Saturday, December 31, 2011

स्वार्थी-सिद्धांत विहीन -दल बदलुओ से समाजवादी पार्टी को होगा नुकसान


अरविन्द विद्रोही...... मायावारी सरकार में वर्षो सत्ता सुख उठा चुके लोग अब वहुजन समाज पार्टी को ख़राब बता रहे है | बसपा से निकले जा रहे नेता,टिकेट ना मिलने से नाराज़ नेता , भ्रस्टाचार के आरोपों में घिरे और कार्यवाही के शिकार नेता अब बसपा सुप्रीमो मायावती को भला-बुरा कह रहे है | अवसरवादी, सिधान्त विहीन ,जनता के हित के विरोधी ,विकास के धन के लुटेरे नेताओ ने अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की तरफ रुख कर लिया है | समाजवादी पार्टी की पहचान उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार की नीतिओ की खिलाफत के कारण ही बनी है ,बसपा के जिम्मेदार रहे नेता जिस तरह समाजवादी पार्टी में महत्व पा रहे है उससे मतदाताओ में एक निराशा उत्पन्न हो गयी है | चुनावो में अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए बसपा से सपा में शामिल होने वाले तमाम दलबदलू नेताओ को सपा नेतृत्व द्वारा प्रत्याशी बना देना समाजवादी कार्यकर्ताओ और नेताओ को निराश करने वाला आत्म घटी कदम है | जिन नेताओ के इशारे पर समाजवादियो ने वर्षो प्रशासनिक अत्याचार सहे ,उन अत्याचारों के खिलाफ सड़क पर संघर्ष किया ,उन्ही बसपा से आये नेताओ के लिए समाजवादी कार्यकर्ता मत मांगेगा ,यह कितनी हास्यास्पद व शर्मनाक बात है | समाजवादियो की पहचान डॉ लोहिया के विचारो और जनता के हित के लिए किये गये संघर्षो से होती है ना कि सत्ता के दलाल प्रवृत्त के अवसर वादी,सिधान्त विहीन नेताओ से | समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संघर्ष की परिपाटी को जीवन्त करने का जो महती काम किया है , उन के उस काम को इन स्वार्थी तत्वों के समाजवादी पार्टी में आने से गहरा धक्का लगा है | उत्तर प्रदेश के आसन्न विधान सभा -२०१२ के चुनाव शुरु हो चुके है,यह निर्णायक घडी है, स्वार्थी-सिद्धांत विहीन - अवसर वादियो को बगल गिर बनाने से समाजवादी सरकार बनाने में मुश्किलें आएँगी,जनता इन स्वार्थी नेताओ से उब चुकी है ,ये जिस पार्टी में रहेंगे उसका ही नुकसान होगा | समाजवादी पार्टी को अपने संघर्ष शील नेताओ की जगह इनको महत्व नहीं देना चाहिए | जिस जिस विधान सभा में बसपा से आये हुये नेताओ को समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है वहा पर समाजवादी कार्यकर्ता हताश है, जिसका खामियाजा भी सपा को उठाना पड़ सकता है |

Wednesday, December 28, 2011

अन्ना का तमाशा

स्वामी राम देव जी को अब अन्ना के बुलावे पर आन्दोलन में शरीक नहीं होना चाहिए ,अपना भारत स्वाभिमान का आन्दोलन जारी रखना चाहिए | ये वही अन्ना टीम है जो अपने अलावा किसी को महत्व नहीं देती ,सिर्फ अपनी बात ही कहती रहती है | भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कामों से बने जन चेतना का लाभ उठा कर स्वामी राम देव जी के आन्दोलन से किनारा करने वालो का साथ नहीं देना चाहिए | जनता की भावना से खिलवाड़ करने वालो का साथ नहीं देना चाहिए | ...............अन्ना के तमाशे में इस बार नहीं जुटी जनता,तमाशा ख़त्म | अन्ना टीम को करना चाहिए आत्म मंथन , काठ की हांड़ी बार बार नहीं चढ़ती यह पुरानी कहावत है | तमाम दावो के बावजूद जनता के ना आने से,बिना किसी के अनुरोध के खुद ही वापस लिया अन्ना ने अनशन ,जेल भरो भी रद्द , नहीं होगा किसी का घेराव |

Saturday, December 24, 2011

किसान मसीहा थे चौधरी चरण सिंह - ज्ञान सिंह यादव

हमारे देश के विकास का आधार कृषि है|कृषि को उन्नत शील बनाने के लिए किसानों की माली हालत में बेहतर सुधार की जरुरत है |चौधरी चरण सिंह जी आजीवन किसानों के हित का काम व संघर्ष करते रहे |आज हमारी सरकारे किसानों के विकास में समुचित ध्यान नहीं दे रही है यह चिंता की बात है | चौधरी चरण सिंह जी किसानों के मसीहा थे ,उनके बताये रास्ते पर चलकर किसानों की दशा में सुधार लाया जा सकता है |यह विचार कुंवर ज्ञान सिंह यादव -जिला सचिव समाजवादी पार्टी बाराबंकी ने राम सेवक यादव चंदौली ,बाराबंकी में राष्ट्रीय सेवा योजना सामान्य कार्यक्रम में चौधरी चरण सिंह के जन्म दिन पर आयोजित गोष्ठी में व्यक्त किया | गोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ अहसान बेग ने तथा संचालन डॉ राम फेर ने किया | अपने संम्बोधन में डॉ अहसान बेग ने कहा क़ि चौधरी चरण सिंह ने अपने कार्यकाल में किसानों के हित की तमाम कल्याण कारी योजनाये लागु की और भ्रस्टाचार के खिलाफ मुहिम चलायी |संचालन कर रहे डॉ राम फेर ने कहा कि चौधरी साहब का साफ़ कहना था कि देश की खुशहाली का रास्ता खेत व खलिहान से होकर गुजरता है| बिना गाँवो की तरक्की के देश का सर्वांगीन विकास नहीं हो सकता है | आज चौधरी साहब के व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेकर किसानों के हित का काम करने की जरुरत है | गोष्ठी में कार्यक्रम अधिकारी शिव बालक यादव,संतोष कुमार यादव,मुख्य नियंता संतराम यादव,क्रीडा अधिकारी उमेश चन्द्र यादव ,प्रवक्ता सोनम यादव , डॉ अरविन्द कुमार वर्मा ,सतीश पांडे सहित सैकड़ो विद्यार्थी शामिल हुये |

सपा में मंथन जारी-कल प्रत्याशियो की बैठक

उत्तर प्रदेश विधान सभा २०१२ के आम चुनावो के लिए समाजवादी पार्टी में मंथन जारी, कल रविवार २५ दिसम्बर को लखनऊ समाजवादी पार्टी कार्यालय में घोषित सभी प्रत्याशियो की बुलाई गयी बैठक | बैठक में प्रत्याशियो को चुनावी अभियान में जीत के गुर सिखायेंगे समाजवादी पार्टी के आला नेता गण | समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव करेंगे मुख्य रूप से प्रत्याशियो को संम्बोधित ,देंगे दिशा निर्देश |

Wednesday, December 21, 2011

किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह -----अरविन्द विद्रोही

राजनीति के ऐसे श्लाका पुरूष चौधरी चरण सिंह जिन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन काल में देश के दलितों,पिछड़ों,गरीबों और किसानों की बेहतरी के लिए संघर्ष किया,राजनीति में हिस्सेदार बनाया,का व्यक्तित्व एवं कृतित्व राजनैतिक-सामाजिक जीवन जी रहे लोगों के लिए अनुकरणीय है।आज हमारा मुल्क भारत भ्रष्टाचार के दलदल में फॅंसा है।जाति-विद्वेष,आतंकवाद,क्षेत्रवाद,साम्प्रदायिकता के झंझावातों में जनमानस पिस रहा है।नौजवान रोजगार के अभाव में कुण्ठित हो रहा है।गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर होता जा रहा है।अन्नदाता किसान खेत और बाजार दोनों जगह लूटा जा रहा है।विकास के नाम पर कृषि भूमि का अधिग्रहण किसानों के साथ-साथ देश को भी संकट की तरफ ले जा रहा है।जिस प्रकार अंधेरे में राह देखने के लिए प्रकाश पुंज की आवश्यकता होती है,उसी प्रकार जनसमस्याओं को समझने के लिए ह्दय तथा जनसमस्याओं से निजात पाने के लिए पथ-प्रदर्शकों की जरूरत होती है।गरीब,किसान,दलित,मजदूर को उसका अधिकार बतलाने वाले एवं आमूलचूल व्यवस्था परिवर्तन करने वाले चैधरी चरण सिंह की नीतिया।,विचार हमारे बीच दीपस्तम्भ की भांति विद्यमान हैं।

चैधरी चरण सिंह ने अपना सम्पूर्ण जीवन भारतीयता और ग्रामीण परिवेश की मर्यादा में जिया।बाबूगढ़ छावनी के निकट नूरपुर गांव,तहसील हापुड़,जनपद गाजियाबाद,कमिश्नरी मेरठ में काली मिट्टी के अनगढ़ और फूस के छप्पर वाली मढ़ैया में 23दिसम्बर,1902 को आपका जन्म हुआ।चैधरी चरण सिंह के पिता चौधरी मीर सिंह ने अपने नैतिक मूल्यों को विरासत में चरण सिंह को सौंपा था।चरण सिंह के जन्म के 6वर्ष बाद चौधरी मीर सिंह सपरिवार नूरपुर से जानी खुर्द गांव आकर बस गये थे।यहीं के परिवेश में चैधरी चरण सिंह के नन्हें ह्दय में गांव-गरीब-किसान के शोषण के खिलाफ संघर्ष का बीजारोपण हुआ।आगरा विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा लेकर 1928 में चैधरी चरण सिंह ने ईमानदारी,साफगोई और कत्र्तव्यनिष्ठा पूर्वक गाजियाबाद में वकालत प्रारम्भ की।वकालत जैसे व्यावसायिक पेशे में भी चैधरी चरण सिंह उन्हीं मुकद्मों को स्वीकार करते थे जिनमें मुवक्किल का पक्ष न्यायपूर्ण होता था।कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन1929 में पूर्ण स्वराज्य उद्घोष से प्रभावित होकर युवा चरण सिंह ने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया।1930 में महात्मा गाँधी द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन के तहत् नमक कानून तोडने का आह्वान किया गया।गाॅंधी जी ने ‘‘डांडी मार्च‘‘ किया।आजादी के दीवाने चरण सिंह ने गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिण्डन नदी पर नमक बनाया।परिणाम स्वरूप चरण सिंह को 6माह की सजा हुई।जेल से वापसी के बाद चरण सिंह ने महात्मा गाॅंधी के नेतृत्व में स्वयं को पूरी तरह से स्वतन्त्रता संग्राम में समर्पित कर दिया।1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भी चरण सिंह गिरफतार हुए फिर अक्तूबर1941 में मुक्त किये गये।सारे देश में इस समय असंतोष व्याप्त था।महात्मा गाँधी ने करो या मरो का आह्वान किया।अंग्रेजों भारत छोड़ों की आवाज सारे भारत में गूंजने लगी।9अगस्त,1942 को अगस्त क्रांति के माहौल में युवक चरण सिंह ने भूमिगत होकर गाजियाबाद,हापुड़,मेरठ,मवाना,सरथना,बुलन्दशहर के गंावों में गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किया।मेरठ कमिश्नरी में युवक चरण सिंह ने क्रांतिकारी साथियों के साथ मिलकर ब्रितानिया हुकूमत को बार-बार चुनौती दी।मेरठ प्रशासन ने चरण सिंह को देखते ही गोली मारने का आदेश दे रखा था।एक तरफ पुलिस चरण सिंह की टोह लेती थी वहीं दूसरी तरफ युवक चरण सिंह जनता के बीच सभायें करके निकल जाता था।आखिरकार पुलिस ने एक दिन चरण सिंह को गिरफतार कर ही लिया।राजबन्दी के रूप में डेढ़ वर्ष की सजा हुई।जेल में ही चौधरीचरण सिंह की लिखित पुस्तक ‘‘शिष्टाचार‘‘,भारतीय संस्कृति और समाज के शिष्टाचार के नियमों का एक बहुमूल्य दस्तावेज है।

दरअसल कुशाग्र बुद्धि के चरण सिंह का जुड़ाव आर्य समाज से भी था।1929 में गाजियाबाद आर्य समाज के सभापति चुने गये चरण सिंह ने आजादी की लड़ाई के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी।स्पष्ट वक्ता तथा दृढ़ संकल्पित चरण सिंह ने 1937 में प्रथम बार बागपत-गाजियाबाद क्षेत्र से प्रांतीय धारा सभा में चुने जाने के बाद ‘‘लैण्ड युटिलाइजेशन बिल‘‘ को पास कराने की चेष्टा की।किसान हितैषी इस बिल को ब्रितानिया हुकूमत ने रखने ही नहीं दिया।चैधरी चरण सिंह ने हिम्मत नहीं हारी तथा उन्होंने धारा सभा में एक ऋण निर्मोचन विधेयक रखा।इस विधेयक का विरोध तो कंाग्रेस के ही तमाम विधायको ने किया।ये ऐसे विधायक थे,जिनके ऋण पाश में लाखों गरीब,खेतिहर,मजदूर,किसान जकड़ा हुआ था।चौधरीचरण सिंह ने विधेयक के पक्ष में अकाट्य तर्क प्रस्तुत किये।ऋण निर्मोचन विधेयक धारा सभा में पास हो गया तथा किसान ऋण मुक्त हो गये तथा उनके घर-खेत नीलाम होने से बच गये।चैधरी चरण सिंह का कृषि विपणन पर लिखा लेख हिन्दुस्तान टाइम्स में 31मार्च और 1अप्रैल,1938 को छपा।इन लेखों को ही पढ़कर सर छोटूराम ने ‘मण्डी समिति ऐक्ट‘ को पंजाब में पाीरत किया था।उ0प्र0 की धारा सभा के भंग होने से यह बिल पास न हो पाया था।आजादी के बाद 1949 में इन्हीं प्रस्तावों को चैधरी चरण सिंह ने 1939 में 50प्रतिशत आरक्षण खेतिहर-मजदूर किसान के लिए आरक्षित करने की मांग नव निर्वाचित धारा सभा में की थी,परन्तु इस प्रस्ताव पर शोषण वादी नीति के संरक्षकों ने विचार भी नहीं किया।आजाद भारत में 1947 में चौधरीचरण सिंह ने पुनः कांग्रेस विधानमण्डल में यह प्रस्ताव रखा।इस विषय पर चौधरी चरण सिंह का लिखा लेख-‘‘सरकारी सेवाओं में किसान स।तान के लिए 50प्रतिशत का आरक्षण क्यों?‘‘किसानों की मनोदशा को उजागर करता है।कांग्रेस और कांग्रेस के नेता पं0नेहरू का मोह कृषि के प्रति न होकर बड़े उद्योगों के प्रति था,इसलिए किसान हितैषी यह बिल पारित न हो सका।यह चौधरी चरण सिंह ही हैं जिनके द्वारा तैयार किया गया जमींदारी उन्मूलन विधेयक ‘‘राज्य के कल्याणकारी निदेशक सिद्धान्त‘‘पर आधारित था।महात्मागाँधी के सच्चे अनुयायी चैधरी चरण सिंह द्वारा तैयार किया ‘‘जमींदारी उन्मूलन विधेयक‘‘विधानसभा में पारित हुआ तथा सदियों से खेतों में खून पसीना बहाने वाले मेहनतकश किसान भू-स्वामी बनाये गये।1जुलाई,1952 के दिन उ0प्र0 के पिछड़ों-भूमिहीनों को अपने पेशवा चरण सिंह की बदौलत हक मिला।इसी दिन प्रदेश में जमींदारी उन्मूलन विधेयक लागू हुआ।

