Saturday, November 10, 2012
बाराबंकी पुलिस का रवैया --अपराध न करेंगे दर्ज ,हम रहेंगे मस्त ,ठेंगे से रहो तुम त्रस्त
पिछले शनिवार - रविवार 27-28 की रात मेरे अपने निजी आवास पे हुई चोरी की घटना ने मुझे हैरानी के साथ साथ दहशत जदा भी कर दिया था । शनिवार 27 की रात 1 1.15 के पश्चात् मैं सोने के लिए बिस्तर के हवाले हो गया । घर में मैं अकेला था- पत्नी दोनों बेटों के साथ दशहरे के अवकाश में अपने मायके तहसील फतेहपुर में थी । रविवार 28 को सभी को लेने के लिए 10 बजे सुबह घर से फतेहपुर के लिए निकलने का कार्यक्रम सुनिश्चित कर लिया था यही कारन था कि देर रात तक पढना लिखना न करके सो गया ।फिर एक आहट सी लगने पे अचानक मेरी नींद खुली और मैं बिस्तर से उठ खड़ा हुआ । सोने के कमरे से बगल के बड़े कमरे की तरफ होकर मुंह धोने / लघु शंका करने के लिए बढ़ा , बड़े कमरे से लगे रसोई घर से खाना आदि दिए जाने वाले झरोखा जो कि ईटों से बंद था को खुला देख कर , उसमे से आती रौशनी देखकर मैं चौंक गया । तभी एकदम से नज़र बड़े कमरे से आंगन में खुलने वाले दरवाजे पे गयी और उसको भी खुला देखकर मैं सकते में आ गया । मैं समझ गया कि मेरे घर में कोई घुस चूका है और अपना हाथ साफ़ कर चूका है । बड़े कमरे की मेरी अपनी अध्धयन की मेज पर मेरा लैपटॉप मुझे दिखाई पड़ा । मेरे समझ में तुरंत ये आया कि रसोई के सामान पे चोरो ने अपना हाथ साफ़ कर लिया होगा ।मैं बड़े कमरे से आंगन में आया और बड़े कमरे से बिलकुल सटे रसोई घर को देखा । रसोई का सामान व ईटे बिखरे पड़े मिले लेकिन गैस - सिलेंडर आदि सुरक्षित मिले । आंगन में पड़ी तमाम वस्तुओं के साथ साथ बेटों की साइकिल भी सुरक्षित मिली । अब मेरी घबराहट एकदम से बढ़ गयी कि आखिर कौन आया और किस मकसद से ? कितना बजा है ये देखने के लिए मैं वापस बिस्तर वाले कमरे में आया और अपना मोबाइल तलाशने लगा , बिस्तर पर मोबाइल न मिलने पे मेरा माथा ठनका और तभी मेरी नज़र भीतरी कमरे के दरवाजे के पल्ले पे गयी जहा रात में मैंने अपने कपडे टांग दिये थे, कपड़े भी गायब दिखे । माज़रा लगभग साफ़ हो चूका था , अब समय देखने के लिए मैंने अपना लैपटॉप ऑन किया , उस समय लगभग 4.45 हुये थे ।
अपने मित्रों से संपर्क साधने के लिए तत्काल मैंने फेसबुक का अपना खाता खोला और अपने वाल पे चोरी की घटना को लिख दिया इस उम्मीद में कि अगर बाराबंकी के , मेरे पड़ोस के कोई भी व्यक्ति तक ये सुचना पहुच जाएगी तो वो मेरे घर आ जायेगा। संपर्क का साधन मोबाइल चोरी जाने के पश्चात् मैंने अंतरजाल को संपर्क के लिए प्रयोग किया । यह लिख कर मैं अपने घर की छत की तरफ चल पड़ा । जीने पे मेरा -पेंट शर्ट पड़ा मिला जिसमे से मेरा पर्स चोर साथ ले जा चूका था । मामूली 35 0 रूपये लेकिन सभी जरुरी कागज मतदाता पहचान पत्र , वाहन चालक अनुज्ञप्ति पत्र , पैन कार्ड , विजिटिंग कार्ड आदि अज्ञात चोर ले जा चूका था । छत से अगल बगल नीचे देखने के पश्चात् मैं दुबारा नीचे कमरे में आ गया । इस समय तक सुबह के 5 बज चुके थे। मैं घर से निकल कर मुख्य मार्ग विकास भवन मार्ग पे आ कर देखने लगा । मुख्य मार्ग निवासी इक श्रीवास्तव परिवार बाहर अपने बेटे को स्टेशन भेजने के लिए खड़ा था ,मैंने उनको भी अपने घर हुई चोरी की घटना बताई और उनके छोटे बेटे से अपना चोरी गया मोबाइल नंबर मिलाने को कहा , उसने तुरंत मिलाया लेकिन तब तक फ़ोन बंद हो चूका था । मिलाते रहना थोड़ी थोड़ी देर में यह कहने के बाद मैं अपने घर आ गया ।थोड़ी देर बाद कुछ समझ में न आने के कारण मैंने अपने पड़ोस में रहने वाले अनिल श्रीवास्तव को घर से बाहर निकल कर उनके मुख्य द्वार से आवाज देकर जगाया और उनको अपने घर हुई घटना की जानकारी दी । वो तत्काल निकले और मेरे घर में कमरे-रसोई से लेकर छत तक गये । उनके घर के लोग भी जग गये और अपनी छत पर पड़ोसी प्रेम पाठक,उनकी पत्नी ,अनिल श्रीवास्तव की पत्नी भी पहुच गये । मैंने अपने पत्नी को फ़ोन करने के लिए अनिल श्रीवास्तव से फ़ोन माँगा तो उन्होंने सलाह दिया की अभी सुबह के 5.30 ही है , थोड़ी देर बाद करियेगा । वो भी अपने मोबाइल से मेरा नंबर मिलाये लेकिन चोर उसे बंद कर ही चूका था । थोड़ी देर में सभी लोग अपने घर चले गये ।
