Tuesday, June 14, 2011

दुनियॉं

घिर गये गम के बादळ
रूठ गयी हमसे खुशियॉं,
जाने हमसे क्या खता हुई
उजइ गयी हमारी दुनियॉं।
ऐसा क्या जळजळा उठा
घिर आयी काळी घटा (जीवन मे),
अपनो ने मुह मोइ ळिया
सपनो मे आना छोइ दिया।
टूट गये सारे रिश्ते
बढ गयी ये दूरियॉं,
न जाने ऐसी क्या वजह हुई
सुनसान हुई हमारी गळियॉ।
दिल दर्द से तइप उठा
जीवन अंधेरो मे घटा (बीता),
तकळीफो ने घेर ळिया
उम्मीदो ने दामन छोइ दिया।
घिर गये गम के बादळ
रूठ गयी हमसे खुशियॉं,
जाने हमसे क्या खता हुई
उजइ गयी हमारी दुनियॉं। by Vinay mohan Joshi

भारत के हालत की जिम्मेदार सरकारे और जनविरोधी सोच


अरविन्द विद्रोही आज के हालत का जिम्मेदार कौन है? अगर भारत में कोई भूख से मरता है तो क्या सरकार जिम्मेदार नहीं है? किसानों की भूमि,मजदूर की मजदूरी हड़पने वाला तंत्र कब तक शोषण की बुनियाद पे टिका रहेगा? अफ़सोस तो यह भी होता है कि यहाँ अपने वतन में बहुत से लोगो के पास पहनने को कपडे नहीं है ,खाने को रोटी नहीं है,और दूसरी तरफ कुछ पूंजीवादी शोषक तंत्र के वाहक अपना तन दिखाने वाले कपडे महंगे दामो में खरीद कर प्रदर्शन करते है,पालतू कुत्तो को बिस्कुट खिलाते है|वाह रे भारत को विकास के पथ पर ६३ वर्षो में ले जाने वाली सरकार............................. अरे माँ भारती आप भी व्यथित हो गयी? अपने एक सपूत के कष्टों को देख कर ,अरे माँ तेरी कोख तो सदा सदा से वीरो और बलिदानियो को जन्म देती रही है| क्या आम जनों पर अत्याचार से तेरा भी ह्रदय द्रवित हो गया , कलेजा फटा जा रहा है माँ तेरा भी ? हजारो वर्षो की गुलामी के पश्चात् आजादी के इन ६४ वर्षो में ही अपनी ही संतानों के द्वारा अपने ही धरा के बंधु-बांधवो पर ढाए गये जुल्म व किये गये शोषण का लहराता पचम तेरे मन को अशांत कर गया है क्या? माँ भारती निवेदन है तेरे इस पुत्र का मन को शांत कर लीजिये| आपका अशांत मन इस धरा पर बड़ा ही प्रलयंकारी होगा| एक बात कहू माँ, जरा अपनी जुल्मी संतानों के प्रति प्रेम व अनुराग का त्याग मात्र कर दो,अब शोषण - अत्याचार- अनाचार के शिकार अपनी मेहनत संतानों की सुधि लो | तू वीरो की जननी, श्रेष्ट पथ-प्रदर्शको की जननी बस अपने व्यथित मन को सहेज कर अपनी भटकी भ्रष्ट संतानों को चेता तो दो| अब अपनी मेहनत-कश संतानों में हौसिला भर दो माँ भारती| हजारो-हज़ार साल की गुलामी के कारण अभी तेरी संताने गुलामी की,दासता की दंश से अभी भी उभर नहीं पाई है| भारत भूमि के किसान-मजदूर-नौजवान में जुल्म-शोषण-अत्याचार के खिलाफ लड़ने की नव शक्ति का संचार कर, अपने स्वाभिमान के लिए,अपने अधिकार के लिए मर मिटने की भावना का नूतन प्रवाह कर दो| ब्रितानिया हुकूमत के दौरान जुल्म का हर संभव तरीके से प्रतिकार कर तेरी बेडीयां काटने वाली संतानों की आत्मा भी आज द्रवित होगी माते | महात्मा गाँधी के नश्वर शरीर