Wednesday, September 5, 2012

विद्यार्थी की मनोकामना - ईश्वर से प्रार्थना ------------- अरविन्द विद्रोही


हे पूज्य गुरुदेवों सादर चरण स्पर्श । हे बृहस्पति गुरु,हे शुक्राचार्य, हे द्रोणाचार्य आदि गुरुओं की परम्परा के वाहक गुरुजन अपनी गौरवमयी परम्परा को याद करें ।यह हमारे समाज का दुर्भाग्य है कि समाज को शिक्षित करके सत्मार्ग पर ले जाने वाले आप समाज के शिक्षक गण अपनी राह से भटक ही नहीं गये हैं वरन पथभ्रष्ट हो गये हैं ।यह वेदना है एक शिष्य की ........पीडा है आपके शिष्य के अंर्तमन की ।जिसका शीश किसी भी गुरुकुल के शिक्षक के सम्मान में झुक जाता था, वो शीश आज शिक्षकों के नित नये अनैतिक कारनामों के उजागर होने से शर्म व ग्लानि से धसां जा रहा है ।हे गुरुदेवों ....अपना पुर्न उत्थान करें ।अपनी ज्ञान उर्जा को शिक्षा जगत में , समाज को शिक्षित करने में लगाने का प्रयास करें । आप मॉं शारदे के पुत्र ,आपको यह सांसारिक लोभ लालच भ्रष्टाचार ने कैसे अपने बंधनो में जकड लिया है ।हे गुरुश्रेष्ठ -जागृत हो,मोह-लोभ की बेडियों को तोड दीजिए ।छोड दीजिए-ठेकेदारी का लालच ।मत मोड़िए ,अपनी शैक्षिक छवि को ,ज्ञान पुंज को-लोभ के दरिया में।व्यभिचार के कुंभ में बदलते अपने स्वरूप को तत्काल रोकें-गुरूदेवों ।हम महादेव के सामने सिर पटक चुके हैं कि हे महादेव-हमारे गुरूओं को सत्मार्ग पर लायें ।हम मॉं सरस्वती से विनयावत हो चुके हैं कि हे माते अपने पुत्रों को सहेजें ।हमने अपने छात्र जीवन की उन घटनाओं को याद किया है ,जब हे गुरूश्रेष्ठ-आप हमें सिर्फ असत्य बोल देने पर कक्षा में दण्डित करते थे ।आज आप ही के द्वारा दण्डित ,सत्मार्ग पर आपके ही द्व्रारा चलाये गये विधार्थी आपके सम्मुख चरण वन्दना को प्रस्तुत हैं-हे गुरूवर ,हे परशुराम ,हे वशिष्ठ आदि ऋषियों मुनियों की भॉंति हमें युगों-युगों से शिक्षित कर रहे शिक्षा के पुजारियों ,आप मॉं लक्ष्मी के पुजारी क्यों बन रहें हैं?आप अपना स्वरूप क्यों बिगाड रहें हैं?विद्या ददाति विनयम् आपने हमें पढाया था। आपकी उदारता ,आपका कर्त्तव्यबोघ ,समाज के प्रति आपका अनुराग कब ,कैसे ,क्यों और कहॉं लुप्त हो गया?हम चिंतातुर हैं मुनिवर् ।हम व्याकुल हैं ,आघुनिक भारत के शिक्षा गुरूओं-हम व्यथित हैं। हे जगतजननी मॉं ,आप ही दया करो। आने वाली अपनी औलादों के लिए हमारे गुरूओं की सद्बुध्दि वापस कर दो -मॉं! मॉं , हम अपने लिए नहीं वरन् अपने गुरूओं और अपनी संतानों और समाज के लिए आपसे गुरूओं को सत्मार्ग पर लाने की भिक्षा मॉंगते। हैं। हे भारतमाता। आप ही समझाओं इन गुरूश्रेष्ठों को। हे दुर्गा मॉं-आपसे तो असुर भी भय खाते थे ,क्या हमारे गुरू आपसे नहीं डरते?हे सनातन धर्म के कोटि2 देवताओं ,हे समस्त धर्मो के श्रध्देयों-हमारी ,विद्यार्थियों की विनती पर भी ध्यान दें ।हमारे शिक्षकों को मॉं सरस्वती का ही पुत्र रहने दें ।हमारे शिक्षकों को भ्रष्टाचार के दलदल से निकालो-कृष्ण ।हे वासुदेव कृष्ण-तुमने तो अधर्म के नाश के लिए चचेरे भाईयों में महाभारत कराकर धर्म की स्थापना की थी। हे मधुसूदन-अपने मामा कंस का वध आपने ही अत्याचार ,आतंक खत्म करने के लिए किया था ।अवतार ले लो हे चक्रधारी । हे सर्वशक्तिमान-सम्पूर्ण सृष्टि के रचयिता ।आप जिस भी रूप में हों, आपकी नजर तो सब पर है ।हम आपको नहीं देख पाते ,आपका डाक पता भी नहीं है ,इसलिए हम इस लेख के माध्यम से आप देवगणों से निवेदन करते हैं कि हमें सत्मार्ग दिखाते आ रहे हमारे गुरूओं ने अपना मार्ग बदल दिया है ,इन्हें राह पर लाने का कोई तो जुगाड. करो प्रभु ।हे सृष्टि रचयिता ब्रहमाजी-आपने कहॉं चूक कर दी?हे पालनहार विष्णु जी-आपने पालन में क्या असमानता कर दी?हे महादेव-क्या आपके त्रिनेत्र खोलने का समय आ गया है?नहीं2 महादेव नहीं , हम अपने गुरूदेवों की तरफ से क्षमाप्रार्थी हैं ।आपने तो समस्त दोषियों को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया है ,उन्हें सचेत किया है ।फिर हमारे मार्गदर्शकों ,हमारे पूज्यनीयों के साथ यह भेदभाव क्यों?गुरूओं को अवसर दें प्रभु ।उन्हे सत्मार्ग पर लाने के लिए मॉं से बोलिए प्रभु ।अपने कर्मो से स्वयं अपना अपमान करा रहे गुरूवरों को दण्डित करने के बारे में अभी मत सोचें-महादेव ।भ्रष्टाचार के घनघोर बियावान में भटक रहे गुरूजनों को अपने ज्ञानपुंज से सदाचरण की राह पर लाओ मॉं ।।।।।।।।।।। इसी आाशा और विश्वास के साथ कि हमारी मनोकामना अतिशीघ्र पूरी होगी।