दृढ़ इच्छा शक्ति के धनी चौधरीचरण सिंह ने प्रदेश के 27000पटवारियों के त्यागपत्र को स्वीकार कर ‘लेखपाल‘ पद का सृजन कर नई भर्ती करके किसानों को पटवारी आतंक से मुक्ति तो दिलाई ही,प्रशासनिक धाक भी जमाई।लेखपाल भर्ती में 18प्रतिशत स्थान हरिजनों के लिए चौधरी चरण सिंह ने आरक्षित किया था।क्रान्तिकारी विचारों के वाहक चरण सिंह ने एक और किसान हित का क्रांतिकारी कानून ‘‘उ0प्र0 भूमि संरक्षण कानून‘‘1954 में पारित कराया।1953 में आप के द्वारा पारित कराया गया ‘‘चकबन्दी कानून‘‘1954 में लागू हुआ तथा संगठित खेत तैयार करने के इस कानून के विषय में अमेरिकी कृषि विशेषज्ञ अलवर्ट मायर ने टिप्पणी की थी-‘‘चकबन्दी के काम को देखकर मुझे ऐसा लगा है कि यह अत्यन्त महत्व का काम गांवों के कृषि उत्पादन में क्रांति लाने वाला होगा।‘‘चौधरीचरण सिंह ने गरीब किसानों के हक में सस्ती खाद-बीज आदि के लिए कृषि आपूर्ति संस्थानों की स्थापना की।मुख्यम।त्री पद पर 3अप्रैल,1967 को आसीन होने के बाद चैधरी चरण सिंह ने कुटीर उद्योगों तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि की योजनाओं को क्रियान्वित करने की दृष्टि से सरकारी एजेंसियों द्वारा ऋण देने के तौर-तरीकों को सुगम बनाया,साढ़े छह एकड़ तक की जोत पर आधा लगान माफ कर दिया तथा दो रूपये तक का लगान बिल्कुल मा़फ कर दिया गया,किसानों की उपज,विशेषकर नकदी फसलों के लाभकारी मूल्यों को दिलाने की दिशा मे। महत्वपूर्ण निर्णय लिए,भूमि भवन कर समाप्त किया।सरकारी काम-काज में हिन्दी का शत् प्रतिशत् प्रयोग तथा 23तहसीलों में,जो उर्दू बाहुल्य थी,सरकारी गजट उर्दू में भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की।किसानों के लिए जोत-बही की व्यवस्था चरण सिंह की ही देन है।ब्रिटिश काल से चले आ रहे नहर की पटरियों पर चलने की पाबंदी को चौधरीचरण सिंह ने कानूनन समाप्त कराया।चैधरी चरण सिंह एक ऐसे नेता थे जिनकी ईमानदारी,नैतिकता और प्रशासनिक दृढ़ता के कारण उ0प्र0 में भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगा था।सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी समाप्त हो गई थी।17अप्रैल,1968 को चौधरी चरण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था।मात्र10माह में किसान व जनहित के ठोस कदम उठाने वाले चरण सि।ह 1969 के मध्यावधि चुनावों में 98 विधायक जिता लाये।17फरवरी,1970 को चैधरी चरण सिंह पुनः मुख्यमंत्री बने।चौधरी चरण सिंह ने सत्ता में आते ही कृषि उत्पादन बढ़ाने की नीति को प्रोत्साहन देते हुए उर्वरकों से बिक्रीकर उठा लिया।साढ़े तीन एकड़ वाली जोतों का लगान माफ कर दिया,भूमिहीन खेतिहर-मजदूरों को कृषि भूमि दिलाने के कार्य पर और जोर दिया।छह माह की अवधि में ही 6,26,338एकड़ भूमि की सीरदारी के पट्टे और 31,188एकड़ के आसामी पट्टे वितरित किये गये।सीलिंग से प्राप्त सारी जमीनें भूमिहीन हरिजनों तथा पिछड़े वर्गों को ही दी गई।भूमि विकास बैंकों की कार्यप्रणाली को और उपयोगी बनाया।गुण्डा विरोधी अभियान चलाया,कानून का राज कायम किया।बाद में केन्द्र में गृहमंत्री रहते हुए चरण सिंह ने ही मण्डल आयोग,अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की।1979में वित्त मंत्री तथा उपप्रधानमंत्री के रूप में राष्टीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक-नाबार्ड की स्थापना की।उर्वरकों व डीजल के दामों में कमी की,कृषि यंत्रों पर उत्पाद शुल्क घटाया,काम के बदले अनाज योजना लागू की।यह चैधरी चरण सिंह ही थे जिन्होंने महात्मा गाँधी की सोच के अनुसार ‘अंत्योदय‘योजना को प्रारम्भ किया।विलासिता की सामग्री पर भारी कर चैधरी चरण सिंह ने ही लगाये।मूल्यगत विषमता पर रोक लगाने के लिए कृषि जिन्सों की अन्तर्राज्यीय आवाजाही पर लगी रोक हटाई।लाइसेंस आवण्टन पर पाबंदी लगाई तथा लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया।बडी कपडा मिलों को हिदायत दी कि 20प्रतिशत कपडा गरीब जनता के लिए बनाये।पहली बार कृषि बजट की आवण्टित राशि में वृद्धि आपके कारण सम्भव हुआ।प्रधानमंत्री पद पर अल्प समय में ही ग्रामीण पुनरूत्थान मंत्रालय की स्थापना आपने ही की थी,जो इस समय ग्रामीण विकास मंत्रालय के नाम से जाना जाता है।

29मई,1987 को स्वर्ग सिधारे सादगी की प्रतिमूर्ति,किसान पुत्र चरण सिंह की ईमानदारी ने उनके भीतर निर्भिकता को जन्म देकर भारत के गरीबों-किसानों के मसीहा के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया।भ्रष्टाचार के विषय में चरण सिंह की स्पष्ट सोच कि भ्रष्टाचार उपर से नीचे की ओर चलता है,अक्षरशः सत्य है।चौधरी चरण सिंह आमजन के लिए वह दीप स्तम्भ हैं,जिसकी रोशनी के बिना उन्हें राह नहीं दिख सकती।आज भ्रष्टाचार,मॅंहगाई का दानव आम जन के हितों को लील रहा है,किसानों की भूमि अधिग्रहण मामलों ने किसानों व कृषि भूमि दोनों को खतरे में डाल दिया है।चैधरी चरण सिंह का चरित्र व सिद्धान्त इन समस्याओं रूपी दानवों से निपटने में आम जन व सरकारों का मददगार हो सकता है बशर्ते आम जन व सरकारें चैधरी चरण सिंह जैसे महापुरूषों को आत्मसात् करे।

Friday, December 16, 2011

सामाजिक न्याय की बात आने पर बिदकते क्यूँ है कुछ लोग

अरविन्द विद्रोही-------- संसद भवन में डॉ भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थल के समीप देश १६३ सांसदों ने सामाजिक न्याय की मांग को बुलंद करते हुये विगत बुधवार को धरना दिया| अपनी मांगो के लिए धरना देना ,ज्ञापन देना आदि संवैधानिक -लोकतान्त्रिक अधिकार भारत के सभी नागरिको को प्राप्त है और सांसद भी भारत के नागरिक ही है| अगर अनुसूचित जाती -अनुसूचित जनजाति के १६३ सांसद एक साथ लोकपाल में हिस्सेदारी यानि आरक्षण की मांग को लेकर धरना दे देते है तो इसमें बुराई क्या है ,यह समझ में नहीं आता है| सामाजिक न्याय के लिए भारत के सभी वर्गों ,सभी जातियो,सभी धर्मो का प्रतिनिधित्व प्रत्येक समिति ,प्रत्येक संस्था में करने में हर्ज़ ही क्या है? वंचितों को आगे लाकर समाज व देश की तरक्की में सभी की हिस्सेदारी करवाने से देश -समाज में समानता ही फैलेगी| समता और समानता समाज के लिए बहुत जरुरी तत्त्व है,भारतीय समाज को सामंतवादी सोच से बाहर आकर सामाजिक न्याय की दिशा में निरंतर अग्रसर होते रहना चाहिए| लोकजनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम विलास पासवान के नेतृत्व में बुधवार को अनुसूचित जाती-अनुसूचित जनजाति के १६३ सांसदों ने धरना देकर ,लोकपाल में सभी वर्गों -जातियो को शामिल किये जाने सम्बंधित ज्ञापन भारत के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को देकर सामाजिक न्याय के एक सज़ग प्रहरी की भूमिका निभाई है |लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान एक दलित नेता के रूप में सैदेव अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे है| सशक्त लोकपाल के लिए चल रहे आन्दोलन और संभावित लोकपाल गठन में सामाजिक न्याय की अनदेखी यक़ीनन समाज के वंचित-दलित तबके की अनदेखी करने उनको पीछे धकेलने सरीखा कृत्य है | देश-समाज के बड़े तबके को देश के बड़े ,संवैधानिक निर्णयों को निर्धारित करने में भागीदारी ना देकर ,निर्णायक संस्थाओ में उनकी भागीदारी सुनिश्चित ना करके , आरक्षण ना देकर के देश -समाज को तोड़ने व आपसी कटुता उत्पन्न करने का काम डॉ लोहिया के अनुयायी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे | आज डॉ लोहिया के एक शिष्य राम विलास पासवान ने सामाजिक न्याय के सवाल को लोकपाल गठन में उठा कर डॉ लोहिया के तात्कालिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष के सिधान्त को साकार कर दिया है| राम विलास पासवान ने टीम अन्ना और केंद्र सरकार की मंशा पर जो सवाल उठाये है कि दोनों पक्ष लोकपाल के पैनल में दलितों,पिछडो,महिलाओ सहित सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के प्रति गंभीर नहीं है , पूर्णतया सत्य ही है | सरकार और अन्ना टीम दोनों लोकपाल मसले पर तानाशाओ सा आचरण करती दिखाई देती है | अपनी बात के अलावा किसी की बात स्वीकार ना करने की अन्ना टीम की जिद्द ने उसका गैर लोकतान्त्रिक चेहरा सबके सामने ला ही दिया है | देश की दलित राजनीति में दलितों के हित में लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान ने सदैव सार्थक लडाई लड़ी है ,पहल की है | लोकपाल के लिए चल रहे आन्दोलन ,उसके गठन की कवायत,के बीच लोकपालो की नियुक्ति में सभी वर्गों के लिए आरक्षण की मांग उठा कर राम विलास पासवान एक बार पुनः दलित राजनीति ही नहीं सामाजिक न्याय की लडाई के सबसे बड़े पैरोकार,सेनानी के रूप में सामने आये है | १६३ सांसदों की संख्या मामूली नहीं होती है और यह सिर्फ इन सांसदों की नहीं देश के सभी वंचितों,दलितों,महिलाओ तथा सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले लोगो की मांग व आवाज है कि निर्णयों और अधिकारों में भागीदारी मिलनी ही चाहिए | डॉ राम मनोहर लोहिया के अनुययियो में से एक राम विलास पासवान ने बगैर राजनीतिक नफा-नुकसान की परवाह किये हक़ की जो आवाज़ बुलंद की है ,उस हक़ की लडाई में सभी समाजवादियो और डॉ लोहिया के लोगो को जुटना ही पड़ेगा |