मैं एक बार फिर अपने घर में अकेला था ,कुछ देर बाद फेसबुक पर नज़र डाली तो स्थानीय दो -तीन मित्र ऑनलाइन दिखे , उन सभी को मैंने सन्देश दिया और मेरे एडवोकेट मित्र मो सबाह - प्रतिनिधि माननीय बेनी प्रसाद वर्मा (केंद्रीय इस्पात मंत्री ) ने जवाब दिया ,मैंने उन्हें ऑनलाइन चोरी की घटना की जानकारी दी और उन्होंने 30 मिनट के अन्दर मेरे घर आने की बात कही । कुछ देर बाद मैं फिर घर से बाहर सड़क पे निकला ,पड़ोस में ही रहने वाले मतीन अहमद प्रातः भ्रमण के अपने दैनिक चर्या के अनुसार मिल गए , उन्हें भी बताया । वो भी तुरंत मेरे मेरे घर और सब जगह देखे । कुछ मिनट के पश्चात् मतीन अहमद अपने घर चले गए और मैं अपने छत से लेकर बहार सड़क तक चहल कदमी करने लगा । कुछ ही देर में मो सबाह अपने वायदे के मुताबिक आ गये । सुबह के सात बजने को थे । मो सबाह के आने से मुझे थोडा सुकून मिला और मैंने कॉफ़ी बने और दोनों लोगो ने पी । इस बीच मो सबाह के मोबाइल से पत्रकार साथी मो अतहर - जिला संवाददाता , पंजाब केसरी को फ़ोन किया पर उनका मोबाइल उठा नहीं । उसके बाद समाजवादी पार्टी के नेता धीरज गुलसिया को फ़ोन से घटना की जानकारी दी और उन्होंने भी जल्दी मेरे घर आने को कहा । घटना की सूचना देने व प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन पत्र मो सबाह ने मेरे निवेदन पे मेरे बताये अनुसार लिखा । लगभग आधे घंटे बाद मो सबाह अपने घर के लिए चले , मैंने उनसे कहा कि अगर अतहर भाई का फ़ोन आयेगा तो उनको मेरे यहाँ चोरी की घटना से अवगत करा दीजियेगा और मैंने अपने घर बुलाया है ये कह दीजियेगा । मो सबाह के जाने के पश्चात् मैं अपनी छत पे गया और बगल में निवासी अनिल श्रीवास्तव जो अपनी छत पर अपने किसी सहकर्मी से वार्ता कर रहे थे, से बात करने लगा । उन्ही से मोबाइल लेकर मैंने अपनी को घर में घटित चोरी की घटना को बताया और कहा कि तुम किसी के साथ बच्चो को लेकर जल्द से जल्द आ जाओ । तभी सपा नेता धीरज गुलसिया आ गये और मैं नीचे आ गया ।उनके घटना स्थल देखने के पश्चात् मैंने कहा कि घटना की सुचना चलकर कोतवाल दे दी जाये और उन्होंने तुरंत हामी भरी और कहा कि चलिए । कमरे और मुख्य द्वार में ताला लगा कर मैं उनके साथ कोतवाली पंहुचा तब तक शायद 8बजने वाले थे । कोतवाली में मौजूद पुलिस कर्मी ने कहा कि अभी कोतवाल साहब नहीं है , 10 बजे के बाद आ जाइये , प्राथमिकी भी दर्ज हो जाएगी और कोतवाल साहब के से कुछ कार्यवाही भी हो जाएगी । मैं वापस अपने घर आ गया और दैनिक क्रिया से निवृत होने के पश्चात् कमरे में ही लेट गया । लगभग 9 बजे दो पुलिसकर्मी आये और मौका मुआयना देखने लगे ।कमरा , रसोई , आंगन और छत सभी जगह देखने के पश्चात् बड़े कमरे में बैठ कर वार्ता करने लगे तभी पंजाब केसरी के जिला संवाददाता मो अतहर और एक अन्य पत्रकार साथी अब्बास भी आ गये । उनके घर के अन्दर आने के चंद मिनट बाद ही आवास विकास चौकी प्रभारी सतीश यादव को साथ लेकर धीरज गुलसिया आ गये । सभी लोग एक साथ कमरे , रसोई , आंगन को देखते हुये छत तक गये और फिर कमरे में आकर बैठ गये । त्वरित कार्यवाही की बात कहते हुए चौकी प्रभारी ने स्वयं घटना का प्राथमिकी दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र माँगा ,जो की मैंने तुरंत दे दिया । दो दिन के भीतर चोरी के खुलासे की बात और समुचित कार्यवाही करने का आश्वासन देकर चौकी प्रभारी और अन्य पुलिस कर्मी चल दिये । यह सब 10.30 बजे तक हो गया , पुलिस चौकी प्रभारी के आने और उसके कथन से तब मुझे बहुत सुकून मिला था ।