Tuesday, September 4, 2012

५ सितम्बर ,शिक्षक दिवस - डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णन का जन्म दिवस-- अरविन्द विद्रोही


आज शिक्षक दिवस है।शिक्षक दिवस भारत के प्रथम उपराष्टपति 1952-1962 तथा द्वितीय राष्टपति 13मई,1962-13मई,1967 तक रहे डॉ०सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिन के अवसर पर मनाया जाता है।डॉ०सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5सितम्बर,1888 को तिरूट्टनी,तमिलनाडु में हुआ था।आपकी पत्नी का नाम शिवकामु था।अपने पीछे 1पुत्र तथा 5पुत्रियां आप छोड़ कर गये थे।डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक प्रखर वक्ता तथा आदर्श शिक्षक थे।भारतीय सभ्यता तथा संस्कृति को अंगीकार किये दार्शनिक स्वभाव के आस्थावान हिन्दू विचारक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 40वर्ष तक शिक्षण कार्य किया। डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने ब्रिटेन के एडिनबरा विश्वविद्यालय में दिये गये अपने व्याख्यान में कहा था कि-‘‘मानव को एक होना चाहिए।मानव इतिहास का सम्पूर्ण लक्ष्य मानव जाति की मुक्ति है।अब देशों की नीतियों का आधार विश्व शांति की स्थापना का प्रयत्न करना हो।‘‘ वास्तव में डाॅ0सर्वपल्ली राधाकृष्णन वसुघैव कुटुम्बकम की अवधारणा को मानने वाले थे।पूरे विश्व को एक इकाई के रूप में रखकर शैक्षिक प्रबंधन के पक्षधर डॉ०राधाकृष्णन अपने ओजस्वी एवं बुद्धिमता पूर्ण व्याख्यानों से छात्रों के बीच अत्यन्त लोकप्रिय थे।शिक्षण कार्य में अपनी जबरदस्त पकड़ रखने के कारण दर्शन शास्त्र जैसे गंभीर विषय को भी अपनी शिक्षण शैली से वो रोचकता पैदा करके सरलतम रूप में छात्रों को समझाते-पढ़ाते थे।शिक्षण काल में छात्रों के मध्य कुछ रोचक प्रस्तुतियां,प्रेरक प्रसंग,हास्य-व्यंग्य की कहानियां प्रस्तुत करके छात्रों में सदैव शिक्षा के प्रति अभिरूचि बनाये रखने में कामयाब रहते थे- डॉ०सर्वपल्ली राधाकृष्णन। डॉ०सर्वपल्ली राधाकृष्णन बहुमुखी प्रतिभा व व्यक्तित्व के धनी एक प्रसिद्ध विद्वान,शिक्षक,प्रखर वक्ता,कुशल प्रशासक,राजनयिक,देश-भक्त,दार्शनिक तथा शिक्षा-शास्त्री थे।शिक्षा को मानव व समाज का सबसे बड़ा आधार मानने वाले डॉ०सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शैक्षिक जगत में अविस्मरणीय व अतुलनीय यांगदान रहा है।जीवन के उत्तरार्द्ध में भी उच्च पदों पर रहने के दौरान शैक्षिक क्षेत्र में आपका योगदान सदैव बना रहा।डॉ०सर्वपल्ली राधाकृष्णन सामाजिक बुराइयों को हटाने के लिए शिक्षा को ही कारगर मानते थे।मात्र सूचना व जानकारी को ही शिक्षा न मानते हुए डॉ०सर्वपल्ली राधाकृष्णन व्यक्ति के बौद्धिक,आध्यात्मिक,सामाजिक रूप से विकास को भी शिक्षा का अभिन्न अंग मानते थे।प्रत्येक नागरिक के मन में लोकतांत्रिक भावना व सामाजिक मूल्यों की स्थापना शिक्षा का मुख्य व महत्वपूर्ण कार्य मानते थे।डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अनुसार-शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और निरन्तर सीखते रहने की प्रवृत्ति।वह एक ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्ति को ज्ञान व कौशल दोनों प्रदान करती है तथा इनका जीवन में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करती है।करूणा,प्रेम और श्रेष्ठ परम्पराओं का विकास भी शिक्षा का उद्देश्य हैं। डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षक उन्हीं लोगों को बनना चाहिए जो सर्वाधिक योग्य व बुद्धिमान हों।उनका स्पष्ट कहना था कि जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होता है और शिक्षा को एक मिशन नहीं मानता है,तब तक अच्छी शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती है।शिक्षक को छात्रों को सिर्फ पढ़ाकर संतुष्ट नहीं होना चाहिए,शिक्षकों को अपने छात्रों का आदर व स्नेह भी अर्जित करना चाहिए।सिर्फ शिक्षक बन जाने से सम्मान नहीं होता,सम्मान अर्जित करना महत्वपूर्ण है-यह कहना था डॉ०सर्वपल्ली राधाकृष्णन का।