Thursday, December 15, 2011

ग्रामीण भारत के आम जन और उनकी अभिलाषा


अरविन्द विद्रोही ........ भारत एक कृषि प्रधान देश है| भारत की बहुसंख्यक आबादी कृषि से ही जुडी है| आज भी भारत की बहुसंख्यक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण जीवन से सरोकार रखती ही है| ग्रामीण अंचलों में आजादी के पश्चात् विकास के अनियंत्रित रथ ने ग्रामीणों और ग्रामीण अंचलों के विकास के स्थान पर कृषि की आधार-भूत ढांचे पर ही प्रहार किया | ग्रामीणों की कृषि योग्य बेश कीमती उपजाऊ भूमि का हरण आजाद भारत की सरकारों ने ब्रितानिया सरकार के बनाये एक काले कानून भूमि अधिग्रहण अधिनियम १८९४ के बलबूते ,सत्ता की हनक और संगीनों के जोर पर जम कर किया| भारत की ग्रामीण जनता अपनी बेबसी को आखिर कब तलक जीती? अपनी जमीन को बचाने के लिए भारत के ग्रामीणों ने एकता के सूत्र में बंधना और भारत की ग्राम्य व्यवस्था को तहस नहस करने वाले इस काले कानून की खिलाफत करना शुरु किया | किसान शक्ति के तमाम धरना,प्रदर्शन, आन्दोलन और किसानों के बलिदान के बाद इस काले कानून में बदलाव की पहल हुई| एक तरफ भारत के शहरी इलाको में विकास कार्यो में वृद्धि और दूसरी तरफ ग्रामीण भारत के ढांचे के प्रतिकूल विकास के नित नए कीर्तिमान कायम करने की होड़ ने ग्रामीणों के मन को व्यथित कर डाला है| कंक्रीट के जंगलो की मार से तड़प रहा किसान ,लाभ कारी फसलो के लिए क़र्ज़ लेकर घाटा उठा कर जान देने पर विवश किसानों की मनो दशा समझने की दिशा में पहल जरुरी है | नकली खाद,नकली बीज , बिजली की किल्लत, बढ़ते डीज़ल के दाम ,नहरों में खेत तक समुचित पानी ना आने की समस्या , कृषि लागत में वृद्धि, नहर कटान से उपजे हालात, कभी बाढ़ तो कभी सूखे से बेजार और परेशान अन्न दाता किसान अपनी आर्थिक दशा और अपने परिवार की सामाजिक-शैक्षिक दशा सुधरने के लिए जी जान से हाड तोड़ मेहनत-मसक्कत करता है | क्या गर्मी,क्या बरसात,क्या सर्दी की सर्द रात और क्या गर्म लू के थपेड़े , अन्न दाता किसान कृषि पैदावार के लिए हर मौसम में अपने खेत-खलिहान में मौजूद रहता है | अपने परिवार के भरण-पोषण और हमारे-आपके खाने के लिए अन्न उपजाने वाले किसान की आर्थिक-सामाजिक -शैक्षिक दशा में सुधार के रास्ते तलाशने की जिम्मेदारी हमारी सब की भी बनती है| किसानों की दशा में सुधार के रास्ते तलाशने के लिए किसानों के ही मन को टटोलने का निश्चय किया और किसानों की अद्भुत ज्ञान परक सोच को जान कर एक सुखद अनुभूति का अनुभव भी किया | क्या खेती किसानी में लगे किसानों से कभी ग्राम्य स्तर पर विकास परक योजना के निर्धारण,उनके क्रियान्वयन के बारे में सलाह मशविरा करना शुरु होगा ? ग्राम्य पंचायतो के प्रस्तावों पर विकास कार्य ना होकर सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से चुनावी लाभ हेतु विकास कार्य व विकास परक योजनाओ की घोषणा का सिलसिला भारत-भूमि को तेज़ी से गहरे खाई की तरफ ले जा रहा है| खुद का चुनाव जीतने के लिए,अपने सगे-सम्बंधियो को जिताने के लिए,अपने संगठन के लोगो को जिताने के लिए अब सरकार में शामिल मंत्रियो ने सामाजिक-राजनीतिक नैतिकता को त्याग कर सरे-आम बेशर्मी पूर्वक प्रलाप शुरु कर दिया| अपने संवैधानि कर्तव्यों के पालन की जगह सिर्फ चुनावी लाभ हासिल करने के छुद्र मानसिकता के चलते चुनावी लाभ के लिए विकास कार्यो और वायदों की बरसात करने वाले नेता व मंत्री निष्पक्ष चुनावो की प्रक्रिया को सरेआम अपने सत्ता के रथ पर सवार होकर रौंदते चले जा रहे है और आम आदमी की बिसात ही क्या भारत का चुनाव आयोग भी एक बेबस निरीह संस्था की तरह सिर्फ अधि-सूचना का इंतज़ार कर रहा है | राजनेताओ की मनमानी और भ्रस्टाचार के इस अदभुत स्वरुप को देख कर ब्रितानिया हुक्मरानों के शासन की याद ताजा हो जाती है,जहा भारत की आम जनता की चिंता ना उस सरकार को थी ना इन सरकारों को है| सरकारे आम जनता के विश्वास को लुटने के लिए ,उनके मताधिकार के संवैधानिक अधिकार को लोभ जाल में फंसा कर हड़पने के लिए जनता के धन का चुनावी लाभ हेतु इस्तेमाल कर रही है| एक विधायक,एक सांसद के अपने विधान सभा,अपने संसदिए इलाके के प्रति क्या कर्त्तव्य है,क्या यह भी इन निर्वाचित प्रतिनिधिओ को ज्ञान नहीं है? क्या सरकारों में शामिल मंत्रियो को सिर्फ अपने इलाके में या जहा से उनके पुत्र या सगे -सम्बन्धी चुनाव लड़ने वाले हो ,अपने मंत्रालय का सारा धन वही लगाना राजनीतिक गिरावट और भ्रस्टाचार नहीं ? बुनियादी बदलाव की जगह तात्कालिक लाभ के लोभ में फंस कर इन स्वार्थी राजनेताओ के मकड़ जाल में आम आदमी दिन प्रति दिन कसता ही जा रहा है| ग्रामीण इलाको ,ग्रामीण जनता ,मेहनत कश तबके के सर्वांगीन विकास की एक ठोस पहल ,एक सकारात्मक कार्य योजना आज तक क्रियान्वित नहीं हो सकी है| चुनावी लाभ के लिए टुकडो टुकडो में लागु की जाने वाली विकास योजना सिर्फ छलावा ही साबित होती है जिस से आम जन की जगह चन्द लोगो की तरक्की और शानो-शौकत में वृद्धि होती है | ग्रामीण जनता के लिए ,उसके जीवन के स्तर को उच्च स्तर पर लाने के लिए अब कंक्रीट और इस्पात की नहीं, खेती- किसानी के लिए किसानों के उपज में लागत के अनुपात में मूल्य निर्धारित करने की जरुरत है | ग्रामीण जनता का भला ना कंक्रीट की इमारतो से हुआ है और ना ही इस्पात के जाल से हो सकता है,ये सिर्फ विकास के एक पहलु ,एक टुकड़े ही है | समग्र विकास की पहल ग्रामीण जनता के जीवन दशा, उनके परंपरा-गत पेशे ,बुनियादी शिक्षा-स्वास्थ्य - कृषि आधारित रोजगार ,वाजिब-लाभकारी मूल्यों के निर्धारण और सबसे बढ़कर उनमे आत्म विश्वास जगाने से होगा| यह आत्म विश्वास जगाने का काम भ्रष्ट नेता नहीं करेंगे ,ये स्वार्थी और भ्रष्ट नेता सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने के लिए आम जनता के सम्मुख विकास के नाम पर लोभ का पिटारा खोलते है |जनता की मेहनत की कमाई से बने सरकारी खजाने और उसी सरकारी खजाने के धन को बेशर्मी पूर्वक सिर्फ अपने राजनीतिक लाभ के मद्दे नज़र इस्तेमाल नहीं लुटाते हुये इनको तनिक भी लाज नहीं आती ,कारण सिर्फ आम जनता की ख़ामोशी ही है| आम जनता की ख़ामोशी तोड़ने का काम ,ग्रामीण जनता के बीच जाकर इन स्वार्थी मंत्रियो-नेताओ के स्वार्थी मंसूबो को बताने और जन चेतना जगाने का काम अगर भारत की तरुनाई आगे बढ़ कर अपने मजबूत कंधो पर ले लेवे और जुट जावे इनके चेहरों से नकाब हटाने की मुहिम में तब सत्ता ही नहीं व्यवस्था परिवर्तन से भी कोई नहीं रोक सकता | आज जरुरत समग्र चेतना जगाने और ग्रामीण इलाको की जनता के मन को समझने की है,ग्रामीण मन अब शोषक वर्ग से त्रस्त हो चुका है,नित नए अंट-शंट आन्दोलनों ने आम जन को निराश ही किया है| ग्रामीण मन भारत का वास्तविक मन है,इसकी अभिलाषा को ना जानने की इच्छा शक्ति सरकारी में है,ना ही इनकी समग्र विकास से वास्ता| ग्रामीण इलाको में विकास कार्य सिर्फ चुनावी लाभ के लिए होते है ना की ग्रामीणों की तरक्की के लिए | ग्रामीणों के लिए बनी सार्थक योजनाये भी स्वार्थी सरकारों के नापाक मनसूबों और भ्रष्ट नेता-भ्रष्ट नौकरशाह -अपराधी के काकस में तम तोड़ कर सिर्फ जेब भरने का जरिया बन गयी है |आज जरुरत ग्रामीण अंचलो में जागरूकता की और संवैधानिक अधिकारों को हासिल करने की लडाई लड़ने की है| ग्रामीण इलाको में लोगो के पास तन ढकने को कपडा नहीं है, उनके पास इतना पैसा नहीं है की वो सलीके का वस्त्र खरीद कर पहन सके और पूंजी वाद की बेरहम चक्की में मेहनत कशो-किसानों-युवाओ के हक़ को पिस कर शोषक वर्ग के लोग शहरो-महानगरो में अपना तन दिखाने के लिए नाना प्रकार के हजारो रूपये के वस्त्र खरीदते और पहनते है| ग्रामीण मन अन्दर ही अन्दर अपने शोषण के खिलाफ जल रहा है,ज्वाला मुखी के मुहाने पर बैठा यह समाज किसानों-मेहनत कशो की मेहनत की गाढ़ी कमाई पर ऐश कर रहा है और अंजाम की परवाह भी नहीं कर रहा है| अगर किसी युवा का आक्रोश तमाचे के रूप में एक मंत्री के मुंह पर जा पड़ता है तब कोहराम मचाने में ये स्वार्थी नेता तनिक भी संकोच नहीं करते और अपने द्वारा आम जन के हितो पर प्रति दिन -प्रति पल कुठारा घात करते समय इनको शर्म भी नहीं आती| जुल्मी-निरंकुश सरकारों के खिलाफ संघर्ष करना और उनको उखाड़ फैकना आज के ग्रामीण भारत के मन की अभिलाषा है| जनता की अभिलाषा पर खरे उतरने वाले राजनीतिक नेतृत्व का अभाव ही भ्रष्ट सरकारों के लिए संजीविनी का काम कर रहा है, समाजवादियो ,जनता के लिए संघर्ष करने वाले संगठनो और राष्ट्र वादियो को ग्रामीण मन के अनुसार चलना चाहिए | भ्रष्ट सरकारों के खिलाफ जनता से जुड़े संघर्ष शील राजनीतिक नेताओ को लोकतान्त्रिक अधिकारों को हासिल करने के लिए चुनाव लड़ना चाहिए या किसी इमान दार ,जन नेता ,समाजवादी चरित्र-सोच के प्रत्याशी की भर-पुर मदद करनी चाहिए | जनता के लिए संघर्ष करने वाले ही जनता के लिए काम कर सकते है ,जोड़ तोड़ व मौका परास्त राजनीति करने वाले सिर्फ स्वार्थ सिद्ध करेंगे यह निश्चित व ध्रुव सत्य है |सामाजिक - राजनीतिक व्यवस्था परिवर्तन के लिए आम जन के हितैषियो को लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत जन प्रतिनिधि निर्वाचन हेतु आगे आना चाहिए ,बगैर लोकतान्त्रिक ताकत हासिल किये व्यवस्था परिवर्तन नहीं किया जा सकता है|

जन चेतना अभियान

बाराबंकी में जन चेतना अभियान के तहत देवा से महादेव तक १३ दिसम्बर को निकली महंगाई,भ्रष्टाचार,जातिवाद,फिरका परस्ती,राजनीतिक गिरावट के खिलाफ और आम आदमी के हको हकूक की लडाई सड़क पर लड़ने के लिए जन कारवां बनाने के उद्देश्य से निकली संकल्प यात्रा अपने उद्देश्यों में सफल रही| अब ग्रामीण अंचलो में ग्रामीणों के साथ बैठक ,पद यात्रा ,साइकिल यात्रा के लिए संघर्ष शील साथियो को आगे आना चाहिए | बाराबंकी की समाजवादी धरा से जुल्मी ,अत्याचारी,जनविरोधी,मौकापरस्तो ,अवसर वादियो ,पूंजीपतियो को प्रत्याशी को विधान सभा में नहीं पहुचने दिया जायेगा यह संकल्प आम जनता को दिलाते रहना है| समाजवादी चरित्र व सोच के विधान सभा प्रत्याशियो जिन्होंने आम जनता के हित की लडाई लड़ी है उनको विधान सभा में अपना प्रतिनिधि निर्वाचित करना है|दल बदलुओ को नकार दीजिये ,सिर्फ जनता से जुड़े अपने राजनीतिक सिधान्त पर अडिग ,राजनीतिक चरित्र व समाजवादी सोच के प्रत्याशियो को समर्थन व मत दीजिये |राजनीतिक दलों के मकड़ जाल से निकल कर समाजवादी सोच - चरित्र के जन नेताओ को विजयी बनाइये |विनम्र अनुरोध के साथ-- अरविन्द विद्रोही

Monday, December 12, 2011

आखिर कार अन्ना पर गरजे बाराबंकी के विकास पुरुष बेनी प्रसाद वर्मा

अरविन्द विद्रोही----- बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री ने अन्ना हजारे की राहुल गाँधी के सन्दर्भ में कि गयी टिप्पणी के बाद अन्ना को चेतावनी भरे लहजे में चुनौती देते हुये कहा कि अन्ना उत्तर प्रदेश में आये,हम उनको देख लेंगे | पुराने समाजवादी ,वर्तमान में गोंडा से सांसद व बाराबंकी के मूल निवासी तथा बाराबंकी के विकास पुरुष माने जाने वाले बेनी प्रसाद वर्मा ने अन्ना और उनके आन्दोलन को संविधान विरोधी करार दिया | बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री ने कहा कि जब मैंने लोकपाल को संविधान के दायरे में लाने कि बात कही थी तब इन लोगो ने मजाक उठाया था,आज ये लोग भी इस बात पर सहमत है लेकिन यह समझ के परे है कि जब कांग्रेस और राहुल गाँधी मजबूत लोकपाल के लिए अपनी प्रतिबद्धता जता चुके है तब यह लोग राहुल गाँधी को निशाना क्यूँ बना रहे है ? बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री ने साफ़ तौर पर कहा कि अन्ना और उनके लोग विपक्ष और आर एस एस के इशारे पर बतौर मोहरे काम कर रहे है |बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि राहुल गाँधी की मेहनत और बढ़ते कांग्रेस के जनाधार से बौखला कर विपक्षी दल अन्ना और उनकी टीम के सहारे सड़क पर अनर्गल प्रलाप कर रहे है| राहुल गाँधी और कांग्रेस के खिलाफ किसी भी प्रकार का अनर्गल टीका टिप्पणी कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा |

भ्रस्टाचार और अनैतिक आचरण

गरीबो,किसानों ,मजदूरों को रोजाना लुटने वाले लोग भी आज कल भ्रस्टाचार के खिलाफ जन लोकपाल बिल लागू करने के लिए अनशन कर रहे है| गरीबो का हक़ मार कर बने पूंजीपति , किसानों को रोजाना ठगते वकील और मजदूरों को कम मजदूरी देकर भरपूर मेहनत करवाने वाले शहरी लोगो को अपने द्वारा किये जा रहे प्रति दिन के भ्रस्टाचार और अनैतिक आचरण पर खुद अंकुश लगाना चाहिए| अगर सभी खुद में सुधार कर लेवे तो किसी विधेयक की जरुरत नहीं| दुसरो के सुधार के पहले चलिए खुद को सुधारा जाये...... |

Sunday, December 11, 2011

हकीकत से मुह मोड़ते कांग्रेस नेता - राजेंद्र चौधरी


समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि कांग्रेस के युवा महासचिव अपने कार्यकर्ताओं को जो पाठ पढ़ा रहे हैं, वह जमीनी हकीकत से मुॅह मोड़ने जैसा है। उ0प्र0 में कांग्रेस 20 वर्षो से सत्ता से बाहर है इसका दर्द उन्हें होना चाहिए, किन्तु यह भी तो उन्हें सोचना होगा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि प्रदेश के मतदाताओं ने कांग्रेस को लगातार नकार दिया है। प्रदेश पार्टी संगठन के प्रति उनमें गहरी नाउम्मीदी है जिसकी वजह से वे बसपा-सपा की बेतुकी तुलनाएं कर अधूरी बात करते हैं।
उ0प्र0 में साम्प्रदायिक ताकतों ने प्रदेश की प्रगति में अवरोध पैदा किए। जातीयता और झूठ के बल पर बसपा ने गद्दी तो हथिया ली लेकिन विकास में प्रदेश केा वर्षो पीछे कर दिया। दुर्भाग्य से इन ताकतों को कांगे्रस की शह मिलती रही हैं। भाजपा राज में बाबरी मस्जिद का ध्वंस हो या बसपा सरकार में हर तरफ लूट और भ्रष्टाचार की बढ़त, इस सबके पीछे कांगे्रस की भूमिका रही है। कांग्रेस महासचिव को इस बात का जवाब देना चाहिए, कि जब कांग्रेस जानती है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार है, विकास रूका हुआ है, घोटाले हो रहे हैं, उसमें हत्याएं हो रही हैं तो फिर क्यों बसपा के भ्रष्टाचार-लूट को केन्द्र सरकार संरक्षण दे रही है। मुख्यमंत्री और उनके परिवारीजनों के खिलाफ तमाम घपलों में संलिप्त होने के लिए सीबीआई मुकदमें क्यों नहीं दर्ज कर रही है?
राजेंद्र चौधरी ने कहा कि कांगे्स महासचिव को क्या यह नहीं मालूम है कि प्रदेश में किसान कितना बदहाल हैं। भट्टापारसौल के किसानों का दर्द जानने के बाद उनको राहत देने के लिए क्या किया गया? मुस्लिमों को आरक्षण देने का झुनझुना दिखाने वाले कांग्रेस नेता को यह तो बताना चाहिए कि सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशें लागू करने में क्यों देरी की जा रही हैं? अपनी ही बनाई कमेटियों की सिफारिशें मानने से गुरेज क्यों है? केन्द्र में तो कुछ वर्षो को छोड़कर बराबर कांग्रेस की सरकारें रही है तो मुसलमान की हालत दलितों से भी ज्यादा बदतर क्यों हो गई है? आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र में कांग्रेस ने मुस्लिमों के हित में कौन से कदम उठाए हैं?
राजेंद्र चौधरी के अनुसार कांग्रेस महासचिव को यह जानना चाहिए कि बसपा के भ्रष्टाचार और लूट खसोट वाले राज के साढे़ चार सालों में सिर्फ समाजवादी पार्टी ही विरोध में मोर्चा सम्हालती रही है। कांग्रेस बताए कि उसने बसपा राज की कुनीतियों के खिलाफ कब संघर्ष किया है? प्रायोजित तरीके से दलित बस्ती में जाकर किसी के घर खाना खा लेने भर से गरीब की जिंदगी में बदलाव आने वाला नहीं है। कांग्रेस ने इस देश को असमानता, गरीबी, भूख और भ्रष्टाचार की थाती सौंपी है। टू-जी स्पेक्ट्रम, घोटाला, कामनवेल्थ खेल घोटाला में केन्द्र सरकार के मंत्री तिहाड़ जेल में बंद हैं तो हत्या, लूट, बलात्कार के मामलों में बसपा के मंत्री विधायक भी प्रदेश की कई जेलो में सजाएं काट रहे हैं। 40 प्रतिशत से ज्यादा बसपा सरकार के मंत्री लोकायुक्त की जाॅच में फंसे हैं।
प्रदेश में सिर्फ समाजवादी पार्टी किसानों की, व्यापारियों की, वकीलों और नौजवानों की, मुस्लिमों और महिलाओं के हितों की लड़ाई लड़ती रही है। उसके हजारों कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस संरक्षित बसपा सरकार के अपमान, उत्पीड़न को सहा है। उ0प्र0 में लोकतंत्र के लिए संघर्ष मंे समाजवादी पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश की जनता अब कांग्रेस -बसपा और भाजपा की आपसी साठ-गाॅठ वाली राजनीति से क्षुब्ध है और समाजवादी पार्टी को ही सत्ता में बिठाने का मन बना चुकी है। मुलायम सिंह यादव का वायदा है कि समाजवादी पार्टी जनता की आशाओं पर खरी उतरेगी।