दोपहर में परिवार वापस आ गया , साफ -सफाई और लोगो के आने जाने वार्ता में ही शाम हो गई । सोमवार और मंगलवार को फ़ोन से चौकी प्रभारी से मामले की प्रगति लेता रहा । मामले में प्रगति शून्य प्रतीत होने व चोरी का तक दर्ज न होने के बाबत जब चौकी प्रभारी से मैंने कहा तो उन्होंने कहा कि चोरी की जगह गुमशुदगी की दरखास्त दे दीजिये , चोरी की प्राथमिकी मत दर्ज कराइए । मैंने कहा कि जब चोरी हुई है तो गुमशुदगी की बात कैसे लिखूं? समाजवादी पार्टी के वरिष्ट नेता अरविन्द यादव - पूर्व विधान परिषद् सदस्य , जिला सचिव ज्ञान सिंह यादव , धीरज गुलसिया आदि ने भी चोरी की प्राथमिकी दर्ज करने और कार्यवाही करने के लिए सतीश यादव - चौकी प्रभारी आवास विकास कालोनी से कहा । अंततः शनिवार 3नवम्बर को बाराबंकी कोतवाल संतोष सिंह से पत्रकार साथी मो अतहर ,आशुतोष श्रीवास्तवा , रेहान के साथ प्रातः 10.30 पे मिला । कोतवाल बाराबंकी संतोष सिंह ने कहा कि दो - तीन दिन का मौका और दे दीजिये , अभियोग पंजीकृत के साथ साथ तब तक अपराधी भी सर्विलांस के द्वारा पकड़ में आ जायेंगे । साथी पत्रकारों की सलाह से मैंने भी कहा कि ठीक है सोमवार तक ही अभियोग पंजीकृत कर दीजियेगा । कोतवाल ने कहा कि गुमशुदगी अभी दर्ज करा दीजिये , मैंने इंकार और कहा कि चोरी हुई है , चोरी की रिपोर्ट लिखिए । खैर सोमवार 5 नवम्बर को अभियोग दर्ज करने और अभियुक्त का पता लगाने का आश्वासन मिल चूका था और पीरबटावन में किसी मामले की सुचना आने के कारण कोतवाल को वहा जाना था । औपचारिक नमस्कार के पश्चात हम सभी लोग बाराबंकी कोतवाली से निकल गये । कोतवाली से निकलने के पश्चात मेरा कार्यक्रम एकदम से मझगवां शरीफ तहसील फतेहपुर जाने का बन गया । शाम को लगभग 6बजे वहा से वापस बाराबंकी घर पंहुचा ।
इस दौरान कई पत्रकारों ने बाराबंकी कोतवाल संतोष सिंह व आवास विकास चौकी प्रभारी सतीश यादव से प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा , लेकिन आपराधिक घटनाओं को ना दर्ज करने की फितरत के चलते अभियोग पंजीकृत पुलिस द्वारा नहीं किया गया । पुलिस के प्राथमिकी तक ना दर्ज करने के कारण मंगलवार 6 नवम्बर को तहसील दिवस के अवसर अपने घर हुई चोरी की घटना और पुलिस द्वारा कार्यवाही ना करने की सूचना और प्राथमिकी दर्ज किये जाने का प्रार्थना पत्र सुनील चौधरी -सदर उप जिला अधिकारी को दिया । उनके साथ सी ओ सिटी दीपेन्द्र चौधरी मौजूद थे , पूरा प्रकरण समझने के पश्चात अधिकारी द्वय ने स्पष्टतः कहा कि कल आप कोतवाली से चोरी की घटना की प्राथमिकी रिपोर्ट की प्रति ले लीजियेगा । दूसरे दिन शाम को पता करने पे अभियोग दर्ज ना होने की जानकारी मिली । गुरुवार 8 नवम्बर को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को बाराबंकी आना निश्चित था ,7नवम्बर की शाम को चौकी प्रभारी सतीश यादव ने वार्ता करने पे कहा कि कोतवाल साहब सहित सभी उसी में व्यस्त हैं , कार्यक्रम के पश्चात प्राथमिकी दर्ज हो जायेगी । 8 नवम्बर को सपा प्रमुख आये और चले भी गए ,आज शनिवार 10नवम्बर तक भी मेरे घर शनिवार - रविवार 27-28 को हुई चोरी की घटना को बाराबंकी की पुलिस ने दर्ज नहीं किया है ।
गुरुवार 8 नवम्बर को एक सुखद लेकिन हैरान कर देने वाला वाकया हुआ । दोपहर बाद करीब 3.15 बजे जब मैं पंजाब केसरी के बाराबंकी कार्यालय में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के द्वारा दिए गये भाषण पे पत्रकार साथियों से विचार विमर्श कर रहा था तभी मेरे पडोसी मतीन अहमद जी का फ़ोन आया । उन्होंने कहा कि तत्काल आ जाओ ,तुम्हारा पर्स मिला है । तत्काल वहा मौजूद अब्बास भाई के साथ अपने मोहल्ले आ गया । मेरे घर के चंद कदम पहले विकास भवन मार्ग पे ही मतीन भाई का निर्माणाधीन अतिथि गृह है , वही मतीन भाई मिले । मुख्य मार्ग पे सड़क के किनारे ईटों का एक चट्टा लगा हुआ है , उसी पे मेरा चोरी गया पर्स एक ईटें से दबा कर रखा था ,जिसको वहा कार्य कर रहे मजदूर ने देखा था और मतीन भाई को सूचना दी । खैर ,मैंने पर्स मिलने की सूचना तत्काल चौकी प्रभारी सतीश यादव को दिया और उन्होंने एक घंटे में आने को कहा , दुर्भाग्यवश आज 10नवम्बर दिन शनिवार दोपहर 1.25 तक भी लगभग 46 घंटे बीत जाने के बाद भी चौकी प्रभारी का एक घंटा नहीं हुआ । बाराबंकी में आवास विकास चौकी प्रभारी सतीश यादव की इन हरकतों से साफ़ समझ में आ चूका है कि पुलिस अपराधी को संरक्षण दे रही है।