से आत्मा को हरने का काम तो सिर्फ एक बार नाथू-राम गोडसे ने किया लेकिन गाँधी के विचारो की निर्ममता पूर्वक प्रति-पल हत्या करने का काम करने का काम आजाद भारत की भ्रस्टाचार हितैषी जनविरोधी सरकार कर रही है| महात्मा गाँधी ने चरखे की अवधारणा को मूर्त रूप देते समय यह कदापि नहीं सोचा होगा कि सादगी व आम जन के द्वारा,आम जन के लिए सिर्फ वस्त्र नहीं विचार का प्रतीक खादी भ्रष्ट नेताओ का,ऐश्वर्या-भोग-विलासता -समृद्धि का लिबास बन जायेगा| आज खादी आम जन से दूर हो कर भ्रष्ट तंत्र के वाहको का गाँधी कवच बन चुका है| खादी का व्यापार गाँधी के चरघे कि अवधारणा को समाप्त कर चुका है| महात्मा गाँधी के अनन्य अनुयायी समाजवादी नेता-विचारक डॉ राम मनोहर लोहिया ने इस परिस्थिति को भांप कर ही चरखे की जगह किसान के फावड़े कि प्राथमिकता कि बात करते थे| चरघे की जगह फावड़ा को रखने की बात करने वाले डॉ लोहिया का कहना व मानना था कि चरखा भारत के आम जन के लिए उतना प्रासंगिक नहीं है जितना कि फावड़ा | खेती में ,नहर बनाने में, सिचाई के काम में, हदबंदी में,भूमि खोदने या समतल करने में,इमारतो को बनाने में,सड़क बनाने में, खेती- किसानी - मजदूरी से लेकर विकास के हर काम में फावड़ा उपयोगी है,यह भारत के हर व्यक्ति के जीवन में काम आने वाला औजार है| महात्मा गाँधी के ग्राम्य विकास कि बलि चढाने वाली सरकार किसानों की बदहाली,मजदूरों की दयनीय दशा और युवाओ की बेकारी की जिम्मेदार नहीं है तो और कौन है?
कृषि भूमि के अधिग्रहण ने अन्न-दाता किसान और भारत के ग्राम्य व्यवस्था के चिंतको की नीद हराम कर दी है|विदेशो से काले धन की वापसी की मुहीम के साथ साथ कृषि भूमि का अधिग्रहण सरीखे तमाम जनविरोधी कानों समाप्त किये जाने से ही देश-समाज विकास के मार्ग पर चल सकेगा| जगह जगह आम जनों पर पुलिसिया गुंडागर्दी का जो नज़ारा देखने को मिल रहा है, बाबा रामदेव व सत्याग्रहियो पर निर्मम अत्याचार देखने को मिला , वो सरकारों का जुल्म ही है| भारत की कांग्रेस सरकार तिलक-गाँधी के स्वराज्य के मूल मंत्र व भाव पर यह जो लगातार कुठाराघात करती चली आ रही है , वो भारत भूमि के बलिदानियो की आत्मा को लहूलुहान कर रही है | भारत एक लोकतान्त्रिक देश है| लोकतंत्र में सत्ताधारी दल को गफलत में नहीं पड़ना चाहिए| यह भी सत्य है कि चुनावो में सत्ता के बेजा इस्तेमाल व धन के अँधाधुंध वितरण से मतदाताओ को लोभ-लालच में डाल कर परिणाम अपने पक्ष में करने में इनको महारत हासिल है परन्तु आज पुनः एक बार भारत की तरुनाई,भारत का किसान,मजदूर, आम आदमी ,घर का बज़ट बेतहाशा बढती महंगाई से परेशान महिला शक्ति के दिलो-दिमाग में सरकार के द्वारा दी जा रही चोट से मन में आग लग चुकी है| लोगो के दिलो में लगी यह आग जुल्मी सरकार को ख़त्म कर के एक जनहित की सरकार को कायम करने की सोच में बदल चुकी है |