Tuesday, December 6, 2011

बेनी प्रसाद वर्मा केंद्रीय मंत्री मंडल से बर्खास्त हो-राजेंद्र चौधरी


समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बेबाकी से कहा कि अब बेनी प्रसाद वर्मा को केंद्रीय मंत्री मंडल से बर्खास्त किया जाना चाहिए|उन्होंने कहा कि ध्यान दीजिये -बेनी प्रसाद वर्मा ने बयान दिया है कि अब राहुल गाँधी को प्रधान मंत्री बनना चाहिए|यह बयान प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के प्रति अविश्वास को प्रकट करता है ,लिहाज़ा बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री को प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के मंत्री मंडल से त्याग पत्र दे देना चाहिए यदि वो त्याग पत्र ना देवे तो प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह को अपने प्रति अविश्वास प्रकट करने वाले केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को अपने मंत्री मंडल से हटा देना चाहिए |अपने मंत्रालय के धन का बेजा इस्तेमाल कर रहे बेनी प्रसाद वर्मा मंत्री पद के संवैधानिक दायित्वों की पूर्ति की जगह अपने व्यक्तिगत प्रचार-प्रसार में जुटे है| राजेंद्र चौधरी ने आगे कहा कि इसके अतिरिक्त भी कई मंत्री है जो अपने मंत्रालय का धन अपव्यय करते हुये अपना प्रचार बड़े-बड़े विज्ञापन पटो के द्वारा कर रहे है ,इस पर तत्काल पाबन्दी लगनी चाहिए|

Monday, December 5, 2011

देवा से महादेवा की संकल्प यात्रा की तैयारियो में जुटे ,जन संपर्क तेज़

अरविन्द विद्रोही----------- संकल्प यात्रा के संयोजक सूफयान अख्तर ने अपने सहयोगियो सादिक हुसैन-सभासद,नगर पालिका बाराबंकी ,हृदयेश श्रीवास्तव - पचघरा,फतेहपुर, डॉ मतीन अहमद-ओबरी,बाराबंकी ,प्रदीप कुमार मिश्र ,नज़मउद्दीन अहमद - अहमदपुर -दरियाबाद, विकास वर्मा-अहमदपुर,फतेहपुर,राम समुझ यादव-उसरहा,कौशल कन्नोजिया-धमसड़, के साथ बाराबंकी शहर के विभिन्न वार्डो का भ्रमण किया|भ्रमण के दौरान संकल्प यात्रा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रमुख लोगो से वार्ता की तथा यात्रा को सफल बनाने के लिए समर्थन माँगा| वही फतेहपुर कस्बे व तहसील में आम जनता-अधिवक्ताओं के मध्य एक परचा वितरित किया जाना आज चर्चा का केंद्र बिंदु बन गया |संकल्प यात्रा में शामिल होने के अनुरोध के साथ साथ इस पर्चे में संकल्प यात्रा निकलने के कारण बताते हुये लिखा है कि यह यात्रा फैले हुये भयंकर भ्रष्टाचार,आसमान छूती महंगाई ,घोले जा रहे जातिवाद के ज़हर,तेजी से आ रही राजनीतिक गिरावट के खिलाफ और किसानों-मजदूरों व अल्पसंख्यको की समस्याओं के निराकरण हेतु संघर्ष के लिए जन चेतना जगाने के लिए निकाली जा रही है| मालूम हो कि अभी १ दिसम्बर को बेलहरा हाउस -देवा रोड बाराबंकी में आयोजित संकल्प गोष्ठी में इस यात्रा का निर्णय हुआ था| कुछ ही दिनों में यह संकल्प यात्रा बाराबंकी के राजनीतिक गलियारों में हर नुक्कड़ व बंद कमरे में चर्चा का मूल विषय बनी है|इस यात्रा के राजनीतिक अर्थ तलाशने की तमाम कोशिशे व्यर्थ ही है ,कारण संकल्प गोष्ठी में ही सरवर अली -पूर्व विधायक ने साफ़ तौर पर एलान कर दिया था की राजनीतिक ताकत के बिना जनता की कोई लडाई नहीं लड़ी जा सकती है ,अतः विधान सभा का चुनाव जरुर लड़ा जायेगा| सम्भावना तो यहाँ तक है बाराबंकी की सभी सीटों पर निर्दलिए प्रत्याशी उतारने की योजना के तहत ही सरवर अली -पूर्व विधायक रात दिन एक किये है|संकल्प यात्रा के प्रचार प्रसार के लिए सरवर अली जनपद के दूर दराज के ग्रामीण इलाको में भ्रमण कर रहे है|बीती रात धमसड़ में ग्रामीणों की एक तैय्यारी बैठक भी सरवर अली ने किया था जिसमे सर्दी के बावजूद सैकड़ो ग्रामीणों ने शिरकत की |

Friday, December 2, 2011

सुधरो या टूटो

अच्छे और ईमानदार लोगो को चुनाव लड़ना चाहिए|अगर चुनाव ना लड़ सकते हो तो किसी ईमानदार प्रत्यासी की भरपूर मदद करनी चाहिए| लोकतंत्र में बिना राजनीतिक ताकत हासिल किये कोई कुछ नहीं कर सकता है| राजनीतिक दलों की बंधुआ मजदूरी से निकल कर चुनाव लड़िये या किसी की मदद करिए | डॉ लोहिया ने भी समाजवादियो से कहा था-सुधरो या टूटो ..

सरवर अली के द्वारा राजनीतिक संघर्ष का एलान-१३ को निकलेगी संकल्प यात्रा

१दिसेम्बर को आयोजित संकल्प विचार गोष्ठी में भारी तादाद में लोगो ने शिरकत किया |संकल्प विचार गोष्ठी का आयोजन पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुफ्यान अख्तर ने अपने आवास बेलहरा हाउस देवा रोड बाराबंकी में किया | संकल्प विचार गोष्ठी की अध्यक्षता आर सी निगम -पूर्व न्यायधीश ने किया|बतौर मुख्य अतिथि पंडित राजनाथ शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि सूफी उबैदुररहमान ने शिरकत किया | गोष्ठी में सगीर अंसारी-शायर,मौलवी मोहिउद्दीन ,पंडित सुनील महराज,डॉ मतीन अहमद,जमील अंसारी-प्रधान ज़र्खा,रईस खान-बदोसराएं,जनाब जान मोहम्मद,भाग्य नारायण सिंह-पूर्व प्रधान अध्यापक,सुरेश वर्मा,अरविन्द वर्मा-पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख ,नसीम गुड्डू-नेता समाजवादी पार्टी,डॉ प्रताप यादव ,रफ़ी अंसारी-प्रधान ,फारुख मियां,सादिक हुसैन-सभासद आदि प्रमुख लोगो ने अपने अपने विचार रखते हुये विधान सभा के आगामी चुनावो में ईमानदार व जनता के लिए लड़ने वालो की मदद करने की बात कही| संकल्प विचार गोष्ठी के मुख्य वक्ता सरवर अली -पूर्व विधायक ने अपने संबोधन में कहा की जनता की लडाई और कारगर तरीके से लड़ने के लिए जन प्रतिनिधि होना जरुरी है,आप लोगो के ही सहयोग से विधान सभा का चुनाव जरुर लड़ा जायेगा |राजनीतिक दल कोई मायने नहीं रखता,जनता के वोट से ही विधायक बनते है |अगर जनता काम करने वालो को ,ईमानदार लोगो को चुनना चाहेगी तो चुनेगी| चुनाव जीतने के लिए मैं किसी भी प्रकार के अनैतिक आचरण का प्रयोग नहीं करूँगा|आप लोगो के लिए ही चुनाव लड़ना है और आप लोगो को ही चुनाव भी लड़ना है|सरवर अली ने एलान किया की १३ दिसम्बर को देवा से महादेव तक की संकल्प यात्रा निकाली जाएगी,जिसकी तैय्यारी में सभी साथी जुट जाएँ|

Thursday, December 1, 2011

व्यभिचार

अब तो सभी को व्यभिचार करने की खुले आम छुट दे दी जानी चाहिए ,,, पार्क या सार्वजनिक जगह अब सिर्फ प्रेम लीला यानि की वासना पूर्ति के स्थान बनते जा रहे है,, लड़के या लड़की घर के बाहर दिन भर क्या कर रहे है किसी अभिभावक को जानने की फ़ुर्सत ही नहीं है|पार्क ही नहीं होटल में भी लोग एक दो घंटे के लिए वासना पूर्ति के लिए कमरा बुक करवाके रंग रेली मनाते है,,शादी की उम्र पर पुनः विचार की जरुरत है,,, विपरीत लिंग के प्रति सहज -प्राकृतिक आकर्षण के कारण युवा वर्ग पार्क,होटल में जाकर वासना को शांत करता है-- सही समय पर विवाह ही सर्वोत्तम उपाय है

Tuesday, November 29, 2011

राजनितिक दलों की कार्य प्रणाली से बंधुआ मजदूर बनते कार्यकर्ता -संगठन व लाचार चुनाव आयोग

अरविन्द विद्रोही ----- राजनीतिक दलों के गठन का उद्देश्य अब सिर्फ और सिर्फ एन केन प्रकारेण चुनाव में विजय हासिल करना और सरकार बनाना या सरकार में हिस्सेदारी पा लेना मात्र रह गया है| आजादी के बाद स्थापित लोकतंत्र में जनता के लिए ,जनता के द्वारा ,जनता की सरकार चुने जाने की अवधारणा राजनैतिक दलों के आलाकमानो की तानाशाही और उनके द्वारा अपने -अपने राजनीतिक संगठनो के भीतर लोकतान्त्रिक प्रणाली को नकार के मनोनयन प्रक्रिया स्थापित कर देने से समाप्त सी हो चुकी है |लोकतंत्र की प्राथमिक पाठशाला के रूप में माने जाने वाले छात्र संघ चुनावो पर भी समय-समय पर इन्ही लोकतंत्र विरोधी तत्वों ने निगाहें टेढ़ी की है |आज राजनीतिक दलों के द्वारा चुनाव लड़ने व जीतने के लिए किस किस प्रकार का अमर्यादित आचरण किया जाता है यह भारत के किसी भी नागरिक से छुपा नहीं है लेकिन चुनावो पर नज़र रखने वाले चुनाव आयोग के कर्ता-धर्ताओ को यह अमर्यादित आचरण नज़र नहीं आता है|चुनाव आयोग ने हर एक चुनाव की एक आचार संहिता बनायीं है जिसका खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन राजनीतिक दलों के घोषित प्रत्याशियो के द्वारा किया जाता है और चुनाव आयोग अपनी बेबसी के बयान जारी कर के जनता को भ्रमित करने के खेल में जाने-अनजाने मौन सहभागिता देता है |राजनीतिक दलों के द्वारा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियो के नाम घोषित करते ही सभी प्रत्याशी अपने-अपने विधान सभा में प्रचार कार्य में जुट जाते है |यही से चुनाव आयोग अपनी बेबसी दिखता है कि अभी चुनाव आचार संहिता नहीं लागु हुई है इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते है|चुनाव सुधारो की कड़ी में इस पर अंकुश लगाने की जरुरत है,चुनाव में प्रत्याशी घोषित होते ही चुनाव आयोग को उस प्रत्याशी पर नज़र रखने ,उसके खर्चे का हिसाब लेने का अधिकार होना चाहिए |यह हालात और बिगडती है जब कोई प्रभावी मंत्री या उसका परिजन किसी चुनाव में प्रत्याशी घोषित हो जाता है | राजनीतिक दलों के द्वारा अपने दलों के द्वारा चुनावो में प्रत्याशी घोषित करने की चयन प्रक्रिया ने इस बार उत्तर-प्रदेश में अभी तक हत-प्रभ कर दिया है |राजनीतिक दलों ने जिस प्रकार से अपने विधान सभा के प्रत्याशी चयन किये है ,वह चयन प्रक्रिया निश्चित रूप से अलोकतांत्रिक, तानाशाही व राजतन्त्र के रवैय्या सरीखी है|उत्तर-प्रदेश की सत्ता धारी बहुजन समाज पार्टी की सरकार और मुख्यमंत्री मायावती की तानाशाही की पानी पी पी कर चर्चा करने वाले राजनीतिक दलों के नेता खुद प्रत्याशी चयन में किन कारणों से तानाशाही रवैय्या अपना कर अपनी पीठ ठोंक रहे है यह समझ से परे है |उत्तर प्रदेश के विपक्षी दलों ने बहुजन समाज पार्टी की मुखिया पर अपनी पार्टी के टिकेट वितरण प्रक्रिया पर तमाम सवाल उठाये थे और आज भी उठाते रहते है|बाहुबलियो,अपराधियो,दल्बदलुओ को भारी धन ले कर प्रत्याशी बनाने के आरोप मायावती और बसपा पर हमेशा से विपक्षी दल लगाते रहे है| विधान सभा २०१२के आम चुनाव के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी,कांग्रेस,और पीस पार्टी ने तमाम विधान सभाओ में अपने प्रत्याशी घोषित कर दिये है| समाजवादी पार्टी जो कि अपने संघर्षो और अपने पुराने कार्यकर्ताओ की मेहनत के बलबूते उत्तर प्रदेश में तेज़ी से बसपा सरकार का विकल्प बनी है, में भी विधान सभा प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया समझ के परे नज़र आ रही है| अपने स्थानीय व पुराने ,संघर्षशील समाजवादी संघर्ष के साथियो के रहने के बावजूद जिन सीटों पर बहुजन समाज पार्टी या अन्य दलों से हालिया शामिल लोगो को टिकेट दे दिया गया,वहा पर समाजवादी पार्टी का जमीनी कार्यकर्ता हताश व निराश होकर घर बैठ चुका है| पुराने धुर समाजवादियो जिनको विधान सभा का चूनाव् नहीं लड़ना है ,जिन कार्यकर्ताओ को सिर्फ समाजवादी पार्टी की सरकार बनवाने में जुटने की प्रबल इक्छा थी, वो भी बसपा से आये लोगो को प्रत्याशी बनाये जाने वो भी बिना किसी संघर्ष में शामिल हुये ,मायुश है और वार्ता में साफ़ तौर पर कहते है कि इन अवसरवादियो की मदद करने से बेहतर होगा कि हम किसी साफ़ छवि के प्रत्याशी की मदद करे| आज समाजवादी पार्टी के टिकेट वितरण में उपजा असंतोष सामने आ चुका है|प्रत्याशियो के आचरण की समीक्षा की बात ने समाजवादी कार्यकर्ताओ को एक आशा दिखाई है|अगर समाजवादी नेतृत्व अपने पुराने -संघर्ष शील साथियो को अपने साथ जुटा लेता है तो समाजवादियो के लिए उत्तर प्रदेश में राहें आसान हो जाएँगी | चुनाव जीतने के फेर में इस बार समाजवादी पार्टी ने भी सिधांतो को प्रत्याशी चयन में दर किनार किया है जिसका फायदा होने की जगह नुकसान होता दिखाई पड़ रहा है | कांग्रेस को उत्तर प्रदेश के २०१२ चुनावो से बहुत उम्मीद है|इस चुनाव को राहुल गाँधी के मिशन के रूप में लिया जा रहा है|समाजवादी पार्टी से समाजवादी क्रांति दल होते हुये कांग्रेस में शामिल होकर गोंडा से सांसद निर्वाचित होने वाले बाराबंकी के निवासी और बाराबंकी के विकास पुरुष माने जाने वाले बेनी प्रसाद वर्मा इस समय कांग्रेस के महा मंत्री राहुल गाँधी के प्रिय पात्र बने हुये है|अभी विगत सप्ताह राहुल गाँधी के उत्तर प्रदेश के दौरे के दौरान घटित घटनाओ ने बेनी प्रसाद वर्मा -इस्पात मंत्री के राजनीतिक-व्यक्तिगत आभा-मंडल पर निः संदेह कालिख पोतने का काम किया है | अपने गृह जनपद बाराबंकी में दरियाबाद से कांग्रेस के टिकेट पर चुनाव लड़ चुके ,वर्तमान में भी चुनाव का टिकेट मांग रहे ,तत्कालीन पी सी सी सदस्य शिव शंकर शुक्ल से बेनी प्रसाद वर्मा के द्वारा किया गया दुर्व्यवहार उनके लिए मुसीबत बन चुका है|आपराधिक धाराओ में मुकदमा दर्ज होने के साथ साथ दरियाबाद विधान सभा में जहा से बेनी प्रसाद वर्मा अपने बेटे राकेश वर्मा -पूर्व कारागार मंत्री उत्तर प्रदेश को कांग्रेस के टिकेट से चुनाव लडवा रहे है,वहा पर पुराने कांग्रेसी नेताओ-कार्यकर्ताओ के द्वारा प्रति- दिन विरोध बैठक व इस्पात मंत्री का पुतला दहन किया जाना जारी है|बलराम पुर,गोंडा ,बहराइच आदि जगहों पर भी पुराने कांग्रेस्सियो ने इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का जमकर विरोध किया और यहाँ तक विरोध किया कि राहुल गाँधी के सामने ही बेनी प्रसाद वर्मा को जन सभा से मंच त्याग कर हटना पड़ा | पुराने कांग्रेसी नेताओ की उपेक्षा से पनपा असंतोष सामने आ गया |राहुल गाँधी के मिशन २०१२ में पलीता कांग्रेस के ही पुराने नेता-कार्यकर्ता लगा देंगे|कारण असंतोष के स्वर के कारण पर नज़र डालने की जगह पुराने कांग्रेसी नेताओ को कांग्रेस से ही निकल दिया गया है,अब यह नेताओ का असंतोष ना होकर कांग्रेस के और बेनी प्रसाद वर्मा के खिलाफ जन असंतोष में तब्दील हो रहा है| इधर घटित घटनाओ ने पुराने कांग्रेसी नेताओ में एकजुटता और संगठन में हो रही पुराने लोगो की उपेक्षा के खिलाफ आवाज़ उठाने की हिम्मत का रास्ता दिखाया है| तेज़ी से उभरी पीस पार्टी तो अभी से बहुजन समाज पार्टी का दूसरा प्रतिबिम्ब मानी जा रही है|अल्प समय में लोकप्रिय हुई पीस पार्टी में भी सुरूआत से पार्टी का काम कर रहे लोगो का चुनाव के समय टिकेट काट कर नव आगंतुको को दिया जाना पीस पार्टी के नेताओ के मंसूबो को साफ़ दर्शाता है|अन्य दलों की चर्चा के कोई खास मायने नहीं है ,सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के टिकेट वितरण पर निगाहे है|भारतीय जनता पार्टी में भी जो संकेत मिल रहे है उसके हिसाब से टिकेट वितरण में दलबदलू,अवसरवादियो ,चापलूसों और पारिवारिक लोगो को भरपूर तवज्जो मिलेगी|अयोध्या के श्री राम जन्म भूमि आन्दोलन में शरीक कार्यकर्ताओ-नेताओ की जगह,संगठन के धारणा-प्रदर्शन में लाठी खाने वालो की जगह जब दुसरे दलों से चुनाव लड़ने के लिए आये लोगो को भारतीय जनता पार्टी विधान सभा में प्रत्याशी बनाएगी तो परिणाम क्या आएगा यह बताने की जरुरत नहीं है|खैर अभी भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रत्याशी नहीं घोषित किये है इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता है|लेकिन संगठन में ,चुनावी संघर्ष में जमीनी कार्यकर्ता ,पुराने कार्यकर्ताओ को जो भी राजनीतिक संगठन ज्यादा से ज्यादा तवज्जो देगा उसको उसका फायदा भी मिलेगा| यह सत्य है की चुनाव में जीतना जरुरी होता है है लेकिन चुनाव जीतने के लिए अपने संगठन के जमीनी कर्ता-धर्ताओ को उपेक्षित करना और उनकी जगह दुसरे दलों से आये लोगो को थोपना गैर जरुरी राजनीतिक अवसरवादिता का परिचायक है,और फिर चुनाव जीतना भी मुश्किल हो जाता है |आज राजनीतक दलों के नेताओ ने संगठन में जिम्मेदारी से लेकर चुनावो में टिकेट वितरण तक की प्रक्रिया में संगठन के बनाये नियमो का खुद ही उल्लंघन करने में कोई कसर नहीं रखी है और अगर कोई कार्यकर्ता-नेता इस अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करता है तो उसको पार्टी विरोधी गतिविधिओ में लिप्त बता कर संगठन से बाहर का रास्ता दिखाना एक आसान सी प्रक्रिया बन चुका है|शायद राजनीतिक दलों के आलाकमान ने राजनीतिक कार्य कर्ताओ को बंधुआ मजदूर समझ लिया है और समझे भी क्यूँ ना ? क्या आगामी विधान सभा २०१२ में राजनीतिक कार्यकर्ता इस मसले पर एक जुट हो सकते है कि गैर राजनीतिक चरित्र के ,दल बदलू लोगो और आपराधिक प्रवृत्त के लोगो की जगह राजनीतिक सूझ-बुझ वाले ईमानदार ,जनता के लिए संघर्ष करने वाले प्रत्याशी की मदद करेंगे ,फिर चाहे वो किसी भी राजनीतिक दल का हो या निर्दलिए ही हो| अगर राजनीति कार्यकर्ता इस तरह की कोई पहल करते है तो सामाजिक कार्यकर्ताओ और बुधिजीविओ को भी आगे बढ़ कर इनके संघर्ष में और नव सृजन में साथ देना चाहिए|