पड़ोसियों और मित्रों की सलाह से मैंने कल 9नवम्बर को अपना पर्स वहा से उठा के अपने कब्जे में ले लिया । पुलिस की इन सारी गैर जिम्मेदाराना व भ्रष्टाचार युक्त आचरण की जानकारी मैंने सुनील चौधरी - उपजिलाधिकारी को दिया । उनके द्वारा भी पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने व कार्यवाही करने को निर्देशित किया गया था , जिस को तक नज़र अंदाज़ पुलिस कोतवाल द्वारा किया गया । कोतवाली अंतर्गत आवास विकास कालोनी चौकी इलाके में अपराधों को दर्ज न करने के सिलसिले का ताज़ा प्रमाण मेरे अपने निजी आवास में पिछले 27-28 की रात हुई चोरी की प्राथमिकी आज तक दर्ज न किया जाना है । कोतवाली इलाके में अपराध हो ही नहीं रहे है ये साबित करने के लिए प्राथमिकी ही नहीं दर्ज करी जाती है । कोतवाली अंतर्गत आवास विकास कालोनी चौकी इलाके में तमाम चोरी की घटनायें प्रकाश में आई है जिनकी प्राथमिकी नहीं दर्ज की गयी है । चौकी प्रभारी आवास विकास कालोनी और बाराबंकी शहर कोतवाल दोनों लोग मेरे अपने घर हुई चोरी की घटना की प्राथमिकी दर्ज करने में हीला हवाली कर रहे है ।अपराधों पर नियंत्रण और अपराधियों पे नकेल कसने के स्थान पर बाराबंकी कोतवाली पुलिस अपराध छुपाने और अपराधियों को बचाने में जुटी हुई स्पष्टतः दिखाई दे रही है । वसूली अभियान को अपना पहला व अंतिम ध्येय बना चुकी बाराबंकी कोतवाली पुलिस की नाक के नीचे अनवरत घटित आपराधिक घटनाओं से यह साबित हो रहा है कि कोतवाली बाराबंकी के पुलिस कोतवाल/चौकी प्रभारी गैर जिम्मेदार व कर्त्तव्य निर्वाहन के प्रति लापरवाह है ।
बाराबंकी पुलिस के इस कदाचरण , मनमाने आचरण और अभियोग ना दर्ज कर अपराधियों को संरक्षण देने के मामले को अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मा अखिलेश यादव एवं पुलिस व गृह विभाग के आला अधिकारीयों के संज्ञान में सोमवार 12नवम्बर को इस मामले का शिकायती पत्र सौंप कर कराऊंगा और घटना की प्राथमिकी दर्ज करवाने के निवेदन के साथ साथ इन गैर जिम्मेदार पुलिस कर्मियों को उचित दंड दिए जाने का भी अनुरोध करूँगा ।
Thursday, November 8, 2012
दिवंगत ब्लैक लिस्टेड शराब व्यवसाई की प्रतिमा का मुलायम सिंह द्वारा अनावरण
दिवंगत ब्लैक लिस्टेड शराब व्यवसाई गुरु प्रसाद जयसवाल - पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका बाराबंकी की प्रतिमा अनावरण के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के आज आगमन के पहले ही बाराबंकी कोतवाली पुलिस का कहर बाराबंकी के नागरिको पर बरसा । तमाम रास्तो पर बैरिकैडिंग लगाकर नागरिको को अपने अपने घर में कैद में रहने को किया मजबूर , छाया चौराहे पर अपनी जीविका के लिए प्रति दिन जमा होकर मजदूरी तलाशने वाले मजदूरों को खदेड़ा गया । सड़क के किनारे खड़ेवाहनों के स्वामियों - चालको से प्रातः से ही अभद्र व्यवहार बाराबंकी पुलिस कर्मियों द्वारा मुलायम सिंह यादव की सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर किया गया है ।
