Friday, October 29, 2010

हमें जगाती चिड़िया

चीं-चीं-चीं चिड़िया करती,
मेरे घर में वो रहती है।
रोज सुबह वह शोर मचाती,
हमको बिस्तर से है उठाती।
चीं-चीं-चीं करती जाती,
भोर हुई उठ कहती जाती।
जब तक हम उठ न जाते,
चीं-चीं-चीं करती जाती।
उठ कर बिस्तर से जैसे ही,
दरवाजों के पट खोलें हम।
नील गगन में उड़ जाती है।
हमसे कहती अब तुम भी,
झट से विद्यालय जाओं न।
पढ़ना-लिखना जाओ सीखों,
समय व्यर्थ गवाओं न।
चीं-चीं-चीं करती चिड़िया ,
प्रतिदिन हमें उठाती है।
अच्छी चिडिया सुन्दर चिडिया,
हमें राह दिखाती है

5 comments:

  1. अच्छी रचना , बधाई !

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  2. कल 09/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. बहुत सुन्दर बालकविता....

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