Monday, November 28, 2011

सर्दी

सर्दियो की शुरुआत हो चुकी है |सर्दी ने अपना प्रभाव दिखाना प्रारंभ कर दिया है |आज तलाश में निकलना है उन लोगो कि जो जरुरत मंदों के लिए सर्दी में गर्म कपडे,कम्बल वितरित कर सके,साथ ही साथ सामूहिक-सार्वजनिक अलाव जलवाने के लिए प्रशासन से आग्रह भी करवाना है| यह सत्य है कि अभी कड़ाके की सर्दी नहीं पड़ रही है लेकिन इस बार मन में आया कि अगर शुरुआत में ही जरुरतमंदो को गर्म कपडे व कम्बल आदि मिल जाये तो उनको ज्यादा आराम मिलेगा|साथ ही साथ और लोग भी प्रेरित हो कर अपने अपने स्तर से जरुरत मंदों की मदद को आगे आयेंगे |आप भी अपने पास के जरुरतमंदो की मदद कर सकते है |शुभकामनाओ सहित -अरविन्द विद्रोही

Sunday, November 27, 2011

लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी


लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघु ठाकुर ने किया १ दिसम्बर के भारत बंद का समर्थन | धुर समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने कहा कि फुटकर व्यापार में विदेशी पूंजी निवेश गलत है|हमारा खुद का व्यापार ५ करोड़ परिवार का पेट पालता है |वालमार्ट ,करिफोर्स जैसी कंपनी रक्षी प्रवृति की है इनका हर सूरत में विरोध किया जायेगा |

दरियाबाद विधान सभा के कांग्रेसी नेताओ ने जलाया केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद का पुतला




अरविन्द विद्रोही ------------- दरियाबाद विधान सभा के अहमदपुर चौराहे पर पुराने कांग्रेसी नेताओ की बैठक का आयोजन कर केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के द्वारा विगत दिनों की गयी शिव शंकर शुक्ल से अभद्रता व जान से मारने की धमकी ,उनके पुत्र अमित शुक्ल से उनके गुंडों द्वारा की गयी मार पीट की निंदा की गयी| बैठक का आयोजन तेज़ कुमार शुक्ल ने किया |इस बैठक की अध्यक्षता करते हुये जगदम्बा बक्श सिंह ने कहा की कांग्रेस की महामंत्री राहुल गाँधी के मिशन २०१२ को असफल बनाने के सुनियोजित योजना की तहत बेनी प्रसाद वर्मा पुराने कांग्रेसी नेताओ और कार्यकर्ताओ को अपमानित कर रहे है|उन्होंने कहा की बेनी प्रसाद का कोई जनाधार नहीं है,वो कांग्रेस की बदौलत गोंडा से सांसद चुने गये है|उनकी इन्ही हरकतों की वज़ह से गोंडा में भी कांग्रेसी नाराज़ है|बैठक में एक प्रस्ताव पास कर के कांग्रेस आलाकमान सोनिया गाँधी से अनुरोध किया गया कि इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को केंद्रीय मंत्री मंडल से बर्खास्त करके कांग्रेस से भी निकल दिया जाये| कांग्रेस के रहमो करम से सांसद बनने वाले बेनी प्रसाद वर्मा अब अपने पुत्र मोह में पुराने कांग्रेस्सियो को ही दार किनार कर रहे है जो कि संगठन हित में नहीं है|इस बैठक में आनंद शुक्ल,संतोष शुक्ल,ठाकुर धुन्नी सिंह शंकर,मृतुन्जय अवस्थी ,संजय कुमार ,दिन नाथ,मनोज अवस्थी जीतू,दीपू शत्रुघ्न ,रमेश वर्मा,अखिलेश सिंह पूर्व प्रधान सिसौना,ननकू रावत,धर्म राज रावत ,राजकुमार रावत आती कांग्रेस जन शामिल हुये |बैठक के बाद अहमदपुर चौराहे पर ही बेनी प्रसाद वर्मा मुर्दाबाद, बेनी भगाओ दरियाबाद बचाओ,शिव शंकर शुक्ल संघर्ष करो-हम तुम्हारे साथ है के नारे लगाते हुये वरिष्ठ कांग्रेस जनों ने इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का पुतला जलाया और संकल्प लिया कि बेनी प्रसाद वर्मा के नापाक मंसूबो को कतई सफल नहीं होने दिया जायेगा |

Friday, November 25, 2011

केंद्रीय इस्पात मंत्री को मंत्री-मण्डल से हटाये जाने की मांग को लेकर बाराबंकी में आज धरना













अखिल भारतीय चाणक्य परिषद् जिला इकाई -बाराबंकी के तत्वाधान में कल हई बैठक में ब्राह्मणों ने केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा द्वारा कांग्रेस नेता शिव शंकर शुक्ल को अभद्र शब्दों से अपमानित करने व जान से मारने की धमकी देने की घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुये इसको ब्रह्मण समाज पर हमला करार दिया है|ब्राह्मणों का अपमान बर्दाश्त ना करने की चेतावनी देते हुये चाणक्य पार्षद ने कहा की कांग्रेस को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे |दशहरा बाग़ स्थित डॉ नीलाम्बुज दीक्षित के आवास पर चाणक्य परिषद् के जिला अध्यक्ष गोपाल मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह विचार परिषद् के संरक्षक पंडित ज्ञान प्रकाश ने व्यक्त किये| पंडित ज्ञान प्रकाश मिश्र ने आक्रोश भरे शब्दों में कहा कि इस्पात मंत्री ने जो अलोकतांत्रिक व अहंकारी मानसिकता का परिचय दिया है और एक ब्राहमण व पुराने कांग्रेसी को अपमानित किया है ,उससे यह साबित होता है कि कांग्रेस में ब्राह्मणों का कोई सम्मान नहीं है |आगामी विधान सभा के चुनाव में ब्रह्मण समाज इस अपमान का बदला लेने के लिए कमर कस चुका है |परिषद् के जिला अध्यक्ष गोपाल मिश्र ने कहा कि केंद्र सरकार को दम्भी मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को मंत्री मंडल से तत्काल हटा देना चाहिए अन्यथा बाराबंकी जनपद कि सभी सीटों पर ब्राहमण समाज कांग्रेस को हराने के लिए एक के गाँव में जाकर जन संपर्क अभियान चलाएगा|बैठक में परिषद् के जिला महामंत्री कन्हैय्या लाल मिश्र,अमरनाथ शुक्ल,देवी शरण मिश्र,अतुल दुबे,बृज किशोर शुक्ल,शिव शंकर तिवारी,देश दीपक मिश्र,संजय त्रिपाठी,दिनेश द्विवेदी ,अतुल मिश्र,डॉ नीलाम्बुज दीक्षित,अरुण अवस्थी,आनंद कुमार तिवारी,अतुल शुक्ल,अरुण शुक्ल,उमानाथ तिवारी,संतोष कुमार मिश्र,नीरज मिश्र,विनीत अवस्थी,श्री दत्त पाण्डेय,ननकाऊ तिवारी ,राजेश अवस्थी,बाबु लाल पाण्डेय,गणेश तिवारी,देव प्रकाश मिश्र,डॉ वी के शुक्ल ,उपेन्द्र द्विवेदी ,आशुतोष मिश्र ,अनिल कुमार बाजपेयी ,रमेश तिवारी, जीतेन्द्र,नरेन्द्र पाण्डेय आदि लोगो कि उपस्थिति में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि सामजिक जातिगत अपमान बर्दाश्त नहीं किया जायेगा|बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि २५ नवम्बर को जिला मुख्यालय पर केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को मंत्री मंडल से हटाये जाने की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना दिया जाये| आज प्रातः १०बजे से ही कचेहरी जिला मुख्यालय में चाणक्य परिषद के लोगो का आगमन शुरु हो गया| धरना ११.३० से प्रस्तावित होने के बावजूद ब्रह्मण समाज के लोग सुबह से ही जुटने लगे |जिला अधिकारी के माध्यम से प्रधान मंत्री को दिये जाने वाले ज्ञापन में अखिल भारतीय चाणक्य परिषद् जिला इकाई बाराबंकी ने लिखा है कि आपका ध्यान आकर्षित करना है कि जनपद बाराबंकी निवासी कांग्रेस नेता इस्पात मंत्री भारत सरकार बेनी प्रसाद वर्मा द्वारा समय-समय पर ब्राह्मणों को अपमानित किया जता रहा है|इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा द्वारा २१ नवम्बर को राहुल गाँधी के बाराबंकी आगमन कि पूर्व संध्या पर कांग्रेस नेता शिव शंकर को सार्वजनिक रूप से अभद्र रूप से गाली देते हुये मारने -पीटने व धमकी देकर कार्यक्रम स्थल से भागना तथा २२नवम्बर को राहुल गाँधी के कार्यक्रम स्थल पर पुनः शिव शंकर शुक्ल के पुत्र अमित शुक्ल की पिटाई किया जाना उनकी ब्राह्मण विरोधी मानसिकता का परिचायक है|शिव शंकर शुक्ल को कांग्रेस से निकले जाने की खबर से ब्राह्मणों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त हो गया है|अंत में चाणक्य परिषद् की बाराबंकी इकाई द्वारा ब्राह्मण समाज आपसे मांग करता है कि ब्राह्मण विरोधी मानसिकता के केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को मंत्री पद से बर्खास्त कर के उचित कार्यवाही करे अन्यथा इसका खामियाजा कांग्रेस को आगामी विधान सभा चुनावो में भुगतना पड़ेगा |चाणक्य परिषद् के पंडित ज्ञान प्रकाश मिश्र,गोपाल मिश्र,अतुल कुमार दुबे ,सभी पदाधिकारी सहित सैकड़ो ब्राह्मणों का जमावड़ा आज धरना स्थल पर रहा | आज शिव शंकर शुक्ल सहित तमाम कांग्रेसी नेताओ को कांग्रेस से निकले जाने पाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये शिव शंकर शुक्ल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के संविधान का खुलम खुल्ला उल्लंघन किया गया है| ना तो मुझे कारण बताओ नोटिस दिया गया है और ना ही मुझसे किसी तरह की वार्ता की गयी है|शिव शंकर शुक्ला ने कहा कि पार्टी से निकले जाने के सन्दर्भ में मैं आज ही कांग्रेस कि अध्यक्ष सोनिया गाँधी,महामंत्री राहुल गाँधी सहित सभी वरिष्ठ नेताओ को पत्र लिखूंगा | मैं जन्मजात कांग्रेसी हूँ और रहूँगा, समाजवादी पार्टी से आये हुये बेनी प्रसाद वर्मा की कांग्रेस के सहारे अपनी राजनीति चमकाने और अपने बेटे को विधायक बनाने के लिए पुराने कांग्रेस्सियो के खिलाफ उनके द्वारा की जा रही सज़िसो को बेनकाब करता रहूँगा |