Friday, June 10, 2011

जुल्म -अन्याय की खिलाफत मानव का पुनीत कर्त्तव्य


अरविन्द विद्रोही लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से निर्वाचित सरकार जब अपने देश-समाज के प्रति कर्त्तव्य पथ से विमुख होती है तब सत्याग्रह ,सविनय अवज्ञा , बहिष्कार, जन चेतना, और आम चुनावो में जुल्मी सरकारों की पराजय सुनिश्चित करने के लिए अपना जीवन लगाना यह सजग नागरिको व देश के नागरिक प्रहरियो का पुनीत कर्त्तव्य है| कुछ लोग भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ लड़ाई पे,उसको लड़ने वालो पे, लड़ाई के तरीको पे सवालिया निशान लगाते है,और इस प्रकार के सवाल हर युग में जुल्मी सल्तनत के खिलाफ लड़ने वालो के ऊपर लगाये जाते रहे है| जुल्म की खिलाफत करने की जगह कायरो की तरह सिसकने वाले नपुन्सको तुम क्या जानो जुल्म की खिलाफत करने वालो के इरादे| क्रांति की राह पे चलने वाले अपने भविष्य की चिंता नहीं करते वो तो सिर्फ अपनी जन्म-भूमि और आम जन के लिए अपनी जान दे भी सकते है और जुल्मी की जान ले भी सकते है|अराजकता की बात करते हो तुम कायरो? यह जो भ्रष्ट तंत्र के वाहको व निरंकुश सरकारों का गठबंधन व्यापक अराजकता फैलाये है ये तुम्हे नहीं दिखाई देती? जनता की मेहनत की कमाई लूटने वालो की खिलाफत करने से अराजकता फैलती है तो फैलनी ही चाहिए| कब तक हमको भ्रष्ट तंत्र की चक्की में पीसोगे? तोडना ही होगा यह भ्रष्ट तंत्र,हर संभव तरीके से,और जब यह बात किसी मतवाले के जेहन में समां जाती है तो जुल्मी शासक वर्ग उसको पागल और देश में अराजकता फ़ैलाने वाला साबित करने में जुट जाता है| लेकिन क्या जुल्मी हुकूमत आज तक इन मतवालों के कदम रोक सकी है जो अब रोक लेगी? ब्रितानिया हुकूमत की गुलामी से मुक्ति के मतवाले बलिदानियो की,क्रांति पथ के सेनानियो की,महात्मा गाँधी की सारी मेहनत पर पानी फेरने का दुष्कर्म आजाद भारत में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से चयनित सरकार कर रही है| आजादी मिलने के तुरंत बाद महात्मा गाँधी ने सत्ता के उच्च पदों पे बैठे लोगो के भ्रस्टाचार के सम्बन्ध में चेतावनी दी थी| डॉ राम मनोहर लोहिया और मधु लिमये संसद में भी भ्रस्टाचार के मामले उठाते रहते थे| जयप्रकाश का आन्दोलन आज भी नजीर है| जवाहर लाल नेहरु के प्रधान मंत्रित्व काल में सत्ता की कोख में पल्लवित-पोषित भ्रस्टाचार भारत में आज आम नागरिको की नसों में रक्त बन कर प्रवाहित हो रहा है | भ्रस्टाचार की खिलाफत करने वालो को सत्ता मद में चूर,भ्रस्टाचार में सरोबौर , साम्राज्य वादी निरंकुश सरकारे पुलिसिया दमन की बदोलत कुचलने की कुचेष्टा में अपना सर्वस्व लगा रही है | पूंजीवाद का घिनौना तांडव भारत के आम नागरिक के प्रति दिन के जीवन का उपहास उडाता है और आम नागरिक मन मसोस कर अपनी किस्मत का रोना रो रहा है| कुछ लोग कहते है कि भारत विकास के पथ पर अग्रसर है,अरे जरा वातानुकूलित गाडियो से निकल के किसी सवारी गाड़ी की यात्रा तो कर के देखो,माल में राशन खरीदने वालो कभी राशन की दुकान से राशन लेने का कष्ट तो उठाओ,कभी सरकारी अस्पताल में पर्ची कटा के इलाज तो करवाओ,अपने बच्चो को सरकारी विद्यालय में पढ़ा के काबिल बनाओ,,क्या हिम्मत जुटा पाओगे भारत की आम