बाराबंकी नगर पालिका में आयोजित दिवंगत ब्लैक लिस्टेड शराब व्यवसाई गुरु प्रसाद जयसवाल - पूर्व अध्यक्ष की प्रतिमा का अनावरण समारोह आयोजित करने वाले वयो वृद्ध पूर्व सांसद अनंत राम जयसवाल ने अभी हालिया संपन्न उत्तर प्रदेश विधान सभा के आम चुनावो में समाजवादी पार्टी के घोषित प्रत्याशियों का खुलकर व जम कर विरोध किया था और कांग्रेस के प्रत्याशियों की मदद करी थी लेकिन बाराबंकी की सभी सीटो पर समाजवादी पार्टी के ही प्रत्याशी जीते । प्रचंड बहुमत से अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी सरकार का गठन भी हुआ और चुनावो के दौरान समाजवादी पार्टी का खुलम खुल्ला विरोध करने वाले और मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत प्रहार करने वाले तमाम जनाधार विहीन लोगो के होश फाख्ता हो गए थे । अपने पुराने रिश्तों की दुहाई देकर समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से बधाई देने के लिए मिलने की मिन्नतों से मिली सफलता के पश्चात् मुलायम सिंह यादव पे अपना व्यक्तिगत प्रभाव व पकड़ दिखाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त कार्यक्रम वर्षो से अनावरण के लिए नगर पालिका परिसर में दिवंगत ब्लैक लिस्टेड शराब व्यवसाई गुरु प्रसाद जयसवाल - पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका बाराबंकी की प्रतिमा अनावरण का आयोजन पूर्व सांसद महोदय को समझ में आया । जबकि इस प्रतिमा का अनावरण बहुजन समाजपार्टी के शासन काल में ही एक संगठन के लोगो ने कर था ।
बाराबंकी समाजवादी धरा पर ब्लैक लिस्टेड शराब के कारोबारी की प्रतिमा अनावरण करके समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने महात्मा गाँधी के मध निषेध कार्यक्रम व शराब बंदी आन्दोलन की अवधारणा पर आघात पहुचाया है । शराब के कारोबारी को महिमा मंडित करके मुलायम सिंह यादव ने समाजवाद की नूतन अवधारणा का प्रतिपादन ही कर डाला । बकौल सपा मुखिया शराब के कारोबार से सरकार को दुसरे नंबर का राजस्व प्राप्त होता है इसलिए शराब व्यवसाई की प्रतिमा लगाई जा सकती है । दलित समाज के महापुरुषों की प्रतिमाओ पर लगातार हो हल्ला मचाने वाले और मूर्ति लगाने को जनता के धन की बरबादी करार देने वाले सपा नेतृत्व को आखिर हो क्या गया है यह मेरी समझ से परे है ।
आज के इस प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के रंजीत बहादुर श्रीवास्तव - नगर पालिका अध्यक्ष की विशिष्ट उपस्थिति और राष्ट्रीय स्वयं संघ के अजय सिंह के संचालन से भ्रम पैदा हो चुका है । बहरहाल शराब व्यवसाई पुत्र के शराब व्यवसाई दिवंगत पिता की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के चलते शराब के शौक़ीन पत्रकारों की पौ बारह रही , खूब दावतें कटी और विज्ञापन / नगदी के बहाने दीपावली का भी इन्तेजाम हो ही गया । बाराबंकी के ही गाँधी वादी समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा - अध्यक्ष गाँधी जयंती समारोह ट्रस्ट ने इस प्रतिमा अनावरण समारोह के आयोजन के औचित्य पर सवाल उठाये थे और मुलायम सिंह यादव से इस कार्यक्रम में न आने की अपील की थी । खैर मुलायम सिंह यादव आज बाराबंकी आये और चले भी गये लेकिन पार्टी के जिला कार्यकर्ताओं में एक निराशा भर के गये जिसका खामियाजा आगामी लोकसभा में भुगतना पड सकता है ।
बाराबंकी कोतवाली पुलिस का कहर
दिवंगत ब्लैक लिस्टेड शराब व्यवसाई गुरु प्रसाद जयसवाल - पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका बाराबंकी की प्रतिमा अनावरण के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के आज आगमन के पहले ही बाराबंकी कोतवाली पुलिस का कहर बाराबंकी के नागरिको पर बरसा । तमाम रास्तो पर बैरिकैडिंग लगाकर नागरिको को अपने अपने घर में कैद में रहने को किया मजबूर , छाया चौराहे पर अपनी जीविका के लिए प्रति दिन जमा होकर मजदूरी तलाशने वाले मजदूरों को खदेड़ा गया । सड़क के किनारे खड़ेवाहनों के स्वामियों - चालको से प्रातः से ही अभद्र व्यवहार बाराबंकी पुलिस कर्मियों द्वारा मुलायम सिंह यादव की सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर किया जा रहा है ।
