Thursday, December 15, 2011

ग्रामीण भारत के आम जन और उनकी अभिलाषा


अरविन्द विद्रोही ........ भारत एक कृषि प्रधान देश है| भारत की बहुसंख्यक आबादी कृषि से ही जुडी है| आज भी भारत की बहुसंख्यक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण जीवन से सरोकार रखती ही है| ग्रामीण अंचलों में आजादी के पश्चात् विकास के अनियंत्रित रथ ने ग्रामीणों और ग्रामीण अंचलों के विकास के स्थान पर कृषि की आधार-भूत ढांचे पर ही प्रहार किया | ग्रामीणों की कृषि योग्य बेश कीमती उपजाऊ भूमि का हरण आजाद भारत की सरकारों ने ब्रितानिया सरकार के बनाये एक काले कानून भूमि अधिग्रहण अधिनियम १८९४ के बलबूते ,सत्ता की हनक और संगीनों के जोर पर जम कर किया| भारत की ग्रामीण जनता अपनी बेबसी को आखिर कब तलक जीती? अपनी जमीन को बचाने के लिए भारत के ग्रामीणों ने एकता के सूत्र में बंधना और भारत की ग्राम्य व्यवस्था को तहस नहस करने वाले इस काले कानून की खिलाफत करना शुरु किया | किसान शक्ति के तमाम धरना,प्रदर्शन, आन्दोलन और किसानों के बलिदान के बाद इस काले कानून में बदलाव की पहल हुई| एक तरफ भारत के शहरी इलाको में विकास कार्यो में वृद्धि और दूसरी तरफ ग्रामीण भारत के ढांचे के प्रतिकूल विकास के नित नए कीर्तिमान कायम करने की होड़ ने ग्रामीणों के मन को व्यथित कर डाला है| कंक्रीट के जंगलो की मार से तड़प रहा किसान ,लाभ कारी फसलो के लिए क़र्ज़ लेकर घाटा उठा कर जान देने पर विवश किसानों की मनो दशा समझने की दिशा में पहल जरुरी है | नकली खाद,नकली बीज , बिजली की किल्लत, बढ़ते डीज़ल के दाम ,नहरों में खेत तक समुचित पानी ना आने की समस्या , कृषि लागत में वृद्धि, नहर कटान से उपजे हालात, कभी बाढ़ तो कभी सूखे से बेजार और परेशान अन्न दाता किसान अपनी आर्थिक दशा और अपने परिवार की सामाजिक-शैक्षिक दशा सुधरने के लिए जी जान से हाड तोड़ मेहनत-मसक्कत करता है | क्या गर्मी,क्या बरसात,क्या सर्दी की सर्द रात और क्या गर्म लू के थपेड़े , अन्न दाता किसान कृषि पैदावार के लिए हर मौसम में अपने खेत-खलिहान में मौजूद रहता है | अपने परिवार के भरण-पोषण और हमारे-आपके खाने के लिए अन्न उपजाने वाले किसान की आर्थिक-सामाजिक -शैक्षिक दशा में सुधार के रास्ते तलाशने की जिम्मेदारी हमारी सब की भी बनती है| किसानों की दशा में सुधार के रास्ते तलाशने के लिए किसानों के ही मन को टटोलने का निश्चय किया और किसानों की अद्भुत ज्ञान परक सोच को जान कर एक सुखद अनुभूति का अनुभव भी किया | क्या खेती किसानी में लगे किसानों से कभी ग्राम्य स्तर पर विकास परक योजना के निर्धारण,उनके क्रियान्वयन के बारे में सलाह मशविरा करना शुरु होगा ? ग्राम्य पंचायतो के प्रस्तावों पर विकास कार्य ना होकर सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से चुनावी लाभ हेतु विकास कार्य व विकास परक योजनाओ की घोषणा का सिलसिला भारत-भूमि को तेज़ी से गहरे खाई की तरफ ले जा रहा है| खुद का चुनाव जीतने के लिए,अपने सगे-सम्बंधियो को जिताने के लिए,अपने संगठन के लोगो को जिताने के