जनता किसान और मजदूर की तरह जिंदगी जीने की कल्पना मात्र करने का? नहीं ना,अब अपने मेहनत का दंभ ना भरो ना ही काबिलियत का दावा करो| यह जो मेहनत कसो की मेहनत लूट के उनके अरमानो की चिता पे अपनी अट्टालिकाएं बना ली है तुम पूंजीपतियो ने, यह तुम्हारे द्वारा किये गये शोषण और बेईमानी की मिसाल है| सरकारों की अराजकता ,सरकारी कर्मिओ का भ्रस्टाचार और मनमाना-पन देखना हो तो कभी किसी लेखपाल से खतौनी बनवा के देखो,किसी थाने में अपने साथ हुई किसी घटना की रिपोर्ट दर्ज करा के देखो| मत ले जाना किसी प्रभावी व्यक्ति को , जरा जा के देखो एक आम नागरिक के रूप में| शोषण का वो नज़रिया देखोगे कि अगर आत्मा होगी तो लहू लुहान हो जाएगी और क्या कहू ? यहाँ तो अब वो व्यवस्था है कि जो सरकारी तंत्र के लूट की खिलाफत करे उसी पर सरकारी काम में बाधा का आपराधिक कृत्य अभियोग दर्ज हो जाता है,सोचो क्या आम जनता को लूटना अब मान्यता प्राप्त सरकारी काम हो गया है ? भ्रष्ट राजनेता-अपराधी-भ्रष्ट नौकरशाहों का काकस भारत के आम जन मानस के अधिकारों को,उनके स्वाभिमान को अपनी सत्ता की ताकत व अवैध अकूत सम्पदा के दम पे रौंदने का काम बदस्तूर जारी रखे है | इन भ्रष्ट तंत्र के वाहको व जनता का शोषण करने वालो के खिलाफ जन चेतना का काम करने वालो पर, आत्म सम्मान-स्वाभिमान का भाव जगाने , आत्म-रक्षा का बल पैदा करने वालो पर कांग्रेस की केंद्र सरकार का अत्याचार भारत के सुलगते मन को ज्वालामुखी बनाने का काम कर रहा है| और यह पूंजीवादी व्यवस्था की पोषक,निरंकुश भ्रष्टाचारियो की हितैषी कांग्रेस सरकार लोकतंत्र के नाम पर एक परिवार के इशारे पर नाचने वाली कठपुतली सरकार भ्रष्टाचारियो पर कार्यवाही की बजाय सत्याग्रहियो को लठिया कर जनतंत्र में जन की आवाज को दबाकर आखिर लोकतंत्र को किस खाई में धकेलना चाहती है ? आज हमारे देश की जो हालत है,किसान अपनी कृषि भूमि को बचाने के लिए जान दे रहा है, सरकारी नौकरियो में पैसे का चलन ,हर जगह लोलुपता ,यह जो सरकारी अराजकता है इसका शिकार आम नागरिक बदस्तूर हो रहा है,अब सरकारी तंत्र की मनमानी और अराजकता की खिलाफत करने से अगर अराजकता फैलने की बात होती है , वो भी सरकारी तंत्र द्वारा तो यह तो वो कहेंगे ही| शायद लोग भूल रहे है की जनता के लिए कानून तोड़ कर ही गाँधी महात्मा बना,भगत सिंह सरीखे युवा क्रांति की मिसाल बने, रासबिहारी बोष ने आजाद हिंद फौज बनाई और सुभाष बाबु ने उसकी कमान संभाली| आजाद भारत में जनता के लिए डॉ लोहिया धारा १४४ तोड़ने के कारण कई बार जेल गये | जन विरोधी काले कानून समाप्त होने चाहिए |भ्रष्टाचार ख़त्म होना चाहिए | क्या दिक्कत है? दिक्कत है कि कोई अपने खिलाफ कार्यवाही कैसे कर सकता है? आम नागरिको को उनके अधिकारों और देश - समाज के प्रति कर्त्तव्य के प्रति जागृत करना,अधिकार प्राप्ति के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देना भारत के नव निर्माण व समता मूलक समाजवादी समाज की स्थापना के लिए किया जाने वाला देश भक्ति पूर्ण कृत्य है| यही शाश्वत सत्य है कि मानव जाति को किसी पर भी अत्याचार करने का अधिकार नहीं है और जो भी व्यक्ति, शासक या शासन सत्ता अत्याचार करती है उसका प्रतिकार करना वीरोचित-न्यायोचित धर्म है|