जनसंघर्ष के पथ पर बलिदान होने वालो को हार्दिक श्रधांजलि

आम जन का जनसंघर्ष जारी रहेगा,पूंजीवादी -शोषक जनविरोधी सरकार, उसके मंत्रियो और उसके चाकरों के खिलाफ आम जनता हर संभव तरीके से संघर्ष करती ही रहेगी|आम जनता के हित की सरकार व व्यवस्था बनाये बिना यह जन संघर्ष नहीं रुकेगा|कही जूता,कही चप्पल,कही थप्पड़ तो कही गोली-बारूद चलेगा|जय हिंद -इन्कलाब जिंदाबाद |जनसंघर्ष के सभी योद्धाओ को मेरा हार्दिक प्रणाम ,जनसंघर्ष के पथ पर बलिदान होने वालो को हार्दिक श्रधांजलि

Thursday, November 24, 2011

बेनी प्रसाद वर्मा को मंत्री मंडल से बर्खास्त किया जाये

अखिल भारतीय चाणक्य परिषद् इकाई बाराबंकी के तत्वाधान में कल एक दिवसीय धरने का आयोजन दिन में ११.३० बजे जिला मुख्यालय ,जिला अधिकारी कार्यालय के सामने आयोजित किया जायेगा| परिषद् के जिला संरक्षक ज्ञान प्रकाश मिश्र के अनुसार यह धरना केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के ब्राह्माण विरोधी मानसिकता और उनके द्वारा किये गये भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले वाले शिव शंकर शुक्ल को धमकी देने के विरोध में दिया जा रहा है| कल के धरने के माध्यम से प्रधान मंत्री से मांग की जाएगी कि बेनी प्रसाद वर्मा को मंत्री मंडल से बर्खास्त किया जाये |

Wednesday, November 23, 2011

केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ,उनके पुत्र राकेश वर्मा सहित दस समर्थको के खिलाफ अभियोग दर्ज

पुराने कांग्रेसी शिव शंकर शुक्ल -सदस्य ,पी सी सी उत्तर प्रदेश और उनके पुत्र अमिट शुक्ल के साथ गाली गलौच करना ,उनको धमकाना और जान से मारने की धमकी देना आख़िरकार केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को महंगा पड़ता दिखने लगा है|जैसा की सर्व विदित है कि बीते २१ नवम्बर को रीता बहुगुणा जोशी,राजबब्बर,पी एल पुनिया सहित तमाम कांग्रेसी नेताओ-कार्यकर्ताओ कि मौजूदगी में ही शिव शंकर शुक्ला से बेनी प्रसाद वर्मा ने अभद्रता कि थी और प्रेस वार्ता स्थल से बाहर फिकवाने का असफल प्रयास भी किया था| उसी दिन शिव शंकर शुक्ल ने बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक आर के भारद्वाज से मिलकर अपनी शिकायत बताई और एक शिकायती पत्र भी दिया था| पुलिस अधीक्षक आर के भारद्वाज ने प्रशासनिक सूझ-बुझ का परिचय देते हुये तुरंत चिक्त्सिए परी chan भी करवाया | राहुल गाँधी के २२ के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुये शायद उस समय प्रशासन ने अभियोग पनिकृत नहीं किया था ,आज शिव शंकर शुक्ल दुबारा पुलिस अधीक्षक आर के भारद्वाज से मिले | दरअसल कल २२ को बेनी प्रसाद वर्मा के समर्थको ने राहुल गाँधी की सभा में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए काफी उत्पात किया था|आज शहर कोतवाल संतोष कुमार को अभियोग पंजीकृत करने का निर्देश दिया |कोतवाली पुलिस ने बेनी प्रसाद वर्मा ,उनके पुत्र राकेश वर्मा सहित दस लोगो पर गाली देने व जान से मारने की धमकी देने का अभियोग पंजी कृत कर दिया है |

इन्टरनेट यानि अंतर्जाल पर बने मित्रो के रिश्तो पर मेरा अनुभव -

पड़ोसिओ,पारिवारिक रिश्तो अर्थात तथाकथित वास्तविक दुनिया के रिश्तो से बेहतर भावनाओ की समझ रखने वाले,समझने वाले और समझाने वाले ,हर ख़ुशी-गम आपस में मिल बटने वाले लोग मुझे तो इस तथाकथित आभाशी -काल्पनिक दुनिया में मिले है| अनतर्जाल पर पता नहीं कितने प्रकार के जाल होंगे लेकिन मैं तो अपने अंतर्जाल के इन मित्रो के स्नेह,ममत्व,अपनत्व के जाल में बहुत ही सुकून महसूस करता हूँ | मेरे अपने जीवन के उस मोड़ पर जब करीबी लगभग सभी रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ लिया था ,राजनीतिक-सामाजिक लाभ ले चुके लोगो ने भी किनारा कस लिया था तो उस अकेलेपन के दौर से गुजरने में चन्द रिश्तो की डोर ने मुझे ताकत दिया,जीवन संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर किया| यह चन्द रिश्ते ना होते तो शायद यह जीवन भी ना होता| अकेलेपन की दुनिया से निकलने और स्वार्थी लोगो से एक दुरी बनाये रखने के लिए इन्टरनेट का प्रयोग शुरु किया | आज यह गर्व से कह सकता हूँ की यह इन्टरनेट की ताकत ही है कि तमाम अनजाने लोगो से मेरी जान-पहचान हुई और उनके स्नेह ने मुझे दिनों दिन हौसला ही दिया | आज तमाम पुराने जानने वाले स्वार्थी रिश्तेदारों से मुझे निजात मिल चुका है,अब मेरी स्थिति सभी स्नेही जनों के आशीर्वाद से अच्छी है | उन लोगो से मिलने ,बात करने में मेरी तनिक भी रूचि नहीं रहती जिन्होंने मेरा साथ मेरे बुरे वक़्त में नहीं दिया | आज मैं इन्टरनेट के ही माध्यम से एक बड़े और नए रिश्तो को हशी-ख़ुशी जी रहा हूँ,खून से बड़े स्नेह रखने वाले लोग यहाँ मुझे मिले है|फेसबुक के सभी मित्र आज मुझे अपने परिवार के ही लगते है| मेरा अनुभव तो यही है इस अंतर्जाल के सन्दर्भ में ......

भिखारी कौन- राहुल या उत्तर प्रदेश के लोग?

यह कांग्रेस का महासचिव राहुल गाँधी तो लगातार उत्तर प्रदेश के लोगो को भिखारी ही कहता चला जा रहा है |कल बाराबंकी में इस राहुल गाँधी ने कहा कि जब यह अपनी गाड़ी से बाहर शीशे उतार के भिखारी से पूछता है कि कहा के हो तो वो कहता है कि उत्तर प्रदेश के है| इससे मिलने कौन जाता है और इससे मिल कौन पता है? क्या कोई आम आदमी मिलने जाता है? इससे तो कांग्रेसी ही मिलने जाते है ना? इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद और उनके कारिंदों ने बाराबंकी में पुराने कांग्रेस्सियो की औकात उनको दिखा ही दी है पिछले दो-तीन दिन में|बाकी जो भी लोग उत्तर प्रदेश के कभीभी राहुल से मिले है दिल्ली में उनके बारे में कि वो क्या है वो राहुल ने बता ही दिया कि वो उनकी नज़र में भिखमंगे से ज्यादा नहीं है |थोडा भी स्वाभिमान बचा है तो लात मारो इस भिखारी की पार्टी को, जो उत्तर-प्रदेश के लोगो से मत रूपी भीख मागने निकला है और हमको ही भिखारी बताता है ,स्वाभिमानी राजनीतिक कार्यकर्ताओ को ज़लालत भरी राजनीति को त्याग कर इस दम्भी राहुल गाँधी को इस बार भीख नहीं देना है यह संकल्प कर लीजिये| उत्तर-प्रदेश में इस के बाप के नाना के पूर्वज भाग के ही आश्रय लेने,रोजी-रोटी कमाने आये थे और यह अपने खानदान के और अपनी ननिहाल के बारे में बताएगा ही नहीं कि वो कौन है और कहा है? सालो-साल कांग्रेस में रहे नेताओ की शरेआम बेईज्ज़ती करने वाले इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की संगत राहुल और कांग्रेस को नेस्ता-नाबूत करने में सहायक-निर्णायक ही सिद्ध होगी | अपमानित ,उपेक्षित व बेनी प्रसाद के आतंक व राहुल के वक्तव्यों से नाराज़ भारी पुराना कांग्रेसी दुसरे दलों से आये लोगो को विधान सभा के चुनाव में करेंगे हराने का काम,कांग्रेस में रहकर लड़ेंगे नए-पुराने की जंग,,

पुण्य तिथि पर याद किये गये समाजवादी जन नेता राम सेवक यादव











२२नवम्बर को पुण्य तिथि पर समाजवादी नेता राम सेवक यादव की स्मृति में जनपद में जगह -जगह कार्यक्रम हुये|राम सेवक यादव यादव महाविद्यालय-चंदौली,बाराबंकी में आयोजित श्रधांजली कार्यक्रम में परिसर में स्थापित प्रतिमा पर पुष्पांजलि करने के पश्चात् उपस्थित छात्र-छात्राओ,शिक्षको को संबोधित करते हुये महाविद्यालय के सचिव /प्रबंद्धक एस डी यादव ने कहा कि राम सेवक यादव समाज के एक पुरोधा थे|उन्होंने समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में बाँधने का कार्य किया है| उनका संघर्ष सदैव समता मूलक,समाजवादी समाज बनाने के लिए रहा है|बाराबंकी कि धरती ऐसे सपूत को जन्म देकर गौरवान्वित हुई है |महाविद्यालय के कोष अध्यक्ष ज्ञान सिंह यादव ने कहा कि आज कि दिग्भ्रमित हो रही युवा पीढ़ी को सही दिशा में रचनात्मक संघर्ष के लिए राम सेवक यादव के व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए| सामाजिक कार्यकर्ता-स्वतंत्र पत्रकार,लेखक अरविन्द विद्रोही ने स्व राम सेवक यादव को भारत भूमि का एक अनमोल रत्न बताते हुये कहा कि स्व राम सेवक यादव जी का जीवन आज भी समाजवादियो के लिए,किसानों के लिए,मेहनत कश तबके के लिए प्रेरणा श्रोत है, बशर्ते लोग उनके बताये रास्ते पर ईमानदारी पूर्वक चले और राम सेवक यादव जैसी सादगी अपने जीवन में भी उतारे|डॉ लोहिया के प्रिय रहे स्व राम सेवक यादव ने ही सबसे पहले युवा मुलायम सिंह यादव कि मेहनत व राजनीतिक छमता को पहचाना था और जिम्मेदारी देकर तराशा भी था|समाजवादी पार्टी के वर्तमान मुखिया मुलायम सिंह यादव स्व राम सेवक यादव जी के प्रिय शिष्यों में एक थे |महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अहसान बेग ने कहा कि स्व राम सेवक यादव ने सदैव जाती धर्म से ऊपर उठ कर कार्य किया |इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ राम फेर ,संत राम यादव,उमेश चन्द्र ,संतोष कुमार यादव,शिव बालक,सतीश चन्द्र सहित समस्त छात्र- छात्राओ ने अपनी श्रधांजलि अर्पित की| उसके पश्चात् शहर स्थित स्व राम सेवक यादव समाधि स्थल पर जाकर महाविद्यालय के सचिव /प्रबंद्धक एस डी यादव ,सामाजिक कार्यकर्ता-स्वतंत्र पत्रकार,लेखक अरविन्द विद्रोही ,महाविद्यालय के कोष अध्यक्ष ज्ञान सिंह यादव,महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ राम फेर ने पुष्प चढ़ाये और उनके पुत्र अमिताभ सिंह यादव से मुलाकात की |

Monday, November 21, 2011

डॉ लोहिया के विचारो और समाजवाद की अलख जगाये धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव


अरविन्द विद्रोही ....... उत्तर प्रदेश के जनपद इटावा के सैफई गाँव में माता श्रीमती मूर्तिदेवी के कोख से जन्मे मुलायम सिंह यादव के जन्म २२नवम्बर,१९३९ के समय उनके जन्मदाता पिता श्री सुघर सिंह यादव ने भी तनिक कल्पना नहीं की होगी कि उनकी संतान के रूप में जन्मा यह अबोध बालक करोडो-करोड़ गरीबो-मज़लूमो-पीडितो-वंचितों-आम जनों का दुःख हर्ता बनकर युगों युगों तक के लिए कुल का नाम रोशन करेगा | क्या उस वक़्त किसी ने भी तनिक सा सोचा होगा कि एक किसान के घर जन्मा यह बालक मुलायम अपनी वैचारिक-मानसिक दृठता और कुशल संगठन छमता के बलबूते समाजवादी विचारक डॉ राम मनोहर लोहिया का सबसे बड़ा जनाधार वाला अनुयायी व उनके संकल्पों,उनके विचारो को प्रचारित-प्रसारित करने वाला बनेगा? १२अक्तुबर,१९६७ में जुल्म अन्याय के खिलाफ लड़ते-लड़ते डॉ लोहिया हमारे बीच से चले गये ,रह गये सिर्फ उनके विचार-उनके संकल्प और उनके अनुयायी| डॉ राम मनोहर लोहिया के देहावसान के बाद १९६७ से लेकर १९९२ तक समाजवादी आन्दोलन-संगठन का विघटन अफसोसजनक व दुर्भाग्य पूर्ण रहा |४-५ नवम्बर ,१९९२ को बेगम हज़रत महल पार्क-लखनऊ में जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के स्थापना सम्मेलन में देश भर के तपे-तपाये समाजवादियो के बीच संकल्प लिया कि अब मैं डॉ लोहिया द्वारा निर्धारित सिधांतो के आधार पर समाजवादी पार्टी का पुनर्गठन करूँगा ,तब से ले कर आज तक धरतीपुत्र की उपाधि से नवाजे गये मुलायम सिंह यादव ने तमाम राजनीतिक दुश्वारिया झेली हैं |डॉ लोहिया के कार्यक्रमों अन्याय के विरुद्ध सिविल नाफ़रमानी,सत्याग्रह,मारेंगे नहीं पर मानेगे नहीं,अहिंसा,लघु उद्योग,कुटीर उद्योग आदि मुद्दों को कर्म के छेत्र में व्यापक जनाधार करके स्थापित करने वाले सिर्फ मुलायम सिंह यादव ही हैं |आज के राजनीतिक दौर में जहा सिर्फ भीड़ ही राजनीतिक ताकत मानी जाती है ,उस दौर में डॉ लोहिया के विचारो-कार्यक्रमों को मजबूती से व्यावहारिक रूप में लागु करते हुये मुलायम सिंह यादव ने भीड़ के पैमाने पर भी खुद को और समाजवादी पार्टी को हमेशा अव्वल साबित करके दिखाया है | ४-५नवम्बर,१९९२ को समाजवादी पार्टी के स्थापना सम्मेलन में तपे-तपाये धुर समाजवादियो का जमावड़ा डॉ लोहिया के विचारो-संकल्पों के प्रचार-प्रसार व समाजवादी मूल्यों की सरकार बनाने को लेकर हुआ था |समाजवादी पार्टी की स्थापना को १९ वर्ष पुरे हो चुके हैं|इन १९ वर्षो में मुलायम सिंह यादव व समाजवादी पार्टी दोनों ने तमाम उतार-चढाव देखे है| तमाम लोग समाजवादी पार्टी से अलग हुये और तमाम जुड़े भी,लेकिन जिन डॉ लोहिया के विचारो को ,समाजवादी सोच व संघर्ष की मशाल को मुलायम सिंह यादव ने अपने मजबूत हाथो में पकड़ लिया था ,उस पकड़ को मुलायम सिंह यादव ने कभी भी तनिक भी ढीला नहीं किया | अपनी-अपनी राजनीतिक विवशता-महत्वाकांछाओं की पूर्ति ना होते देख कई समाजवादी नेताओ ने समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव का साथ छोड़ा|चन्द वैचारिक नेताओ ने बिना जमीनी हकीकत समझे समाजवादी पार्टी को त्याग करके डॉ लोहिया के विचारो के प्रचार -प्रसार व अनुपालन के एक बड़े अवसर को त्यागा| मौका पाकर तमाम अवसरवादी ,मौका परस्त ,शौकिया राजनीति करने वालो ने भी एक काकस बनाकर समाजवादी पार्टी को आघात लगाया|मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी ,समाजवादी आन्दोलन को कमज़ोर करने की कुचेष्टा सफल नहीं हो पाई और ऐसे तत्वों को समाजवादी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया| डॉ राम मनोहर लोहिया एक महान चिन्तक थे ,अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का संकल्प उनके लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण था|१२ अक्टूबर ,१९६७ को डॉ लोहिया के देहावसान के बाद डॉ लोहिया को एक महापुरुष मानने वाले मुलायम सिंह यादव ने आगे बढ़ कर मृत समाजवादी आन्दोलन में आगे बढ़ कर नयी जान फूंक दी| प्रसिद्ध समाजवादी लेखक स्व लक्ष्मी कान्त वर्मा ने अपनी पुस्तक समाजवादी आन्दोलन- लोहिया के बाद में लिखा है कि दस-बारह वर्ष आशा-निराशा भरे अनुभवों से गुजरने के बाद जब मुलायम सिंह ने १९९२ में डॉ लोहिया का नाम लेकर और उनके समस्त रचनात्मक कार्यक्रमों को स्वीकार करते हुये समाजवादी आन्दोलन को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया तो वह ना तो गाँधी थे और ना ही लोहिया थे| वह मात्र अपने युग के एक जागरूक व्यक्ति के रूप में पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे| मुलायम सिंह वास्तव में एक ऐसे व्यक्ति हैं जिसने स्वतंत्रता के तीन-चार दशको तक आम आदमी के दुःख-दर्द,अन्याय और उपेक्षा को देखा और भोगा है| वे उस अंतराल की पीढ़ी के के प्रतिनिधि है जो समस्त संवेदनशील बिन्दुओ को अपने में समेट कर समाजवाद सत्ता और सगुण सिद्धांतो को कार्यान्वित करने का सपना देख रही है| जिस तरह गाँधी ने कभी यह दावा नहीं किया कि वह स्वयं कोई शंकराचार्य या मसीहा हैं,ठीक उसी प्रकार मुलायम ने भी कभी यह दावा नहीं किया कि वह दुसरे लोहिया हैं| उन्होंने डॉ लोहिया के साथ-साथ जयप्रकाश और आचार्य नरेन्द्र देव को भी अपना पुरखा स्वीकार किया है और जब इन्होने इनको अपना पुरखा मान लिया है तो यह शंका अपने आप समाप्त हो जाती है कि वह डॉ लोहिया बनना चाहते है या अकेले उन्ही के सिद्धांतो के उत्तराधिकारी हैं| वे स्वतंत्रता के बाद आर्थिक ,सामजिक,सांस्कृतिक और राजनीतिक न्याय के छेत्र में संघर्ष करने वाले चौधरी चरण सिंह के भी उत्तराधिकारी हैं| डॉ भीम राव अम्बेडकर के भी उत्तराधिकारी हैं और खुले दिमाग के एक संघर्ष शील समाजवादी कार्यकर्ता के रूप में लोहिया ,जयप्रकाश,आचार्य नरेन्द्र देव ,मधु लिमये,राज नारायण इन सब के विचारो और राजनीतिक प्रयोगों और प्रयासों के उत्तराधिकारी है| और आज नवम्बर २०११ में भी डॉ लोहिया के विचारो पर समाजवादी पार्टी का गठन करने वाले मुलायम सिंह यादव एक बार फिर से राजनीतिक चुनौतिओ का सामना करने के लिए कमर कस चुके हैं| राजनीतिक विश्लेषकों के इस पूर्वानुमान कि इस बार के उत्तर प्रदेश के विधान सभा के आम चुनावो में सपा की केंद्रीय भूमिका में मुलायम सिंह यादव नहीं रहेंगे ,असत्य साबित हो चुका है| अपने जन्म दिन के मात्र ५दिन पूर्व १६नवम्बर को राम लीला मैदान-एटा में आयोजित जन सभा में उमड़े अथाह जन सैलाब को संबोधित करके नयी चेतना व विश्वास उत्पन्न करने में कामयाबी हासिल करने वाले धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव ने पुनः साबित कर दिखाया है कि ७३ साल की उम्र में भी सपा कार्यकर्ताओ ,जनता व डॉ लोहिया के विचारो के प्रति समर्पण में तनिक भी कमी नहीं आयी है| चाहे उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार के द्वारा आम जनता,किसानों व जन संगठनो पे किये गये अत्याचार की बात हो या चाहे कांग्रेस की केंद्र सरकार के द्वारा राम लीला मैदान में बाबा राम देव और सोती हुई जनता पर ढाए गये जुल्म की बात हो ,मुलायम सिंह यादव ने हर एक जुल्म की ,अत्याचार की पुरजोर खिलाफत की है| डॉ राम मनोहर लोहिया के अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने के सिद्धांत का पालन करते हुये समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में जुल्मी सरकार बदलने की पुरजोर अपील के साथ एक बार पुनः क्रांति रथ यात्रा को उत्तर प्रदेश की सभी विधान सभाओ में भ्रमण हेतु रवाना किया है| उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के कुशल नेतृत्व में निकली रथ यात्रा ७ चरण की यात्रा पूरा कर चुकी है| भारी तादात में जनता की उमड़ती भीड़ ने जहा सपा नेताओ के हौसले बढ़ा दिये है वही दुसरे दल चौकन्ने हो चुके हैं | समाजवादी संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाते हुये मुलायम सिंह यादव के एक सेनानी इलाहाबाद के युवा नेता अभिषेक यादव ने अपने साथियो के साथ मिल कर १४नवम्बर को समाजवादी मूल्यों और छात्र संघ बहाली की हक़ की लड़ाई लड़ने के मार्ग को और अधिक दृढ़ता प्रदान की है| धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के पहले और बाद में भी समाजवादी संघर्ष के ऐसे ही तोहफे देना समाजवादी मूल्यों की सरकार बनाने में निर्णायक सिद्ध होंगे| डॉ लोहिया के अनुयायी मुलायम सिंह यादव ने अपने को हर बार साबित कर दिखाया है| अब तो समाजवादी पार्टी के नेताओ और कार्यकर्ताओ की परीक्षा की घडी है कि वो अपने नेता को जन्मदिन के अवसर पे बसपा की जुल्मी सरकार से निजात दिलाने के संघर्ष के महायज्ञ में कैसा और कितना योगदान रूपी आहुति डालने का निश्चय कर ,उसको पूर्ण कर धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव को जन्मदिन का उपहार देते है|

Thursday, November 17, 2011

मानवता का हन्ता आतंकवादी

जो भी सरकारी कर्मचारी है उनको तनख्वाह कर्त्तव्य पालन के लिए ही मिलती है,और यह तनख्वाह आम जनता के पैसे से ही दी जाती है|पुलिस बल हो या सशस्त्र सुरक्षा बल सभी तनख्वाह के लिए ही नौकरी कर रहे है|नित सफाई करने वाला सफाई कर्मी और खम्बे पर चढ़ कर बिजली के तार जोड़ने वाला लाइन मैन ,सब भारत के लोगो के लिए ही तनख्वाह ले कर काम कर रहे है| लेकिन इनमे से किसी को गलत करने की अनुमति देश भक्ति के नाम पर नहीं देना चाहिए,सब वेतनभोगी है-बिना वेतन कुछ नहीं करेंगे ,ना खम्बे पर चढ़ेंगे -ना सीमा पर दुश्मन से लड़ेंगे|ये सब आम जनता के नौकर है ना की मालिक| बेकसूर आम जनता की हत्या करने वालो को मानवता का हन्ता आतंकवादी ही कहना होगा वो चाहे जो हो,,,

Wednesday, November 16, 2011

जन चेतना अभियान

आज डॉ लोहिया के विचार और समाजवाद की अवधारणा के प्रचार के तहत जन चेतना अभियान के तहत आज बेलहरा-फतेहपुर तहसील ,विधान सभा कुर्सी तक जाने का कार्यक्रम है| राहुल गाँधी के द्वारा उत्तर प्रदेश के मेहनत कश लोगो को भिखमंगा कहे जाने की बात सुदूर ग्रामीण इलाको में रहने वालो को भी बताने के लिए आज निकल रहा हूँ| डॉ लोहिया इन्ही कारणों से नेहरु और कांग्रेस को भारत की दुर्दशा का जिम्मेदार मानते थे |

Tuesday, November 15, 2011

मार-पीट करने वाले गुंडे कांग्रेसी नेताओ के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज हो

छात्र संघ बहाली की मांग को लेकर कांग्रेस के महासचिव राहुल गाँधी को ज्ञापन देने गये अभिषेक यादव ,अनिल यादव,आशीष यादव,कार्तिकेय यादव आदि को लातो-मुक्को से मारने वाले कांग्रेसी नेता रूपी अपराधी प्रमोद तिवारी,जीतीं प्रसाद,आर पी एन सिंह ,नसीब पठान के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग और राहुल गाँधी के उत्तर प्रदेश के लोगो पर दिये गये बयान के विरोध में बाराबंकी में भी समाजवादी पार्टी छात्र सभा के कार्यकर्ताओ ने जोरदार प्रदर्शन किया| समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश सचिव फरजान उस्मानी के नेतृत्व में रितेश जयसवाल,सैय्यद फैजी,पंकज वर्मा,चमन सिंह,हसनैन कुरैशी ,शशिकांत वर्मा,राहुल यादव,आशीष वर्मा,नीरज वर्मा,गणेश शंकर श्रीवास्तव,रमण सिंह,संदीप कुमार,टिंकू कुमार,सैफ खान लकी ,अदनान हुशेन,मो असद,ज्ञानेंद्र वर्मा,राहुल वर्मा ,विवेक चौधरी,शाने राजा ,मो इसरार भूरे,शोभित शुक्ल सहित दर्ज़नो छात्रों ने शहर के सिविल लाइंस स्थित कांग्रेस कार्यालय के सामने जमकर राहुल गाँधी मुर्दाबाद,कांग्रेस मुर्दाबाद ,छात्र संघ बहाल करो के नारे लगाये| छात्रों का भारी जमावड़ा देखकर पूरा प्रशासनिक अमला वहा आ गया| सी ओ सिटी दीपेन्द्र नाथ चौधरी व कोतवाली प्रभारी एस के सिंह ने कांग्रेस कार्यालय के पास दल बल के साथ पहुच करके छात्र सभा के छात्रों को समझा के वहा पर प्रदर्शन समाप्त करवाया| वहा से चल कर सभी छात्र छाया अम्बेडकर चौराहे पर पहुचे जहा पर राहुल गाँधी के चित्रों में आग लगा कर बाराबंकी के समाजवादी छात्रों ने अपना आक्रोश प्रकट किया| यहाँ आम जनता भी एकत्र हो गयी और जन समुदाय को संबोधित करते हुये सपा नेता फरजान उस्मानी ने कहा कि समाजवादी साथियो को मारने वाले कांग्रेसी नेताओ पर मार पीट करने का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए,हम सभी राहुल गाँधी के बयान की निंदा करते है जिसमे उन्होंने उत्तर प्रदेश के लोगो को भिखारी कहा है |

Wednesday, November 9, 2011

उत्तर प्रदेश की बदहाली और समाजवादियो-सामाजिक कार्यकर्ताओ का दायित्व

अरविन्द विद्रोही उत्तर प्रदेश के हालात दिन प्रतिदिन बाद से बदतर होते जा रहे है | सियासत की चक्की में आम जन की बात दीगर है , प्रशासनिक अधिकारी और विपक्षी दलों के नेता भी पिसते जा रहे है |उत्तर प्रदेश में सत्ता धारी बहुजन समाज पार्टी के हितो के विपरीत बात करने वाले अधिकारी पागल तक करार दिये जा रहे है ,कोई पागल हो या ना हो इतने यंत्रणा के बाद पागल होने की पूरी सम्भावना उत्पन्न हो ही जाती है | तानाशाही व नौकर शाही के दो पाटो के बीच बेचारा लोकतंत्र,मतदाता पिसता ही जा रहा है| लोकतान्त्रिक मूल्यों की स्थापित मान्यताओ की परवाह किये बिना जन आकांझाओ की अवहेलना करते हुये सरकारों का दमन कारी रवैय्या अपने चरमोत्कर्ष पे है|उत्तर प्रदेश की बसपा और केंद्र की कांग्रेस दोनों सरकारों का दमन चक्र आम जन की भावनाओ को दरिंदगी से कुचलता ही जा रहा है | लोकतंत्र में निर्वाचित सरकारों का जन विरोधी यह चरित्र शर्मनाक और लोकतंत्र को ख़त्म करने वाला चरित्र है| जनविरोधी तानाशाही सरकारों के कारण ही आज आम जन का विश्वास लोकतान्त्रिक व्यवस्था से डगमगा रहा है| आज हालात यह है की उत्तर प्रदेश में हर एक वर्ग बहुजन समाज पार्टी की कार गुजारियो से त्रस्त है |बसपा सरकार की गलत नीतिओ के खिलाफ जनता में जो आक्रोश दिखना चाहिए था ,अनवरत जारी सरकारी लूट ,दमन ,शोषण ,मनमानेपन के खिलाफ उबाल आना चाहिए था ,आखिर वो उबाल ,जनता का आक्रोश लगातार सड़क पर दिखाई क्यूँ नहीं दे रहा है? आम जन त्रस्त है ,यह सत्य है लेकिन संघर्ष से वास्ता नहीं रखना चाहती,आखिर क्यूँ? समाजवादी विचारक डॉ राम मनोहर लोहिया ने जनता की मनोदशा पे कहा था---- हिंदुस्तान जैसे देश में साधारण जनता यांकी गरीब आदमी क्रांति को इतना नहीं समझेगा,जितना कि राहत वाली राजनीति को |वह बराबरी को इतना नहीं समझेगा ,जितना कि बख्शीश को |उसको अगर थोडा बहुत पैसा मिलता रहे जीतने कि उसको आकांझा है,तो वह इसे ज्यादा पसंद करेगा,चाहे वह पैसा और समाज में उसका स्थान बहुत निचे दर्जे का हो,लेकिन कुछ मिला तो सही|जहाँ आदमी बहुत भूखा ,बहुत नंगा है ,बहुत दबा और गिरा हुआ है,वहां वह थोड़ी-बहुत छोटी-मोटी राहत की चीजों से प्रसन्न हो जाया करता है और उसको बराबरी की इच्छा कोई ऐसे सपने के जगत की काल्पनिक चीज मालूम होती है कि उसके लिए वह कुछ बहुत चिंता या सोच विचार करने को तैयार नहीं होता| ऐसा देखा गया है ,लेकिन यह खाली तुलनात्मक बात कह रहा हूँ| ऐसा ना समझना कि हमेशा के लिए एक भूखे और बहुत गरीब देश का गरीब आदमी क्रांति के बजाय राहत की राजनीति को,बराबरी के बजाय बख्शीश वाली नीति को पसंद करेगा |अगर ऐसा हो तो संसार में बदलाव कभी आ ही नहीं सकता|समय बीतते-बीतते ठोकर खाते-खाते दूसरी बातें भी दिमाग में आने लगती है| शायद अब वो वक़्त आ गया है हिंदुस्तान की राजनीति में जिसकी तरफ ,जिसके कभी ना कभी आने की बात डॉ लोहिया ने कही थी|आज तमाम संगठन जनता की आवाज़ बन के उभरे है,जनता में विश्वास की उमंग जगी है| भारत स्वाभिमान आन्दोलन की बाबा राम देव की अगुआई में जनजागरण यात्रा, अन्ना हजारे के अनशन,लाल कृष्ण आडवानी की लोकनायक जय प्रकश नारायण की जन्म स्थली से शुरु हुई रथ यात्रा ,युवा समाजवादी अखिलेश यादव की क्रांति यात्रा ने जनता की भावनाओ को उद्वेलित व जागृत करने का अनूठा काम किया है | उत्तर प्रदेश में समाजवादी आन्दोलन के आशा के केंद्र बिंदु बन चुके समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने डॉ लोहिया के विचारो के आधार पे मुद्दों की राजनीति की सकारात्मक शुरुआत की है जो उनके प्रति बन रहे जन आकर्षण का प्रमुख कारक है |आज जुल्म के खिलाफ लड़ने व एकजुट होने का समय आ गया है| कांग्रेस भ्रस्टाचार की जननी है इसको राजनीतिक नेपथ्य में करने और उत्तर प्रदेश को बसपा की माया सरकार से निजात दिलाने के किये सभी समाजवादियो और सामाजिक कार्यकर्ताओ को गैर कांग्रेसी गठबंधन बनाने की दिशा में काम करना चाहिए| डॉ लोहिया को मानने वालो,समाज हित में काम करने वालो,सरकारों के तानाशाही तरीको से त्रस्त जनों को देश-प्रदेश की सरकारों को उखाड़ फैकने की मुहिम में जुट जाना होगा और समाजवादी मूल्यों की सरकार बनाने के लिए अपना सर्वस्व लगाना पड़ेगा |

Monday, November 7, 2011

समाजवादी अलख


समाजवाद की अलख जगाने निकले और जन चेतना उत्पन्न करके भ्रष्ट-निरंकुश-जुल्मी बसपा सरकार को उत्तर प्रदेश की सत्ता से उखाड़ फैकने के लिए क्रांति रथ पे निकले समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव पुराने समाजवादियो-सामाजिक कार्यकर्ताओ के लिए एक आशा की किरण बन के उभरे है |अखिलेश यादव की क्रांति रथ यात्रा का ,उनका जगह जगह भव्य स्वागत और बड़ी बड़ी जन सभा आयोजित करने वालो को समाजवादी संघर्ष के नव-पुरोधा अखिलेश यादव की मेहनत से कुछ सबक लेना चाहिए | सिर्फ अखिलेश यादव के गले में माला पहना देने और जिंदाबाद के नारे लगा देने से ,मजमा जमा कर देने से बसपा की सरकार नहीं बदली जा सकती है|समाजवादी पार्टी के जनपद के संगठन कर्ताओ को समाजवादी चरित्र व सोच को अपनाने की जरुरत है | जरुरत है नव-पुरोधा अखिलेश यादव की तरह अपने -अपने विधान सभा में अनवरत समाजवादी अलख जगाने के लिए जनता की सवारी साइकिल पे सवार होकर निकल पड़ने की| डॉ लोहिया के विचारो की धार,धरती पुत्र मुलायम सिंह का आशीर्वाद और अखिलेश यादव के प्रभावी नेतृत्व के साथ जनता के बीच उनकी आवाज बनने की जरुरत है ना कि इलाके के मठाधिशो और सत्ता के दलालों के फेर में पड़ने की|

Tuesday, November 1, 2011

भावी मुख्यमंत्री हो सकते है बेनी प्रसाद वर्मा

समाजवादी अपने विचारो और कर्म से अपनी उपयोगिता साबित ही कर देता है,बाराबंकी के विकास पुरुष-धुर समाजवादी नेता बेनी प्रसाद वर्मा-केंद्रीय इस्पात मंत्री ने कांग्रेस में अपनी पकड़ बना के यह एक बार पुनः साबित कर ही दिया है | आगामी विधान सभा २०१२ में गाँधी परिवार अपने अलावा सिर्फ समाजवादी नेता बेनी प्रसाद के जनाधार को मानते हुये उनको भर पुर तवज्जो दे रहा है| बेनीप्रसाद वर्मा भी अपने पुराने संपर्को का इस्तेमाल करके कांग्रेस में समाजवादियो को महत्व पूर्ण जिम्मेदारी वा सम्मान दिलाने का भरोसा दिला कर कांग्रेस का कारवां बढ़ाने में रात दिन एक किये है| कुशल राजनीतिज्ञ , एक एक जनाधार वाले नेता को व्यक्तिगत रूप से जानने वाले बेनी प्रसाद युध्य स्तर पे अभी से अपनी राजनीतिक सेना सजाने लगे है |उनके समर्थक उन्हें भावी मुख्य मंत्री मान रहे है | गाँधी परिवार से मिल रही तवज्जो , व्यापक जनाधार और अपनी मेहनत के बूते बेनी प्रसाद वर्मा २०१२ के आम चुनाव के बाद मुख्य मंत्री बन सकते है,यह खबर चर्चा में आने से बाराबंकी में तो एक अलग ही माहौल बनता दिख रहा है| अपने द्वारा कराय गये विकास कार्यो के कारण जन जन में लोकप्रिय बेनी प्रसाद वर्मा के कारण कांग्रेस विरोधी एक बड़ा मतदाताओ का तबका भी कांग्रेस को मत करने का मन बनाने लगा है | मतदाताओ का आपसी चर्चा में कहना है कि बेनी प्रसाद वर्मा बाराबंकी का विकास करने और बाराबंकी में उद्योग धंधे लगवाने में कोई कसर नहीं रखेंगे इसलिए इनके साथ हम सभी को देना चाहिए | समाजवादी विचारधारा का गढ़ बाराबंकी में समाजवादी नेता बेनी प्रसाद वर्मा की बदौलत ही कांग्रेस का सांसद जीता था और आगामी विधान सभा में सभी सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी सीधे लड़ाई में रहेंगे यह अभी से दिखने लगा है| अपने अंतर विरोध और गलत टिकेट वितरण का आरौप झेल रही समाजवादी पार्टी बाराबंकी में मृत प्राय सी हो गयी है |

Monday, October 31, 2011

घट रहा है समाजवादी पार्टी का जनाधार

कल संपन्न हुये बाराबंकी के जैदपुर विधान सभा के समाजवादी कार्यकर्ता सम्मेलन में सपा जिला अध्यक्ष मौलाना मेराज के रवैये से हुये कार्यकर्ता नाराज़, स्थानीय कार्यकर्ताओ ने मेहनत की और मंच पे कब्ज़ा जमाया जिला इकाई ने,विधान सभा इकाई के किसी नेता को बोलने का नहीं दिया मौका | दरियाबाद से प्रत्याशी राजीव कुमार सिंह -विधायक के अलावा बाकी घोषित प्रत्याशी सपा नेतृत्व के निर्देशों को दरकिनार कर पहुंचे दूसरी विधान सभा के कार्यकर्ता सम्मेलन में | कार्यक्रमों में देर से पहुचने के कारण समाजवादी पार्टी के नेताओ से हो रहे है कार्यकर्ता और आम जनता नाराज़| विधान सभा स्तर के नेताओ को नज़र अंदाज़ करने से होगा भारी नुकसान , घोषित प्रत्याशी है अपने में मगरूर , बसपा विरोध और अखिलेश यादव की मेहनत के भरोसे लड़ रहे है चुनाव | घट रहा है समाजवादी पार्टी का जनाधार लेकिन समाजवादी पार्टी की जिला इकाई और प्रत्याशी बेफिक्र|

Thursday, October 27, 2011

बधाई विज्ञापनों के जरिये अपना हित साधने , राजनीति चमकाने की और पत्रकारों को लुभाने की कोशिश

हम सभी ने दीप पर्व दीपावली मना लिया | पूंजीपतियो ने जम कर अपनी पूंजी का प्रदर्शन करते हुये जमकर अपने आवास , अपने व्यापारिक प्रतिषठान की सजावट रंग बिरंगे बिजली के झालरों से करवाई | एक एक पूंजीपति परिवार ने सिर्फ आतिशबाजी में ही हजारो रुपये स्वाहा कर दिये| इनकी देखा देखी परिवार के सदश्यो के मन रखने के लिए , परंपरा निर्वाहन के नाम पे मेहनत कशो ने भी अपनी सामर्थ से ज्यादा का धन दीप पर्व को उल्लास पूर्वक मानाने में खर्च किया | व्यापारिक वर्ग ने एक तरफ जहा जम के कमाई कि वही दूसरी तरफ इन्ही व्यापारियो ने अधिकारिओ के घर जा जाकर मिठाई ,आतिशबाजी और मेवा , कपडे आदि उपहार स्वरुप रिश्वत भेट की | यही नहीं तमाम कमाई वाली जगह पर नियुक्त सरकारी कर्मचारी व अधिकारिओ ने भी अपने उच्च अधिकारिओ को भेट देने में कोई कोताही नहीं रखी | दीपावली का असली आनंद तो नौकरशाह , पूंजीपतियो , व्यापारियो ने जम कर उठाया | यही नहीं राजनीतिज्ञों ने भी दीपावली का जमकर उपभोग किया | दीप पर्व के बहाने जन संपर्क किया , बड़ी बड़ी होर्डिंग्स लगवाकर बधाई सन्देश दिया | जिन लोगो ने कभी किसी का भला नहीं किया वो भी बधाई संदेशो और विज्ञापनों के द्वारा बधाई देते नज़र आये | राजनीति में नेपथ्य में पड़े जनाधार विहीन , असामाजिक तत्वों ने भी आने वाले विधान सभा चुनावो को ध्यान में रखते हुये दीप पर्व की बधाई आम जनता को दे डाली | अपने पास अनैतिक तरीके से जमा किये गये धन का प्रयोग अब विभिन्न पर्वो में बधाई संदेशो और समाचार पत्रों में विज्ञापनों को देने में करने में ये तत्त्व तनिक भी गुरेज़ नहीं करेंगे | मीडिया जगत भी ऐसे तत्वों के शोषण का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता है | सिर्फ चुनावी बेला में बधाई देने वालो के मंसूबो को भांप के आम जनता और मिडिया जगत दोनों भरपूर आर्थिक दोहन करने के इंतज़ार में इन तत्वों का हौसला अफजाई कर रही है |

Saturday, October 22, 2011

स्वार्थी,जनाधार विहीन ,विचार विहीन और सत्ता के दलाल प्रवृति के लोगो से समाजवादी संघर्ष को खतरा

अरविन्द विद्रोही समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव -सांसद की वर्तमान सरकार की जनविरोधी नीतिओ ,मनमाने-पन के खिलाफ निरंतर पुरे प्रदेश में क्रांति रथ से , साइकिल से यात्रा के कार्यक्रम ने व्यापक जन समर्थन जुटा लिया है और जन संघर्ष व समाजवादी आन्दोलन के युवा कंधो की मजबूती को साबित करने में रात दिन एक कर रहे है |काबिल-ए -तारीफ है समाजवादी आन्दोलन व संघर्ष के नव प्रतीक बन कर उभरे समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव का यह प्रयास | युवा समाजवादी अखिलेश यादव को जन संघर्ष खड़ा करने की इस मुहीम में सर राम मनोहर लोहिया की बातो का पूरा ध्यान भी रखना और उसका अनुपालन भी करना और करवाना चाहिए | डॉ लोहिया के विचारो की रौशनी अखिलेश यादव की अपनी राजनीतिक जीवन की तरक्की-बेहतरी के लिए कारगर ही साबित होगी, इसमें कोई शक सुबहा की लेश मात्र भी गुंजाइश नहीं है | डॉ राम मनोहर लोहिया समाजवादी विचारधारा की वो अखंड ज्योति है जिसकी रौशनी में धरती-पुत्र मुलायम सिंह यादव ने अपनी संघर्ष की राजनीति को परवान चढ़ाया | डॉ राम मनोहर लोहिया ने कहा था -- एक तरफ वे लोग जो कि आन्दोलन के उद्देश्यों के लिए तकलीफ उठाते है ,दूसरी तरफ वे लोग जो आन्दोलन के सफल होने के बाद उसके हुकुमती काम-काज को चलते है | और आप याद रखना कि ये संसार के इतिहास में हमेशा ही हुआ है |लेकिन इतना बुरी तरह से कभी नहीं हुआ जितना की हिंदुस्तान में हुआ है | और मुझे खतरा लगता है कि कही सोशलिस्ट पार्टी कि हुकूमत में भी ऐसा ना हो जाये कि लड़ने वालो का तो एक गिरोह बने और जब हुकूमत का काम चलाने का वक़्त आये तब दूसरा गिरोह आ जाये | डॉ लोहिया कि यह चिंता दुर्भाग्य वश समाजवादी पार्टी के शासन काल में अमर प्रभाव के चलते वाजिब साबित हुई और जिसका खामियाजा भी सपा ने भुगता | बा मुश्किल सत्ता कि दलाली करने वाले गिरोह के मुखिया से सपा को निजात मिला और तब सपा के विचारधारा आधारित नेताओ व कार्यकर्ताओ को एक असीम सुख-आनंद की अनुभूति हुई थी | क्रांति रथ के माध्यम से जन संवाद , जन संपर्क पर निकले अखिलेश यादव को अपने इर्द-गिर्द लगातार बने रहने वाले चापलूस,जनाधार विहीन,फरेबी,दलाल प्रवृति के लोग ना जमने पाए यह विशेष ध्यान देना होगा | ऐसे स्वार्थी तत्वों कि शिनाख्त करके जो अपने अपने विधान सभा में प्रत्याशियो की मदद करने के बजाय उनके आगे पीछे घुमा करते है उनको तत्काल हटा देना चाहिए | नेतृत्व के अगल बगल रहकर चित्र खिचवा के विधान सभा का टिकेट कटवाने -दिलवाने का खेल भी चल रहा है यह ध्यान देना अखिलेश यादव के लिए जरुरी है | लोकतंत्र में किसी को भी विजय श्री मतदाताओ के द्वारा मत दिये जाने के कारण ही होती है | मतदाता संगठन के ,संगठन के नेताओ के विचार ,क्रिया कलाप व संघर्ष के कारण अपना समर्थन व अमूल्य मत देकर प्रत्याशी को विजयी बनाता है | युवा समाजवादी संघर्ष के प्रतीक अखिलेश यादव को अपने साथ सिर्फ विचारवान , संघर्ष शील युवा साथियो को ही रखना चाहिए | क्रांति रथ यात्रा के प्रारंभिक चरण में ही समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ़ कहा था कि विधान सभा के घोषित सभी प्रत्याशी सिर्फ अपने अपने विधान सभा के कार्यक्रमों में ही भागीदारी करे ,चुनाव कार्य में जुटे ,मतदाताओ के बीच बने रहे और चुनाव जीतने के बाद लखनऊ आये | पार्टी नेतृत्व को ध्यान देना चाहिए की क्या उसकी बातो पर तनिक भी ध्यान दिया जा रहा है? वो कौन लोग है जो स्पष्ट निर्देशों के बाद भी धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव के प्रेरणा पुंज डॉ राम मनोहर लोहिया और छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के चित्र व जिक्र तक से परहेज़ कर रहे है | अब समाजवादी पार्टी के संगठन को , नेतृत्व को खुद , अखिलेश यादव को संगठन व पार्टी के घोषित प्रत्याशियो की होने वाली बैठक में उपरोक्त बिन्दुओ को संज्ञान में लेकर कड़े निर्देश जारी करने चाहिए | अंत में एक बात सब से जरुरी हर जगह अपना फोटो साथ में खिचवाने वाले और जगह जगह आलाकामान से निजी रिश्ते होने की बात कहने वाले चन्द एक लोगो को अपने से दूर अखिलेश यादव हटाते है या उनसे गलबहिया करके उन लोगो के द्वारा कही जा रही तमाम बातो को पुख्ता करते है | सभी विपक्षी दलों सहित मिडिया की भी नज़र इस समय अखिलेश यादव व उनके इर्द गिर्द के लोगो पर यह यह बात सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव को नहीं भुलाना चाहिए | अतीत की गलती ना दुहराने से भविष्य सँवरता ही है |