Wednesday, August 15, 2012

मौलाना मेराज पर शासन सत्ता के दुरूपयोग का आरोप


समाजवादी पार्टी के बाराबंकी जनपद अध्यक्ष मौलाना मेराज पर शासन सत्ता के दुरूपयोग का आरोप लगाते हुये राईन समाज - सब्जी व्यापारियों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को शिकायती पत्र प्रेषित किया | मौलाना मेराज के खिलाफ गलत तरीके से मंडी परिषद् में दुकान सस्ते दर पे आवंटित करा लेने का आरोप लगाने वाले मो इसरार हाफिज़ के भाई की बीती रात पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के पश्चात् तनाव का माहौल व्याप्त हो चुका है | राईन समाज के नेता गण मो सिद्धिक पहलवान , वसीम राईन , ताज बाबा राईन आदि ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष का इस समय एक ही कार्य है कि किसी भी तरीके से शासन सत्ता के आधार पे ज्यादा से ज्यादा संपत्ति अर्जित कर ली जाये | आज सब्जी व्यापारियों और राईन समाज के लोगो ने बैठक कर के यह निर्णय लिया है कि अगर ४ दिनों के भीतर मौलाना मेराज के कृत्यों की जाँच करके कार्यवाही ना की गयी तो आन्दोलन किया जायेगा |