Wednesday, June 8, 2011

निरंकुश सरकारों के खिलाफ सत्याग्रह व संघर्ष


अरविन्द विद्रोही अब वो समय आ गया है की युवा वर्ग को अपना ध्यान आम जनता के बीच सरकार की निरंकुशता के खिलाफ जागृति पैदा करने में देना होगा| बेईमानो की हितैषी, जनविरोधी, निरंकुश सरकार और जनरल डायर के माफिक आचरण कर रहे लोगो को सबक सिखाने के लिए हमें ही आगे आना होगा| अभी ४ जून की रात को दिल्ली के राम लीला मैदान में मानवता को शर्म सार करने वाला, लोकतंत्र पे कुठारा घात करने सरीखा दुष्कर्म भारत की राजनीति को गहरे अंधे खड्ड में धकेलने वाला बर्बर कृत्य तथा-कथित ईमानदार मनमोहन सिंह की अगुआई व सोनिया गाँधी की रहनुमाई में चल रही निरंकुश-गैर जिम्मेदार-जन विरोधी सरकार की गुलाम पुलिस बल ने अंजाम दिया है| राम लीला मैदान में भारत की सत्तासीन कांग्रेस सरकार ने दरिन्दिगी में मानो गुलाम भारत की शासक रही ब्रितानिया हुकूमत को परस्त करने का मन बना लिया था| लोकतंत्र को भद्दा मजाक बना चुकी कांग्रेस को शायद विस्मृत हो चुका है कि ब्रितानिया हुकूमत ने जांलियावाला बाग में १३ अप्रैल ,१९१९ को जो दरिन्दिगी दिखाई थी,उसका प्रतिकार क्रांति के मतवालों ने लिया था| जालिया वाला बाग़ की अमानवीय घटना के बाद भारतीय युवा वर्ग आक्रोशित हुआ था | भगत सिंह ,उधम सिंह सरीखे तमाम किशोर वहा की माटी माथे पे लगा के बोतलों में भर के, ब्रितानिया हुकूमत कि दबंगई का प्रतिकार लेने की सौगंध खा के घर लौटे थे | १२ वर्षीय उधम सिंह इस अमानविए घटना के चश्मदीद गवाह थे | हृदय में प्रतिशोध कि ज्वाला लिए उधम सिंह उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गये | आखिरकार १३ मार्च, १९४० को रक्त पिपासु गवर्नर मुकल ओडायर जिसने जांलियावाला बाग में बर्बर कार्यवाही का आदेश जनरल डायेर को दिया था ,को एक के बाद एक ५ गोलिओं से भून कर पंजाब केसरी लाला लाजपत राय कि निर्मम व दुर्भाग्य पुण्य हत्या का बदला ले लिया था | १२ जून ,१९४० को वीर उधम सिंह को ब्रितानिया हुकूमत फांसी पर लटका दिया था | भारत में ऐसे रन-बांकुरो कि कमी नहीं है हो अपने नेता के अपमान व हत्या का बदला अपनी जमीन पर ही नहीं दुश्मन के घर में घुस के भी लेते है | इसके पूर्व क्रान्तिकारियो के बौधिक नेता के रूप में स्थापित हो चुके भगत सिंह,राजगुरु व सुखदेव को साइमन कमीशन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस की निर्ममता के शिकार लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए हिंदुस्तान रिपब्लिक सोशलिस्ट एसोशिएसन ने चुना था | १७ दिसम्बर,१९२८ को पुलिस अधिकारी सांडर्स व एक हेड कांस्टेबिल को ब्रितानिया हुकूमत की बर्बरता के बदले मृत्युदंड माँ भारती के इन सपूतो ने दे दिया| आजाद भारत में सो रहे सत्यग्राहियो पर बर्बरता पूर्वक लाधी बरसाने,आंसू गैस छोड़ने वाले पुलिस बल को अपना पौरुष सीमा पर व सीमा पार से संचालित हो रहे भारत विरोधी आतंक वाद के खात्मे में दिखना चाहिए था | आतंकवादियो की दामाद की तरह खातिरदारी करने वाली कांग्रेस की सरकार भारत के आम नागरिक को लतियाने व धमकियाने में अपनी ताकत लगा रही है | आखिर कांग्रेस सरकार चाहती क्या है? क्या काला धन वापस भारत लाने की बात करना ,सत्याग्रह करना बंद हो जाना चाहिए? याद आ जाना चाहिए इन जन विरोधी लोगो को कि महात्मा गाँधी के १९२१ के असहयोग सत्याग्रह आन्दोलन में मात्र १४ वर्ष के चन्द्र शेखर आजाद