Sunday, November 4, 2012
बाराबंकी शहर कोतवाली पुलिस का मनमाना - भ्रष्ट रवैया
बाराबंकी शहर कोतवाली पुलिस का मनमाना - भ्रष्ट रवैया बदस्तूर जारी है । कोतवाली अंतर्गत आवास विकास कालोनी चौकी इलाके में अपराधों को दर्ज न करने के सिलसिले का ताज़ा प्रमाण मेरे अपने निजी आवास में पिछले शनिवार - रविवार की रात हुई चोरी की प्राथमिकी आज तक दर्ज न किया जाना है । कोतवाली इलाके में अपराध हो ही नहीं रहे है ये साबित करने के लिए प्राथमिकी ही नहीं दर्ज करी जाती है । कोतवाली अंतर्गत आवास विकास कालोनी चौकी इलाके में तमाम चोरी की घटनायें प्रकाश में आई है जिनकी प्राथमिकी नहीं दर्ज की गयी है । चौकी प्रभारी आवास विकास कालोनी और बाराबंकी शहर कोतवाल दोनों लोग मेरे अपने घर हुई चोरी की घटना की प्राथमिकी दर्ज करने में हीला हवाली कर रहे है । कल इस घटना के सन्दर्भ में / बाराबंकी कोतवाली पुलिस के कदाचरण के संदर्भ में समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री राजेंद्र चौधरी - विधान परिषद सदस्य से मुलाकात कर के अवगत कराऊंगा । ---- अरविन्द विद्रोही
Friday, October 12, 2012
मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ़ पंडित सिंह का इस्तीफा
जनपद गोंडा के समाजवादी पार्टी के तमाम कार्यकर्ताओ से मैंने हालिया चर्चित घटना क्रम के सन्दर्भ में वार्ता की । किसी भी कार्यकर्ता ने सपा नेता पंडित सिंह - मंत्री उत्तर प्रदेश शासन को दोषी नहीं बताया । पंडित सिंह से व्यक्तिगत रंजिश रखने वाले कुछ प्रभावी लोगो ने भी इस घटना चक्र में पंडित सिंह की भूमिका को नाकारा और कहा कि अधिकारी अपनी मनमानी करते है और जब कोई उनपे अंकुश लगाने की कोशिश करता है तो इसी तरह उस व्यक्ति , नेता को अपराधी - दोषी करार करने का दुष्चक्र रचा जाता है । चिकित्सा अधिकारी द्वारा मनमानी पूर्ण कार्य की कलाई खुलने की आशंका से प्रभावी मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ़ पंडित सिंह की घेराबंदी का कार्य नौकर शाहों और पंडित सिंह के राजनितिक विरोधियो ने किया है -- यह मानना है स्थानीय मित्रो का । पंडित सिंह के इस्तीफे से साफ़ है कि नौकर शाही ने सपा सरकार को अपने दबाव में उसी तरह ले लिया है जिस तरह बसपा सरकार को ले लिया था । अधिकारी किसी के नहीं होते है , सपा के -नेताओ कार्यकर्ताओ में हताशा व्याप्त होगी अब और ज्यादा ।नौकर शाह चिकित्सा अधिकारी के भ्रस्टाचार को उजागर करने की जगह अपने पुराने समाजवादी की बलि नुकसान दायक ही होगी सपा के लिए
Thursday, October 11, 2012
लोकनायक जय प्रकाश नारायण का जन्म दिवस
लखनऊ के चिनहट विकास खंड के गाँव मुरलीपुर ( विधान सभा - बख्शी का तालाब ) में लोकनायक जय प्रकाश नारायण के जन्म दिवस पे किसान नेताओ ने चित्र पर पुष्प अर्पित करके उनके योगदान की चर्चा की । लोकनायक जय प्रकाश नारायण के जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित इस विचार गोष्ठी में अरविन्द विद्रोही , गंगा प्रसाद यादव , संतोष सिंह , चन्द्र शेखर वर्मा , पंकज श्रीवास्तव , कौसल किशोर वर्मा , राम कैलाश गौतम , धन पत रावत , उमेश वर्मा , राम कुमार , हनुमान , संजय यादव आदि ने अपने अपने विचार रखे । गोष्ठी में निर्णय लिया गया कि भारत के महापुरुषों के जीवन संघर्ष - विचारो के प्रचार प्रसार के लिए साहित्य का प्रकाशन और ग्रामीण इलाको में वितरण पुनः शुरू किया जाये । किसानो के साथ विचार विमर्श चौपाल लगाके किया जाये । ग्रामीण इलाको में शराब बंदी आन्दोलन शुरू हो । ग्रामीण युवाओ को रोजगार परक योजनाओ की जानकारी देने की और उनको सामाजिक जिम्मेदारी भावना से जोड़ने के लिए युवाओ को ग्रामीण चौपाल में बुलाने पर जोर गया ।
Tuesday, October 9, 2012
बहुजन समाज को सामाजिक चेतना से राजनीतिक चेतना तक ले जाने वाले नायक मान्यवर कांशीराम
अरविन्द विद्रोही .............
