके, हर चुनाव में दल बदलने वाले, चन्द लोग इस बार अपनी चुनावी मंशा पूरी ना होते देख कर बौखला गये है| वर्तमान परिस्थितियो में ,राजनीतिक-सामाजिक समीकरणों के हिसाब से इन सीटो पर घोषित प्रत्याशियो को भारी मतों से विजय श्री मिलनी सुनिश्चित है ,यही कारण है की इन सीटो पर चुनाव लड़ने की अति आतुरता है |सपा के पक्ष में जनमानस का मान भांप के अब असंतुष्ट सपाई ही इन घोषित प्रत्याशियो के विजय मार्ग में कांटे बिछाने का दुष्कर्म कर रहे है |चन्द एक लोग जिस सीट से विधायक होते आये उसके नए परिसीमन में आरक्षित हो जाने से वो दूसरी सीट से लड़ने को जबरन बेताब है | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव द्वारा समाजवादी पार्टी मुख्यालय लखनऊ में आयोजित कार्यकर्ता बैठकों में कई बार विधान सभा चुनावो को लेकर निर्देश दिये गये है| हर हाल में चुनाव लड़ने को आतुर चन्द असंतुष्ट नेता उनके निर्देशों का मखौल उड़ने में कोई कोताही नहीं छोड़ रहे है | अभी बीते शुक्रवार को एक टिकटार्थी विधायक जिनकी परंपरागत सीट परिसीमन में आरक्षित हो गयी है , समाजवादी पार्टी प्रदेश मुख्यालय में समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने आये थे| जन चर्चा के अनुसार मिलने के बाद जब ये विधायक कक्ष से बाहर आये तो बाहर बरामदे में खड़े सपा के तमाम नेताओ ने इनकी खैरियत पूछी | राजधानी के निकटवर्ती जनपत के यह विधायक हाल में ही बहुजन समाज पार्टी से टिकेट ना मिलने के कारण समाजवादी पार्टी में शामिल हुये थे |इनको एक सीट से चुनाव लड़ने की हरी झंडी भी दी जा चुकी है लेकिन ये दूसरी सीट से चुनाव लड़ने को आतुर है जहा से पार्टी ने एक मजबूत प्रत्याशी पहले से उतार रखा है| खैरियत पूछते ही विधायक महोदय हत्थे से उखाड़ गये और अनर्गल प्रलाप करने लगे | इनके अनर्गल प्रलाप की चर्चा समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आने जाने वालो की जुबान पर है, साथ ही साथ तमाम निष्ठावान नेता-कार्यकर्ता आक्रोशित भी है | सिर्फ नेतृत्व द्वारा अनुशासित रहने के निर्देश के चलते समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओ के कोप भजन से यह विधायक उस दिन बच गये |हालिया शामिल इन विधायक के द्वारा कही बातो को पार्टी के जिम्मेदारो तक पहुचने की बात उपस्थित कार्यकर्ताओ ने कही| यह तो रही सपा मुख्यालय में घटित दुर्भाग्य पूर्ण घटना| इसी तरह के चन्द चुनाव लड़ने को आतुर नेताओ की अनर्गल बयान बाजी का सामना तमाम प्रत्याशियो को अपने अपने विधान सभा क्षेत्र में करना पड़ रहा है| इन असंतुष्टो के द्वारा हर हफ्ते टिकेट काटने की अनर्गल अफवाह उड़ाकर ,जनता के मान में भ्रम पैदा करने का पार्टी विरोधी कृत्य चन्द स्वार्थी तत्वों के द्वारा बदस्तूर जारी है | समाजवादी पार्टी को अब इन असंतुष्टो पर मंथन करना चाहिए | आम जनता बहुजन समाज पार्टी से त्रस्त होकर बेहतर विकल्प की तलाश में समज्वाद्दी पार्टी की ही तरफ देख रही है | पार्टी विरोधी गतिविधिओ में लिप्त, घोषित प्रत्याशियो का विरोध करने वालो, टिकेट काट जाने की बात जनता में फ़ैलाने वाले स्वार्थी लोगो को अब सुधरने की चेतावनी देने से कोई फायदा नहीं,इनके तार किसी ना किसी दूसरी पार्टी से जुड़ चुके है| समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को अब संगठन के निर्णयों और घोषित प्रत्याशियो का विरोध करने कर सीधे सीधे नेतृत्व को चुनौती देने वालो को समाजवादी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में ना तो देरी करनी चाहिए और ना ही कोताही बरतनी चाहिए| इन चन्द स्वार्थी नेताओ की मंशा हर चुनाव की लड़ना और अपना ही हित साधना है | संगठन हित में , नेतृत्व के निर्णयों के अनुपालन में तनिक भी रूचि ना रखने वाले यह लोग दीमक की तरह पार्टी का नुकसान कर रहे है , इनका उपचार ही एकमात्र विकल्प है |