ने अपने कोमल शरीर पे १५ कोड़े खाए थे, महत्मा गाँधी के सत्याग्रह का यह सिपाही जब ब्रितानिया हुकूमत के खिलाफ सत्य के मार्ग पे चलता हुआ क्रांति के पथ का राही बना तो ब्रितानिया हुकूमत के बड़े बड़े सुरमा अपने अपने जान को बचने की फ़िराक में रहते थ | सत्याग्रहियो पे सरकारी जुल्म ने हमेशा क्रांति के मतवालों को जन्म दिया है | जुल्म का प्रतिकार लेने के लिए भारत के युवा वर्ग्य ने अपनी जान की बाज़ी हर युग में लगायी है और जुल्मी को दंड दिया है | उत्तर प्रदेश की माया सरकार की पुलिस निर्ममता का विरोध करने वाले राहुल गाँधी और उनके चाटुकारों को दिल्ली के राम लीला मैदान में अपनी सरकार के जुल्म नहीं दिखाई दे रहे है क्या? आतंकवादियो को मनपसंद पकवान व भारत की सत्याग्रही जनता को लाठी खाने को देने वाली निक्कमी सरकार के जिम्मेदारो ने बेशर्मी का विश्व रिकॉर्ड बना डाला है | सरकार के जुल्म से आज भारत की आम जनता का मन सिसक रहा है | आम आदमी के कलेजे में आग लग चुकी है | मंहगाई,बेकारी,कुशिक्षा ,कृषि भूमि का जबरन व मनमाने अधिग्रहण,जन सुविधाओ-जन अधिकारों की बदहाली की मार झेल रहे भारत के आम नागरिक सरकार की इस निर्मम कृत्य को देखकर स्तब्ध है| महात्मा गाँधी को अपना आदर्श मानने का दावा करने वाली सरकार के द्वारा महत्मा गाँधी के ही सत्याग्रह के राही स्वामी रामदेव और जन समुदाय के साथ किया गया कुकृत्य मन को आंदोलित कर चुका है | क्या पता आजाद भारत में जुल्मी सरकार के आतंक व जुल्म की मूक गवाह राम लीला मैदान की माटी भी किशोरों ने अपने माथे पे लगा के जुल्म के प्रतिकार की सौगंध उठा ली हो | सरकार के जुल्म से ही क्रांति के सेनानी जन्म लेते है | जब सरकारे अपनी ताकत का प्रयोग अपने ही सत्याग्रही नागरिको पे करेंगी तो निश्चित ही माँ भारती खुद अपने सपूतो को जुल्म का प्रतिकार करने हेतु प्रेरित करेंगी | आज माँ भारती की पुकार को सुनने और उसको पूरा करने का समय आ गया है| सरकारों के इस जनविरोधी जुल्मी दौर में समाजवादी चिन्तक व विचारक, महात्मा गाँधी के अनुयायी डॉ राम मनोहर लोहिया की बात याद आ जाती है| कांग्रेस को आजाद भारत में व्याप्त बुराई,भ्रस्टाचार का जिम्मेदार मानने वाले डॉ लोहिया अन्याय के खिलाफ संघर्ष को समाजवादियो का कर्त्तव्य मानते थे| जायज़ मांगो को लेकर सत्याग्रह पर बैठे स्वामी राम देव और अन्य सत्याग्रहियो पर अत्याचार का विरोध सभी समाजवादियो को करना ही चाहिए| सरकारों की निरंकुशता की खिलाफत करके समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने एक अच्छा काम किया है | डॉ राम मनोहर लोहिया युग दृष्टा थे | डॉ लोहिया की गैर कांग्रेस वाद की अवधारणा पर अमल करने का समय लोकतंत्र व समाजवाद में विश्वाश रखने वाले सभी राजनितिक व्यक्ति व संगठनो के सम्मुख आ गया है | देश में सत्ता पे काबिज नाकारा-निरंकुश सरकारों को उखाड़ फैंकने और जन अधिकारों की बहाली की सोच रखने वालो को अब व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई में अपना योगदान खुद ही सुनिश्चित करना चाहिए | समाजवादी नेता डॉ राम मनोहर लोहिया पूरी जिंदगी शोषण ,अत्याचार,अन्याय,जुल्म के खिलाफ लड़े और मज़लूमो की आवाज बने | आज सरकारों के निरंकुशता के खिलाफ सभी समाजवादियो की , डॉ लोहिया को मानने वालो की आवाज उठनी भी चाहिए और निरंकुश हो चुकी सरकारों के खिलाफ सड़क से सांसद तक विरोध-संघर्ष भी होना चाहिए|