Monday, August 6, 2012

जनता - जन लोकपाल व टीम अन्ना का आन्दोलन


अरविन्द विद्रोही ....................... भारत में संसद व आम जनता द्वारा चुने हुये जनप्रतिनिधियो को धमकाते- गरियाते - धिक्कारते चले जन लोकपाल आन्दोलन की परिणिति राजनीतिक दल के गठन के रूप में आ ही गयी है | चलो यह सुखद ही है संवैधानिक व्यवस्था , लोक्तान्त्रन्तिक व्यवस्था से मिली आम जनता को अपना जन प्रतिनिधि निर्वाचित करने ले अधिकार की ताकत का मखौल उड़ाते उड़ाते गैर सरकारी संगठनो के ये कर्ता धर्ता राजनीतिक ताने बने में आ ही गये | निश्चित रूप से लोकतान्त्रिक देश में राजनीतिक दल बनाने व निर्वाचन प्रक्रिया में शामिल होने का इनका कदम स्वागत योग्य है | अब इस टीम के स्व नाम धन्य नेताओ को अपना मताधिकार भी सुनिश्चित करने की तरफ ध्यान देना होगा और आम जनता से अपने दल के लिए मत भी जुटाना पड़ेगा | गैर सरकारी संगठनो के इस जमावड़े में आई हेट पोलिटिक्स का जुमला भी खूब चला था | जुमला उछालने वाले युवाओ की मानसिक दशा अब इनके प्रति क्या होगी यह समझा जा सकता है | विचार - सिद्धांत - संगठन की जगह सिर्फ व्यक्ति को प्रतीक बना कर , उसको महिमा मंडित करके उसके इर्द गिर्द मिडिया के रहमो करम से इस आन्दोलन को प्रारंभ में बखूबी परवान चढ़ाया गया | प्रारंभिक दौर में तमाम खुले - ढके - छुपे कारणों से जन लोकपाल विधयेक लागु करने का यह आन्दोलन मिडिया ने खूब प्रचारित प्रसारित किया | भ्रस्टाचार और सरकार की गैर जिम्मेदाराना कृत्यों से त्रस्त व अपना अपना सामाजिक राजनीतिक प्रभाव आम जन में बढ़ाने के लिए तमाम राजनीतिक कार्यकर्ताओ ने - समर्थको ने इस सामाजिक आन्दोलन में अपना योगदान बखूबी दिया | दलिए सीमाओ का बंधन टूटा और जन भावनाएं उभरी | लोगो का हुजूम मुख्य आन्दोलन स्थल जंतर मंतर की तरफ कूच किया और एक जन कारवां बन गया | जगह जगह जनपद स्तर पे भी अनशन आन्दोलन जारी हो गये थे | जिले स्तर पे भी गैर सरकारी संगठनो से जुड़े लोगो का भारी जमावड़ा आन्दोलन में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने में तत्पर दिखा | इंडिया अगेंस्ट करेप्सन नामक संगठन के बैनर तले स्व घोषित व मिडिया पोषित स्वयंभू सिविल सोसाइटी के इन कर्ता धर्ताओ ने भारत को भ्रस्टाचार से मुक्त करने का एक मसौदा तैयार किया और उसको ही लागु करने के लिए आन्दोलन शुरु किया था | इनके मसौदे के प्रावधानों की जानकारी के बगैर ही सिर्फ व्यक्ति आधारित विश्वास की अवधारणा के वशीभूत होकर भारत का शहरी नागरिक व युवा उद्वेलित दिखा | स्वतः स्फूर्ति से संचालित यह आन्दोलन प्रारंभ से ही संगठनहीन व दिशा हीन रहा | अन्ना टीम अपने ही खेलो - करतबों और बयानों से तेजी से कुख्यात होती गयी | इंडिया अगेंस्ट करेप्सन के जनपद स्तर के कई कर्ता धर्ताओ से वार्ता के दौरान स्पष्ट पता चला की ये सभी लोग अन्ना हजारे के व्यक्तिगत आभा मंडल , मिडिया के द्वारा प्रचार व जनता के स्वतः स्फूर्त भावनात्मक उभर के भरोसे अपना गाल बजा के व पीठ थपथपा के आत्म मुग्धता के शिकार हो रहे है | इस टीम का एक और प्रसिद्ध जुमला कि अब पूरा देश भ्रस्टाचार के खिलाफ है और हमारे साथ है , कितना हास्यास्पद था , इसका इनको भान ही नहीं रहा | दुर्भाग्य वश भारत में भ्रस्टाचार भारत के आम नागरिक की शिराओ में रक्त बनकर प्रवाहित हो रहा है , यह अलग बात है कि अपना भ्रस्टाचार उसको चलता है , अपने खिलाफ षड़यंत्र और दुसरे का भ्रस्टाचार देश द्रोह दिखता है | भारत में सभी नागरिक यदि भ्रस्टाचार के खिलाफ हो गये और अन्ना टीम के साथ आंदोलित हो गये थे तो भ्रस्टाचार स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए था आखिर भारत में भ्रस्टाचार भारत के ही नागरिक तो करते है | इस तरह के ही बयान बड बोलेपन की निशानी होते है , आम जन चेतना के कार्य को करे बैगैर सिर्फ कोर बयानों - भावनाओ से आन्दोलन करने का परिणाम सामने आ ही चुका है | भ्रस्टाचार समाप्ति का एक सुन्दर सपना देख रहे लोगो का , उसके लिए सार्थक तरीके से लगे , आंदोलित लोगो का एक सपना जो की विगत वर्षो में तेजी से लोगो के जेहन में समाया वो बिखर गया | भ्रस्टाचार के खिलाफ इस सामाजिक आन्दोलन का सर्वाधिक दुर्भाग्य पूर्ण पहलु यह रहा