कांशीराम - भारत की राजनीति में एक अनूठा व्यक्तित्व | बालक कांशीराम का जन्म खवासपुर गाँव - जिला रोपड़ - पंजाब में एक रामदासिया हरिजन परिवार में हुआ था | गाँव में ही शिक्षा ग्रहण करने वाले बालक कांशीराम के दादा व चाचा फ़ौज में थे | कांशीराम ने विज्ञानं स्नातक की शिक्षा रोपड़ में ग्रहण की | बाल्य कल से लेकर शैक्षिक जीवन तक कांशीराम को सामाजिक भेदभाव व छुआ छूत का अनुभव नहीं था क्यूंकि आर्य समाज व सिख संप्रदाय के प्रभाव के चलते पंजाब में सामाजिक बुराई समाप्त प्राय : थी |
आखिर युवक कांशीराम से - एक शिक्षित नौकरी शुदा कांशीराम से सामाजिक राजनीतिक चेतना का नायक मान्यवर कांशीराम तक का सफ़र कैसे शुरू हुआ ? यह एक दिलचस्प और प्रेरक प्रसंग है | वर्तमान परिस्थितियो में भी मानों इतिहास खुद को दोहराने की प्रक्रिया में लगा हुआ है | आभास होता है कि काल की गति स्वयं को दोहारने वाली है | कांशीराम १९५७ में सर्वे ऑफ़ इंडिया की परीक्षा में उत्तीर्ण हुये | विभाग में कार्यभार ग्रहण करने के पूर्व भरवाए जाने वाले बंद को भरने से इंकार करके कांशीराम ने वो नौकरी ना करने का फैसला किया | तत्पश्चात आपने पूना में एक्स प्लोसिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेट्री ( ई आर डी एल ) में अनुसन्धान सहायक के पद पे कार्य करना प्रारंभ किया | अनुसन्धान सहायक के पद पे कार्य रत कांशीराम की रूचि सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों की तरफ होने लगी थी | कांशीराम की इसी नौकरी के दौरान ई आर डी एल में एक ऐसी घटना घटी जिसने शिक्षित कांशीराम को जो अगर यह घटना ना घटी होती तो शायद गुमनामी में ही गम रह जाता , को करोडो - करोड़ लोगो का मान्यवर कांशीराम बनाने में अहम् भूमिका अदा की | दरअसल इसी समय बुद्ध जयंती व अम्बेडकर जयंती के अवकाश को निरस्त करने का निर्णय ई आर डी एल ने लिया और जब उसका विरोध वही के एक कर्मचारी ने किया तो उसे नौकरी से निलंबित कर दिया गया | कांशीराम से ना रहा गया , अपने मित्रो-सहकर्मियों के तमाम मना करने के बावजूद कांशीराम ने अन्याय के खिलाफ प्रतिकार का संकल्प लेते हुये उस निलंबित कर्मचारी की मदद कारी तथा मा ० न्यायालय में इसके विरोध में वाद दायर किया | मा० न्यायालय ने न्याय किया तथा निलंबित कर्मचारी के निलंबन को रद्द करने के साथ साथ बुद्ध व अम्बेडकर जयंती दोनों के अवकाश को बहाल किया | आज उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार ने मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि पर घोषित अवकाश को रद्द करते हुये पुनः वही परिस्थितिया - हालात पैदा कर दिया है जो किसी नए कांशीराम के आगे आने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है |
सामाजिक - राजनीतिक दिलचस्पी लेना प्रारंभ कर चुके कांशीराम ने डॉ भीमराव अम्बेडकर को उनके विचारो-पुस्तकों के अध्धयन से आत्मसात करना प्रारंभ कर दिया | इसी अध्धयन काल में कांशीराम ने नौकरी का परित्याग किया और संकल्प लिया --- "मैं कभी शादी नहीं करूँगा और ना ही किसी प्रकार की कोई व्यक्तिगत संपत्ति अर्जित करूँगा |" सामाजिक बुराइयों की जड़ जातिवाद है और इसको समाप्त करना जरुरी है , यह बात समाजवादी चिन्तक युगद्रष्टा डॉ राममनोहर लोहिया हमेशा दोहराते रहते थे | डॉ लोहिया ने कार्यक्रम भी दिया था , जाती तोड़ो - समाज जोड़ो | इसी जाती के विष को भांपते हुये , परखते हुये कांशीराम ने कहा था कि , -- " मुझे लगा कि जातिवाद सामाजिक व्यवस्था ही सारी बुराइयों की जड़ है | जाती विहीन समाज की स्थापना के बगैर इस तरह की बुराइयाँ समाप्त नहीं हो सकती है | मैं इस बुराई को ख़त्म करने का काम करूँगा इसीलिए मैंने १९६४ में अपनी नौकरी त्याग दी थी | "
सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में पूरी तरह तल्लीन कांशीराम ने महाराष्ट्र रिपब्लिक पार्टी तथा डॉ अम्बेडकर द्वारा स्थापित पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी के लिए काम शुरू किया | लगभग ४ वर्षो तक इन संगठनो में कार्य करने के पश्चात् कांशीराम ने अनुभव किया कि इन संगठनो में आन्तरिक मतभेद बहुत है तथा संगठन - समाज का मूल कम कर पाना इसमें संभव नहीं है | कांशीराम ने नया संगठन बनाने और शोषित समाज को एक साथ लाने कि दिशा में सोचा और ६ दिसम्बर , १९७३ को पुन व दिल्ली के चन्द सरकारी कर्मचारियों को साथ लेकर बामसेफ का गठन किया | बामसेफ को अखिल भारतीय स्वरुप देने में कांशीराम को ५ वर्षो का समय लगा और ६ दिसम्बर , १९७८ को दिल्ली में ही बामसेफ की औपचारिक घोषणा की | बामसेफ को सरकारी कर्मचारियों की संस्था के रूप में खड़ा करके एक मजबूत सामाजिक आधार के साथ साथ आर्थिक मजबूती का कार्य कांशीराम ने किया | कांशीराम के ही अनुसार ,- " जिस समाज की राजनीतिक जड़े मजबूत नहीं होती , उस समाज की राजनीति कभी कामयाब नहीं होती | मैंने बामसेफ बना कर दलित-शोषित समाज का राजनीतिक आधार मजबूत किया | "
सक्रिय राजनीति में कदम रख चुके कांशीराम की नज़र सर्वोच्च सत्ता पे थी , बगैर किसी लाग लपेट के कांशीराम का कहना था ,- " राजनीति सत्ता के लिए होती है और सत्ता बिना संघर्ष के नहीं मिलती | " असमान सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष को धार देने के लिए , जाती विहीन समाज की सथापना के लिए , समाज में बराबरी कायम करने के लिए कांशीराम ने १९८१ में दलित शोषित समाज संघर्ष समिति ( डी एस फोर ) का गठन किया | डी एस फोर के बैनर तले कांशीराम ने ' समता और सम्मान के लिए संघर्ष ' आन्दोलन की शुरुआत ६ दिसम्बर ,१९८३ को प्रारंभ किया | देश के पाँच कोनो कन्याकुमारी , कोहिमा , कारगिल , पूरी तथा पोरबंदर से कांशीराम ने दो-दो दिन के अंतराल पर दिल्ली के लिए साइकिल यात्रा शुरू की | सौ दिन में दिल्ली पहुची इस यात्रा में डी एस फोर के ३ लाख कार्यकर्ताओ ने साढ़े सात हज़ार सभा करी , १० करोड़ से ज्यादा लोगो तक इस आन्दोलन के माध्यम से समता और सम्मान की बात पहुचाई | कांशीराम का मानना था कि , -- " जब हम इस गैर बराबरी वाले समाज को ध्वस्त कर एक नए समाज की स्थापना के लिए संघर्ष की बात करते है तो हमें विकल्प भी प्रस्तुत करना होगा और यह विकल्प राजनीतिक सत्ता को हासिल किये बगैर संभव नहीं है | " और कांशीराम ने --- करोडो- करोड़ लोगो में सामाजिक राजनीतिक चेतना जगाने वाले बहुजन समाज के नायक कांशीराम ने अपने जीते जी राजनीतिक सत्ता- ताकत हासिल करके दिखाई भी | भारतीय लोकतंत्र में कांशीराम द्वारा गठित राजनीतिक दल बहुजन समाज पार्टी ने जोरदार आगाज़ किया तथा सभी प्रमुख राजनीतिक दलों - नेताओ को अपने चातुर्य व रणनीति के तहत बार - बार घुटने टेकने पर विवश किया | कांशीराम अपने समाज को जागृत करते हुये कहते थे ,--" शिक्षित करो , संघर्ष करो तथा संगठित करो | " कांशीराम का स्पष्ट मानना था कि सामाजिक कार्यवाही बिना उग्रता के होनी चाहिए |
मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि पे अवकाश को रद्द किये जाने पे प्रतिक्रिया देते हुये साथी पत्रकार धनञ्जय सिंह लिखते है कि -- यू पी में कांशीराम पुण्यतिथि पर अवकाश रद्द होना ठीक नहीं | यही एक प्रदेश है जहा उनके प्रयोग धरातल पर उतरे | छुट्टी के बहाने ही सही लोग उन्हें याद करते | आप उन्हें नकार नहीं सकते | नोयडा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पाण्डेय का मानना है कि सीमित संसाधनों में समाज के सबसे निचले वर्ग का संकलन कर उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के सत्ता शीर्ष पर बैठने वाले मा कांशीराम जी वन्दनिये है | भले ही उनके मिशन को आगे बढ़ाने वाले कार्यकर्ताओ का अभाव हो गया है किन्तु तब भी अभी तक उनके द्वारा किये गये प्रयासों का अपेक्षित परिणाम ही आया है |
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