Saturday, June 4, 2011

समाजवादी पार्टी -असंतुष्ट -कार्यकर्ता और अरविन्द सिंह गोप


अरविन्द विद्रोही तमाम राजनितिक विषमताओं और झंझावातों के बावजूद स्वर्गीय रामसेवक यादव की जन्म व कर्म स्थली बाराबंकी में समाजवादी आन्दोलन का एक बार पुनः परचम लहराते हुए समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव अरविन्द सिंह गोप- विधायक व पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश शासन ने अपनी सांगठनिक छमता व मिलनसारिता के बदौलत समाजवादी पार्टी नेतृत्व द्वारा दिये गये दायित्व का बखूबी निर्वाहन करते हुए अपनी उपयोगिता व छमता दोनों सिद्ध कर दी है | ज्ञात हो की समाजवादी पार्टी के नेतृत्व ने २ जून को पुरे प्रदेश में जनपद स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन के आयोजन का निर्देश दिया था| बाराबंकी जनपद में नेतृत्व द्वारा आगामी विधान सभा २०१२ के आम चुनाव के लिए घोषित पार्टी प्रत्याशियो को लेकर समाजवादी पार्टी के राम सागर रावत-पूर्व सांसद,छोटे लाल यादव-पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री,रामवीर सिंह,अनंत राम जयसवाल-पूर्व सांसद,कुसुम लता रावत,सिद्धीक पहेलवान,अरविन्द यादव -पूर्व विधान परिषद् सदस्य आदि तमाम नेता आक्रोशित व असंतुष्ट हैं| इन समाजवादी नेताओ ने विगत २५ मई को जनपद बाराबंकी मुख्यालय के कमला नेहरु पार्क के सामने सामाजिक एकता सम्मेलन का आयोजन किया था | इस सम्मेलन में भारी तादाद में कार्यकर्ता जुटे थे| इसी सम्मेलन में प्रस्ताव पास कर के समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से मांग की गयी थी कि बाराबंकी में घोषित प्रत्याशी सूची को निरस्त किया जाये| इस अवसर पे उपस्थित रहे वयोवृद्ध समाजवादी नेता अनंत राम जयसवाल ने कहा था कि विधान सभा कमेटी व स्थानीय कार्यकर्ताओं कि राय पर समाजवादी पार्टी के टिकेट वितरित होते थे और अभी भी होने चाहिए| निश्चित रूप से यह ध्यान में और अमल में लाने वाली बात है| और २५ मई से सिर्फ ७ दिन के अन्तराल पे २ जून को आयोजित समाजवादी पार्टी के जनपद स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में बाराबंकी जनपद की सभी विधान सभा कमेटीओ के समस्त नेताओं,जनपद कमेटी व घोषित प्रत्याशियो ने उपस्थित हो कर के समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव जिंदाबाद,डॉ लोहिया अमर रहे ,राम सेवक यादव अमर रहे,समाजवादी पार्टी जिंदाबाद,अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारों से बाराबंकी कि समाजवादी धरा को गुंजाएमान कर दिया| समाजवादी पार्टी के जनपद स्तर के इस कार्यकर्ता सम्मेलन में सभी फ्रंटल संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे| सहकारी बैंक के पूर्व और अध्यक्ष समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव धीरेन्द्र कुमार वर्मा के कुशल संचालन में सफलता पूर्वक संपन हुए इस सम्मेलन की मौलाना मेराज ने किया| सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में अहमद हसन-नेता प्रति पक्ष विधान परिषद् मौजूद रहे| सम्मेलन प्रभारी विजय सिंह,ज़रीना उस्मानी-प्रांतीय कार्यसमिति सदस्य,राम गोपाल रावत-पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष,राम मगन रावत-पूर्व विधायक,राजेव कुमार सिंह-विधायक,फरीद महफूज़ किदवई-विधायक,सुरेश यादव उर्फ़ धरम राज सिंह,ज्ञान सिंह यादव आदि ने कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया|एक स्वर में सभी वक्ताओं और कार्यकर्ताओ ने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व के द्वारा घोषित प्रत्याशियो को जिताने का संकल्प दोहराया| टिकेट ना मिलने से नाराज नेता तथा समाजवादी पार्टी के नेतृत्व द्वारा अरविन्द सिंह गोप को अत्यधिक महत्व दिये जाने की बात सार्वजनिक मंचो से कहने वाले नेताओ को अब आत्म मंथन व आत्म विश्लेषण भी करना चाहिए| समाजवादी पार्टी से विधायक व मंत्री रहने के बावजूद कोई भी उल्लेखनीय काम ना कर पाने की स्वीकारोक्ति आखिर क्या साबित करती है? विगत आम चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकेट पे चुनाव लड़ के हार चुके नेता गण हर चुनाव में मानो पार्टी टिकेट पे अपना जन्म सिद्ध अधिकार मान चुके है|क्या सिर्फ विधान सभा के टिकेट के लिए ही इस असंतुस्टों की आस्था समाजवादी पार्टी में थी यह बात आम जनता में चर्चा का विषय बन चुका है| असंतुष्ट समाजवादी नेताओ की आँख की किरकिरी बन चुके अरविन्द सिंह गोप ने बाराबंकी जनपद में समाजवादी पार्टी के बिखर रहे कुनबे व आधार को जोड़ने का महती काम किया है| मुलायम सिंह यादव के खसम खाश तथा बाराबंकी के विकास पुरुष-धुर समाजवादी नेता बेनी प्रसाद वर्मा द्वारा समाजवादी पार्टी छोड़ने पर उनके साथ गये तमाम समाजवादी नेताओ व कार्यकर्ताओं की पुनः समाजवादी घर में ससम्मान वापसी करवाने का काम अरविन्द सिंह गोप ने ही किया| राधेश्याम वर्मा-पूर्व विधायक,राम गोपाल रावत-पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष,शाहाब खालिद,स्वर्गीय रामसेवक यादव जी के भतीजे विकास यादव,धीरज गुलाशिया आदि प्रमुख नेता अरविन्द सिंह गोप के ही अथक प्रयास से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बनके पुनः मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में काम करने लगे| यही नहीं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष राम नाथ मौर्या,हरिनाम सिंह वर्मा,राजलक्ष्मी वर्मा-पूर्व विधायक,मौर्या समाज ने नेता वीरेन्द्र प्रधान आदि लोगो को भी अरविन्द सिंह गोप ने ही डॉ लोहिया के विचार धारा पर आधारित और मुलायम सिंह यादव के संघर्ष व कुशल नेतृत्व पर बनी समाजवादी पार्टी से जोड़ा|संगठन विस्तार और समाजवादी आन्दोलन में नए लोगो को शामिल करने का दुष्कर काम करने वाला निश्चित रूप से किसी भी नेतृत्व का प्रिये हो जाता है और उसको और उसकी बातो को महत्व भी मिलता है,और मिलना भी चाहिए,यह सत्य है|