की इसके कर्ता धर्ताओ ने संवैधानिक संस्थाओ पे प्रहार किया और जनता के मताधिकार का मखौल उड़ाया | अंततोगत्वा उंट पहाड़ के नीचे आ ही गया और इस टीम ने राजनीति में आने व राजनीतिक दल बनाने की अपनी घोषणा सार्वजनिक कर दी | इनको यह याद नहीं रहा कि मजदूर तो हर जगह मजबूर है ही , किसान भी बेजार है , युवा वर्ग को भी राहत और बख्शीश की दरकार है |महिलाओ का कौन पुरसाहाल है ? तंत्र है भ्रष्ट लेकिन जन के मन में लगा है जंग ,शिराओ में भ्रस्टाचार रक्त बनकर हो रहा है प्रवाहित लेकिन दुसरो पे ऊँगली उठाने में है हम माहिर | खुद में सुधार की बात को मानते है बेमानी और दुसरो पे लगाम अगने की है इच्छा भारी | बलिदानी पैदा हो पड़ोस में और मेरे घर अनिल अम्बानी ये ही सोच बन गयी है भारत के शहरी समाज की | इस सोच को बदलने के लिए अनवरत जनचेतना जागृत करने की जरुरत है | अनशन समाप्ति के अवसर पे समाजवादी पुरोधा डॉ राम मनोहर लोहिया - लोक नायक जय प्रकाश नारायण के विचारो और संघर्षो की याद जंतर मंतर पे ताज़ा की गयी व उनके अनुपालन की भी प्रतिबद्धता दोहराई गई | टीम अन्ना में शामिल इन गैर सरकारी संगठनो के करता धर्ताओ को यह पता होना चाहिए कि अपने को महात्मा गाँधी का कुजात शिष्य मानने वाले समाजवादी चिन्तक - युग दृष्टा डॉ लोहिया आजाद भारत में व्याप्त सभी बुराइयों कि जननी कांग्रेस व नेहरु को मानते थे | डॉ लोहिया ने गैर सरकारी संगठनो के भ्रस्टाचार के प्रति आगाह करते हुये कहा था कि , --- " सरकार भ्रष्ट करती है और पढ़ा लिखा तैयार हो जाता है | यह बहुत मुमकिन है कि पढ़ा लिखा राजी यों हो जाता है वह इतने ज्यादा बच्चो का बाप होता है कि सबको पालना पोसना उसके बूते के बाहर हो जाता है और शहरो के पश्चिमी ढर्रे की वजह सबब से उसे जीवन का एक स्तर बनाये रखना पड़ता है | पढ़े लिखे के संपूर्ण पतन का ज्यादा कारण हो सकता है उसके बच्चे पैदा करने की प्रवृति | विरोधी पार्टियों समेत सभी राजनीतिक दलों में पढ़े लिखे पर इस पतन का असर पड़ा है | संगठन और संस्थाएं खड़ी कर दी गयी है , जहा सरकार के और विरोधी दलों के लोग एक दुसरे से सांठ गांठ कर सकते है और आमदनी या चंदे का बंटवारा कर लेते है | राष्ट्रीय एकता के नाम पर और राष्ट्र निर्माणात्मक काम की आड़ में यह सब किया जा सकता है | १९२० से आज तक हिंदुस्तान में सरकार ने अनेक गैर सरकारी संगठन खड़े किये जो उसकी सक्रिय सरपरस्ती में चलते है | १९२०-३० की अमन सभाएं और ३०-४० के राष्ट्रीय युद्ध फ्रंट के वारिस ही तो है ५० के भारत सेवक समाज इत्यादि | इन पुस्तैनी गुलामी के अड्डो पे जनता की सेवा के नाम पर झूठी मुठी योजनायें लेकर गाने बजने वाले भाट और चिल्ल पों मचने वाले राजनीतिक भी जमा होते है | मतलब सिर्फ पैसे से होता है | पढ़े लिखे को पैसा चाहिए और इन संगठनो से उसे वह इस तरह से मिलता है कि उसे भान होता है कि जैसे वो जनता का भला कर रहा हो | " डॉ लोहिया ने वर्षो पहले साफ़ संकेत दे दिया था | गाजे बजे के साथ चले गैर सरकारी संगठनो के इस अनशन - आन्दोलन में धन के प्राप्ति के माध्यमो की पड़ताल होनी चाहिए | जन लोकपाल विधेयक लागु करने के लिए इंडिया अगेंस्ट करेप्सन के बैनर तले टीम अन्ना के द्वारा चलाये गये अनशन - आन्दोलन में वैचारिक प्रतिबद्धता का नितांत अभाव रहा | प्रारंभ से ही जैसे जैसे आन्दोलन में उभर आता गया , आन्दोलन को अपने कब्जे में लेने का प्रयास आन्दोलन के ही एक आतंरिक समूह द्वारा तेज हुआ और परिणाम स्वरुप आन्दोलन से जुड़े प्रमुख चेहरे एक के बाद एक अलग होते गये | विरोधाभाशो के ही कारण अंत में तमाम अपीलों के बावजूद प्रारंभिक अनशन- आन्दोलन की तरह जन भावना को अन्ना टीम नहीं उभार पाई | अन्ना टीम को ना तो जन सैलाब दिखा और ना ही इलेक्ट्रानिक मिडिया का अतिरिक्त स्नेह रूपी अनवरत प्रसारण | अब इसे अन्ना टीम की हताशा कहे या प्रमुख हस्तिओं की अनशन ख़त्म करने की अपील का असर --- बलिदान देने की बड़ी बड़ी बोल वचन वालो ने एक आन्दोलन - एक सपने का अंत स्वतः कर दिया | सुखद सिर्फ यह रहा कि बडबोले व आत्म मुग्धता के शिकार अन्ना टीम को अब राजनीति में संगठन व कार्यकर्ताओ की फौज तैयार करना पड़ेगा और इनको भी राजनीति में आटे दाल का भाव पता चलेगा |

Friday, July 27, 2012

डॉ लोहिया और समाजवाद के आइने में सपा सरकार का अक्स


अरविन्द विद्रोही ....................................................... डॉ राम मनोहर लोहिया युग दृष्टा थे | समाजवादी विचारो के प्रचारक व आम जनता के हित के तमाम कार्यक्रम देने वाले , सिद्धांतो का प्रतिपादन करने वाले तथा जन संघर्षो को खड़ा करने वाले डॉ लोहिया आम जनता के हित की सरकारों के गठन का प्रयास करते थे और सरकारों पर जन नियंत्रण का प्रभावी काम भी करते थे | डॉ लोहिया के विचारो - सिद्धांतो - संघर्षो की कसौटी पर खरे उतरे बगैर कोई भी समाजवादी सरकार सफल नहीं मानी जा सकती है | वर्तमान में डॉ लोहिया के विचारो पर १९९२ में बनी समाजवादी पार्टी की उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व में सरकार चल रही है | यह सरकार जनता के विश्वास रूपी मतों से निर्वाचित हुई है | आम जनता ने सुश्री मायावती के नेतृत्व में चल रही तत्कालीन बहुजन समाज पार्टी की सरकार में व्याप्त भ्रस्टाचार , नौकरशाही के दबदबे से त्रस्त आकर बसपा सरकार के खिलाफ सड़क पर लगातार संघर्ष कर रहे समाजवादी कार्यकर्ताओ की मेहनत को देखते हुये बसपा को सत्ता से बेदखल किया | समाजवादी पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र ने बसपा सरकार के भ्रस्टाचार से त्रस्त जनता के साथ साथ बेरोजगार युवाओ को आकर्षित करने में सफलता पाई और सोने पर सुहागे का काम किया था | बसपा सरकार को दुबारा ना आने देने के लिए कृत संकल्पित मतदाताओ के मन को पक्का किया था- क्रांति रथ पर निकले , उम्मीदों की साइकिल पर सवार युवा समाजवादी अखिलेश यादव के जन आकर्षण की छमता और सौम्यता पूर्ण आचरण ने | वर्षो के पश्चात् संघर्ष के बलबूते सत्ता में वापस आए समाजवादी कार्यकर्ताओ की आशा के केंद्र बिंदु बने मुख्य मंत्री अखिलेश यादव को अब समाजवादी पुरोधा डॉ राम मनोहर लोहिया की बातों का पुनः स्मरण करना होगा | डॉ लोहिया ने वर्षो पहले ही चिंता व्यक्त करी थी कि --- किसी भी बड़े आन्दोलन में एक अजीब तरह की वाहियात चीज या मोड़ बन जाया करता है | एक तरफ वे लोग कि जो आन्दोलन के उद्देशों के लिए तकलीफ उठाते है , दूसरी तरफ वे लोग जो आन्दोलन के सफल होने के बाद उसके हुकुमती कम-काज को चलते है | और आप याद रखना कि ये संसार के इतिहास में हमेशा ही हुआ है | लेकिन इतना बुरी तरह से नहीं हुआ कभी जितना कि हिंदुस्तान में हुआ है | और मुझे खतरा लगता है कि कही सोशलिस्ट पार्टी कि हुकूमत में भी ऐसा ना हो जाये कि लड़ने वालो का तो एक गिरोह बने और जब हुकूमत का काम चलाने का वक़्त आए तब दूसरा गिरोह आ जाये | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल की बातो पर चर्चा के बजाये वर्तमान समाजवादी सरकार के द्वारा अल्प काल में लिए गये फैसलों पर निष्पक्ष नज़र डालने से उम्मीदों की साइकिल की रफ़्तार धीमी , पकड़ कमजोर और दिशा गंतव्य से अलग जाती दिखती है | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने नव गठित सरकार को काम करने के लिए ६ माह का समय देने और उसके पश्चात् काम काज का आकलन करने की बात करी थी और अपने आकलन में शत प्रतिशत सफल सरकार बताया था | सपा मुखिया ने हालिया संपन्न विधान सभा चुनाव में कार्यकर्ताओ से कहा था कि सरकार बनने के पश्चात् उनके सम्मान में कोई कसर नहीं रखी जाएगी और इस बात को सरकार गठन के पश्चात् भी दोहराया गया | आम जनता की बात दीगर है, आज समाजवादी पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता भी हताशा के दौर में पहुच चुका है , उसे लोकसभा चुनावो में जनता के बीच दुबारा मत मांगने किन उब्लाब्धियो के बूते जाया जाये यह समझ नहीं आ रहा है | बेरोजगारी भत्ते , लैपटॉप वितरण आदि में पाबंदियो का सवाल कैसे देना है यह समाजवादी कार्यकर्ताओं को समझ नहीं आ रहा है | कानून व्यवस्था और नौकरशाही दोनों बदहाल है , ये अखिलेश सरकार की प्राथमिकताओ में होने चाहिए | सरकार के फैसले जाने अनजाने उत्तर प्रदेश की सत्ता से बेदखल हो चुकी बहुजन समाज पार्टी के जनाधार को पुख्ता करने का काम कर रहे है | बिगड़ी कानून व्यवस्था के चलते और नौकरशाही के अपने ढर्रे के चलते आम जनों को अब बहुजन समाज पार्टी का शासन काल याद आ रहा है जिसमे प्रशासनिक नियंत्रण - कानून व्यवश्ता चुस्त- दुरुस्त रहती थी | डॉ लोहिया महान समाजवादी विचारक थे | उनके विचारो - सिद्धांतो का अनुपालन ना करने वाला समाजवादी कैसे हो सकता है ? भारत की विधान सभाओ और संसद का लोकतंत्र की गरिमा को बढ़ाने के बजाये सत्ताधारी दल और उसके बड़े नेता के पिछलग्गू बनने की प्रवृत्ति से उनको तकलीफ थी | सार्वजनिक जीवन में बढती बेईमानी और स्वार्थवादिता को लेकर डॉ लोहिया के मन में ग्लानि होती थी | नेहरु और कांग्रेस को आजाद भारत में व्याप्त सभी बुराइयों की जड़ मानने वाले डॉ लोहिया ने इसको उखाड़ने के लिए गैर कांग्रेस वाद की नीति अपनाई थी | संसद और संसद के बाहर डॉ लोहिया और उनके साथियो ने देश को गरम किया और १९६७ के चुनावो में कांग्रेस को ८ राज्यों में पराजित किया | डॉ लोहिया की इच्छा थी कि राजनीति में गति आए , कांग्रेस का एकाधिकार समाप्त हो , राजनीतिक दल कार्यक्रम अभिमुख बने | डॉ लोहिया ने अपनी सरकारों को समयबद्ध कार्यक्रम और उनको लागु करने के लिए ६ माह का समय दिया था | जय प्रकाश नारायण से साफ तौर पर डॉ लोहिया ने कहा था , --- मैं सरकार का आदमी नहीं हूँ , इसलिए मुझे दिलचस्पी नहीं है कि सरकार क्या करती है | अगर वह ६ महीने कुछ नहीं करती , कुछ ऐसा नहीं करती कि जिससे देश का मन उछले तो मैं इस सरकार को गिराने की मुहिम शुरू करूँगा | इसके पहले १९५४ में भी मानव प्राणों का मूल्य सत्ता से अधिक मानने वाले डॉ लोहिया जो कि पुलिस के द्वारा भीड़ पर बर्बर गोलीबारी के विरुद्ध रहते थे , ने आम जन हित के सवाल पर अपनी पार्टी की सरकार को घेरा था और वो सरकार चल नहो सकी | १९५४ में ट्रावनकोर कोचीन वर्तमान में केरल में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता पट्टम थानू पिल्लै मुख्य मंत्री थे | वहा पुलिस की गोलीबारी में अनेको लोग मारे गये , नैनी जेल में बंद डॉ लोहिया ने अपनी ही सरकार का इस्तीफा माँगा | इस मुद्दे पर पार्टी टूटी , डॉ लोहिया ने कहा था - सुधरो या टूटो | कुछ माह पश्चात् सरकार भी गिरी | सत्ता को जनता के हित के लिए उपयोगी मानने वाले डॉ लोहिया के कार्यक्रमों व सिद्धांतो पर दृष्टि डालने और उसका अनुपालन करने का काम समाजवादी सोच की सरकार की प्राथमिकता में होना ही चाहिए |

Saturday, July 7, 2012

यशवंत सिंह के समर्थन में बाराबंकी में बैठक


आज बाराबंकी के पंजाब केशरी कार्यालय में पत्रकारो की एक आवश्यक बैठक संपन्न हुई | बैठक में पिछले दिनों भड़ास 4 मीडिया के संपादक यशवंत सिंह की फर्जी मुकदमो में गिरफ़्तारी पर रोष प्रकट किया गया | उपस्थित पत्रकारो ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से यशवंत सिंह की फर्जी मुकदमो में गिरफ़्तारी की उच्च स्तरीय जाँच तथा एक निर्भीक -बेबाक पत्रकार यशवंत सिंह के साथ आतंकवादियो सरीखा व्यवहार करने वाले नोयडा पुलिस कर्मिओ को दण्डित करने की मांग की | बैठक में स्वतंत्र पत्रकार अरविन्द विद्रोही , मो अतहर - पंजाब केशरी , तारिक किदवई - उर्दू आग , प्रदीप सारंग - टीवी १००,देवेन्द्र नाथ मिश्र - प्रतिदिन , दीपक निर्भय - यू पी न्यूज़ , मो असीम किदवई - जन माध्यम , संजय वर्मा , सतीश कश्यप , हृदेश श्रीवास्तव आदि पत्रकार साथी मौजूद थे |

Wednesday, July 4, 2012

दलाल पत्रकारिता और भ्रष्ट पुलिस तंत्र का हमला तेज़ हुआ है बेबाक पत्रकारिता पे


अरविन्द विद्रोही ................... यशवंत सिंह -संपादक भड़ास ४ मिडिया की नोयडा पुलिस के द्वारा गिरफ़्तारी ने यह साबित कर दिया है कि वेब मिडिया कि ताकत से दलाल पत्रकारों और भ्रष्ट पुलिस तंत्र के रखवारो के होश उड़ गये है | पिछले महीनो से संदुपुर -बाराबंकी , गोरखपुर , लखनऊ के पश्चात् नोयडा और लखीमपुर में जनसरोकार रखने वाले और निर्भीक पत्रकारों के पुलिसिया उत्पीडन से यह साफ हो गया है कि यह एक सुनियोजित साजिस है निर्भीक पत्रकारों कि आवाज़ को दबाने की | एक के पश्चात् एक घटित हो रही घटना यह सिद्ध करती है कि वेब मीडिया ने दलाल प्रवृति के पोषक और पत्रकारिता कि आड़ में अधिकारियो की दलाली करने वाले प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मिडिया के पत्रकारों के काकस को भेद दिया है | यशवंत सिंह की गिरफ़्तारी प्रकरण के पश्चात् वेब मिडिया की ताकत और भी ज्यादा बढ़ेगी | पत्रकारिता जगत के काले कारनामो को उजागर करने की वजह से ही यशवंत सिंह और भड़ास ४ मिडिया भ्रष्ट-दलाल लोगो की आँखों की किरकिरी बन गये थे और आज भी बने है | शायद इन दलालों को अनुमान रहा हो कि यशवंत सिंह कि फर्जी मुकदमो में गिरफ़्तारी के पश्चात् भड़ास का संचालन बंद हो जायेगा , यशवंत अकेले और अलग थलग पद जायेंगे , साथी साथ त्याग देंगे | लेकिन उनका अनुमान दुर्भाग्यवश गलत सिद्ध हो चुका है | यशवंत सिंह के साथ आज तमाम वरिष्ट पत्रकार खड़े है | कुमार सौवीर ,प्रकाश हिन्दुस्तानी , सुभाष राय , दयानंद पाण्डेय , हरे प्रकाश उपाध्याय ,मदन तिवारी , सैयद असदर अली , अविनाश , कृष्णभानु आदि ने इस प्रकरण पे अपने विचार लिख कर निर्भीक पत्रकारिता को उर्जा व ताकत प्रदान करी है | दलाली से इतर जनसरोकार व निर्भीक पत्रकारिता , बेबाक लेखन करने वालो को इस तरह कि दिकक्तो से रूबरू होते ही रहना पड़ेगा | व्यवस्था को जड़ तक भ्रष्ट कर चुके लोगो को यह कतई नहीं गवारा होता है कि कोई उनकी जड़ पर प्रहार करे | कमियां उजागर करने वालो को सदैव साजिशो का शिकार होना पड़ता है | बस जिस तरह दलाल पत्रकारों का साथ दलाल दे रहे है उसी तरह अब निर्भीक व बेबाक लेखन का माद्दा रखने वालो को दलाल पत्रकारिता के खिलाफ , उनकी सज़िसो के खिलाफ अब कलमकारों की कलम अनवरत चलती रहनी चाहिए |