लिए अब सरकार में शामिल मंत्रियो ने सामाजिक-राजनीतिक नैतिकता को त्याग कर सरे-आम बेशर्मी पूर्वक प्रलाप शुरु कर दिया| अपने संवैधानि कर्तव्यों के पालन की जगह सिर्फ चुनावी लाभ हासिल करने के छुद्र मानसिकता के चलते चुनावी लाभ के लिए विकास कार्यो और वायदों की बरसात करने वाले नेता व मंत्री निष्पक्ष चुनावो की प्रक्रिया को सरेआम अपने सत्ता के रथ पर सवार होकर रौंदते चले जा रहे है और आम आदमी की बिसात ही क्या भारत का चुनाव आयोग भी एक बेबस निरीह संस्था की तरह सिर्फ अधि-सूचना का इंतज़ार कर रहा है | राजनेताओ की मनमानी और भ्रस्टाचार के इस अदभुत स्वरुप को देख कर ब्रितानिया हुक्मरानों के शासन की याद ताजा हो जाती है,जहा भारत की आम जनता की चिंता ना उस सरकार को थी ना इन सरकारों को है| सरकारे आम जनता के विश्वास को लुटने के लिए ,उनके मताधिकार के संवैधानिक अधिकार को लोभ जाल में फंसा कर हड़पने के लिए जनता के धन का चुनावी लाभ हेतु इस्तेमाल कर रही है| एक विधायक,एक सांसद के अपने विधान सभा,अपने संसदिए इलाके के प्रति क्या कर्त्तव्य है,क्या यह भी इन निर्वाचित प्रतिनिधिओ को ज्ञान नहीं है? क्या सरकारों में शामिल मंत्रियो को सिर्फ अपने इलाके में या जहा से उनके पुत्र या सगे -सम्बन्धी चुनाव लड़ने वाले हो ,अपने मंत्रालय का सारा धन वही लगाना राजनीतिक गिरावट और भ्रस्टाचार नहीं ? बुनियादी बदलाव की जगह तात्कालिक लाभ के लोभ में फंस कर इन स्वार्थी राजनेताओ के मकड़ जाल में आम आदमी दिन प्रति दिन कसता ही जा रहा है| ग्रामीण इलाको ,ग्रामीण जनता ,मेहनत कश तबके के सर्वांगीन विकास की एक ठोस पहल ,एक सकारात्मक कार्य योजना आज तक क्रियान्वित नहीं हो सकी है| चुनावी लाभ के लिए टुकडो टुकडो में लागु की जाने वाली विकास योजना सिर्फ छलावा ही साबित होती है जिस से आम जन की जगह चन्द लोगो की तरक्की और शानो-शौकत में वृद्धि होती है | ग्रामीण जनता के लिए ,उसके जीवन के स्तर को उच्च स्तर पर लाने के लिए अब कंक्रीट और इस्पात की नहीं, खेती- किसानी के लिए किसानों के उपज में लागत के अनुपात में मूल्य निर्धारित करने की जरुरत है | ग्रामीण जनता का भला ना कंक्रीट की इमारतो से हुआ है और ना ही इस्पात के जाल से हो सकता है,ये सिर्फ विकास के एक पहलु ,एक टुकड़े ही है | समग्र विकास की पहल ग्रामीण जनता के जीवन दशा, उनके परंपरा-गत पेशे ,बुनियादी शिक्षा-स्वास्थ्य - कृषि आधारित रोजगार ,वाजिब-लाभकारी मूल्यों के निर्धारण और सबसे बढ़कर उनमे आत्म विश्वास जगाने से होगा| यह आत्म विश्वास जगाने का काम भ्रष्ट नेता नहीं करेंगे ,ये स्वार्थी और भ्रष्ट नेता सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने के लिए आम जनता के सम्मुख विकास के नाम पर लोभ का पिटारा खोलते है |जनता की मेहनत की कमाई से बने सरकारी खजाने और उसी सरकारी खजाने के धन को बेशर्मी पूर्वक सिर्फ अपने राजनीतिक लाभ के मद्दे नज़र इस्तेमाल नहीं लुटाते हुये इनको तनिक भी लाज नहीं आती ,कारण सिर्फ आम जनता की ख़ामोशी ही है| आम जनता की ख़ामोशी तोड़ने का काम ,ग्रामीण जनता के बीच जाकर इन स्वार्थी मंत्रियो-नेताओ के स्वार्थी मंसूबो को बताने और जन चेतना जगाने का काम अगर भारत की तरुनाई आगे बढ़ कर अपने मजबूत कंधो पर ले लेवे और जुट जावे इनके चेहरों से नकाब हटाने की मुहिम में तब सत्ता ही नहीं व्यवस्था परिवर्तन से भी कोई नहीं रोक सकता | आज जरुरत समग्र चेतना जगाने और ग्रामीण इलाको की जनता के मन को समझने की है,ग्रामीण मन अब शोषक वर्ग से त्रस्त हो चुका है,नित नए अंट-शंट आन्दोलनों ने आम जन को निराश ही किया है| ग्रामीण मन भारत का वास्तविक मन है,इसकी अभिलाषा को ना जानने की इच्छा शक्ति सरकारी में है,ना ही इनकी समग्र विकास से वास्ता| ग्रामीण इलाको में विकास कार्य सिर्फ चुनावी लाभ के लिए होते है ना की ग्रामीणों की तरक्की के लिए | ग्रामीणों के लिए बनी सार्थक योजनाये भी स्वार्थी सरकारों के नापाक मनसूबों और भ्रष्ट नेता-भ्रष्ट नौकरशाह -अपराधी के काकस में तम तोड़ कर सिर्फ जेब भरने का जरिया बन गयी है |आज जरुरत ग्रामीण अंचलो में जागरूकता की और संवैधानिक अधिकारों को हासिल करने की लडाई लड़ने की है| ग्रामीण इलाको में लोगो के पास तन ढकने को कपडा नहीं है, उनके पास इतना पैसा नहीं है की वो सलीके का वस्त्र खरीद कर पहन सके और पूंजी वाद की बेरहम चक्की में मेहनत कशो-किसानों-युवाओ के हक़ को पिस कर शोषक वर्ग के लोग शहरो-महानगरो में अपना तन दिखाने के लिए नाना प्रकार के हजारो रूपये के वस्त्र खरीदते और पहनते है| ग्रामीण मन अन्दर ही अन्दर अपने शोषण के खिलाफ जल रहा है,ज्वाला मुखी के मुहाने पर बैठा यह समाज किसानों-मेहनत कशो की मेहनत की गाढ़ी कमाई पर ऐश कर रहा है और अंजाम की परवाह भी नहीं कर रहा है| अगर किसी युवा का आक्रोश तमाचे के रूप में एक मंत्री के मुंह पर जा पड़ता है तब कोहराम मचाने में ये स्वार्थी नेता तनिक भी संकोच नहीं करते और अपने द्वारा आम जन के हितो पर प्रति दिन -प्रति पल कुठारा घात करते समय इनको शर्म भी नहीं आती| जुल्मी-निरंकुश सरकारों के खिलाफ संघर्ष करना और उनको उखाड़ फैकना आज के ग्रामीण भारत के मन की अभिलाषा है| जनता की अभिलाषा पर खरे उतरने वाले राजनीतिक नेतृत्व का अभाव ही भ्रष्ट सरकारों के लिए संजीविनी का काम कर रहा है, समाजवादियो ,जनता के लिए संघर्ष करने वाले संगठनो और राष्ट्र वादियो को ग्रामीण मन के अनुसार चलना चाहिए | भ्रष्ट सरकारों के खिलाफ जनता से जुड़े संघर्ष शील राजनीतिक नेताओ को लोकतान्त्रिक अधिकारों को हासिल करने के लिए चुनाव लड़ना चाहिए या किसी इमान दार ,जन नेता ,समाजवादी चरित्र-सोच के प्रत्याशी की भर-पुर मदद करनी चाहिए | जनता के लिए संघर्ष करने वाले ही जनता के लिए काम कर सकते है ,जोड़ तोड़ व मौका परास्त राजनीति करने वाले सिर्फ स्वार्थ सिद्ध करेंगे यह निश्चित व ध्रुव सत्य है |सामाजिक - राजनीतिक व्यवस्था परिवर्तन के लिए आम जन के हितैषियो को लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत जन प्रतिनिधि निर्वाचन हेतु आगे आना चाहिए ,बगैर लोकतान्त्रिक ताकत हासिल किये व्यवस्था परिवर्तन नहीं किया जा सकता है|

जन चेतना अभियान

बाराबंकी में जन चेतना अभियान के तहत देवा से महादेव तक १३ दिसम्बर को निकली महंगाई,भ्रष्टाचार,जातिवाद,फिरका परस्ती,राजनीतिक गिरावट के खिलाफ और आम आदमी के हको हकूक की लडाई सड़क पर लड़ने के लिए जन कारवां बनाने के उद्देश्य से निकली संकल्प यात्रा अपने उद्देश्यों में सफल रही| अब ग्रामीण अंचलो में ग्रामीणों के साथ बैठक ,पद यात्रा ,साइकिल यात्रा के लिए संघर्ष शील साथियो को आगे आना चाहिए | बाराबंकी की समाजवादी धरा से जुल्मी ,अत्याचारी,जनविरोधी,मौकापरस्तो ,अवसर वादियो ,पूंजीपतियो को प्रत्याशी को विधान सभा में नहीं पहुचने दिया जायेगा यह संकल्प आम जनता को दिलाते रहना है| समाजवादी चरित्र व सोच के विधान सभा प्रत्याशियो जिन्होंने आम जनता के हित की लडाई लड़ी है उनको विधान सभा में अपना प्रतिनिधि निर्वाचित करना है|दल बदलुओ को नकार दीजिये ,सिर्फ जनता से जुड़े अपने राजनीतिक सिधान्त पर अडिग ,राजनीतिक चरित्र व समाजवादी सोच के प्रत्याशियो को समर्थन व मत दीजिये |राजनीतिक दलों के मकड़ जाल से निकल कर समाजवादी सोच - चरित्र के जन नेताओ को विजयी बनाइये |विनम्र अनुरोध के साथ-- अरविन्द विद्रोही

Monday, December 12, 2011

आखिर कार अन्ना पर गरजे बाराबंकी के विकास पुरुष बेनी प्रसाद वर्मा

अरविन्द विद्रोही----- बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री ने अन्ना हजारे की राहुल गाँधी के सन्दर्भ में कि गयी टिप्पणी के बाद अन्ना को चेतावनी भरे लहजे में चुनौती देते हुये कहा कि अन्ना उत्तर प्रदेश में आये,हम उनको देख लेंगे | पुराने समाजवादी ,वर्तमान में गोंडा से सांसद व बाराबंकी के मूल निवासी तथा बाराबंकी के विकास पुरुष माने जाने वाले बेनी प्रसाद वर्मा ने अन्ना और उनके आन्दोलन को संविधान विरोधी करार दिया | बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री ने कहा कि जब मैंने लोकपाल को संविधान के दायरे में लाने कि बात कही थी तब इन लोगो ने मजाक उठाया था,आज ये लोग भी इस बात पर सहमत है लेकिन यह समझ के परे है कि जब कांग्रेस और राहुल गाँधी मजबूत लोकपाल के लिए अपनी प्रतिबद्धता जता चुके है तब यह लोग राहुल गाँधी को निशाना क्यूँ बना रहे है ? बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री ने साफ़ तौर पर कहा कि अन्ना और उनके लोग विपक्ष और आर एस एस के इशारे पर बतौर मोहरे काम कर रहे है |बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि राहुल गाँधी की मेहनत और बढ़ते कांग्रेस के जनाधार से बौखला कर विपक्षी दल अन्ना और उनकी टीम के सहारे सड़क पर अनर्गल प्रलाप कर रहे है| राहुल गाँधी और कांग्रेस के खिलाफ किसी भी प्रकार का अनर्गल टीका टिप्पणी कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा |

भ्रस्टाचार और अनैतिक आचरण

गरीबो,किसानों ,मजदूरों को रोजाना लुटने वाले लोग भी आज कल भ्रस्टाचार के खिलाफ जन लोकपाल बिल लागू करने के लिए अनशन कर रहे है| गरीबो का हक़ मार कर बने पूंजीपति , किसानों को रोजाना ठगते वकील और मजदूरों को कम मजदूरी देकर भरपूर मेहनत करवाने वाले शहरी लोगो को अपने द्वारा किये जा रहे प्रति दिन के भ्रस्टाचार और अनैतिक आचरण पर खुद अंकुश लगाना चाहिए| अगर सभी खुद में सुधार कर लेवे तो किसी विधेयक की जरुरत नहीं| दुसरो के सुधार के पहले चलिए खुद को सुधारा जाये...... |

Sunday, December 11, 2011

हकीकत से मुह मोड़ते कांग्रेस नेता - राजेंद्र चौधरी


समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि कांग्रेस के युवा महासचिव अपने कार्यकर्ताओं को जो पाठ पढ़ा रहे हैं, वह जमीनी हकीकत से मुॅह मोड़ने जैसा है। उ0प्र0 में कांग्रेस 20 वर्षो से सत्ता से बाहर है इसका दर्द उन्हें होना चाहिए, किन्तु यह भी तो उन्हें सोचना होगा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि प्रदेश के मतदाताओं ने कांग्रेस को लगातार नकार दिया है। प्रदेश पार्टी संगठन के प्रति उनमें गहरी नाउम्मीदी है जिसकी वजह से वे बसपा-सपा की बेतुकी तुलनाएं कर अधूरी बात करते हैं।
उ0प्र0 में साम्प्रदायिक ताकतों ने प्रदेश की प्रगति में अवरोध पैदा किए। जातीयता और झूठ के बल पर बसपा ने गद्दी तो हथिया ली लेकिन विकास में प्रदेश केा वर्षो पीछे कर दिया। दुर्भाग्य से इन ताकतों को कांगे्रस की शह मिलती रही हैं। भाजपा राज में बाबरी मस्जिद का ध्वंस हो या बसपा सरकार में हर तरफ लूट और भ्रष्टाचार की बढ़त, इस सबके पीछे कांगे्रस की भूमिका रही है। कांग्रेस महासचिव को इस बात का जवाब देना चाहिए, कि जब कांग्रेस जानती है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार है, विकास रूका हुआ है, घोटाले हो रहे हैं, उसमें हत्याएं हो रही हैं तो फिर क्यों बसपा के भ्रष्टाचार-लूट को केन्द्र सरकार संरक्षण दे रही है। मुख्यमंत्री और उनके परिवारीजनों के खिलाफ तमाम घपलों में संलिप्त होने के लिए सीबीआई मुकदमें क्यों नहीं दर्ज कर रही है?
राजेंद्र चौधरी ने कहा कि कांगे्स महासचिव को क्या यह नहीं मालूम है कि प्रदेश में किसान कितना बदहाल हैं। भट्टापारसौल के किसानों का दर्द जानने के बाद उनको राहत देने के लिए क्या किया गया? मुस्लिमों को आरक्षण देने का झुनझुना दिखाने वाले कांग्रेस नेता को यह तो बताना चाहिए कि सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशें लागू करने में क्यों देरी की जा रही हैं? अपनी ही बनाई कमेटियों की सिफारिशें मानने से गुरेज क्यों है? केन्द्र में तो कुछ वर्षो को छोड़कर बराबर कांग्रेस की सरकारें रही है तो मुसलमान की हालत दलितों से भी ज्यादा बदतर क्यों हो गई है? आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र में कांग्रेस ने मुस्लिमों के हित में कौन से कदम उठाए हैं?
राजेंद्र चौधरी के अनुसार कांग्रेस महासचिव को यह जानना चाहिए कि बसपा के भ्रष्टाचार और लूट खसोट वाले राज के साढे़ चार सालों में सिर्फ समाजवादी पार्टी ही विरोध में मोर्चा सम्हालती रही है। कांग्रेस बताए कि उसने बसपा राज की कुनीतियों के खिलाफ कब संघर्ष किया है? प्रायोजित तरीके से दलित बस्ती में जाकर किसी के घर खाना खा लेने भर से गरीब की जिंदगी में बदलाव आने वाला नहीं है। कांग्रेस ने इस देश को असमानता, गरीबी, भूख और भ्रष्टाचार की थाती सौंपी है। टू-जी स्पेक्ट्रम, घोटाला, कामनवेल्थ खेल घोटाला में केन्द्र सरकार के मंत्री तिहाड़ जेल में बंद हैं तो हत्या, लूट, बलात्कार के मामलों में बसपा के मंत्री विधायक भी प्रदेश की कई जेलो में सजाएं काट रहे हैं। 40 प्रतिशत से ज्यादा बसपा सरकार के मंत्री लोकायुक्त की जाॅच में फंसे हैं।
प्रदेश में सिर्फ समाजवादी पार्टी किसानों की, व्यापारियों की, वकीलों और नौजवानों की, मुस्लिमों और महिलाओं के हितों की लड़ाई लड़ती रही है। उसके हजारों कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस संरक्षित बसपा सरकार के अपमान, उत्पीड़न को सहा है। उ0प्र0 में लोकतंत्र के लिए संघर्ष मंे समाजवादी पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश की जनता अब कांग्रेस -बसपा और भाजपा की आपसी साठ-गाॅठ वाली राजनीति से क्षुब्ध है और समाजवादी पार्टी को ही सत्ता में बिठाने का मन बना चुकी है। मुलायम सिंह यादव का वायदा है कि समाजवादी पार्टी जनता की आशाओं पर खरी उतरेगी।

Tuesday, December 6, 2011

बेनी प्रसाद वर्मा केंद्रीय मंत्री मंडल से बर्खास्त हो-राजेंद्र चौधरी


समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बेबाकी से कहा कि अब बेनी प्रसाद वर्मा को केंद्रीय मंत्री मंडल से बर्खास्त किया जाना चाहिए|उन्होंने कहा कि ध्यान दीजिये -बेनी प्रसाद वर्मा ने बयान दिया है कि अब राहुल गाँधी को प्रधान मंत्री बनना चाहिए|यह बयान प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के प्रति अविश्वास को प्रकट करता है ,लिहाज़ा बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री को प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के मंत्री मंडल से त्याग पत्र दे देना चाहिए यदि वो त्याग पत्र ना देवे तो प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह को अपने प्रति अविश्वास प्रकट करने वाले केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को अपने मंत्री मंडल से हटा देना चाहिए |अपने मंत्रालय के धन का बेजा इस्तेमाल कर रहे बेनी प्रसाद वर्मा मंत्री पद के संवैधानिक दायित्वों की पूर्ति की जगह अपने व्यक्तिगत प्रचार-प्रसार में जुटे है| राजेंद्र चौधरी ने आगे कहा कि इसके अतिरिक्त भी कई मंत्री है जो अपने मंत्रालय का धन अपव्यय करते हुये अपना प्रचार बड़े-बड़े विज्ञापन पटो के द्वारा कर रहे है ,इस पर तत्काल पाबन्दी लगनी चाहिए|

Monday, December 5, 2011

देवा से महादेवा की संकल्प यात्रा की तैयारियो में जुटे ,जन संपर्क तेज़

अरविन्द विद्रोही----------- संकल्प यात्रा के संयोजक सूफयान अख्तर ने अपने सहयोगियो सादिक हुसैन-सभासद,नगर पालिका बाराबंकी ,हृदयेश श्रीवास्तव - पचघरा,फतेहपुर, डॉ मतीन अहमद-ओबरी,बाराबंकी ,प्रदीप कुमार मिश्र ,नज़मउद्दीन अहमद - अहमदपुर -दरियाबाद, विकास वर्मा-अहमदपुर,फतेहपुर,राम समुझ यादव-उसरहा,कौशल कन्नोजिया-धमसड़, के साथ बाराबंकी शहर के विभिन्न वार्डो का भ्रमण किया|भ्रमण के दौरान संकल्प यात्रा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रमुख लोगो से वार्ता की तथा यात्रा को सफल बनाने के लिए समर्थन माँगा| वही फतेहपुर कस्बे व तहसील में आम जनता-अधिवक्ताओं के मध्य एक परचा वितरित किया जाना आज चर्चा का केंद्र बिंदु बन गया |संकल्प यात्रा में शामिल होने के अनुरोध के साथ साथ इस पर्चे में संकल्प यात्रा निकलने के कारण बताते हुये लिखा है कि यह यात्रा फैले हुये भयंकर भ्रष्टाचार,आसमान छूती महंगाई ,घोले जा रहे जातिवाद के ज़हर,तेजी से आ रही राजनीतिक गिरावट के खिलाफ और किसानों-मजदूरों व अल्पसंख्यको की समस्याओं के निराकरण हेतु संघर्ष के लिए जन चेतना जगाने के लिए निकाली जा रही है| मालूम हो कि अभी १ दिसम्बर को बेलहरा हाउस -देवा रोड बाराबंकी में आयोजित संकल्प गोष्ठी में इस यात्रा का निर्णय हुआ था| कुछ ही दिनों में यह संकल्प यात्रा बाराबंकी के राजनीतिक गलियारों में हर नुक्कड़ व बंद कमरे में चर्चा का मूल विषय बनी है|इस यात्रा के राजनीतिक अर्थ तलाशने की तमाम कोशिशे व्यर्थ ही है ,कारण संकल्प गोष्ठी में ही सरवर अली -पूर्व विधायक ने साफ़ तौर पर एलान कर दिया था की राजनीतिक ताकत के बिना जनता की कोई लडाई नहीं लड़ी जा सकती है ,अतः विधान सभा का चुनाव जरुर लड़ा जायेगा| सम्भावना तो यहाँ तक है बाराबंकी की सभी सीटों पर निर्दलिए प्रत्याशी उतारने की योजना के तहत ही सरवर अली -पूर्व विधायक रात दिन एक किये है|संकल्प यात्रा के प्रचार प्रसार के लिए सरवर अली जनपद के दूर दराज के ग्रामीण इलाको में भ्रमण कर रहे है|बीती रात धमसड़ में ग्रामीणों की एक तैय्यारी बैठक भी सरवर अली ने किया था जिसमे सर्दी के बावजूद सैकड़ो ग्रामीणों ने शिरकत की |