Friday, June 3, 2011

समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन











कल समाजवादी पार्टी का सभी जनपदों में कार्यकर्ता सम्मेलन हुआ | भारी तादात में सम्मेलन स्थल पे जुटे समाजवादी आन्दोलन के योधा| बाराबंकी जनपद में समाजवादी पार्टी के नेता अरविन्द सिंह गोप के कुशल प्रबंधन और मिलनसारिता का दिखा परिणाम,उमड़ा कार्यकर्ताओं का सैलाब|बाराबंकी विधानसभा से प्रत्याशी सुरेश यादव सैकड़ों समर्थको के साथ पहुचे सम्मेलन में | उत्साह से लबरेज़ समाजवादी युवा कार्यकर्ताओ ने डॉ लोहिया अमर रहे,मुलायम सिंह यादव जिंदाबाद,अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे लगाये|डॉ लोहिया,जनेश्वर मिश्रा,मधु लिमये,जय प्रकाश नारायण,राम सेवक यादव,राजा बलभत्र सिंह चहलारी,के ड़ी सिंह बाबु आदि के स्मृति द्वार सम्मेलन स्थल जाने वाले मार्ग पे बनाये गये|समाजवादी आन्दोलन की मजबूती और समाजवादी पार्टी के घोषित प्रत्याशियो को जिताने का संकल्प लिया समाजवादी कार्यकर्ताओ ने...

Wednesday, May 25, 2011

अन्याय के खिलाफ संघर्ष




समाजवादी नेता स्वर्गीय राम सेवक यादव की नगरी बाराबंकी के कमला नेहरु पार्क में आज जुटे खांटी समाजवादी कार्यकर्ता व विचारक | अनन्तराम जयसवाल-पूर्व सांसद,रामसागर रावत-पूर्व सांसद, असर्फ़ी लाल यादव-पूर्व विधायक,छोटे लाल यादव-पूर्व मंत्री,कुंवर रामवीर सिंह,अरविन्द यादव-पूर्व विधान परिसद सदश्य ,कुसुम लता रावत,अनित यादव,सिद्धीक पहेलवान,राम चन्द्र मिश्रा, मास्टर राम दुलारे, हौसिला बख्स सिंह, मेवा लाल, शेखर चौधरी, आरिफ,कमलेश कुमारी आदि नेताओ के साथ हजारो कार्यकर्ताओ ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया.